शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

अब भी नहीं सुधर रही पुलिस ...


यह तो कुत्ते की दुम को बारह साल पोंगली में रखने के बाद भी सीधी नहीं होने वाली कहावत को ही चरितार्थ करती है वरना छत्तीसगढ़ पुलिस का रवैया पीढि़तों को लेकर इतना नकारात्मक नहीं होता । जुआं सट्टा अवैध शराब बेचने वालों के अलावा अपराधियों से गठजोड़ में छत्तीसगढ़ पुलिस इतनी मशगुल हो गई है कि उनका मन बलात्कार जैसे मामले की पीढि़तों को देखकर भी नहीं पिघलता तभी तो गौरेला के टीआई सी एन सिंह ने बलात्कार की शिकार महिला को थाने से भगा दिया । पीडि़त महिला की शिकायत पुलिस कप्तान रतन लाल डांगी से की गई तब कहीं जाकर न केवल रिपोर्ट लिखी गई बल्कि टी आई सी एन  सिंह को निलंबित किया गया ।
पिछले हफ्ते जहां पूरा देश दामिनी के लिए न्याय मांग रहा था वहीं छत्तीसगढ़ की पुलिस बलात्कारियों के प्रति नरम रवैया रखे हुए थे । गौरेला की इस घटना के अलावा पिछले हफ्ते छत्तीसगढ् में आधा दर्जन से अधिक बलात्कार की वारदात हुई और प्राय: इन सभी मामलों में थाने का रवैया दुर्भाग्य पूर्ण रहा  । भानुप्रतापुर में तो महिला से सामूहिक बलात्कार के मामले में पुलिस ने तब कार्रवाई की जब मीडिया ने हल्ला मचाया । ईलाज के लिए उस मलिा को राजधानी से दूर इसलिए भी रखा कि कोई नई मुसिबत खड़ी न हो जाए । रातो रात जुर्म दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया । लेकिन मजाल है कि इस मामले में कप्तान साहब कुछ कहते । इसलिए कुछ नहीं कर पाये क्योंकि थाना प्रभारी उपर तक पहुंच रखता है ।
पुलिस जानती है कि उनकी वर्दी के रौब के आगे सब डरते है और यदि मामले पर Óयादा हल्ला मचा तो भी तो कुछ दिन बाद सब शांत हो जायेगा ।
पुलिस जानती है कि उनके प्रति लोगों में बेह्द गुस्सा है लेकिन उन्हें उनकी परवाह भी नहीं है क्योंकि गुण्डागर्दी का लाइसेंस तो उन्ही के पास है और जब तक नेताओं व मंत्रियों के पैसों की भूख रहेगी उन्हें अ'छी जगह पोस्टिंग से कोई नहीं रोक सकता ।
तभी तो राजधानी में ऐसे ऐसे वर्दी वाले थाने में बैठे हैं जिनकी गलतियां उन्हें नौकरी में रखने के लायक नहीं है । पंडरी मोवा थना प्रभारी की शिकायत क्या कम है या लोहा कारोबारी पंकज की रिपोर्ट नहीं लिखने वाले का क्या हुआ ।
तभी तो लोगों का गुस्सा फट पड़ता है और यदि कोई पुलिसिया अत्याचार पर आवाज उठाये तो पुलिस उसकी पिटाई से भी  परहेज नहीं करती तभी तो पिछले दिनों राजधानी के शास्त्री चौक जैसे व्यस्ततम चौक में वर्दी वालों ने भाजपा नेता के रिश्तेदार की सरे आम पिटाई की लेकिन उपर से दबाव आया तो विभागीय जांच के निर्देश दे दिये गये । भाजपा के सांसद रमेश बैस के भतीजे ओंकार बैस की भी पुलिस वालों ने पिटाई की लेकिन मामला सांसद के भतीजे का था इसलिए मारने वाला पुलिस कर्मी को निलंबित कर दिया यानी आम आदमी की पिटाई पर यहां कुछ नहीं होना है ।
ुपुलिस अपनी मर्जी की मालिक है वह जो चाहे कम है तभी तो पंडरी कपड़ा मार्केट में तवेरा की लूट होती है और पुलिस चोरी का जुर्म दर्ज करती है मजाक है राजधानी के दो-दो मंत्री पुलिस से पूछने की हिम्मत कर सके कि ऐसा कैसे हो गया वे तो तभी बोलते है जब उनके परिजानों पर पुलिस का गुस्सा निकलता है ।
लोग गुस्से में है । लेकिन उनका गुस्सा कभी नहीं निकलता । वर्दी वाले का खौफ केवल शरीफों पर ही चलता है तभी तो अंबिकापुर में पुलिस कर्मी पर जानलेवा हमला होता है और हमलावर को पकडऩे जब पुलिस आरोपी के घर पहुंचती है तो वहां एक सब इस्पेंक्टर को कालर पकड़कर बंधक बना लिया जाता है और सीएसपी को दल बल के साथ जाना पड़ता है । और अपराधी पुलिस से डरे भी क्यों ? पैसा लेकर गलबहियां करने में पुलिस को भी मजा आता है ।
चलते चलते ...
अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाने व ठेकेदार के दबाव से निपटने पुलिस ने नया फार्मूला निकाला है । आलंपिक संघ के अध्यक्ष और महासचिव यानी रमन सिंह और बल्देव भाटिया के संबंधो को खूब प्रचारित करों लोग सीधे मुख्यमंत्री पर ही उंगली उठायेंगे ।

1 टिप्पणी:

  1. वाकई हमारे देशवासी स्वतंत्रता के केवल इसी सूत्र का

    पालन करते नजर आ रहे हैं

    "क़ानून का पालन कौन करे हम हैं आज स्वतन्त्र"

    .....सुन्दर विचार।


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