सोमवार, 30 सितंबर 2024

युवाओं के आँखों की किरकिरी बन गये चौधरी

  युवाओं के आँखों की किरकिरी बन गये चौधरी


इसमें किसी को संदेह नहीं है कि अफसरी से राजनीति में आये ओपी चौधरी  न केवल चतुर व्यक्ति है बल्कि डबल इंजन की सरकार में उनकी पकड़ भी बेहद मजबूत है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा भरे मंच में पीठ ठोंकने के बाद ओपी चौधरी का रुतबा जिस तेजी से बढ़ा, उतनी ही तेज़ी से उनकी छवि शिक्षक भती वाले वीडियो वायरल होने के बाद बिगड़ने लगी है कहा जाए तो गलत नहीं होगा|

कहा तो यहां तक जा रहा है कि वित्त मंत्री बनने के बाद जिस तरह से उन्होंने शासन-प्रशासन में अपनी पकड़ मजबूत की उतनी ही तेजी से युवाओं में उनकी छवि फ़िसलने लगी है। तो इसकी बड़ी वजह 33 हजार शिक्षकों की भर्ती नहीं होने के अलावा नियमितिकरण को लेकर चलने वाला आन्दोलन भी है।

सूत्रों की माने तो इस बिगड़ती छवि की जानकारी ओपी चौधरी को भी लग गई है इसलिए वे इन दिनों अपनी छवि सुधारने के नाना प्रकार के उपाय कर रहे हैं। जनसंपर्क की पूरी टीम के अलावा पत्रकारों में घुसपैठ बनाने कोरबा का एक व्यापारी भी सक्रिय है, लेकिन भोपाल वाली खबर ने एक बार फिर पोर्टल वालों की डिमांड बढ़ा दी है।   ऐसे में ओपी चौधरी की मुश्किल यह है कि छवि सुधारने के खेल में छवि बिगड़‌ने का खतरा भी बढ़ गया है और जहां गुड़ वहां मक्खी की तर्ज पर चल रहे इस खेल का अंजाम क्या होगा कहना मुश्किल है लेकिन छवि सुधारने में खतरे तो उठाने हो होगे।

रविवार, 29 सितंबर 2024

ईडी ने वसूली तो छत्तीसगढ़ में भी की है...

 ईडी ने वसूली तो छत्तीसगढ़ में भी की है...

कहाँ है रामगोपाल…


इलेक्ट्रोरल बांड ने मोदी ब्राण्ड को बुरी तरह बेनकाब कर दिया है, बेंगलुर की अदालत के द्वारा वित्त मंत्री निर्मला सितारमन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा सहित 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर के आदेश ने इस आरोप की पुष्टि कर दी है कि मोदी सरकार में ईडी का काम क्या था।

ऐसे में छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला, कोयला परिवहन घोटाला, महादेव सट्‌टा एप सहित कई मामलों की जांच में भी क्या इडी ने वसूली की है। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्योंकि इडी की  कार्रवाई पहली नजर में पक्षपात पूर्ण दिखाई देने लगी है।

ईडी की कार्रवाई मैं जो पहला पक्षपात दिखाई देता है वह आई एएस व आईपी एस अफसरों पर कार्रवाई को है और इसके बाद गिरफ्तारी की सूची में उन नामों का ग़ायब होना जिस पर सबसे ज्यादा संदेह था। उसके अलावा कुछ लोगों को फ़रार होने का मौका देना और इसके बाद ई ओ डब्ल्यू में एफआई आर की सूची।

छत्तीसगढ़ में इडी की वसूली की चर्चा में वे नाम सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में है जिसका नागपुर कनेक्शन है । और कहा जाता है कि ऐसे आईपीएस अफ़सरों से 15 से 25 करोड़ के बीच वसूली हुई है। कोयला परिवहन घोटाले से जुड़े इन अफसरों से पूछताछ तो हुई है लेकिन पैसा लेकर छोड़ देने का आरोप है और इन अफसरों की साय सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति भी कम चौंकाने वाला नहीं है।

इस पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम तो आईएएस विवेक ढांड और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और  उसके रिश्तेदार है। कहा जाता है कि रामगोपाल को सेंटिंग के तहत ही फरार होने का मौका दिया गया।

हुब इस खेल में क्या क्या हुआ और कौन कौन आरोपी बचा लिये गए है हम आपको बताते रहेंगे, आरोपों से घिरे अफसरों को साय सरकार ने कैसे सर माथे पर बिठाया है और उनका नागपुर कनेक्शन भी  चर्चा में है।

शनिवार, 28 सितंबर 2024

अडानी को बचाने वाले पर अमेरिका ने कसा शिकंजा…

 अडानी को बचाने वाले पर अमेरिका ने कसा शिकंजा…



अमेरिका के मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सजेंज कमीशन ने एन आर आई निवेशक राजीव जैन की कंपनी पर जीक्यूजी पार्टनर्स पर पांच लाख डॉलर का जुर्माना लगा दिया है कंपनी पर व्हिसलब्लोअर सुरुक्षा नियम के उल्लयेन का आरोप है, और इस कंपनी जी क्यू जी ने इस आरोप के खिलाफ जाने की बजाय पांच लाख डालर को जुर्माना भरने पर सहमत हो गया है।

दरअसल हिडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद गौतम अदानी की मुसिबतें थमने  का नाम ही नहीं ले रहा है। केऱ्या में एयरपोर्ट को लेकर कोर्ट के फैसले के ने बाद भारी नुक़सान के साथ-साथ बांग्लादेश में तख्ता पलट की वजह से वहाँ चल रहे अदाणी ग्रुप के  प्रोजेक्ट भी खतरे में है तो अब श्रीलंका में नये राष्ट्र‌पति चुने जाने के बाद अडानी की ग्रीन एनर्जी कंपनी के प्रोजेक्ट पर भी खतरा मंडरा रहा है। अभी इन  मामलों से अडानी उबर भी नहीं पाये है कि अमेरिका से आ रही खबर ने भी सभी को चौंका दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका के एनआरआई निवेशक राजीव जैन की कंपनी जीक्यूजी पार्टनर्स 5 लाख डॉलर का जुर्माना भरने को तैयार हो गई है। अमेरिका के मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने कंपनी पर व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन रूल्स के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया है। कंपनी ने इन आरोपों का स्वीकार करने या इनका खंडन करने के बजाय इसे सेटल करने पर सहमति जताई है। इसके लिए कंपनी 5 लाख डॉलर का पेनाल्टी भरेगी। जीक्यूजी पार्टनर्स पिछले साल उस समय सुर्खियों में आई थी जब उसने अडानी ग्रुप की कंपनियों में भारी निवेश किया था। हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट के कारण अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आ रही थी।

एसईसी ने कहा कि जीक्यूजी ने व्हिसलब्लोअर सुरक्षा नियम 21एफ-17(ए) का उल्लंघन किया है। यह किसी व्यक्ति को संभावित प्रतिभूति कानून उल्लंघन के बारे में एसईसी कर्मचारियों से सीधे संवाद करने से रोकने के लिए किसी भी कार्रवाई को प्रतिबंधित करता है। नियामक ने जीक्यूजी पर रोजगार के लिए उम्मीदवारों और एक पूर्व कर्मचारी के साथ ऐसे समझौते करने का आरोप लगाया है जिससे उनके लिए एसईसी को संभावित प्रतिभूति कानून उल्लंघनों की रिपोर्ट करना अधिक कठिन हो गया।

SEC के मुताबिक नवंबर 2020 से सितंबर 2023 तक GQG ने 12 उम्मीदवारों के साथ नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स किए। इससे उन्हें GQG के बारे में गोपनीय जानकारी का खुलासा करने से प्रतिबंधित किया गया। SEC का कहना है कि GQG ने एक पूर्व कर्मचारी के साथ भी सेटलमेंट एग्रीमेंट किया। उसके वकील ने GQG को धमकी दी थी कि वह रेगुलेटर को कथित प्रतिभूति कानून उल्लंघनों की रिपोर्ट करेगा। जीक्यूजी पार्टनर्स ने भारत में कई कंपनियों में निवेश किया है। इनमें अडानी ग्रुप की छह कंपनियां भी शामिल हैं।

शुक्रवार, 27 सितंबर 2024

बुरी तरह फँस गई निर्मला सीतारमण

 बुरी तरह फँस गई निर्मला सीतारमण


घटिया और अमानक स्तर की दवाइयों को लेकर चल रहे विवाद के बीच जब बंगलुर के कोर्ट ने वित्त मंत्री निर्मला सितारमण के खिलाफ एफ‌आईआर दर्ज करने का आदेश पारित किया तो सहसा इलेक्ट्रोरल बांड की फ़ाइले आंखों के आगे सामने आ गई।

वित्त मंत्री निर्मला सितारमण के खिलाफ क्या है मामला हम बताये इससे पहले यह बता दे कि वित्त मंत्री के खिलाफ जो जुर्म दर्ज करने का आदेश दिया गया है उसका संबंध भी वही इलेक्ट्रोरल बांड से है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तो बताया लेकिन इस अबैध कमाई की राशि को जब्त करने की हिम्म्मत नहीं जुटा पाया।

इलेक्ट्रोरल बांड की सूची में चंदा देने वालों में तब आधा दर्जन से अधिक ऐसी दवा कंपनियों के नाम थे जिन्होंने मोदी सत्त्रा की बीजेपी को करोड़ों-अरबों रूपये चंदा दिया था, इन चंदा देने वाली दवा कंपनियों  में वे कंपनी भी शामिल थी जिनकी दवाईयां घटिया निकली थी और इनमें से कुछ की जाँच रोक दी गई थी तो कुछ को क्लीन चीट दे दी गई थी।

यानी आम लोगों की जान की कीमत पर दवा कंपनियों से इलेक्ट्रोरेल बांड के रूप में चंदा वसूला गया था। तब भी धमकी-चमकी, काम लो पैसा दो के आरोप मोदी सत्ता पर लगे थे लेकिन न जांच हुई और न ही इन आरोपों पर  कोई जुर्म दर्ज ही हुआ।

