बुधवार, 5 मई 2010

अनुमति मिली नहीं कोल ब्लॉक 32 करोड़ में बेच दी...

भाजपा नेता का मामला सुर्खियों में
केन्द्र सरकार द्वारा 14 कोल ब्लाकों को अनापत्ति देने से मना करने से राय सरकार ही नहीं भाजपा के एक नेता की भी नींद उड़ गई है। इस नेता ने स्पंज आयरन के लिए कोल ब्लाक मांगा था लेकिन इसे उसने महाराष्ट्र की एक कंपनी को 32 करोड़ में बेच दिया था। अब केन्द्र सरकार द्वारा अनुमति नहीं देने से बवाल मच गया है।
उल्लेखनीय है कि राय सरकार की मांग पर केन्द्र के पर्यावरण मंत्रालय ने प्रदेश के 14 बड़े कोल ब्लाकों को अनापत्ति देने से साफ तौर पर मना कर दिया है। हालांकि इसकी वजह से दर्जनभर बिजली परियोजनाएं अटक गई है। पर्यावरण विभाग के इस रोड़े से राय सरकार में हड़कम्प तो मचा ही है कोल ब्लाक लेने वाले कई उद्योगपतियों में भी हड़कम्प मच गया है।
जिन कोल ब्लाकों को अनुमति नहीं मिली उनमें हाल ही में सीबीआई छापे का शिकार प्रकाश इण्ड्रस्ट्रीज के अलावा श्रीराधे इण्ड्रस्ट्रीज, अक्षय स्पात उद्योग, एमएसपी स्टील, शारदा एनर्जी, अल्ट्राटेक, सींघन इंटरप्राईजेस, नवभारत कोलफिल्ड, वंदना एनर्जी, अंजली स्टील शामिल है। बताया जाता है कि इनमें से एक कोल ब्लाक प्रदेश के एक भाजपा नेता को भी आबंटित किया था कहने को तो वे स्पंज आयरन के लिए कोल ब्लाक मांगा था और भाजपाई होने के कारण राय सरकार ने उन्हें आबंटित भी कर दिया था। लेकिन इस भाजपा नेता की मंशा का पता अभी चला जब केन्द्र की आपत्ति के बाद महाराष्ट्र की उस पार्टी ने अपने 32 करोड़ वापस मांगे।
कभी राजिम से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके इस भाजपा नेता ने जिस तरह से पर्यावरण का मुखौटा लगाया है उससे भी उनकी इस मंशा का अंदाजा लगाना मुश्किल है। बताया जाता है कि अपनी पहुंच का फायदा उठाकर कोल ब्लाक महाराष्ट्र की कंपनी को 32 करोड़ में बेचे जाने की चर्चा जबरदस्त है और इसमें सरकार में एक मंत्री के शेयर की भी कहानी अब सामने आने लगी है।
बताया जाता है कि प्रदेश में पार्टी की सरकार होने का कई भाजपा नेता फायदा उठाने लगे हैं और कई खदानों में पार्टनर बनकर बैठ गए है या अनाप शनाप कीमत में बेच रहे हैं। इसी तरह अन्य कोल ब्लाक को लेकर भी कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि कई लोगों को सोची समझी रणनीति के तहत कोल ब्लाक दी जा रही थी।
बहरहाल भाजपा नेता के द्वारा महाराष्ट्र की कंपनी को 32 करोड़ में कोल ब्लाक बेचे जाने की यहां जमकर चर्चा है और कहा जा रहा है कि रुपए भी डकारे जा रहे हैं और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर महाराष्ट्र की कंपनी को दो टूक भाषा में भगा दिया गया।

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