मंगलवार, 31 मार्च 2026

याद है वर्दी वाली खलनायिका


 याद है वर्दी वाली खलनायिका 

यह है वेद मती दरियो वर्दीधारी इनकी वर्दी की धमक अपराधियों पर कितनी है यह कहना कठिन है लेकिन इनके खिलाफ पीड़ित ही प्रताड़ित थाने में रिपोर्ट करने के लिए आने वालो को ही धमकाने में बहुत मजा आता है राजधानी के इकलौते महिला थाना के प्रभारी थी तब  इनके सामने अच्छे अच्छों की गिग्गी बन जाती और दहेज प्रताड़ित द्वारा वसूली का नया रिकॉर्ड कायम करने की भी चर्चा रही और यही नहीं इनके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा मामले थे और घेरा घारी करके  जब एसीबी ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया तो इनकी ठसक देखने लायक थी ऐसा नहीं है कि एसीबी ने सिर्फ इस महिला वर्दीधारी जो प्रताड़ित लोगों के लिए खलनायिका बन चुकी थी को ही गिरफ्तार किया बल्कि धमतरी जिले में भी एसीबी ने कारवाही करके तहसीलदार को पकड़ा हमने विस्तार से बताया कि किस तरीके से इसके पहले एसीबी ने भागीरथ खांडे को गिरफ्तार किया था जो एसडीएम थे अब तक के सबसे बड़े अधिकारी को चपेट में लिया था एसीबी ने लेकिन वेद मती दरियों की अपनी कहानी है राजधानी के इकलौते महिला थाना के इस प्रभारी रही  के खेल को आप सुनेंगे तो चौक जाएंगे कि किस तरीके से जो पीड़ित पक्ष उन्हीं से यह पैसा वसूल की थी और कहा तो यहां तक जाता है कि यह प्रताड़ित पक्ष से यानी जो प्रताड़ित करने वाले हैं या जो अपराधी पक्ष है उनसे सेटिंग कर लेती थी और यह खेल बड़े लंबे समय से चल रहा था लगातार एसीबी को शिकायत मिल रही थी लेकिन और ऐसा नहीं है कि इसकी खबर जिले के अफसर या नेताओं को नहीं थी कई नेता भी इसको अपनी तरह से दरियो से अपने हित के काम के लिए उपयोग भी करते थे कहा तो यहां तक जाता है कि मंत्री तक इनकी पकड़ थी इसमें कितनी सच्चाई हम नहीं कह सकते लेकिन जिस तरीके से उसके खिलाफ लगातार आरोप लग रहे थे मीडिया में भी खबरें छप रही थी कि महिला थाने में किस तरह की भर्रा साही चल रही है उसके बाद भी पुलिस कप्तान इसे नहीं हटा रहे थे तो क्या उनका भी संरक्षण था या राजनीतिक दबाव की वजह से पुलिस कप्तान कुछ नहीं कर पा रहे थे यह एक अलग कहानी है लेकिन मैडम दरियो के नाम से ना केवल महिला थाना आने वाले थर थर कापते थे चाहे वे रिपोर्ट लिखाने ही क्यों ना आए हो और महिला परामर्श केंद्र जहां घरेलू झगड़े को निपटाया जाता है वहां भी इनकी धमक जबरदस्त ी कहा जाता है कि परामर्श केंद्र में जो महिला परामर्श वाली हैं जो महिलाओं को परामर्श देती हैं घरेलू विवाद निपटा हैं ऐसे लोगों में भी इनकी धमक थी और उनकी रिपोर्ट के विपरीत जाकर काम करती थी और वे महिला परामर्श में बैठने वाली महिलाएं समाजसेवी का चुप हो जाती थी क्योंकि इनकी अपनी धमक थी कहा जाता है कि मोआ की एक पीड़ित दहेज प्रतारक महिला ने एसीबी से शिकायत की और इस बात के लिए तैयार हो गई कि हां रिश्वत की राशि को लेकर वह एबी के कार्यशैली को अपना लेगी और इसी तरह से जब प्रीति बंजारे पैसा लेकर पहुंची तो एसीबी की टीम ने वेद मती दरियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया 

