कुपोषण में भारत से पाकिस्तान बेहतर
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा इकोनॉमी बनाने के लिए कमर कसकर तैयार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शायद यूनिसेफ की उस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है जो भारत को पाकिस्तान से भी नीचे खड़ा कर देता है हमसे भी छोटे-छोटे देश बच्चों के पोषण के मामले में बेहतर है नेपाल बांग्लादेश श्रीलंका किसी भी देश का नाम आप ले लीजिए हमसे एक पायदान नीचे कोई है तो वह अफगानिस्तान है अफगानिस्तान यानी तालिबान तब ऐसी परिस्थिति में विश्व गुरु बनाने की जो चाल चली जा रही है या सपना दिखाया जा रहा है उसकी हकीकत क्या यूनिसेफ की रिपोर्ट ने नहीं खोल दिया
दुनिया भर में 18 करोड़ से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार है या उन्हें ठीक से खाना नहीं मिल रहा है और उनमें से 40 फीसद बच्चे भारत के यानी भारत की स्थिति नीचे के पैदान से आठवें नंबर पर है और हमसे बेहतर स्थिति में पाकिस्तान
पाकिस्तान तो खुशहाली की रिपोर्ट में भी भारत से बेहतर तब क्या भारत में जो बच्चे हैं उन्हें पोषित खाना नहीं मिलना चाहिए 5 किलो अनाज एक परिवार को देकर वोट हासिल करने लाभार्थी बताकर लाभ लेने का इस खेल में किस कदर भारत की स्थिति लगातार खराब होते जा रही है और पूंजीपति और पूंजी वाले होते जा रहे हैं दुनिया में भारत का डंका बजाने के लिए ठहाके लगाए जा रहे हैं याद कीजिए आप इटली में किस तरीके से देश के प्रधानमंत्री ठहाके लगा रहे थे लेकिन यह कालिक क्या उन्हें दिखाई नहीं देता दुनिया तो देख ही लेगी यूनिसेफ की रिपोर्ट को य की रिपोर्ट बेहद ही चौकाने वाला ही नहीं परेशान करने वाला है कि किस तरीके से भारत के 40 फीसद बच्चे पोषण युक्त खाने के लिए तरस रहे हैं किस तरीके से गरीबी हावी है और इसकी कल्पना तो उन लोगों को तभी कर लेनी चाहिए थी जब भारत सरकार ने आंकड़े दिए थे कि 80 लाख परिवारों को 5 कि अनाज दिया जाता है तब देश में आम आदमी किस कदर परेशान है महंगाई बेरोजगारी एक अलग सवाल है लेकिन बच्चे बच्चों की जिंदगी को लेकर भी क्या सरकार गंभीर नहीं है कुपोषण दूर करने के लिए कितने बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं प्रचार प्रसार में ही करोड़ों रुपए बर्बाद करके अपना प्रचार प्रसार किया गया लेकिन खप की स्थिति यूनिसेफ ने खोल कर रख दी है कि किस तरीके से भारत में छोटे बच्चों को पोषण युक्त खाना तक नसीब नहीं हो रहा है और देश के प्रधानमंत्री भारत को दुनिया का तीसरा इकोनॉमी बनाने के लिए तैयार है तो क्या यह इकोनॉमी कॉरपोरेट सेक्टर के दम पर बन रहा है क्या पूंजी सिर्फ कारपोरेट सेक्टर के पास जाकर रह गई यह बेहद ही गंभीर सवाल है और इसके लिए मानवाधिकार को लेकर चिंतित लोगों को भी सामने आना चाहिए कहां है वह एनजीओ जो लगातार बच्चों के लिए काम कर रहे हैं किस तरीके से काम कर रहे हैं क्या सिर्फ अपना वेतन निकाल रहे हैं और सरकार के जी हुजूरी में लगे हुए हैं या उनके ग्रांड लेने में लगे हुए हैं सवाल आप कुछ भी उठा लीजिए सवाल यह नहीं है कि दे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश की दिशा किस तरफ ले जाना चाह रहे हैं सवाल तो यह है कि देश किस दिशा में जा रहा है नसता बढ़ी है इसमें किसी को कोई संदेह नहीं अब तो छोटी-छोटी बातों पर ही लोग मारने कूटने को तैयार हो जाते हैं तब ऐसी परिस्थिति में यूनिसेफ की जो रिपोर्ट है हम डिस्क्रिप्शन बॉक्स में उनका लिंक दिया आप चाहे तो जाकर पढ़ सकते हैं लेकिन जो रिपोर्ट है वह बेहद ही गंभीर चेतावनी है देश के लिए कि आने वाले दिनों में देश इस तरह से चलाया जाएगा तो जो भविष्य के नागरिक हैं वे किस तरीके से होंगे महंगाई को लेकर कोई सवाल नहीं उठाता शिक्षा व्यवस्था ठप हुई है किस तरीके से शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया गया वह भी इस दौर में लोगों ने देखा है और यह भी है कि सरकारी स्कूलों को खंडहर में तब्दील करके निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया गया क्या इस तरीके से इकोनॉमी बढ़ेगी भारत की और वह दुनिया में अपना झंडा बुलंद करेगा लेकिन धरातल में हकीकत क्या है जिस देश में 80 लाख परिवार 5 किलो अनाज पर निर्भर हो जिस देश में पीने का पानी के लिए हाहाकार मज गया हो जिस देश में बिजली सुविधा तक निर्वात गति से नहीं मिल रही हो या ट्रेन तक रद्द कर दी जाती हो तब उस देश में तीसरी इकोनॉमी को लेकर प्रधानमंत्री ने जो सपना देखा है क्या उसके लिए उन्हें बधाई दे दिया जाए इस यूनिसेफ की रिपोर्ट आने के बाद बधाई दे दिया जाए आप खुद तय करें
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