बुधवार, 7 अप्रैल 2010

तब क्या करें ?

कल शाम से लिखने की बिल्कुल भी इक्छा नहीं हो रही थी जब भी लिखने बैठता नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों की छाया सामने आ जाती थी
लेकिन लिखना भी है इसलिए लिख रहा हूँ आखिर यह सब क्यों हो रहा है सरकार कर क्या रही है संसद में हमले के बाद जब तत्कालीन पीएम अटल जी ने सिर्फ आर-पार का ऐलान किया था तब भी मै इतना व्यथित नहीं था
अब तो एक ही सवाल है --
जो सरकार निकम्मी है ,वह सरकार बदलनी है
लेकिन अब इसे भी राजनीती कहा जाता है तब क्या करें ?

1 टिप्पणी:

  1. isase baat naheen banegee,ki kyaa likhoon. likhanaa hee hoga. man kee baat samane aanaa hee chahiye. yac paanchavaan khambha hai.aur yahaan abhi kisi ka bandhan naheen hai.

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