कहना बेहद कठिन है क्योंकि इस दौर में राजनीतिक पहुंचने यही सब तो किया तब जो धमतरी में गिरफ्तार हुए हैं एसीबी की टीम ने जिसे गिरफ्तार किया है वे तहसीलदार है कीर सागर बघेल यही नाम है उनका एक किसान से नामांतरण को लेकर उन्होंने रिश्वत मांगी थी किसान बहुत गिड़गिड़ा है इनके सामने लेकिन वे साफ कह दिए थे कि पैसे के बगैर कोई काम नहीं होगा और यही वजह है कि उस किसान ने त्रस्त होकर एसीबी में शिकायत की थी और एसीबी ने पूरी टीम के साथ इस तहसीलदार बघेल को रंगे हाथों की रफ्तार की हमने आपको बताया था कि किस तरीके से दो हफ्ते पहले ही सूरजपुर क्षेत्र में एसडीएम भागीरथी खांडे को एसीबी की टीम ने पकड़ा था और खुद तो वे पकड़ाई अपने साथ वे बाबू चपरासी सबको ले डूबे थे देखना है कि इस मामले में क्या कुछ होता है क्योंकि जिस तेजी के साथ सरकार बद है उसी तेजी के साथ भ्रष्टाचार के मामले लगातार आ रहे हैं और इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मुख्यमंत्री के जनदर्शन में पहुंचने वाले ज्यादातर लोग इसी तरीके से प्रताड़ित लोग हैं शासन प्रशासन से प्रताड़ित लोगों की संख्या बड़ी बढ़ते जा रही है और मुख्यमंत्री इलाज के लिए पैसा देकर ट्राई साइकिल देकर वाहवाही लूटने में लगे हैं कि जन दर्शन में पहुंचने वालों की तकलीफें दूर की जा रही है लेकिन हकीकत तो यह है कि जिस तरीके से राजनैतिक हस्तक्षेप के साथ भ्रष्टाचार ही नहीं अफसरों की मनमानी भी बड़ी है उससे आम लोगों की तकलीफ बढ़ चुकी है देखना है कि इन तमाम मामलों में जो मुख्यमंत्री जनदर्शन में भी शिकायत लेकर आ रहे हैं उन पर किस तरह के कारवाई होती है !

Vidio देखें 


https://youtu.be/T-xppzHlF7k?si=U3QhOp0znCBkFM7P

सोमवार, 30 मार्च 2026

जब चौधरी ने बताया था दो करोड़ को चौबीस करोड़ बनाना

जब चौधरी ने बताया था दो करोड़ को चौबीस करोड़ बनाना 


देश के गृहमंत्री अमित शाह के लाड़ले और छत्तीसगढ़ प्रदेश के वित्त मंत्री ओ पी चौधरी का पैसा कमाने का अपना फंडा है,  2 करोड़ रुपया को  करोड़ रुप बना लेते है, और हो सकता है कि अमित शाह के लाड़ले ओपी चौधरी इसलिए बने हैं क्योंकि उनके पास पैसा कमाने का सभी तरह का फंडा है कहा जाए तो भी गलत नहीं होगा

 पिछले दिनों साला उत्सव के कार्यक्रम में जब ओपी चौधरी ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बताया बच्चों को या सिखाया कि किस तरीके से उन्होंने दो करोड़ रुपए को 24 करोड़ बना दिया । शाला उत्सव के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी ओपी चौधरी की बात सुनकर ताली बजाते नजर आए दरअसल छत्तीसगढ़ में हर साल  शाला  प्रवेश उत्सव का कार्यक्रम चलता है जगह-जगह प्राय सभी स्कूलों में जनप्रतिनिधि विधायक मंत्री इसी तरह के कार्यक्रम में व्यस्त रहते  है बच्चों का स्वागत कर रहे हैं सम्मान कर रहे हैं ऐसे ही एक कार्यक्रम बगीचा में हुआ जो मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है और यहां ओपी चौधरी ने किस तरीके से पैसा कमाने का फंडा बताया वह बच्चों को क्या सीखना चाहिए यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए है क्योंकि ओपी चौधरी ने बताया कि बगैर शिक्षकों के या शिक्षकों के अभाव में उन्होंने पढ़ाई को  प्राथमिकता देते हुए आईएएस बने यह ओपी चौधरी बता रहे थे प्रदेश सरकार के सबसे होशियार मंत्री माने जाने वाले ओपी चौधरी ने जब बताया कि किस तरीके से शिक्षकों के अभाव में वे पढ़ाई कर रहे थे वे बच्चों से कह रहे थे कि पढ़ाई शिक्षा ही जीवन में काम आता है क्योंकि राइस मिल लगाने से लेकर दूसरे तमाम धंधे के लिए पैसा चाहिए अगर लाइफ में आप कुछ करना चाहता जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता हो तो शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाओ आप क्रेसर खोले जाया तो दिक्कत आ सकते है राइस मिल खोले जाया तो पैसा नहीं है तो घर में नहीं खोल सका आज पेट्रोल पंप चालू कर किया तो एक सामान्य घर के लड़का नहीं कर सके लेकिन पढ़ाई आप मन जरूर कर सकते हो और पढ़ाई के माध्यम से जीवन लापन के बदल सका था लेकिन शिक्षा के लिए पैसा नहीं पैसे की जरूरत नहीं होती केवल मन लगाने की जरूरत होती है और उन्होंने बताया कि जब वे 2018 का चुनाव हार गए तो उन्होंने किस तरीके से अपने दोस्तों से उधारी लेकर शेयर मार्केट का गहन अध्ययन करके दो करोड़ रुपए को 24 करोड़ रुपए बनाया एक तरह से कहा जाए तो शेयर मार्केट को लोग आम बोलचाल की भाषा में सट्टा बाजार भी कहते हैं वहां पैसा लगाकर ओपी चौधरी ने कई गुना किया अपने पैसे को उधारी उन्होंने चुकाया नहीं चुकाया इस पर उन्होंने कोई बात नहीं की लेकिन यह गजब का फंडा है पैसा कमाने का जो बच्चों को बताया जा रहा था कि शेयर मार्केट में पैसा लगाकर कई गुना ज्यादा पैसा कमाया जा सकता है।

