मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आते ही अडानी यानी गौतम अडानी की कंपनियों के काम में तेजी आ गई है एक तरफ हसदेव अरण्य को धड़ल्ले से काटा जा रहा है पेड़ काटने की अनुमति दी जा रही है वहां पर्यावरण को लेकर जिस तरह के सवाल उसकी अनदेखी की जा रही है तो दूसरी तरफ तिल्दा राजधानी रायपुर से लगे क्षेत्र में अडानी पावर के विस्तार को लेकर जन सुनवाई कल हुई इस जन सुनवाई के विरोध में गांव वाले एक राय होकर पहले ही सरकार को कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंप चुके थे कि जन सुनवाई रोक दी जाए पहले ही जीएमआर पावर कंपनी ने जो द किया था गांव वालों से उसे पूरा नहीं किया गया और गांव की आबोहवा अलग खराब हो रही है ऐसे में विस्तार के लिए जो 885 एकड़ जमीन चाहिए वे नहीं देंगे लेकिन यह विष्णुदेव साय की सरकार है यह डबल इंजन की सरकार है और कहा जा रहा है कि सरकार तो पूरी तरीके से अदानी की गोद में जा बैठे यानी जैसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्र के लिए क वही सब कुछ विष्णु देव साय की सरकार करेगी और यही वजह है कि जब ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा था कि यह जन सुनवाई टाल दी जाए स्थगित कर दी जाए उसकी अनदेखी करके कल जन सुनवाई की गई लदा विकासखंड के तहत रायखेड़ा गांव में स्थापित अडानी पावर लिमिटेड के पावर ग्रेड 370 मेगावाट प्लान के विस्तार हेतु प्रस्तावित 1600 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट की पर्यावरण स्वीकृति हेतु जन सुनवाई थी और प्रचारित प्रसारित यह किया जा रहा है कि जन सुनवाई में लोगों ने समर्थन दिया है लेकिन हकीकत तो यह है कि कल जमकर विवाद हुआ है विरोध हुआ है कांग्रेस ही नहीं दूसरे दलों के नेता जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के नेता भी पहुंचे थे विरोध के लिए जिसमें रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय पूर्व राज्यसभा सांसद छाया वर्मा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ग्रामीण जिलाध्यक्ष है उधो राम वर्मा जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के मुखिया अमित बघेल सहित कई लोग यहां पहुंचे थे और इस बात का विरोध कर रहे थे कि कंपनी जमीन लेते समय तो सब वादा कर देती है लेकिन जमीन हासिल होने के बाद गांव वालों की मुसीबत बढ़ जाती ऐसी परिस्थिति में अब सवाल यह उठ रहा है कि हसदेव कितना बच पाएगा और अब रायखेड़ा क्षेत्र के लोग पर्यावरण के प्रदूषण से अपने को कैसे बचा पाएंगे किस तरीके का विरोध प्रदर्शन हुआ है या किसी से छिपा नहीं है लेकिन मीडिया में खबर छपाई जा रही है कि समर्थन में लोग खड़े हैं ऐसे में सवाल यह है कि क्या सचमुच विष्णुदेव साय की सरकार अदानी की गोद में जा बैठी और कहा जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों में फिर जमीन खरीदी की जा रही है बड़े पैमाने पर अदानी द्वारा खासकर राजधानी और बड़े शहरों के नजदीकी जमीन ताकि वहां बड़े पैमाने पर गोदाम बनाया जा सके यानी मध्य प्रदेश की तर्ज पर क्या अब एफसीआई में रखने की बजाय धान जो खरीदती है छत्तीसगढ़ की सरकार वह अदान के गोदामों में रखेगी ऐसे कई सवाल हैं हम आपको बताते रहेंगे अभी तो जन सुनवाई एक बार हुई और कितने बार करती है या इस तरीके से हसदेव अरण्य को काटे जाने को लेकर जिस फर्जी जन सुनवाई हुई है कहा जा रहा है उस तरह से क्या फर्जी जन सुनवाई करके विस्तार के लिए अनुमति दे दी जाएगी पर्यावरण की अनदेखी कर कर दी जाएगी जिसका प्रभाव राजधानी में भी पढना तय है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है!
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