ऐसे में घटिया 53 दवाईयों के  सप्लाई का मामला जो अब सामने आया है उसे लेकर मोदि सत्ता फिर सवालों में है। लेकिन अब इलेक्ट्रोरल बॉड की लूट की परतें उधड़ने लगी है तो निर्मला सितारमण के खिलाफ जुर्म दर्ज हो गया है । 

मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के जरिए कथित जबरन वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। ये आदेश बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने दिया है। जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु की अदालत में शिकायत दर्ज कर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी।

कई नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज

आदर्श अय्यर ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड के जरिए धमकी देकर जबरन वसूली की गई। जन अधिकार संघर्ष परिषद ने पिछले साल अप्रैल में 42वें ACMM कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ईडी अधिकारियों, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी के अन्य राष्ट्रीय नेताओं, बीजेपी के तत्कालीन कर्नाटक अध्यक्ष नलिन कुमार कटील, बी वाई विजयेंद्र के खिलाफ शिकायत की थी। अदालत ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु के तिलक नगर पुलिस थाने को चुनावी बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।


गुरुवार, 26 सितंबर 2024

चर्बी मिले प्रसाद के साथ चंदा में मिली दवाईयां…

 चर्बी मिले प्रसाद के साथ चंदा में मिली दवाईयां…

स्वास्थ मंत्री की चिंता कुनबा बढ़ाने की…


यदि आप तिरुपति के प्रसाद में चर्बी मिलने के पाप से प्रायश्चित का प्रहसन से निजाद पा चुके हो तो अमानक दवाईयों के खेल को भी समझ लो क्योंकि खेलते-कूदते, भागते-दौड़ते जो मौत की खबरें आती है, उसके पीछे चंदे की वह कहानी भी हो सकती है जिस इलेम्ट्राल बांड को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तो ठहराया, लेकिन इस अवेध कमाई को जब्त करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया । दूसरी तरफ़ स्वास्थ मंत्री जे पी नद्दा की अपनी चिंता है वे इन दिनों रायपुर में घूम घूम कर मोदी की तारीफ़ और बीजेपी की संख्या बढ़ाने में लगे है।

प्रायश्चित के इस प्रहसन में मंदिर भी शुद्ध हो गया और प्रसाद खाने वाले भी प्राथश्चित  करके अपने को चर्बी सेवन के पाप से मुक्त कर ही लेंगे। लेकिन न तो दवा कंपनी मानने को तैयार है कि उनकी दवाईया घटिया और अमानक है और न ही सरकार ही मानेगी कि उसने चंदा लेकर वैक्सिन से लेकर पैरासिटामॉल सहित पचास से अधिक द‌वाईयों की आपूर्ति की अनुमति दी जो घटिया और अमानक थी।

देशभर को पता चल गया कि मंदिर का प्रसाद अशुद्ध था…

…लेकिन पूरा देश घटिया और नक़ली दवाइयाँ खा रहा है, इससे किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है

53 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल,

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रग रेगुलेटर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में 53 दवाओं को क्वालिटी टेस्ट में फेल घोषित किया है। इन दवाओं में पेरासिटामोल समेत कैल्शियम और विटामिन डी3 सप्लीमेंट्स, एंटी-डायबिटीज दवाएं और हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का फेल होना आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

CDSCO द्वारा जारी की गई इस सूची में दवाओं को "नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी" (NSQ) घोषित किया गया है। ये अलर्ट रैंडम सैंपलिंग के आधार पर जारी किए जाते हैं, जिन्हें विभिन्न राज्यों के ड्रग अधिकारियों द्वारा एकत्र किया जाता है। क्वालिटी टेस्ट में फेल होने वाली दवाओं में प्रमुख रूप से पेरासिटामोल 500 एमजी, विटामिन डी3 सप्लीमेंट्स और डायबिटीज की दवाएं शामिल हैं।

CDSCO ने दो अलग-अलग सूचियां जारी की हैं। पहली सूची में 48 दवाएं हैं जो क्वालिटी टेस्ट में फेल हुई हैं, जबकि दूसरी सूची में 5 दवाओं को रखा गया है, जिनके बारे में कंपनियों को जवाब देने का मौका दिया गया है। हालांकि, अब तक फार्मा कंपनियों ने इन नतीजों को मानने से इनकार करते हुए इसे गलत ठहराया है।

अब इस बात पर नज़र होगी कि संबंधित कंपनियों और सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं ताकि ऐसी दवाओं का बाजार से तुरंत हटाया जा सके और आम जनता को सुरक्षित रखा जा सके।क्योंकि एक तरफ घटिया दवाएं हैं और दूसरी तरफ नकली दवाओं के बाज़ार में आने की भी खबर है। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व भी निभा रहे हैं, उन पर भाजपा के सदस्यता अभियान को सफल बनाने का जिम्मा है। हालांकि तीन दिन पहले आयुष्मान भारत ‘प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना’ के छह बरस पूरे होने पर श्री नड्डा ने नरेन्द्र मोदी की इस पहल की तारीफ़ करते हुए कहा था कि यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा पहलों में से एक बन गई है। यह सभी नागरिकों,  विशेष रूप से सबसे कमज़ोर लोगों के लिए समान स्वास्थ्य सेवा पहुंच प्रदान करने के लिए इस सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।लेकिन स्वास्थ्य मंत्री को यह समझना होगा कि सरकार की प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री के गुणगान करने से पहले काम करने से पूरी होगी। चिंता की बात यह है कि असफल दवाओं में कई ऐसी दवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल सबसे अधिक होता है। जैसे देश में करीब 220 मिलियन लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, इसी तरह 2021 में डायबिटीज मरीजों की संख्या 529 मिलियन थी। करोड़ों लोग एसीडिटी रोकने की और विटामिन्स की दवाएं लेते हैं।

 हर आए दिन अचानक हृदयाघात से मौत की खबरें आ रही हैं और सरकार इस बारे में कुछ नहीं कहती। ब्रिटेन में कोविड वैक्सीन बनाने वाली एस्ट्राजेनका ने माना ही था कि उसके बनाए टीकों से नुकसान हो रहा था। इसके बाद उन टीकों को वापस भी लिया गया। लेकिन क्या भारत में परीक्षण में असफल दवाएं वापस ली जाएंगी, यह बड़ा सवाल है।

 गंभीर सवाल दवा कंपनियों और सत्तारुढ़ दलों के बीच आर्थिक रिश्तों का है।  इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार दिया था। चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिए अधिकृत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने काफी ना-नुकुर के बाद इसके विस्तृत आंकड़े जारी किए थे, जिनमें खुलासा हुआ था कि कई बड़ी दवा कंपनियों ने करोड़ों के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं और इनका बड़ा हिस्सा भाजपा को मिला है। यह भी पता चला था कि बॉन्ड खरीदने वाली दवा कंपनियों की कई दवाएं पहले परीक्षण में अमानक और घटिया पाई गई थी, और जाँच रोक देने या क्लीन चिट देने का आरोप भी लगा था । क्या इस बार भी जिन कंपनियों की दवाएं घटिया मिली हैं, उनसे किसी तरह का चंदा मिला है।

फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और स्वास्थ्य मंत्री नड्डा दोनों ही भाजपा का कुनबा बढ़ाने और चुनावी राज्यों में दौरों में व्यस्त हैं, 53 दवाओं का परीक्षण में फेल होना, कोई मामूली बात नहीं है, इसकी गहन जांच होनी चाहिए कि आखिर इस असफलता की वजह क्या है। अभी ज़्यादा वक़्त नहीं बीता जब गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में भारत के बने कफ़ सिरप को पीने से बड़ी संख्या में बच्चों की मौतें हुई थीं, इसके बाद इन पर कई देशों में प्रतिबंध लगा था। यह वैश्विक स्तर पर शर्मिंदगी थी और ऐसी घटनाओं से असल में देश का अपमान होता है।लेकिन डंका बजने का दावा करने वाले हिन्दुवादियो को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता ।

हैरानी तो यह है कि नक़ली या घटिया दवा के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की बजाय अभी भी प्रसाद में मुस्लिम कनेक्शन खोजने में ज़्यादा रुचि है…!


बुधवार, 25 सितंबर 2024

अभी सिर्फ बेल, नहीं छूटेगा जेल

  अभी सिर्फ बेल, नहीं छूटेगा जेल

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उठते सवाल 


कोयला लेव्ही कांड को लेकर जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत तो मिल गई है लेकिन दूसरे और भी मामलों से जुड़े होने की वजह से वे जेल में ही रहेंगी।

२१ महिने से जेल में बंद सौम्या को अंतरिम जमानत देते समय कोर्ट ने जो सवाल खड़े किये, उसका जवाब सरकार या ईडी के पास नहीं था कि आखिर किसी मामले के आरोपी को कितने समय तक जेल में रखा जा सकता है ? हैरानी की बात बात तो यह है कि ईडी ने अभी तक सौम्या के खिलाफ आरोप ही तय नहीं किये है। जबकि २१ माह  में इस मामले की सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है।

ऐसे में कांग्रेस के इस आरोप को बल मिलता है कि यह पूरा मामला भूपेश बघेल को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका की सुनवाई ने तीन बड़े सवाल खड़े किये है कि आख़िर सोम्पा के खिलाफ अभी तक आरोप तय क्यों नहीं कर पाई, दूसरा सवाल. यही है कि सिर्फ पूछताछ के लिए इडी किसी को कितने दिनों तक हिरासत में रख सकती है और तीसरा जो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सत्ता किसी को ऐसा असिमित अधिकार कैसे दे सकती है जो मानवाधिकार के उल्लघन का अधिकार  दे दे। 

पूरा मामला इस प्रकार हैं... सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को अंतरिम जमानत दे दी. सौम्या चौरसिया कथित कोयला लेवी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी हैं. जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि चौरसिया एक साल और नौ महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं, उनके खिलाफ आरोप तय होना बाकी है और मुकदमा शुरू नहीं हुआ है. इसके साथ ही अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगले आदेश तक सौम्या चौरसिया को सेवा में बहाल न करे.