जब कलेक्ट्री की नौकरी छोड़ दे रहे तो आदमी मन सोचे कैसे जीवन यापन करी का करी कैसे करी इकोनॉमिक समय मो थोड़ ठीक ठाक पकड़ रही तो मैं स्टॉक मार्केट के पढ़ाई करो 20089 से देखो थोड़ बहुत का का का होते करके तो जब मैं नौकरी छोड़ दे तो स्टॉक मार्केट के बहुत गहनता के साथ अध्ययन करें और दो करोड़ रुपया में उधारी ले अलग अलग दोस्त मंे मिला जुला के और चार साल में सरस्वती मां के ही कृपा से दो करोड़ रुप 24 करोड़ रुपया बना दो करोड़ रुप 24 करोड़ रुप बना हालाकि ओपी चौधरी की चौधरा हट को लेकर कई तरह की चर्चा है और कई लोग तो उन्हें सुपर सीएम भी कहते हैं खासकर आईएएस आईपीएस लाबी में ओपी चौधरी की धमक है और कहा तो यहां तक जाता है कि ओपी चौधरी ही तमाम प्रशासन को चलाते हैं वि देव साय को मुख्यमंत्री बनाया है मोदी शाह ने लेकिन ओपी चौधरी को तो चुनाव प्रचार के दौरान ही अमित शाह ने बड़ा आदमी बनाने की बात कह दी थी तब शायद अमित शाह को यह बात मालूम नहीं रहा होगा कि ओपी चौधरी तो बड़ा आदमी बन चुके हैं उन्होंने शेयर मार्केट से दो करोड़ को 24 करोड़ बना दिया अब देखना है कि इस बयान को लेकर ओपी चौधरी का जो वीडियो है वह खूब वायरल हो रहा है देखना है कि आने वाले दिनों में स्कूली बच्चे इस पैसा कमाने के फंडे को किस तरीके से लेते हैं!

वीडियो देखे 


https://youtu.be/mnR6Vhd0qro?si=I5_A6zPiWKL7AYcC

रविवार, 29 मार्च 2026

अब इस कोल घोटाले पर बिफरे ननकीराम, सीबीआई जाँच की माँग

अब इस कोल घोटाले पर बिफरे ननकीराम, सीबीआई जाँच की माँग 


 माल ढुलाई के लिए यात्रियों को परेशान करने वाले रेल मंत्रालय क्या अब कोयला घोटाले में शामिल हो गया है यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस तरीके से छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेनों को रद्द किया जा रहा है उसे ले कर लोगों में बेहद आक्रोश है लेकिन 10 सीट भारतीय जनता पार्टी को देने के बाद भी यहां के सांसदों ने इस मामले में अपने मुंह में दही जमा रखा है कहा जाए तो गलत नहीं होगा 

पिछले छ महीने बल्कि उससे अधिक दिनों से यहां के जो यात्री है जो रेलवे में सफर करते हैं वह परेशान है लेकिन अब कल जो मामला सामने आया है कि कोयला ढुलाई के नाम पर किस तरीके से कोल माफिया सक्रिय हैं और इस पूरे खेल में ना केवल रेल प्रशासन एचएससीएल बल्कि राज सरकार के भी कई अधिकारियों और नेताओं के शामिल होने की खबर है 

इस मामले को लेकर पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कवर ने रमन सरकार में गृह मंत्री थे और उन्होंने अपनी ईमानदारी के चलते रमन सरकार के एसपी और कलेक्टर को वसूली बाज और कमीशन खोर ही नहीं कहा था बल्कि 10 हजार में थाना बिकने की भी बात भरी विधानसभा में कही थी और अब उसी ननकी राम कवर ने कोयला घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी से मुलाकात करके पूरे मामले की जानकारी देते हुए सीबीआई जांच की मांग की है और उनके इस मांग से प्रदेश सरकार के कई अफ़सर और नेताओं में भी हड़कंप मचा हुआ है कहा जाए तो गलत नहीं होगा

