रविवार, 26 सितंबर 2010

घटना हुई तो डांस बार याद आया वरना महिनों से सिर्फ पैसा खाया

थानेदार तो दूर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी पैसा खाने का आरोप
 छत्तीसगढ़ की राजधानी में महिनों से चल रहे डांस बार का खुलासा करने की बजाय महिना खाने वाले पुलिसिये तब भी कार्रवाई नहीं करते यदि मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष प्रभाष झा के बिगड़ैल लड़के व उसके साथियों के साथ मारपीट नहीं होती। सट्टा पकड़ाने पर थानेदारों को निलंबित करने वाले पुलिस अधिकारी से गृहमंत्री ननकीराम कंवर तक ने इस मामले में सिर्फ दोनों पक्षों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुप्पी ओढ़ ली जबकि महिनों से यहां न केवल डांस बार चल रहा था बल्कि चर्चा इस बात की भी है कि यह सब पुलिस के संरक्षण में हो रहा था और थानेदार से लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों तक महिना पहुंचाया जाता था।
वैसे तो इस सरकार के चलते जो कुछ हो जाए कम है। मंत्रियों से लेकर अधिकारियों तक सिर्फ अपनी जेब गरम करने में लगै हैं भले ही इसकी वजह से आम लोगों की जान पर बन आए। यही वजह है कि राजधानी पुलिस पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगता रहा है।
ताजा मामला शिवसेना प्रमुख धनंजय सिंह परिहार द्वारा संचालित होटल का है। बताया जाता है कि इस होटल में महिनों से बार डांस चल रहा था और दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता सहित देश के विभिन्न हिस्सों से यहां न केवल लड़कियां आती थी बल्कि इनके देह व्यापार करने के भी चर्चे शहर में आम रहे हैं। इतना ही नहीं यहां प्राय: रोज छोटी-मोटी लड़ाई-झगड़े भी आए दिन होते रहते थे लेकिन डीडी नगर थाने को हर माह मिलने वाली मोटी रकम और उच्चाधिकारियों को हर माह पहुंचाई जाने वाली रकम की वजह से पुलिस ने इस बार में चल रहे अनैतिक कार्यों की तरफ कभी ध्यान नहीं दिया।
बताया जाता है कि यदि शनिवार की रात भी यदि मध्यप्रदेश सरकार के अध्यक्ष प्रभाष झा का बिगड़ैल औलाद यहां मार नहीं खाता तो पुलिस मामले को दबा देती। बताया जाता है कि भाजपाध्यक्ष का यह पुत्र पहली बार यहां नहीं आया था वह अपने साथियों के साथ मौज मस्ती के लिए अक्सर आता था और शहर के कई युवक-युवतियां यहां डांस करने भी पहुंचती थी। डीडी नगर थाने वाले तो इस कदर यहां पार्किंग या छोटे-मोटे झगड़े में धनंजय सिंह परिहार का साथ देते थे मानों वे सरकार की नहीं इस होटल के कर्मचारी हो।
बताया जाता है कि चूंकि पैसा पुलिस के उच्चाधिकारियों तक पहुंचता था और एक वरिष्ठ अधिकारी की यहां रूचि थी इसलिए घटना के बाद मारपीट में शामिल दोनों पक्षों के खिलाफ तो कार्रवाई हुई लेकिन थाने को बचा लिया गया। सट्टा या अन्य छोटे मामले में थानेदार को आंख तरेरने वाले गृहमंत्री ननकीराम कंवर भी इस मामले में आश्चर्यजनक रुप से चुप है जबकि इस घटना के लिए सबसे यादा दोषी कोई है तो वह डीडी नगर थाना है। डीडी नगर थाना वाले यह कहकर अपनी जिम्मेदार से मुंह नहीं मोड़ सकते कि उन्हें यहां चल रहे डांस की खबर नहीं थी जबकि कई बार यहां हुए झगड़ों के बाद मामला थाने पहुंचा है लेकिन रिपोर्ट कभी नहीं लिखी गई।

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