"जब भी जरूरत हो ट्रायल कोर्ट में सौम्या चौरसिया पेश हों": अदालत ने कहा कि जब भी जरूरत हो ट्रायल कोर्ट में सौम्या चौरसिया पेश हो और गवाहों को प्रभावित न करें. शीर्ष अदालत में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 28 अगस्त के आदेश को चुनौती दी गई है. जिसके तहत उच्च न्यायालय ने जमानत देने से इंकार किया था. जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि चूंकि उनकी याचिका पर सुनवाई में कुछ समय लगेगा, इसलिए वह उन्हें अंतरिम जमानत दे रहे हैं.



मंगलवार, 24 सितंबर 2024

गौ हत्यारे को बचा रही साय सरकार की पुलिस...

 गौ हत्यारे को बचा रही साय सरकार की पुलिस...



कचना स्थित सेल्स टैक्स कालोनी में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, मामले का जो विडियो सामने आया है वह खूब वायरल हो रहा है और वायरल विडियों में दावा किया जा रहा है कि साय सरकार की  पुलिस गौ वंश के हत्यारे को इसलिए बचा  रही है क्योंकि उसने अपने पैसे के दम पर पुलिस वालो का मुंह बंद कर दिया है।

बायरल विडियो बेहद ही दर्दनाक है कि किस तरह से एक कार लापरवाही पूर्वक बछड़े को कुचलते हुए भाग जाती है, बछड़े के कुचले जाने के बाद किस तरह से गायों का झुण्ड इस बछड़े के पास पहुंच रही है।



मानवीयता को शर्मसार करती इस घटना  को लेकर लोगों में बेहद आक्रोश है। जिस कार से यह घटना हुई है उस कार का नम्बर सीजी 04 एन वी 5557 यह कार क्षेत्र के चर्चित बिल्डर्स का है और कहा जा रहा है कि इसी बिल्डर्स का बेटा कार चला रहा था। और  लोगों का आरोप है कि  उक्त बिल्डर्स का बेटा इसी तरह से लापरवाही पूर्वक कार चलाता है जिसकी वजह से आये दिन विवाद होता रहता है।




लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि इस घटना की शिकायत पुलिस में करने के बाद भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लग रहा है। यानी गौवंश की रक्षा के नाम पर मॉब लिचिंग करने वाले हिन्दू संगठन भी पैसों के आगे नतमस्तक हो गये है ।

सोमवार, 23 सितंबर 2024

कौन बचा रहा है अभिषेक पल्लव को...

 कौन बचा रहा है अभिषेक पल्लव को...

 


सारे गवाह, सारे सबूत चीख-चीख कर कह रहे हैं कि गृहमंत्री विजय शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के लोहाराडीह में पुलिसिया बर्बरता उस रात चरम पर थी। घरों के दरवाजे तोड़‌कर आधी रात को पुलिस ने सोते से जगाकर या सोते हुए महिलाओं और बच्चों पर कहर बरसाया है। साहू समाज आन्दोलित है।  पूरे देश में इस घटना को लेकर साय सरकार के कथित सुशासन की थू-थू हो रही है लेकिन तत्कालीन एस पी अभिषेक पल्लव को न तो निलंबित किया गया और न ही पुलिसिया बर्बरता को लेकर ही कोई एफ आई आर हो दर्ज हुई।

क्यो ?

यह सवाल अब न केवल बहा होने लगा है बल्कि अब इस सवाल का जवाब भी तलाशा जा रहा है कि अभिषेक पल्लव को कौन बचा रहा है। यह सवाल इसलिए भी उठाये जा रहे हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ में साहू समाज को भाजपा का वोट बबैंक माना जाता है और  इस वोट बैंक के खिसकने या नाराजगी को लेकर किस किमत पर अभिषेक पल्लव को बचाया जा रहा है यह सवाल चर्चा में है।

हालांकि कभी रमन सिंह पर साहू समाज की उपेक्षा का आरोप लगाकर भरे मंच से गरियाने वाले मोतीलाल साहू न केवल भाजपा में चले गये बल्कि राजधानी के ग्रामीण का विधायक भी है। ऐसे में साहू समाज में क्या आन्दोलन को लेकर दो फाड् या दो मत है?

कवर्धा यदि गृहमंत्री विजय शर्मा का  विधानसभा है तो रमन सिंह का भी गृह  है ऐसे में  दोनों नेतार्थों पर अभिषेक पल्लव को बचाने का आरोप खुलकर लगाया जा रहा है लेकिन दूसरी तरफ सुपर सीएम के रूप में चर्चित ओपी चौधरी का नाम भी कम सुर्खियों में नहीं है। और मुख्यमंत्री साय को लेकर जो चर्चा है वह रिमोट पर आकर समाप्त हो जाता है।

अब समझने नहीं बल्कि जानने बाली बात है कि साहू समाज कब तक अपने समाज को न्याय दिलाने अड़े रहेंगे १

रविवार, 22 सितंबर 2024

राजधानी में मोबाईल लुटेरों ने कर दी हत्या पर उठते सवाल

जंगलराज में तब्बिल होता छत्तीसगढ़…

राजधानी में मोबाईल लुटेरों ने कर दी हत्या



राजधानी के तेलीबांधा मेरिन ड्राईव जैसे व्यस्त इलाने में यदि सुबह-सुबह मोबाईल लुटेरे सक्रिय हो और वे हत्या तक को अंजाम देने आमादा  हो तब क्या यह मार्निंग वॉक करने वालों के लिए खतरे की घंटी नहीं है।

जब से डबल इंजन की सरकार सत्ता में आई है, छत्तीसगढ़  में अपराधियों के होसले बुलंदी पर है। दिल दहला देने वाली घटनाओं के बाद भी यदि सरकार सुशासन का विज्ञापन करें तो किर इसे सत्ता की बेशर्मी नहीं तो और क्या कहना चाहिए।

बलौदा बाजार से लेकर लोहारा डीह जैसे बड़ी घटनाओं के  बाद पुलिस का जो चरित्र  सामने आया है, वह सतनामी समान और साहू समाज भूला नहीं है लेकिन लगातार हो रही हत्या,लूट, चोरी की घटनाए भी क्या राजनैतिक साज़िश का हिस्सा है।

सप्ताह भी मुश्किल बीते होगे कि मेरीन हाइव में हत्या की यह दूसरी वारदात हो गई पहली वारदात को प्रेमी युगल की करतूत बता मामले पर परदा डालने वाली पुलिस अब इस पर परदा कैसे डालेगी।

सच तो यही है कि अपराधियों को धर्म के आधार पर पहचानने वाली सत्ता  के लोग ही संरक्षक बने है, कहा जाए तब भी गलत इसलिए नहीं होगा क्योंकि लोहाराडीह में जिस प्रशांत साहू की पुलिस ने हत्या की वह प्रशांत साहू के साथ खुद गृहमंत्री विजय शर्मा की तस्वीर है कार्यक्रम में नहीं, सीधे फोटो खिचाते । 


धर्म के नाम पर भाजपा ने किस तरह से गुण्डे बदमाशों के साथ गलबहिया की वह बजरंगदल को लेकर उठे विवाद से भी समझा जा सकता है। तब गृहमंत्री यदि इस्तीफा दे दे तब भी अपराधियों को विपक्ष में रहते  संरक्षण देने की धार्मिक अनुष्ठान का असर तो रहेगा ही। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ राजधानी रायपुर स्थित मरीन ड्राइव इन दिनों खूब सुर्खियों में है। यहां आए दिन कुछ ऐसी घटनाएं हो रही है, जो अब चिंता का विषय बन गई है। ताजा मामला सामने आ रहा है कि मरीन ड्राइव में युवक की हत्या कर दी गई है। ये युवक कोई और नहीं बल्कि अंबिकापुर कलेक्ट्रेट का ड्राइवर बताया जा रहा है

मिली जानकारी के मुताबिक, चाकू मारकर हत्या कर दी गई है। 3 अज्ञात बाइक सवार लुटेरों ने मोबाइल लूटने के विवाद में ड्राइवर की चाकू मारकर अंबिकापुर निवासी ईश्वर राजवाड़े की हत्या की है। बताया जा रहा है कि शासकीय काम से मृतक ईश्वर राजवाड़े अधिकारी को रायपुर लेकर आया था।

यह पूरा मामला .तेलीबांधा थाना इलाके का है। वहीं, इस मामले में अभी तीनों अज्ञात बाइक सवार लुटेरे फरार बताए जा रहे हैं। बता दें कि पिछले हफ्ते ही मरीन ड्राइव में दिनदहाड़े युवक ने अपनी प्रेमिका की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। प्रेमिका का गला काटने के बाद युवक अपना हाथ काटकर तालाब में कूद गया था। हालांकि इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

लूट के दौरान हुआ विवाद

मिली जानकारी के मुताबिक ईश्वर राजवाड़े अधिकारी को लेकर रायपुर आया था। तेलीबांधा तालाब के पास गाड़ी लगाया था, तभी तीन बदमाश मोबाइल लूटने लगे। इसी बीच विवाद हो गया। बीच बचाव के कारण 3 अज्ञात लुटेरों ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। युवक की मौत हो गई।

आरोपी गिरफ्त से बाहर

बताया जा रहा है कि चाकू मारने वाले 3 बदमाश फरार हैं। तेलीबांधा पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। वहीं फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीम जुट गई है। घटना स्थल के आस-पास की CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

शनिवार, 21 सितंबर 2024

वन नेशन-वन इलेक्शन : सब कुछ तहस नहस करने की कोशिश

  वन नेशन-वन इलेक्शन : सब कुछ तहस नहस करने की कोशिश


मोदी सरकार के केबिनेट ने वन नेशन-वन इलेक्शन पर मुहर लगा दी। हालांकि इसके संसद में पारित हो जाने की संभावना दूर-दूर तक नहीं है और यह मुद्‌दा भाजपा के पिछले तीन घोषणा पत्र की तर्ज पर आने वाले चुनाव के घोषणा पत्र का हिस्सा ही रहेगा।

सोचा था इस पर नहीं लिखूँगा लेकिन प्रशंसकों ने जब जोर देकर कहा तो इस पर हतने दिनों के बाद लिख रहा हूँ। तो इससे पहले बता दूं कि मोदी सरकार का  हमेशा ही ऐसी पॉलिसी लाती करने है जिसकी क़ीमत  इस देश को चुकानी पड़‌ती है, आमजन से लेकर अर्थ व्यवस्था को और समाज से लेकर संविधान तक को…।

चाहे वह नोटबंदी हो या जीएसटी , इलेक्ट्रोरोलर बांड हो या तीन कृषि क़ानून, आप कोई भी पॉलिसी को देख लीजिए, इसकी क़ीमत जनताऔर देश दोनों को चुकानी पड़ी है । 

इसलिए एक लाईन में कहे तो वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब भी यही है- 

बाक़ी इसका प्रभाव क्या होगा इसे थोड़ा ऐसे समझ लें

यह पिछले तीन लोकसभा चुनावों में बीजेपी के घोषणापत्र का वादा रहा है। लेकिन यह कैसे लागू होगा, कब होगा और क्यों ऐसा हो रहा है? ऐसे कई सवाल हैं... 