 दरअसल मामला सरबिया स्टेशन का है जहां खदान से निकलने वाली कोयले को मालगाड़ी के जरिए ढुलाई करते हुए पहुंचाया जाता है और ज्यादा माल यानी कोयला ज्यादा लोड कर देने की वजह से डंप किया जाता है एडजस्टमेंट किया जाता है समायोजन किया जाता है यह रेलवे का दावा है लेकिन इस डंप कोयले की तलाई वजन या फिर यह कहां जा रहा है किसी को नहीं पता चलता और कहा जा रहा है कि इस डंप कोयले को फिर डंपर के माध्यम से इधर उधर पहुंचाया जाता है और इसी में पूरा खेल होता है इस मामले की जांच लंबे समय से ननकी राम कवर करते रहे और उन्होंने इस मामले को लेकर वहां धरना भी दिया था और कहा जाता है उसके धरने के बाद रेलवे प्रशासन ने जांच के आदेश तो दिए लेकिन अब सरबिया स्टेशन में माल डंप होना बंद हो गया लेकिन ननकी राम कवर ने सवाल उठाया है कि यदि सब कुछ सही था तो फिर डंप क्यों बंद किया गया क्यों पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल रही यानी इसमें बहुत लंबा चौड़ा घोटाला और इस मामले को लेकर कल ननकी राम कवर ने जी किशन रेड्डी से मुलाकात भी की लाखों मेट्रिक टन कोयले की हेराफेरी और यही नहीं इस सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि ज्यादा लोड लादने की वजह से रेलवे ट्रैक भी खराब हो रहे हैं रेलवे को भी नुकसान हो रहा है और किसकिस तरह के नुकसान हो रहे ये सब सीबीआई जांच में पता चलेगा लेकिन इस मामले को लेकर नंद की राम कवर ने साफ तौर पर जी किशन रेड्डी यानी केंद्री मंत्री से कहा कि इसकी सीबीआई जांच की जाए उन्होंने जितने भी मामले उठाए हैं चाहे इसके पहले कोयला घोटाला हो शराब घोटाला हो या पीएससी परीक्षा घोटाला हो सब में कार्रवाई चल रही है और कई अफसर जेल की सलाखों में है कई नेता जेल की सलाखों में है कई दलाल से जेल की सलाखों में है इसलिए इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए क्योंकि इस पूरे खेल में ना केवल रेल मंत्रालय बल्कि कोयला उत्पादन कंपनी और यही नहीं राज्य सरकार के कुछ अफसर भी शामिल हैं यह ननकी राम कवर का दावा है देखना है कि इस मामले को लेकर किस तरह की जांच शुरू होती है लेकिन ननकी राम कवर के सीधे केंद्रीय मंत्री से मिल लेने को लेकर भी पार्टी में हलचल है।

वीडियो देखें 


https://youtu.be/FL7uDUlMjQY?si=zT6txdNU8YWhkqKD

शनिवार, 28 मार्च 2026

जब धर्मजीत ने गधा गंवार कहा

 जब धर्मजीत ने गधा गंवार कहा 


सत्ता का नशा जब सर चढ़कर बोलता है तो वह किसी बात की परवाह नहीं करता ना तो उसकी जुबान पर ही कोई कंट्रोल रहता है और ना ही तेवर पे और शायद यही वजह है कि जल जीवन मिशन में घपले घोटाले को लेकर विधानसभा में जब चर्चा चल रही थी तब भारतीय जनता पार्टी के विधायक धर्म जीत सिंह ने ठेकेदारों को लेकर ऐसी बात कह दी जो हैरानी की बात है चौकाने वाली बात है 

उन्होंने कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के आ कहां कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के सब गए उनके भीतर का ठाकुर इसलिए जाग गया कि कितने सालों के बाद उनकी पार्टी को सत्ता मिली धर्मजीत सिंह कभी कांग्रेस में हुआ करते थे और उसके बाद जब जनता कांग्रेस बनी यानी जोगी कांग्रेस की नीव रखी गई तो धर्मजीत सिंह जोगी कांग्रेस चले गए लेकिन अमित जोगी से उनकी पटरी नहीं बैठी तो वे भारतीय जनता पार्टी में आ गए और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें टिकट दी वे चुनाव भी जीत गए काफी सीनियर है लेकिन है तो ठाकुर तब छत्तीसगढ़ विधानसभा में उन्होंने क्या कहा यह पहले विस्तार से सुन लीजिए 

कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के आ गए हैं आदरणीय अध्यक्ष जी इनके कारण ही पूरा जल जीवन मिशन लेप्स पोजीशन में है  सिर्फ बिलासपुर की बात नहीं कह रहा हूं इस सदन में  90 विधानसभा क्षेत्र में यह योजना दम तोड़ रही है उसमें दम देने का काम आपसे निवेदन है कि आप करिए करोड़ों रुपया की लागत है अगर उसम थोड़ा और पैसा देकर के उसको लागू हो जाए तो गांव गांव में हम लोग जाते हैं दौरे में लोग क्या करेंगे हम लोग क्या कर सकते हैं  घपले घोटाले में पूरा सिस्टम शामिल है क्या अधिकारी क्या मंत्री क्या ठेकेदार क्या बाबू क्या चपरासी सब कुछ शामिल है लेकिन गुस्सा धर्मजीत सिंह का है तो अपनी सरकार के मंत्री की बजाय या अधिकारियों की बजाय उन ठेकेदारों कर कहां के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के सब गए हैं इसम यह नहीं है कि धर्मजीत सिंह किस नेचर के व्यक्ति हैं वैसे तो बड़े सौम्य माने जाते हैं चेहरा मोहरा भी बड़ा शानदार है 

