रविवार, 22 फ़रवरी 2026

राशन घोटाले में तीन हज़ार दुकान घेरे में

 राशन घोटाले में तीन हज़ार दुकान घेरे में 


316 करोड़ के राशन घोटाले का मामला उलझता जा रहा है। राशन दुकानों में लूट और दोषियों को अफसरों द्वारा बचाए जाने के इस खेल के खेल किस कदर बढ़ा है और किस तरीके से विधानसभा की जांच समिति को गुमराह कर रही है यह चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल 216 करोड़ का चावल और 100 करोड़ का शक्कर घोटाला का मामलाविधानसभा में उठा था और सत्ता पक्ष इस तरह से घिर गई थी कि उन्हें जांच समिति बनानी पड़ी थी।

 विधानसभा की जांच समिति जब जांच शुरू की तो उसके सामने ऐसे ऐसे घोटाले और करतूत सामने आए कि आप सुनकर चौंक जाएंगे। कहा जा रहा है कि जांच समिति को पता चला कि इस पूरे घोटाले में ना केवल दुकानदार बल्कि कई बड़े अफसर शामिल है। ऐसे अफसर शामिल है जिन्हें सत्ता का पूरा संरक्षण इन दिनों मिल रहा है और जांच समिति कोगुमराह करने के लिए भी गलतसलत आंकड़े दिए गए। 

इस घोटाले ने ना केवल खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है बल्कि राशन वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए। 2024 के विधानसभा बजट सत्र में प्रश्न क्रमांक 58 के तहत खाद्य विभाग में चावल और शक्कर की चोरी के आंकड़े पेश किएगए और कहा जाता है कि चोरी की मात्रा को कम करके दिखाया गया था। प्रदेश में 33 जिलों की राशन दुकानों में बड़े पैमाने पर अमितता हुई। बस्तर में 344, कांकेर में275, कोरबा में 367, सक्तरी में 276, बेमतरा में 167, कवर्धा में 351, खैरागढ़ में दो, बड़ौदा बाजार में 227 और गरियाबंद में 188 राशन दुकानों में शक्कर गायब पाई गई। इसके अलावा भी 2000 टन शक्कर की कमी पाई गई। जिसका बाजार मूल्य करोड़ों में है

और रायपुर के खमतराई थाने की बात बता रहे हैं। दो राशन दुकान संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। यह दुकानें थी मां कंकाली महिला स्वसहायता समूह द्वारासंचालित जिनके पास दो दुकान जांच में एक दुकान से 222 क्विंटल चावल और सवा5 तीन क्विंटल शक्कर की कमी पाई गई जबकि दूसरी दुकान में 241 क्विंटल चावल गायब था। इस राशन की कुल कीमत लगभग 17 लाख आकी गई थी। 216 करोड़ के चावल और 100 करोड़ से अधिक की शक्कर चोरी का यह मामला छत्तीसगढ़ में राशन वितरण प्रणाली की खामियों को उजागर करता है। खाद विभाग के अफसरों द्वारा विधानसभा में गलत जानकारी देना ना केवल गंभीर लापरवाही है बल्कि यह भी संकेत देता है कि फर्जीवाड़ा में शामिल लोगों को बचाने की किस तरह की कोशिश की जा रही है। हजारों राशन दुकानों को नोटिस और सैकड़ों को बर्खास्त करने के बावजूद विभाग का दावाकि कोई शिकायत नहीं मिल रही है। है ना?
हंसी आएगी आपको। गलत दुकान दोषी अधिकारी सब कुछ क्या बचा लिए जाएंगे?
दरअसल जांच के दायरे में चार और राशन दुकान आ गए। जिनके खिलाफ थानों में एफआईआर दर्ज की तैयारी चल रही है। लेकिन कहा जा रहा है कि राजनैतिक हस्तक्षेप या सत्ता के हस्तक्षेप के कारण एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा रही है। अफसर जब पत्रकारों से बात करते हैं तो कहते हैं कि कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी लेकिन दूसरी तरफ जमकर खेल हो रहा है। एक तरफ खाद्य विभाग का दावा है कि कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है। अब सब ठीक कर लिया गया लेकिन दूसरी तरफ जो नोटिस दिए जा रहे हैं वो साफ संकेत दे रहे हैं कि गड़बड़ी हो रही है चल रही है। यदि गड़बड़ी नहीं चल रही है तो फिर नोटिस क्यों दी जा रही है? जो एक आंकड़े सामने आए उसके मुताबिक 2847 राशन दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। 1167 दुकानों के खिलाफ राजस्व वसूली की कारवाई शुरू की है। कोरबा में एक राशन दुकान को निलंबित कर दिया गया है।जबकि 160 दुकानों को पूरी तरह से बर्खास्त कर दिया गया। सवाल उठता है कि अगर गड़बड़ी नहीं थी तो इतनी बड़ी संख्या में कार्रवाई क्यों हो रही है? अब देखना है कि इस पूरे मामले में जब विधानसभा की समिति जांच करनेवाली है तो फिर क्या कुछ होगा? किस तरीके से अफसरों का खेल होगा। किस तरीके से सत्ता अफसर को बचा लेंगे? क्योंकि अफसरों को बचाने के खेल में तो यह सत्ता बेहदमाहिर है। आबकारी विभाग के 29 अफसरों को किस तरीके से बचाया जा रहा था? दिव्यांगों के नाम पर अस्पताल खोलकर हजारों करोड़ रुपए की घपलेबाजी करने वाले अफसरों को कैसे बचाया जा रहा था? महादेव सट्टा एप में हर महीने लाखों रुपए वसूलने वाले अफसरों को कैसे बचाया जा रहा है? क्या कोई जेल में दिखाई देता है आपको? जेल में तो ईडी, सीबीआई जैसी संस्थाएं डालती हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस क्या करेगी? किस तरीके से राजनीतिक दबाव में काम करेगी? गरीबों के इस राशन घोटाले पर सत्ता क्या रुख अपनाती है, यह देखने की बात होगी।

वीडियो भी देखे 

https://youtu.be/6MFXHnXJTJU?si=2KnJfCGDFWJanOQ6


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