कांग्रेस ने तो ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को संविधान के खिलाफ बताया है। 

पिछले साल मोदी सरकार ने लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और नगर निगमों के चुनाव एक साथ कराने के तरीके सुझाने के लिए कोविंद कमेटी गठित की थी।पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली इस कमेटी ने लोकसभा चुनाव से पहले इस साल मार्च में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें अलग-अलग संवैधानिक संशोधनों की सिफारिश की गई थी। इस कमेटी ने सिफ़ारिश की थी कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं और इसके 100 दिनों के अंदर स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जा सकते हैं... 

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बीजेपी बिल को कैसे कराएगी पास....??  बीजेपी के पास लोकसभा में 240 सीटें हैं। बहुमत के लिए उसे टीडीपी, जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) जैसे सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ता है। अब ऐसे भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि एक साथ चुनाव कराने की बीजेपी की योजना उसके सहयोगी दलों का समर्थन मिलेगा या नहीं...? 

अगर 2029 में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ होना है तो कई राज्य विधानसभाओं को उनके पांच साल के कार्यकाल से पहले भंग कर दिया जाएगा। यानी उनका कार्यकाल पूरा होने से काफी पहले चुनाव के लिए राज्य को तैयार होना होगा.. 

पिछले साल जिन 10 राज्यों में नई सरकारें बनीं उनमें 2028 में फिर से चुनाव होंगे और नई सरकारें लगभग एक साल या उससे भी कम समय तक सत्ता में रहेंगी। ये राज्य हिमाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, तेलंगाना, मिजोरम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान हैं.... 

उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में चुनाव 2027 में होने हैं यानी इन राज्यों में 2027 में बनने वाली सरकारें दो साल या उससे कम समय तक चलेंगी, इसी तरह पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल में चुनाव 2026 में होने हैं। यहां ऐसी सरकारें होंगी तीन साल तक चल पाएंगी...

अथवा इन राज्यों का निर्धारित समय में चुनाव ना कराकर इनके कार्यकाल को 2029 तक बढ़ाना पड़ेगा.... 

केवल अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा में जहां इस साल चुनाव हो चुके हैं या हो रहे हैं पांच साल तक एक ही सरकार चल सकती है.... 

यानी अब आप सोचिए की इसकी वजह से क्या खेल होगा…।


शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

प्रसादम में चर्बी की साजिश के पीछे की कहानी...

 प्रसादम में चर्बी की साजिश के पीछे की कहानी...


तिरूपति के श्री वेंकैंटेश्वर बालाजी के प्रसाद लड्‌डू में गाय की चर्बी और मछली के तेल की पुष्टि से संघ सहित कई हिन्दूवादियों का मुंह धीरे धीरे खुलने लगा है लेकिन वह क्या इतना खुल पायेगा कि इसकी सच्चाई से परदा उठ जाए?

इस सवाल का उत्तर जानने के लिए उस बाजारवाद के खेल को समझना जरुरी है जिस बाजार वाद के खेल में सत्ता सब  कुछ अपने मित्रों को सौंप देना चाहती है?

याद कीजिए नंदनी दूध को लेकर मचे बवाल में सरकार को अमूल को घुसाने के कद‌म को वापस लेना पड़ा  था । लेकिन चुनाव भर यह मुद्दा छाया रहा क्योंकि वह दक्षिण का राज्य है, हिन्दीभाषी राज्य नहीं जहाँ धर्म की पट्टी ने लोगों की सोचने  समझने की शक्ति ही छीन ली है।

मेरा दावा है कि अब आपके जेहन में यह बात आ गई होगी कि प्रसादम के लड्डू में गाय और सुअर की चर्बी कैसे आई । नहीं आई है तो दंतक्रांति में मछली की हड्‌डी का मामला कोर्ट कैसे पहुंचा वह ध्यान में रख ले।

और यदि अब भी नहीं आई समझ में तो इसे ऐसे जान ले करोड़ो रूपये कमाने वाले मंदिर ने जब नदिनी डेयरी के दो चार रुपये कीमत बढ़ाने पर दूसरी जगह से घी लेना शुरु किया तो नंदिनी डेयरी के कर्ताधर्ताओं ने कहा दो चार रूपयों के लिए था  यह न किया जाए।


अब इसे सुनील सिंह बघेल मध्यप्रदेश  के शब्दों में ऐसे समझ लिजिए

#तिरुपति के प्रसाद लड्डू जिस घी से बनता है उसमें  मछली का तेल.. सूअर.. बीफ की चर्बी मिले होने की खबर आपने पढ़ ली होगी.. चलिए इस दुखद कथा के पीछे कौन सी पटकथा शामिल है.. और उस पटकथा का एक हिस्सा मध्य प्रदेश भी है... कैसे..?? तो आइए उसे समझते हैं.. कुछ तथ्य आपके सामने रखता हूं..निष्कर्ष आप निकाल लीजिएगा..।

तो पहला तथ्य.. कभी इंदिरा गांधी के जमाने में शुरू हुए ऑपरेशन श्वेत क्रांति की पैदाइश थे, देश भर के सांची ,अमूल जैसे दुग्ध संघ.. इसमें सबसे प्रतिष्ठित दुग्ध सघों में से एक रोजाना 80 लाख लीटर दूध एकत्र करने वाला कर्नाटक दुग्ध संघ (#KMF) का ब्रांड #नंदिनी भी शामिल है..

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दूसरा तथ्य दिमाग में रखिए ..बड़ी कंपनियों की नजर काफी समय से ,डेयरी क्षेत्र के अरबों के कारोबार को दुहने पर है.. केंद्र सरकार लंबे समय से प्रयासरत है कि देशभर के सांची, नंदिनी जैसे स्थापित ब्रांड वाले सहकारी दुग्ध संघ, केंद्र के अधीन आ जाएं.. उनका संचालन नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के पास आ जाए। इसके पीछे तर्क..दावा वही "तपस्या में कोई कमी रह गई होगी " वाले 3 किसान बिल जैसा , यानी किसान हित का था..

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अब जरा कर्नाटक की एक पुरानी घटना याद दिलाता हूं..यूं तो 6-7 सालों से दुग्ध संघों को पहले बदहाल करो और फिर  हथियाने की रणनीति के तहत.. समय-समय पर हमले होते रहे हैं.. ऐसी ही हड़पने की अप्रत्यक्ष कोशिश कर्नाटक के नंदिनी ब्रांड के साथ भी की गई... लेकिन कर्नाटक की जनता का इस ब्रांड से जुड़ाव और भरोसा कितना होगा कि, इसकी भनक लगते ही जनता, स्थानीय राजनीतिक दल विरोध में आ गए.. यहां तक की #NANDANI यह चुनावी मुद्दा बन गया.. केंद्र को कदम वापस खींचने पड़े।

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अब आते हैं चौथे तथ्य पर ..तिरुमाला देवस्थान में बनने वाले लड्डू प्रसादम के लिए घी सप्लाई करने की जिम्मेदारी 40-50 सालों से सहकारिता क्षेत्र के कर्नाटक के नंदिनी घी के पास थी। तिरुपति में सालाना करीब 4.5 हजार मी.टन की की जरूरत होती है। यानी नंदिनी घी का एक बड़ा स्थाई ग्राहक।

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#nandani को हड़पने की कोशिश कर्नाटक की जनता और नेताओं ने असफल कर दी.. चोर दरवाजे से अमूल को घुसाने की कोशिश असफल हो गई। जाहिर है यह बात केंद्र में बैठे हुक्मरानों को नागवार गुजरी। नजरे टेढ़ी हुई। 40-50 सालों से तिरुपति को रियायती दामों पर घी सप्लाई कर रहे कर्नाटक दुग्ध संघ के हाथ से ,घी सप्लाई का ठेका निकाल कर निजी हाथों में पहुंचा दिया गया।

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 दरअसल जब दूध की कीमत बढ़ी तो घी की कीमत भी बढ़ी.. नंदिनी घी के भाव भी बढ़े.. लेकिन सिर्फ लड्डू बेचकर 500 करोड़ से ज्यादा कमाने वाले तिरुमाला देवस्थान ने, दो चार रुपए के पीछे घी सप्लाई का ठेका, निजी हाथों में दे दिया। तब भी कर्नाटक दुग्ध संघ के अध्यक्ष ने आगाह किया था कि  दूध के जो भाव है उसे देखते हुए, इतने कम भावों पर घी बनाना और बेचना संभव ही नहीं है.. यदि कोई देता है तो यह गुणवत्ता से समझौता करना होगा.. (ऐसी तमाम पुरानी मीडिया रिपोर्ट यूट्यूब पर मौजूद हैं).. खैर सनातन के इन नए तथाकथित रखवालो को गुणवत्ता से क्या लेना देना..?? नंदिनी से हजारों टन घी का ठेका छीनकर हुकुम उदूली का सबक तो सिखा दिया ना..!!