लेकिन भाषा क्या इस तरह की होनी चाहिए किसी के लिए भी क्या कोई भी ठेकेदार बन जाता है जल जीवन मिशन में निश्चित रूप से जबरदस्त घपला हुआ है अब तक नौ इंजीनियर निलंबित किए जा चुके हैं कई ठेकेदारों को भी सस्पेंड कर दिया है या उनके काम को रोक दिया है उनसे काम वापस ले लिया गया प्राय सभी जिले में सर्वाधिक तो जो शिकायत सामने आई है वह बिलासपुर संभाग में है तो धमतरी जिले में भी जमकर शिकायत हुई है कहा जा रहा है कि अधिकारियों को पैसा देकर ठेकेदारों ने काम पूर्ण होने का सर्टिफिकेट तक ले लिया है लेकिन धरातल में काम शुरू ही नहीं हुआ कई जगह तो काम हुए कई जगह तो पानी की सप्लाई लोगों को मिला लेकिन 15 दिन बाद बंद कर दिया गया कई जगह तो पाइपलाइन ही नहीं बची यानी आधे अधूरे काम को पूर्ण दिखाकर जिस तरीके से ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया है उसे लेकर विधायकों ने सवाल पूछे तो मंत्री का जवाब भी हैरान कर देने वाला था गोलमोल जवाब दे रहे थे मंत्री सवाल कुछ और पूछे जा रहे थे जवाब कुछ और दिए जा रहे थे यहां तक कि जो ज्यादा राशि ठेकेदारों को दी गई है उसे लेकर भी जब सवाल पूछा गया तो ना तो ठेकेदारों पर कारवाई की बात की गई और ना ही उन राशियों को वसूलने की बात की गई यहां तक कि उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी क्या कारवाई होगी कहना मुश्किल है 

लेकिन धर्मजीत सिंह को गुस्सा उन अधिकारियों पर नहीं है धर्मजीत सिंह को गुस्सा उस सिस्टम पर नहीं है गुस्सा है उन ठेकेदारों पर जो कमाने के लिए ही ठेकेदारी कर रहे हैं तब सवाल यह है कि क्या सत्ता का नशा इस तरीके से सिर चढ़कर बोलता है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/nxStEleO5Bw?si=HaogPSqQ7c5j_OCv

शुक्रवार, 27 मार्च 2026

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम 


 क्या मोदी सत्ता ने केंद्र सरकार के सभी विभागों को भ्रष्टाचार करने की खुले आम छूट दे रखी है लगातार खबर आ रही है चाहे रेलवे क्यों ना हो वंदे भारत एक्सप्रेस की छत से पानी टपकने की खबर आ रही है तो दूसरे तरफ पूलों के लगातार ढहने की खबर दिल्ली के प्रगति मैदान की भी तो खबर हैं तो दूसरी तरफ जिस तरीके से  कैग ने रिपोर्ट दी थी चाहे आयुष्मान भारत कार्ड योजना हो या फिर ा स करोड़ रुपए में एक किलोमीटर सड़क निर्माण की बात हो सब तरफ भ्रष्टाचार की खबरें आ रही है लेकिन अब जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से खबर रही है वह भी हैरान कर देने वाली रायपुर स्थित एम्स  अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान  वहां से जो टेंडर घोटाले की खबर आ रही है वह हैरान कर देने वाली है कि किस तरीके से दिल्ली से आए स्टाफ ने अपने चहेते ठेकेदार को टेंडर देने के लिए किस किस तरीके का खेल नहीं खेला सब कुछ कागजों में कैद है और आरटीआई के माध्यम से और भी जानकारी इकट्ठी की जा रही है लेकिन जो प्रारंभिक जानकारी मिली है वह साफ संकेत दे रही है कि चहते ठेकेदार को टेंडर देने ठेका देने मनमाने ढंग से घपले बाजी की गई है घोटाले की गई है 

इस घोटाले को लेकर जो खबर आ रही है व हैरान कर देने वाली इसलिए भी है क्योंकि रायपुर एम्स जो कई कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के आगमन के कार्यक्रम भी होते हैं मंत्रियों के कार्यक्रम होते इसके लिए इवेंट कंपनियों को काम दिया जाता है ऐसा ही एक काम का टेंडर निकला था जिसे 30 मई को खोला जाना था इस टेंडर में तीन कंपनियों ने भाग लिया था जिसम से एक कंपनी को यह टेंडर मिल गया था लेकिन वह कंपनी चहेता कंपनी नहीं था इसलिए यह टेंडर रदद कर दिया गया कि इन कंपलीट फाइनेंस की होने की वजह से 

