समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई ने दो क्लोज़र रिपोर्ट दाख़िल कर दी हैं. इन रिपोर्टों में अभिनेता की मौत के मामले में किसी साज़िश से इनकार किया गया है.
महीनों तक रिया चक्रवर्ती का मीडिया ट्रायल हुआ और उसे अपराधी घोषित कर दिया गया.
सुशांत केस बंद..पर रिया को इंसाफ़ कौन देगा!
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रिया दोषी थी या नहीं, ये अब कोई नहीं पूछ रहा…
मीडिया का काम पूरा हो चुका है।
उस दिन एक नहीं, दो मौतें हुई थीं।
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पहली— सुशांत की।
दूसरी— रिया की निजता, करियर और चरित्र की।
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1998 में मोनिका लेविंस्की के साथ भी यही हुआ था।
राष्ट्रपति क्लिंटन को बचाने के लिए मीडिया ने मोनिका को शिकार बना दिया।
आज वही खेल रिया के साथ खेला गया।
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"क्या रिया ने ड्रग्स लिए?"
"क्या रिया ने सुशांत को मारा?"
"रिया 'विषकन्या' थी?"
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सवालों का ढोंग था…
फैसला तो पहले ही सुना दिया गया था।
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राजकुमारी डायना मीडिया से बचते-बचते मर गईं।
मोनिका लेविंस्की ने लड़ाई लड़ी, और आज ऑनलाइन उत्पीड़न के खिलाफ खड़ी हैं।
रिया को भी लड़ना होगा…
क्योंकि उसका सामना ऐसे शिकारी से है जो मरने के बाद भी शिकार को बेचता है।
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जब समाज ही जल्लाद बन जाए, तो समझो सभ्यता की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी
सीबीआई आज़ जिस निष्कर्ष पर पहुंची है तब मुंबई पुलिस ने भी यही कहा था और इसे आत्महत्या क़रार दिया था. लेकिन मीडिया ट्रायल के दबाव एवं राजनीतिक लाभ के मद्देनजर यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया.
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के बाद न्यूज चैनलों के खिलाफ ग़लत खबर चलाने एवं एक महिला के उत्पीड़न मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए.
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