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अब आईए समझते हैं तिरुमाला देवस्थान के चर्बी वाले लड्डू , नंदिनी घी और इस घटना का प्रदेश से क्या रिश्ता है..?? सांची हमारा जाना पहचाना नाम है.. पीढियां सांची दूध पीकर बड़ी हुई है..। प्रदेश में सांची के 11000 गांव में फैली 33000 दुग्ध समितियां के नेटवर्क को हथियाने कोशिश तो शिवराज जी के जमाने से ही होने लगी थी। शायद वे असली खेल को समझते थे.. इसलिए केंद्र का खेल पूरी तरह सफल नहीं हो पाया.. लेकिन इसकी पूर्णाहुति, मौजूदा सरकार के कुछ दिन पहले लिए गए निर्णय से हो चुकी है.. 

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अभी तो किसान हित की आड़ में सांची की कमान नेशनल  डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के पास पहुंचने का रास्ता साफ हुआ है.. फिर यह कमान धीरे से किन हाथों मे  पहुंचेगी..?? इस को समाजशास्त्रीय राजनीति शास्त्र नहीं, बल्कि अपराध शास्त्र के नजरिए से समझने की कोशिश कीजिए.. पूरा असली खेल समझ में आ जाएगा।

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सांची को हड़पने की शुरुआत हो चुकी है ...लेकिन यह कर्नाटक की नहीं ,मध्य प्रदेश की जनता है.. वह तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से आए 'हिंदू खतरे में है' वाले मैसेज पढ़ने फॉरवर्ड करने.. हनुमान आरती बाबाओ के दरबार में हाजिरी लगाने.. 5 किलो राशन, लाडली बहना मे मगन है.. रही बात नपुंसक हो चुके विपक्षी दलों के नेताओं की तो, उनके पास ना तो इस षड्यंत्र को समझने की समझ है और ना ही साहस..हां जिस ईमानदार अधिकारी प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने समझा, उसे इस 'केंद्र शासित प्रदेश' ने रातों-रात बाहर का रास्ता दिखा दिया.. लूट पर मोहर लग चुकी है।

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तो हे #व्हाट्सएपिया_सनातनी ..!!यदि तुमने भी पिछले साल 2 सालों में तिरुपति का प्रसाद खाया है तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है... किसी पंडित ब्राह्मण से संपर्क करो.. हमारे धर्म में प्रायश्चित पूजा पाठ का विधान है.. वह तुम्हारा सनातन सुरक्षित कर देगा.. बस फिर क्या नए जोर से से जुट जाना अपने राष्ट्रीय कर्तव्य में.. भूल गए..??अरे वही काम.. हिंदू खतरे में जो ह…!

गुरुवार, 19 सितंबर 2024

तिरुपति प्रसादम् लड्‌डू में गाय की चर्बी हिन्दू‌वादियों की बोलती बंद हो गई...

 तिरुपति प्रसादम् लड्‌डू में गाय की चर्बी हिन्दू‌वादियों की बोलती बंद हो गई...


दुनिया के सबसे अमीर मंदिर माने जाने वाले तिरुपति स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर के प्रसाद‌म लड्‌डू में गाय की चर्बी, मछली का तेल और अन्य जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल की पुष्टि हो जाने के बाद न तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खून खौल रहा है और न ही हिन्दू‌वादी संगठनों की आस्था ही आहत हो रही है। 

यह आश्चर्यजनक स्थिति इसलिए बनी क्योंकि इस पूरे मामले में न तो कांग्रेस है और ही मुसलमान ।

दरअसल इस देश में हिन्दूवादियों का खून तभी खोलता है जब मुसलमान या कांग्रेस जुड़ा होता है वरना छोटे छोटे मासूम पहलवानों की छाती पर हाथ मारने वाला छिछोरा पहलवान बृजभूषण सिंह को पास्को एक्ट की धारा  हटवाने का मौका नहीं दिया जाता। और न ही उसके बेटे को बीजेपी टिकिट ही देती।

क्या है पूरा मामला हम बताये इससे इस देश में हिन्दुत्व के नाम पर पहले क्या चल रहा है। इस कहानी से समझने की कोशिश करते है

भेड़िये को मेमने को ख़ाना है

भेड़िया - मेमने तुम ने मुझे गाली दी 

मेमना - नहीं मैंने नहीं दी 

भेड़िया - फिर तुम्हारे बाप ने दी होगी 

मेमना - नहीं उसने भी नहीं दी 

भेड़िया - फिर तो तुम्हारे बाप के बाप ने दी होगी

मेमना - नहीं यह हो ही नहीं सकता 

भेड़िया- गाली तो दी है , साबित करों कि गाली नहीं दी है।

मेमना-कैसे साबित करूँ 

भेड़िया - साबित नहीं कर सकता ना ! तब तो गाली जरूर दी है और भेड़िया झपट कर मेमने को खा जाता है।

अच्छे दिन का नारा लगाते कट्टरपंथी जयघोष करते है संघ में ताकत है।अब, पशु आहार और दूध तथा दूध उत्पादों के परीक्षण पर केंद्रित एक निजी प्रयोगशाला एनडीडीबी कैल्फ की रिपोर्ट से पता चला है कि तिरुपति लड्डू बनाने में इस्तेमाल किए गए घी के नमूनों में विदेशी वसा शामिल थी, जिसमें पाम ऑयल, मछली का तेल, बीफ टैलो और लार्ड (सूअर के वसा ऊतक को निकालकर प्राप्त किया गया) शामिल था। रिपोर्ट की प्रति सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रवक्ता अनम वेंकट रमना रेड्डी ने साझा की।

रेड्डी ने कहा, "नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट प्रमाणित करती है कि तिरुमाला को आपूर्ति किए गए घी को तैयार करने में गोमांस की चर्बी और पशु वसा तथा मछली के तेल का उपयोग किया गया था, तथा एस मान केवल 19.7 है।"


चंद्रबाबू नायडू के आरोपों के बाद आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने भी इस मुद्दे को लेकर जगन मोहन रेड्डी सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर हमारा सबसे पवित्र मंदिर है। मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी प्रशासन ने तिरुपति प्रसादम में घी के बजाय पशु वसा का इस्तेमाल किया।"

इस बीच, वाईएसआरसीपी ने नायडू के आरोप को "दुर्भावनापूर्ण" करार दिया और कहा कि टीडीपी सुप्रीमो "राजनीतिक लाभ के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं"।

वाईएसआरसीपी नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्बा रेड्डी ने आरोप लगाया कि नायडू ने अपनी टिप्पणियों से पवित्र तिरुमाला की पवित्रता और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

सुब्बा रेड्डी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "तिरुमाला प्रसादम के बारे में उनकी टिप्पणी बेहद दुर्भावनापूर्ण है। कोई भी व्यक्ति ऐसे शब्द नहीं बोलेगा या ऐसे आरोप नहीं लगाएगा।"

आंध्र प्रदेश कांग्रेस समिति (एपीसीसी) की अध्यक्ष वाईएस शर्मिला ने सीबीआई जांच की मांग की ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या मिठाई बनाने में वास्तव में पशु वसा का इस्तेमाल किया गया था।

शर्मिला ने कहा कि नायडू के आरोपों से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं जो भगवान वेंकटेश्वर को पूज्य देवता मानते हैं।

शर्मिला ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "तुरंत एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए या सीबीआई से जांच कराई जाए कि क्या घी की जगह पशु वसा का इस्तेमाल किया गया था।"


बुधवार, 18 सितंबर 2024

वाराणासी में क्यों पीटा गया सं‌धी ..


 वाराणासी में क्यों पीटा गया सं‌धी ..

पूरा वीडियो भी देखिए…


 सबसे ताकतवर होने का दम भरने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बुल्डोजर चलाकर रोब जमाने वाले योगी आदित्यनाथ के वाराणासी में यदि संघ के नेता की जमकर धुनाई हो जाये तो फिर इसे क्या आने वाले राजनीति के लिए कोई संकेत माना जाना चाहिए।

झूठ और अफवाह के आसरे नफरत की राजनीति में माहिर लोगों ने इस कदर जहर फैला रखा है कि अब उनके कुकर्म खुलकर सामने आने लगे हैं।

ऐसा ही मामला वाराणासी में तब सामने आया जब प्रेगनेंट कर देने की धमकी पर योगी की पुलिस इसलिए खामोश रह गई क्योंकि धमकी देने वाला संधी था। और इसके बाद युवती और उसके परिजनों  ने इस संघी राजेश सिंह की वह हाल कर दी कि आज पूरा देश इस संधी पर थू-थू कर रहा है। पूरे मामले का विडियो वायरल होते ही हिन्दू वादियों को साँप सूँघ गया है।


मंगलवार, 17 सितंबर 2024

फिर मोदी के आगे संघ शरणागत…!

 फिर मोदी के आगे संघ शरणागत !


 नान बायोलाजिकल क्रियेचर के इस दौर में एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी ताकत का रौब संघ को  दिखा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रत्यक्ष रुप से आलोचना करने में लगे संघ प्रमुख मोहन भागवत  की लाचारी के कई किस्सों के बीच अब जो क़िस्सा सामने आया है । उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी किसी और के लिए नान बायोलाजी हो  न हो, संघ के लिए तो है ही।

दरअसल लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद जिस तरह से संघ प्रमुख हमलावर थे उसे देखते हुए  स्वयंसेवकों और मोदी विरोधियों में नए तरह की आशा की उम्मीद जगी थी। और जब केरल में आयोजित बैठक  में भाजपाध्यक्ष जेजी नड्‌डा पहुंचे थे तो यह माना जा रहा था कि संघ अब मोदी सत्ता को कड़ा संदेश देगी। लेकिन कहा जाता है कि जेपी नड्‌डा ने ही मोदी का कड़ा संदेश सुनाकर मोहन भागवत की  बोलती बंद कर दी।

सूत्रों की माने तो जेपी नड्डा ने साफ तौर पर कह दिया कि बग़ैर सत्ता के संघ  का कोई मतलब नहीं रहेगा इसलिए आलोचना करने की बजाय अब तक बीजेपी के लिये जिस ताह से संघ काम करती रही है वैसा ही करे। यहीं नहीं राज्यों के चुनाव में भी संघ के लोगों को सक्रिय बनाने की रूपरेखा तैयार कर ले। और अपनी पूरी ताक़त लगाये।

कहा जाता है कि मोदी के इस स्पष्ट संदेश ने संघ प्रमुख को सकते में ला दिया है, क्योंकि एक तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लगातार हमले से स्वयंसेवकों में घबराहट है और ऐसे में यदि मोदी ने भी हाथ खींच लिया तो मुश्किल बढ़ सकती है । इसलिए इस संदेश के बाद अब संघ ने बैठकों का सिलसिला शुरु करते में ही अपनी भलाई मानकर हरियाणा में वनवासी कल्याण आश्रम की बैठक तय कर ली है। जबकि हरियाणा में आदिवासियों की जनसंख्या क्या  है वह भी अच्छी तरह से जानते है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के तीन दिवसीय सम्मेलन का हरियाणा के समालखा में आयोजन होगा। इस सम्मेलन को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण के प्रचार प्रमुख प्रमोद पेठकर ने बताया कि इसमें करीब 80 जनजातियों को बुलाया गया है। इसमें दो हजार लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।मोद पेठकर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय सम्मेलन का 20, 21 और 22 सितंबर को हरियाणा के समालखा में आयोजन किया जाएगा। इसमें 80 जनजातियों को बुलाया गया है, जो अपनी पूजा-पद्धति को सामने रखेंगे। इसमें पूरे भारत के एकता के दर्शन हो पाएंगे। हम चाहते हैं कि समाज तक जनजातीय जीवन के गौरवपूर्ण पूजा-पद्धति को पहुंचाया जाए।



सोमवार, 16 सितंबर 2024

किताब रद्दी में: किसे बचा रहे हैं मुख्यमंत्री साय...