जबकि इसे जिस तरह के रेट  आए थे या जो ए कंपनी थी व य 30 लाख में काम करने को तैयार थी तो जो दूसरी कंपनिया थी वह कोई 40 लाख तो कोई 60 लाख तक का टेंडर भरा था ऐसे में उस फाइनेंशियल कीट के जो खाने छूटे हुए थे उसे भरकर आसानी से टेंडर जारी किया जा सकता था लेकिन वर्क आर्डर नहीं दिया गया और तमाम टेंडर निरस्त करके फिर से टेंडर जारी कर दिया गया यह पूरा ऑनलाइन प्रक्रिया है लेकिन किस तरीके से इसमें भी खेल होता है यह समझिए जब दूसरी बार टेंडर जारी हुआ और 26 तारीख को उसे 26 जून को इसे खोला जाना था तब छ कंपनियो ने इस में हिस्सा लिया कंपने प्रजेंटेशन नहीं दिया तो उनका फम रिजेक्ट कर दिया गया अब सिर्फ दो कंपनिया बची थी एक री दूसरा और इन दोनों कंपनियों का टेंडर खोला जाना था और जिसका एल वन होता उसे टेंडर दे दिया जाना था लेकिन आश्चर्यजनक रूप से  टेंडर खोला ही नहीं क्योंकि  टेंडर देना था यह शिकायत भी हुई है क्योंकि जिस बना पर मेरी टेडर किया नहीं खोला गया है व पहले जब टेंडर हुआ था उसम प्रेजेंटेशन व दे चुके थे और यह कर दिया गया को की आपका जो प्रेजेंटेशन है अप टू द मार्क पर नहीं है जबक इसी प्रेजेंटेशन पर पहली बार टेंडर उसे मिल चुका था जिसे निरस्त किया गया था ऐसी परिस्थिति में जब हमारी टीम ने इस शिकायत पर जब अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो उपलब्ध नहीं थे लेकिन जो जानकारी मिली है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है क्योंकि टेंडर की शर्तो में एक महत्वपूर्ण शर्त यह था कि टर्न ओवर एक करोड़  होना चाहिए लेकिन जिस कंपनी को यह टेंडर जारी कर दिया गया उसका टर्न ओवर 50 लाख से भी ज्यादा नहीं है और कारण यह बताया गया क्योंकि वह  एमएसएनई कंपनी है इसलिए उसे छूट दी जा रही है और यही बात यदि टेंडर जारी करते समय कर दी जाती कि एमएसएमई  सेक्टर वालो को छूट दी जाएगी तो यकीन मानिए कि कई लोग स्टैंडर में भाग लेते हैं यानी एक करोड़ टन की शर्त लगाकर एमएसए के कई कंपनियों को रोक दिया गया और एमएस की छूट के नाम पर अपने चहते कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले में जबरदस्त ढंग से खेल हुआ है और यही नहीं अब तो जो कंपनिया इवेंट का काम करती है फ्लावर लगाने का टेंट लगाने का लगाने का व कंपनिया आशंकित इसलिए भी है क्योंकि एम्स में हर साल करोड़ अरब रुपए का काम निकलता है तो एक शुरुआत थी इस साल की उसमें ही यदि इस तरीके की घपले बाजी हो रही है तो आने वाले दिनों में क्या कुछ होगा कहना मुश्किल है देखना है कि इस मामले को लेकर अब किस तरीके की कारवाई होगी क्योंकि कहा तो यहां तक जा रहा है कि कुछ पार्टी इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाने वाली है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/uXzRZRUhjLw?si=_zis7qUm9KlXBTBE

प्रदेश में क्यो बदतर हो रही क़ानून व्यवस्था

 प्रदेश में क्यो बदतर हो रही क़ानून व्यवस्था 


क्या छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार पूरी तरीके से फेल हो चुकी है और उसके सामने इस प्रदेश के कानून व्यवस्था को संभालने का कोई रास्ता नहीं बचा है या फिर प्रदेश की सरकार को किसानों की भी चिंता नहीं है , हालत बदतर होते जा रहा है महंगाई को जमा खोर ने और बढ़ा दिया है जमकर जमाखोरी हो रही है छत्तीसगढ़ में और बेरोजगारी का यह आलम है कि एक वैकेंसी निकलती है और लाखों बच्चे टूट पड़ते हैं उसकी नौकरी पाने के लिए तब ऐसी परिस्थिति में डबल इंजन की सरकार कर क्या रही है यह बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कि अपनी पूरी कैबिनेट के साथ विष्णु देव साय सरकार  रामलला के दर्शन करने गए थे, वे अपने साथ बेर भी ले गए हैं सबरी का बेर बहुत चर्चित रहा है पूरे राम कथा में उस बेर को लेकर गए हैं शिवरी नारायण से तो विष्णु भोग चाव यह भी छत्तीसगढ़ की एक अपनी पहचान है कोंसा वस्त्र कारी लड्डू अनरसा और सीताफल सब कुछ लेकर गए थे,रामलला को खुश करने के लिए लेकिन क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि जब वह रामलला के दर्शन की रवानगी कर रही थी तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ की राजधानी में सरेआम गोलीबारी हो रही थी हवाई फायर किए गए हैं कार को गोली लगी है तब कानून व्यवस्था की स्थिति किस हद तक बदतर है और किस तरीके से लोगों में पुलिस का डर खत्म हो गया है यह लगातार देखने को मिल रहा है लगातार हत्याएं हो रही है सवाल सिर्फ बलौदा बाजार के उस घटना का नहीं है जिसमें पुलिस कप्तान के कार्यालय को जला दिया गया और कलेक्टोरेट में तोड़फोड़ किया गया उसके बाद पुलिस पकड़ धकड़ कर रही है कहा जा रहा है कि जो लोग इस घटना में शामिल नहीं थे उनकी भी गिरफ्तारी हो रही है भीम आर्मी भी निशाने में है तो कांग्रेस के नेता भी निशाने में है लेकिन यदि प्रदेश भर में लगातार हत्याएं हो रही है याद कीजिए कि किस तरीके से सरेआम एक लड़की को बीच बाजार में चाकू मार दिया गया था सरगुजा क्षेत्र में तो दूसरी तरफ जगदलपुर में जो घटना हुई है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है सरकार भले ही दुनिया भर का दावा कर ले लेकिन महंगाई और बेरोजगारी ने आम लोगों का जीवन नार की बना दिया और नशे के कारोबार में जिस तरीके से सरकार भी लिप्त हो गई है जिस तरीके से अवैध शराब बिक रहे हैं जिस तरीके से नशे की गोलियां राजधानी के कई क्षेत्रों में बिक रही है उसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार केवल पैसा पैसा पैसा कर रही है क्योंकि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी साफ कह दिया है कि योजनाओं में पैसे खर्च हो रहे हैं रोज बेरोजगार युवक पकौड़ा तलने यह सीधे नहीं कहा है लेकिन इसी तरह का आशा है उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि वैकेंसी नहीं निकलेगी तब ऐसी परिस्थिति में जब अपराध पढ़ रहे हैं राजधानी में ही लगातार नशे के कारोबार फल फूल रहे हैं जुआ सट्टा का जोर है और खुलेआम गोलीबारी हो रही हो तब सवाल यह है कि आखिर बस्तर में जो जगदलपुर में जो दोहरा हत्याकांड हुआ उसका सच क्या है क्या उसके पीछे महंगाई बड़ी वजह है कहा भी जा रहा है कि जिस युवक ने अपने मां और बड़े भाई की हत्या की वह पूरी तरीके से कर्ज में डूबा था उनके घर में आए दिन पैसे को लेकर विवाद होता था और घर चलाना मुश्किल होता जा रहा था एक छोटी सी किराने की दुकान थी आप सोच रहे होंगे कि अपनी मां और भाई की हत्या करते वक्त उस हत्यारे भाई का हाथ क्या नहीं खापा होगा लेकिन क्या महंगाई और कर्जे का बोझ इतना बड़ा हो चला था कि उसके हाथ अपनी मां और भाई के गर्दन तक जा पहुंचा सवाल सवाल आप इस दौर में कुछ भी उठा ले लेकिन यदि सब कुछ धर्म के आधार पर ही राजनीति को हका जाएगा तो फिर आम आदमी की तकलीफ कैसे दूर होगी यह सबसे बड़ा सवाल है जिस तरीके से तेली बांधा क्षेत्र राजधानी के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है भीड़भाड़ वाले इलाके में सरेआम कोयला कारोबारी पर गोली दागी गई हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन क्या यह कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा नहीं करता है आप खुद सोचिए कि एक तरफ कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर है किसानों की हालत खराब है और दूसरी तरफ यदि सत्ता सरकारी खर्चे से यदि पूरे कैबिनेट के साथ राम लला का दर्शन करने जा रहे हैं तो यह किस तरह की राजनीति की जा रही है आप खुद सोचिए !