 किताब रद्दी में: किसे बचा रहे हैं मुख्यमंत्री साय...

 जांच समिति बनी, एफ आई आर क्यों नहीं...


छत्तीसगढ़ के नौनिहालों की बांटे जाने वाली किताब रद्‌दी के भाव बेन्च दी गई लेकिन सरकार के मुखिया विष्णुदेव साय ने इस पर चुप्पी ओढ़ ली है। लाखें करोड़ों की इन किताबों को लेकर कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने घोटाले का आरोप लगाया है लेकिन किताबें बरामद होने के बाद इस पर एफ आई आर नहीं किया गया, बल्कि अब आरोप यह लगाया जा रहा है कि मामले की लीपापोती करने ही जाँच कमेटी बनाई गई है। लेकिन समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। 

राजधानी के समीप सिलयारी स्थित रियल बोर्ड पेपर मिल में लाखों पाठ्‌य पुस्तकें कबाड़ में मिलने के बाद मचे बवाल के बीच सरकार की अपनी हो रही किरकिरी से बचने जाँच समिति बनाई है जाँच समिति में पाठ्‌य पुस्तक निगम के प्रबंध संचालक राजेतश कटारा के अलावा अतिरिक्त संचालक योगेश शिवहरे, संभागीय संयुक्त संचालक राकेश पाण्डे, पापुनि के महाप्रबंधक प्रेम प्रकाश शर्मा के अलावा रायपुर कलेक्टर के नामित अधिकारी होगे।

अब जांच समिति के सदस्यों पर ही सवाल उठने लगे है। कहा जाता है कि समिति में शामिल कुछ अधिकारियों की भूमिका पहले ही विवाद में रही है, हमारी टीम इस पर काम कर रही है हम शीघ्र ही जांच समिति के सदस्यों को लेकर खुलासा करेंगे।

दूसरी तरफ पाठ्‌य पुस्तकों के कबाड़ में बरामदगी से घबराई सरकार ने पेपर मिल को सील कर दिया है। कहा जा रहा है कि कबाड़ को ठिकाने लगाने की आशंका को लेकर कोग्रेस नेता विकास उपाध्याय द्वारा धरना देने के दबाव में यह कार्रवाई हुई है।

चूंकि मुख्यमंत्री के पास ही शिक्षा विभाग है इसलिए सरकार की खूब किरकिरी हो रही है।

 छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दिए जाने वाली पाठ्य पुस्तकें राजधानी में रद्दी में मिली है। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश किताबों को शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए तैयार किया गया था। इसका खुलासा रविवार को कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने किया है। उनका आरोप है कि नि:शुल्क किताब वितरण के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने इस पूरे मामले में जांच की मांग की है।

सूचना के आधार पर पूर्व विधायक उपाध्याय सिलियारी स्थित एक पेपर मिल गए। वहां देखा कि पाठ्य पुस्तक निगम की ओर से सरकारी स्कूलों में वितरित की जाने वाली किताबें बड़ी संख्य में डंप थी। जब उन्होंने कुछ किताबों को देखा तो इन किताबों पर वर्ष 2024-25 लिखा था। किताबों का जखीरा पकड़ने के बाद उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में भी जारी किया। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से इस छापेमारी की कार्रवाई को लाइव किया है। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का मामला है।

रविवार, 15 सितंबर 2024

दादा की शहादत पर भारी पोते की गाली...

 दादा की शहादत पर भारी पोते की गाली...


पता नहीं भाजपा  में जाते ही कोई देशद्रोही का तमगा बाँटने लगता है तो कोई हिन्दुत्व का। लेकिन इस दौर में यही  सब हो रहा है, दुनिया देख रही है कि भारत की राजनीति में हिन्दू वोटरों के ध्रुवीकरण का  कैसा विभत्स खेल चल रहा है।

परेशानी यह नहीं है कि देश की तरक्की किस विचारधारा से होगी। परेशानी तो यह है कि मोदी सत्त्रा की आलोचना आख़िर  उनकी पार्टी को बर्दाश्त क्यों नहीं है, क्या मंहगाई, बेरोजगारी, नफरत, लूट, दरकती सड्‌के, टपकती छत, महँगी  शिक्षा पर बात नहीं होनी चाहिए।


नॉन बायोलोजिकल क्रियेचर पर स्पेस टेक्नालाजी पर बहस क्या सत्ता  का ही अधिकार है।


ऐसे में रवनीत सिंह बिट्‌टू का राहुल गांधी को देश का नम्बर वन आंतकी घोषित करने के क्या मायने है। जिस परिवार से रवनीत सिंह बिट्‌टू आते  है क्या वे सभी आतंकी थे? उनके दादा बेअंत सिंह ने तो कांग्रेस से मुख्यमंत्री रहते शहादत दी थी। तब क्या वे भूल गये हैं कि राहुल या कांग्रेस को आतंकी  कहने का मतलब क्या है?

खबर के मुताबिक़ केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस लीडर राहुल गांधी को आतंकवादी बताया है। नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधते हुए बिट्टू ने कहा, ‘राहुल गांधी ने सिखों को बांटने का प्रयास किया है। सिख किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है, मगर चिंगारी लगाने की कोशिश हो रही है। राहुल गांधी देश के नंबर वन टेररिस्ट हैं।’ भाजपा नेता ने कहा कि वे लोग जो हर वक्त मारने की बात करते हैं, जहाजों-ट्रेनों को उड़ाने की बात करते हैं... वे राहुल गांधी के समर्थन में आ गए हैं। ऐसे में आप अंदाजा लगा लीजिए। मेरे ख्याल से अगर किसी को पकड़ने के लिए इनाम होना चाहिए तो वो राहुल गांधी हैं। उन्होंने राहुल गांधी को देश का सबसे बड़ा दुश्मन भी बताया।

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, 'राहुल गांधी भारतीय नहीं हैं, उन्होंने अपना ज्यादातर समय बाहर बिताया है। उन्हें अपने देश से ज्यादा प्यार नहीं है, क्योंकि वह विदेश जाकर हर बात को गलत तरीके से कहते हैं। जो लोग मोस्ट वांटेड हैं, अलगाववादी हैं, बम, बंदूक और गोले बनाने में माहिर हैं, उन्होंने राहुल गांधी के बयानों की सराहना की है।' मंत्री ने कहा कि कांग्रेस केवल इधर-उधर की बातें करती है। जबकि राहुल गांधी पहली बार संसद में विपक्ष के नेता बने हैं। वे कभी सिख की असुरक्षा की बात करते हैं तो कभी समाज के बिखराव की बात करते हैं। उनका ऐसा व्यवहार माफ करने लायक नहीं है।

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि राहुल गांधी में गंभीरता नहीं है। राहुल गांधी हो या उनके पार्टी के अन्य नेता, सभी देश को तोड़ने में लगे हुए हैं। कांग्रेस को देश की सुरक्षा और करोड़ों जनता के हितों की चिंता बिल्कुल नहीं है। सिर्फ वोट के लिए कांग्रेस समाज में अशांति फैलाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मैंने काफी नजदीक से देखा है, परखा है। कांग्रेस के टिकट पर तीन बार सांसद रहा हूं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और भाजपा के मूल मंत्रों से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता ली। पीएम मोदी के नेतृत्व वाले केंद्र सरकार में शामिल होकर रेल के क्षेत्र में देशवासियों की सेवा कर रहा हूं। 

राहुल गांधी ने वाशिंगटन डीसी में भारतीय अमेरिकियों की सभा को बीते सोमवार को संबोधित किया था। इस दौरा उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कुछ धर्मों, भाषाओं और समुदायों को अन्य की तुलना में कमतर मानता है। उन्होंने कहा था कि भारत में राजनीति के लिए नहीं, बल्कि इसी बात की लड़ाई लड़ी जा रही है। कांग्रेस नेता ने कहा था, ‘लड़ाई इस बात की है कि क्या एक सिख को भारत में पगड़ी या कड़ा पहनने का अधिकार है या नहीं। या एक सिख के रूप में वह गुरुद्वारे जा सकते हैं या नहीं। लड़ाई इसी बात के लिए है और यह सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए है।’ 

अमेरिका क्यों ताकतवर है...

 अमेरिका क्यों ताकतवर है...


यह बेहद कठिन सवाल है लेकिन इसका जवाब इन दिनों कुछ ऐसे दिया जा रहा है कि अमेरिका के लोग बेहद सजग है

उन्हें जैसे ही पता चला कि उनका राष्ट्र‌पति सठिया गया है, उस पर उम्र हावी होने लगी है वे आयँ-बायं-सायं बोलने लगा है।

तत्काल राष्ट्रपति जो बाइडन की पार्टी ने राष्ट्र‌पति के निर्णय लेने के अधिकारों को सीमित करते हुए बड़े और कड़े फैसले के लिए केद्रीय केबिनेट को अधिकृत कर दिया। इतना ही नहीं जो बाइडन को बीच चुनाव में उम्मीदवारी से हटा कर उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को उम्मीदवार बना दिया।

क्योंकि अमेरिकन जानते है कि देश बतौलेबाजी से नहीं चलता...!

आदिवासी समाज ने नहीं उठाया शव...

आदिवासी समाज ने नहीं उठाया शव...

तेज होते आन्दोलन से सत्ता की नींद उड़ी 

 हत्या कर लाश दपनाकर पानी टंकी का निर्माण 


सीतापुर में आदिवासी युवक की हत्या करके उसकी लाश दफनाकर पानी टंकी का निर्माण करवाने वाले आरोपी ठेकेदार अभिषेक पाण्डेय को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। तो दूसरी तरफ मृतक संदीप लकड़ा के शव को लेने से इंकार करते हुए उसके परिजनों ने धरना देना शुरू  कर दिया है।) मृतक के परिजनों को दो करोड़ मुआवजा और आरोपी की गिरफ्तारी की मोग के चलते संदीप का शव 10 दिनों से मर्क्युरी में रखा हुआ  है तो अब मृतक के परिजनों के समर्थन में आदिवासी समाज के साथ कांग्रेस भी खड़ी हो गई है।

दृश्यप फिल्म की तर्ज पर हुए इस हत्याकांड को लेकर कोग्रेस के दिग्गज नेता भी धरना स्थल पहुंचने लगे है जिसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री ती एस सिंहदेव, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के अलावा कांग्रेस  व गोडवान पार्टी के नेता शामिल है।

सीतापुर में राजमिस्त्री की हत्या व फिर दृश्यम मूवी की तर्ज पर उसके शव को ओवरहेड टैंक के नीचे दफन करने के मामले ने अब और तूल पकड़ लिया है। सर्व आदिवासी समाज ने सीएम के नाम लिखे एक पत्र में मुख्य आरोपी ठेकेदार अभिषेक पांडेय, उसके सहयोगी प्रत्यूष पांडेय व गौरी तिवारी के खिलाफ नामजद अपराध दर्ज कर तीनों को फांसी की सजा देने की मांग की है। वहीं उसके परिजन को 2 करोड़ रुपए का मुआवजा व शासकीय नौकरी देने की भी मांग की है।


सीएम के नाम लिखे गए पत्र में सर्व आदिवासी समाज ने कहा है संदीप का शव 75 दिन बाद मिला है। उन्होंने एसपी, एसडीओपी, थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जांच कराने तथा तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की मांग की है। उन्होंने मृतक संदीप लकड़ा (Sandeep murder case) की पत्नी सलीमा लकड़ा को शासकीय नौकरी देने की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि मुख्य आरोपी अभिषेक पांडेय के निजी खाते से आहरित करोड़ों रुपए का उपयोग इस प्रकरण को दबाने में इस्तेमाल किया गया है। इसकी जांच कर संबंधितों के ऊपर एफआईआर दर्ज किया जाए

अमरजीत भगत के मुताबिक परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी गिरफ्तार नहीं होता पार्थिव शरीर को नहीं लेंगे. जबकि पुलिस प्रशासन अब तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सका है.ऐसे में शव को इसी तरह से कब तक रखा जाएगा.इसलिए प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

सीतापुर के बेलजोरा निवासी राजमिस्त्री संदीप लकड़ा की नृशंस हत्या व शव दफन करने वाला मुख्य आरोपी ठेकेदार अभिषेक पांडेय अब तक गिरफ्तार  नहीं हुआ है। इसे लेकर आदिवासी समाज में आक्रोश है। वे सीतापुर रेस्ट हाउस के सामने 3 दिन से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं। वहीं परिजनों ने अब तक संदीप का शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है। उनका कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी नहीं पकड़ा जाता, वे शव नहीं लेंगे। इसी बीच सीतापुर थाने के टीआई जॉन प्रदीप लकड़ा व एक एसआई को हटा दिया गया है।

शुक्रवार, 13 सितंबर 2024

टिकिट तो दे दी ही अब बुर्का भी बाँटेगी बीजेपी

 टिकिट तो दे दी ही अब बुर्का भी बाँटेगी बीजेपी


लोकसभा चुनाव में २४० सीट आने से घबराई बीजेपी ने हरियाणा और कश्मीर के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को टिकिट दे दिया है तो अब महाराष्ट्र में वह बुर्का बाँटने आमदा है।

लोगों को कपड़े से पहचान लेने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस रुख से वे तमाम लोग क्या करेंगे जो हिजाब और बुर्के लेकर पूरे देश में हंगामा खड़‌ा कर रहे थे। बुल्डोजर का निशाना बनाकर हिन्दुत्व की दुहाई दे रहे थे, इसका तो पता नहीं चला है लेकिन लोकसभा चुनाव में अपनी भद पिटवा चुकी भाज़पा का मुसलमानों के शरण में जाना किसी आश्चर्य से कम नहीं है।


दरअसल लोकसभा के चुनाव में महाराष्ट्र में न केवल भाजपा बल्कि इंडिया गठबंधन की ऐसी बुरी हार की किसी ने कल्पना नहीं की थी, इसलिए अब जब महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने है, तो सत्ता जाते देख भाजपा के सहयोगी दलों की नींद उड़ी हुई है, हालांकि पासमांदा मुसलमानों को रिझाने की कोशिश तो पहले भी हुई थी लेकिन लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने भाजपा के सह‌योगियों के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।


और यही वजह है कि मुंबई के कई इलाकों में मुस्लिम महिलाओं को रिझाने बुर्का वितरण समारोह किया जा रहा है।

यदि ऐसा ही पोस्टर कांग्रेस या इंडिया गठबंधन का कोई दल लगा देता तो तमाम तरह के हिन्दुवादी संगठन बिलबिलाने लगते लेकिन इस बार न केवल ऐसे पोस्टर शिंदे गुट ने लगाया है बल्कि शिंदे गुट के विधायक यामिनी यशवंत जाधव ने तो बुर्का वितरण समारोह का आयोजन शुरु कर दिया उपर से इस पर पत्रकारों के सवाल पर उनरी प्रतिक्रिया है वे तो यह सब नहीं मानती, उनके लिए उनेक क्षेत्र के लोग ही महत्वपूर्ण है।

अब देखना है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीख आते आते और भी क्या कुछ होने वाला है। लेकिन अब उन बेचारों का भी सोचिये जिनकी ऐसी बेइज्जती इन दिनों रोज हो रही है। 

गुरुवार, 12 सितंबर 2024

और ऐसे हो जाते हैं आकाश विजयवर्गीय बरी…

 और ऐसे हो जाते हैं आकाश विजयवर्गीय बरी…


भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को न्यायालय ने बरी कर दिया। क्या उसे न्यायालय ने सिर्फ इसलिए बरी कर दिया क्योंकि वह मध्यप्रदेश भाजपा के कद्‌दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र थे। लेकिन कानून के आँख में तो पट्टी बंधी होती है फिर वह यह कैसे देख सकता है कि आकाश कौन है?

लेकिन पुलिस के आँख में तो पट्टी नहीं बंधी और न ही मार खाने वाले निगम अधिकारी धीरेन्द्र बायस के आंखों में ही पट्टी बंधी थी तब क्या इन लोगों ने भी अपनी आंखों में पट्टी बांध ली थी?

आकाश विजयवर्गीय खुले आम निगम अधिकारी धीरेन्द्र को क्रिकेट के बल्ले से पीट रहा था , और इस पिटाई का वायरल विडियों पूरे देश ने देखा । लेकिन पुलिस गवाह और सबूत नहीं जुटा पाई, वायरल विडियों का सत्यापन नहीं कराया, गवाह मुकर गये ।लेकिन सबसे बड़ी बात जिस अधिकारी धीरेंद्र की पिटाई हुई उसने पिटाई से इंकार तो नहीं किया लेकिन उसने भी आकाश को नहीं देखा।


है न गजब का कमाल, राजस्थान में काला हिरण ने खुद गोली मारी थी , याद आया कुछ, अरे वही सलमान ख़ान वाला मामला। राजस्थान की इस घटना का मतलब, देश ने जाना था, अब आकाश के बल्ले ने उस अधिकारी को बाल समझकर खुद पिटने लगा था।

समझ रहे हैं आप... सत्ता और पैसे की धमक ...!

बुधवार, 11 सितंबर 2024

भाजपा का उजाला चार बीबी वाला...

 भाजपा का उजाला 

चार बीबी वाला...


जो किस भाजपा लव जिहाद और चार बीबी के मुद्दे को लेकर पूरे देश में हिन्दुओं का वोट हासिल करता हो, उसी भाजपा में यदि चार दो हिंदू औरतों के साथ चार बीबी वाला नत्थे खान पठान सालो से कद्‌द‌ावर नेता बना बैठा हो तब इसका मतलब क्या है।

यदि नत्थे खान पठान का होटल में गिलास की चुस्कियों के साथ एक महिला के अंतरंग वीडियो जारी नहीं होता तो न तो भाजपा उन्हें पद से हटाती और न ही भाजपा की इस करतूत का देश को पता ही चलता।

दरअसल पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी से चालीस साल से जुड़े कद्‌दावर नेता नत्थे ख़ान का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे गिलास से चुस्कियाँ लगाते एक महिला के साथ अश्लिलता  करते दिखाई दे रहे है। कहा जाता है कि यह विडियो खुद नत्थे ख़ान ने बनाकर वाट्‌सअप ग्रुप में डाला था। और कहा जाता है कि जब 'नशा टूटा तो उन्होंने विडियों डिलिट कर भी दिया लेकिन डिलिट करने में इतना देर हो गया कि विडियों देश भर में फैल गया। 

विडियो वायरल होते ही राजस्थान बीजेपी में भी हड़कम्प मच गया और नत्थे ख़ान को पार्टी  के सभी पदों से हटाने की घोषणा भी कर ही लेकिन अभी भी नत्थे खान को पार्टी से हटाया गया है या नहीं कहना मुश्किल है क्योंकि भाजपा में अभी भी इस तरह के लोगों की फ़ेहरिस्त है।

इधर नत्थे ख़ान  ने विडियों बयान जारी कर   बताया है कि जिस महिला के साथ विडियों है वह महिला उनकी चौथी पत्नी है जिससे 6 साल पहले शादी हुई है । यानी 64 के उम्र वाले नत्थे ख़ान ने 58 के उम्र में चौथी शादी की है।

नत्थे खान की यह चौथी बीबी है जिसमें से दो बीबी हिन्दू है।

एक देश-एक बीबी, लव जेहाद जैसे नारा लगाने वाली भाजपा में यदि नत्थे ख़ान सालों से है और राजस्थान भाजपा के कद्‌दावर नेता माने जाते है तो अब यह कहा ही जा सकता है कि भाजपा को चाल चेहरा सौर चरित्र की बात नहीं करनी चाहिए।

मंगलवार, 10 सितंबर 2024

उपमुख्यमंत्री साव ने बना ही ली रिकार्ड...

 उपमुख्यमंत्री साव ने बना ही ली रिकार्ड...


पहली बार विधायक बनते ही उपमुख्यमंत्री बने अरुण साव के नाम नई सरकार में एक ऐसा रिकार्ड जुड़ गया है जो अब पांच साल तो नहीं टूटने वाला  है। संघ से सांसद और फिर प्रदेश अध्यक्ष बनकर सर‌कार बनाने के बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी से वंचित रहने वाले अरुण साव पर वैसे तो आठ माह में जिस तरह के आरोप लगे हैं वह किसी भी नेता के लिए परेशानी का सबब हो सकता है लेकिन इस सबसे बेपर‌वाह उनकी कार्य शैली में कोई बदलाव नहीं होना आश्चर्य का विषय माना जा रहा है।

नगरिय निकायों में संविदा कर्मियों की भर्ती को लेकर आरोपों के बीच उन पर जल जीवन मिशन योजना का बँटाधार करने का आरोप भी लगने लगा है। धमतरी - बलोदा बाजार सहित कई जिलों में अनियमितता उजागर होने के बावजूद इंजीनियरों और ठेकेदारों को बचाने और अनकी करतू‌तों का मामला तो विधानसभा में भी गर्म रहा। 

इधर उनके अमेरिका प्रेम को लेकर भी जबरदस्त चर्चा रहा । अमेरिका जाने वीजा क्लीयर कराने के चक्कर में वे तीन दिन दिल्ली में जमे रहे और जब वीजा क्लीयर नहीं हुआ तो थक हारकर लौट आये थे ।

लेकिन अब वीजा क्लीयर होते ही वे फिर जिस तेज़ी से दिल्ली कूच कर गये, उसे लेकर भी कम चर्चा नहीं है । 

वे इस दौरान जाने अनजाने में अनोखा रिकार्ड भी बना गये और यह रिकार्ड है नई सरकार में विदेश जाने वाले पहले मंत्री बन जाने का रिकॉर्ड…।

सोमवार, 9 सितंबर 2024

अब इंदौर में रेप के आरोप में भाजपाई फँसे…

 अब इंदौर में रेप के आरोप में भाजपाई फँसे…

युवती को एफ़आईआर के लिए कोर्ट जाना पड़ा


गुजरात के राजकोट में छात्रा से बलालार करने वाले भाजपाईयों को गिरफ़्तार  करने से पुलिए किस तरह बचती रही यह मामला अभी लोगों के जेहन से उतरा भी नहीं है कि अब मध्यप्रदेश के इंदौर से खबर आ गई कि सामूहिक बलात्कार के आरोपियों के खिलाफ पुलिस में एफ़आईआर कराने युवती को न्यायालय जाना पड़ा तब कहीं जाकर पुलिस ने सामूहिक बलात्कार के आरोपियों के खिलाफ एफ‌आईआर दर्ज की। इस मामले का मुख्य आरोपी भाजपा नेता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बताया कि 34 साल की महिला की शिकायत पर शहजाद मडावरा, सलीम बारी निवासी श्रीनगर कांकड, सलीम तेली पुत्र ईद मोहम्मद निवासी खजराना, इरफान अली निवासी रसलपुर देवास और नजर पठान पर गैंगरेप की धाराओं में कार्रवाई की है।

पीड़िता के मुताबिक घटना 11 जून 2024 की है। वह कनाड़िया में किराये से फ्लैट देखने जा रही थी। तभी एक थार गाड़ी से सामने से आई स्कूटी के यहां रोक दी। इस कार से इरफान अली उतरा। वह मुझे जबरदस्ती कार में बैठाने लगा। कहा कि तुझे सलीम भाईजान से 10 से 12 लाख रुपए दिलवा देता हूं।मैंने काफी विरोध किया तो कार की पीछे की सीट पर सलीम तेली निकला। उसने कहा सड़क पर ही इसे कपड़े उतार दो। फिर एक मिनट में गाड़ी में बैठ जाएगी। इसके बाद सलीम बारिक नाम का लड़का उतरा और मुझे खींचकर जबरदस्ती गाड़ी में बैठा दिया। उसी समय सफेद रंग की दूसरी कार से शहजाद उतरा। उसने भी अपशब्द कहे।

इसके बाद सभी पीड़िता को कार में बैठाकर अपहरण किया और अरविंदो अस्पताल के यहां गोदाम में ले गए। यहां कमरे में टीवी चालू कर सभी शराब पीने लगे।

तभी स लीम ने बेल्ट निकाला और मुजरा करने को कहा। करीब आधे घंटे बाद सभी ने अननैचुरल सेक्स को लेकर दबाव बनाने लगे। मना किया तो नजर पठान ने बेल्ट से बुरी तरह से मारा। फिर सभी एक के बाद एक बेल्ट से मारने लगे। सभी ने नशा किया और पीड़िता के साथ रेप किया।

पीड़िता ने एफआईआर में लिखवाया कि मैं चिल्लाई तो टीवी पर चल रही अश्लील फिल्म की आवाज तेज कर दी। सलीम तेली ने अननैचुरल सेक्स के लिए मजबूर किया। मेरे साथ शैतानों जैसी हरकत की। कुछ देर बाद मुझे नजर पठान मुझे एक्टिवा पर बैठाकर एमआर10 ब्रिज के यहां छोड़कर भाग गया।

यहां से मैं अपनी बहन के यहां पर मूसाखेड़ी चली गई। पीड़िता ने बताया कि वह इनके खिलाफ शिकायत करने थाने पहुंची। कनाड़िया पुलिस ने भी उसकी सुनवाई नहीं की। आरोपियों को पता चला तो उन्होंने मुझे काफी डराया। सोमवार रात कनाड़िया पुलिस ने पांचों आरोपियों पर केस दर्ज किया है।

देवास में भाजपा का पार्षद रह चुका इरफान गैंगरेप का एक आरोपी इरफान भाजपा का पार्षद रह चुका है। वह स्थानीय भाजपा विधायक का करीबी भी बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इरफान आरोपी सलीम सहित अपने अन्य दोस्तों के साथ कुछ दिन पहले गोवा घूमने गया था।

रविवार, 8 सितंबर 2024

मोदी की मनमानी पीएम-श्री का पुलिंदा...



 मोदी की मनमानी 

पीएम-श्री का पुलिंदा...



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नई  शिक्षा नीति  को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं शिक्षण सस्थानों में संघ के विचार धारा के साथ-साथ इतिहास के महत्वपूर्ण कालों को विलोपित करने जैसे आरोपों  के बीच नाम थोपने का विवाद है। भाजपाई राज्य तो इस शिक्षा नीति को बगैर चु-चपड़ के स्वीकार कर दिया है।और केंद्र से पैसा लेने पुराने स्कूलों को इस योजना में शामिल कर मोदी का फ़ोटो भी लगा रहे हैं।

नई शिक्षा नीति के तहत पीएम-श्री स्कूल का मॉडल तैयार किया गया है जिसमें केंद्र सरकार 60 फीसदी हिस्सा तभी देगा जब राज्य सरकार 40 फीसदी  हिस्सा देगा।

यानी राज्यों के चालीस फीसदी हिस्सा के बाद भी स्कूल पीएम श्री इसलिए कहलायेगा क्योंकि केन्द्र 60 फीसदी हिस्सा दे रहा है। और केंद्र तभी पैसा देगा जब राज्य पीएम श्री नाम रखेगा। मोदी का फ़ोटो लगाएगा।

इसे लेकर विवाद के चलते कई राज्यों को पैसा नहीं मिल रहा है लेकिन राज्यों के पास फंड की कमी है और स्कूलों को सुविधा सम्पन्न करना है तो केंद्र की बात यानी मोदी  की तस्वीर लगानी ही होगी।

छत्तीसगढ़ में तो पुराने स्कूलों को ही पीएमश्री योजना में शामिल कर पैसे लिये जा रहे है, अन्य भाजपा शासित  राज्यों में भी यही हाल है। यानी नया कोई पीएमश्री स्कूल  नहीं होगा, पुराने स्कूलों को ही नाम बदलकर पीएम श्री कर दिया जायेगा।वह भी सिर्फ ६० फ़ीसदी हिस्सेदारी के साथ।

पंजाब तो पहले ही क़र्ज़ में लदा है इसलिए वह पुराने स्कूलों को इस योजना में लाकर   राजी हो गया, दिल्ली की मजबूरी किसी से छिपी नहीं है । वह ऐसा राज्य है जहां की चुनी हुई सरकार पूरी तरह से केन्द्र पर निर्भर है हालिए वह तैयार हो गई। तो बाक़ी  राज्य भी मजबूरी में तैयार हो गये हैं ।


लेकिन अभी तक तमिलनाडू और बंगाल तैयार नहीं हुए है। वे प्रधानमंत्री मोदी का फोटो सिर्फ 60 फीसदी अंशदान में तैयार नहीं है। लेकिन कोई अपने फोटो के बगैर पैसा न दे तो इसे आप क्या कहेंगे। 

यदि नाम का केंद्र को इतना ही शौक है तो पूरा पैसा दें। राज्यों से 40 फीसदी राशि क्यों लिया जा रहा है ।