Video देखें 

https://youtu.be/C42uGXjDaB4?si=pib-0Tiw-v1lahmD

बुधवार, 25 मार्च 2026

आख़िर कौन चला रहा कृषि विभाग

आख़िर कौन चला रहा कृषि विभाग 


 छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार के मंत्रियों की करतूत एकएक करके बाहर आने लगी है हमने आपको बताया कि किस तरीके से सीजीपीएससी घोटाले में ओपी चौधरी की भूमिका सामने आई है तो शिक्षा विभाग के घोटाले को लेकर कई तरह के सवाल उठे हैं ट्रांसफर पोस्टिंग पदोन्नति जिसमें देखिए आप गड़बड़ छाला है लेकिन आज हम बात कर रहे हैं कृषि विभाग का क्योंकि अब मानसून छत्तीसगढ़ पहुंच चुका है और यहां के किसान खेती किसानी में जूट गए हैं धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की अपनी अहमियत है कृषि को लेकर और विभाग को लेकर शायद यही वजह है कि एक समय में डॉक्टर रमन सिंह ने इसके लिए अलग से बजट तक की बात कर दी थी लेकिन अब इस दौर में किस तरीके का खेल यहां चल रहा है कहना मुश्किल है कृषि विभाग आखिर है किसके हवाले कहने को तो इसके मंत्री राम विचार नेताम को बनाया गया है लेकिन राम विचार नेता काम को लेकर कई तरह के सवाल हमेशा ही उठते रहे हैं खासकर इंदिरा प्रदर्शनी बैंक घोटाले में राम विचार ताम का नाम सामने आया था नारको टेस्ट की कथित सीडी में जिस तरीके से पैसे की लेनदेन को लेकर बातें सामने आई थी उसमें राम विचार नेताम का नाम भी सामने था इसके अलावा भी उनके गृह मंत्री रहते जब रमन सरकार में वे गृह मंत्री थे तब भी उन के खेल को लेकर सवाल उठते रहे लेकिन इस बार विष्णु देव साय की सरकार ने उन्हें कृषि विभाग दिया है सबसे बड़ा बजट वाला विभाग कहा जाए तो गलत नहीं होगा और इस विभाग में किसका खेल चल रहा है यह विभाग आखिर चला कौन रहा है क्या कृषि मंत्री राम विचार नेताम चला रहे हैं या आईएएस जो बैठे हैं भुनेश यादव वे चला रहे हैं राजस्थान से आते हैं भुनेश यादव और उनकी एक अपनी कहानी है कि किस तरीके से वे बिजनेस करते आईएएस बने दूसरे अटें में उन्होंने पास किया था लेकिन सत्ता बदलते हु उन्हें एपीओ में रख दिया गया था कोई विभाग नहीं दिया गया था फिर कई तरह के विभाग मिले भूपेश बघेल सरकार के नाक के बाल भी कहे जाते थे भूने यादव हालांकि उन पर अभी तक घपले घोटाले के कोई चार्ज नहीं लगे हैं लेकिन जिस तरीके का रवैया चल रहा है कृषि विभाग में उसमें भुनेश यादव की भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है तब क्या कोई राकेश अग्रवाल नाम का व्यक्ति चला रहा है कृषि यह बेहद ही गंभीर सवाल है क्योंकि जो मीडिया रिपोर्ट आ रही है उसमें सीधे अग्रवाल का नाम तो सामने नहीं आ रहा है हमारी टीम ने जब पता किया कि मीडिया रिपोर्ट में जिस लक्ष्मी पुत्र की बात की जा रही है या जिस दलाल की बात की जा रही है वह है कौन तब उसमें कुछ नाम सामने आए और सबसे बड़े नाम जो सामने आए वह राकेश अग्रवाल का नाम है तो क्या कृषि विभाग को राकेश अग्रवाल के सुपुर्द कर दिया गया यह बेहद गंभीर सवाल हालांकि हमने राकेश अग्रवाल से बात करने की कोशिश की लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे इस पूरे मामले को लेकर लेकिन कहा जा रहा है कि पूरा दफ्तर वहीं से चल रहा है तब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बीच निगम में चल क्या रहा है टेंडर को लेकर गड़बड़ियों की खबर तो लगातार आ रही है यही नहीं किसानों को दिए जाने वाली योजनाओं में भी जो ठेका दिया जाता है उसे लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि किसान त्रस्त है नकली बीज नकली खाद का मामला तो पहले भी उठता रहा है लेकिन सप्लाई के काम में जिस तरह की भर्रा साही की खबरें सामने आ रही है या मीडिया रिपोर्ट सामने आ रहे हैं कि किस तरीके का खेल हो रहा है वहां पहले कमीशन दो और कमीशन भी कितना 40 फीदी कमी की बात सामने आ रही है जो प्रदेश में किसी भी विभाग में सबसे ज्यादा बताया जा रहा है हालांकि कमीशन के मामले को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग हो या नगर निगम कई तरह के विभाग जो है वोह हमेशा ही चर्चा में रहे हैं पीएचई में जल जीवन मिशन को लेकर घोटाले की लगातार खबरें आ रही है कुछ इंजीनियरों को सस्पेंड भी किया गया हम इस पर विस्तार से फिर कभी चर्चा करेंगे लेकिन कृषि विभाग है किसके पास यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि जो खबरें आ रही हैं वह हैरान कर देने वाली है कि आखिर राम विचार नेताओ ने चुप्पी क्यों ओढ ली है या इन खबरों को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है यह भी समझ में नहीं आ रहा है बीज निगम से लेकर उद्यान की विभाग तक गड़बड़ झाला की जो खबरें आ रही है वह हैरान कर देने वाली है हम हमारे रिपोर्टर्स लगे हुए हैं इस पूरे मामले की पता साझी करने के लिए देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है !

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https://youtu.be/36X_nwujrko?si=IvoMnqz5Ift3g1Am

भाजपा विधायकों की वसूली बाजी

भाजपा विधायकों की वसूली बाजी 


 डबल इंजन की सरकार बने अभी दो साल ही पूरे  हुए हैं और पार्टी के विधायकों और कई पदाधिकारियों पर वसूली के आरोप लगने लगे हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में अभी तक ना तो संगठन कोई कारवाही कर रही है ना नोटिस दी है और ना ही सरकार की तरफ से ही कोई बयान आया है मामला सिर्फ शराब को लेकर नहीं है या अहाता को लेकर नहीं है या फिर कोयला घोटाले को लेकर नहीं है सवाल तो अब सीधे-सीधे मामले को दबाने के लिए वसूली का है और यह मामला कहीं और से नहीं साझा विधानसभा क्षेत्र के जो विधा पहली बार बने हैं गरीब विधायक के रूप में प्रचारित प्रसारित किया गया उनके द्वारा एक मामले को दबाने के लिए दो लाख रुपए वसूलने की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई है और इस मामले के सामने आते ही कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमकर हमला बोला है सरकार पर और कहा जा रहा है कि कई विधायकों के नाम है पंडरिया की विधायक भावना बोहरा पर तो तीन ट्रक खादी उतरवा लेने का आरोप लगाया गया इसके अलावा भी कई तरह के आरोप है भावना बोहरा को डॉक्टर रमन सिंह की रिश्तेदार बताई जाती है और पहली बार वे भी विधायक बनी है इसके अलावा भैयालाल राजवाड़े को लेकर स्वास्थ्य विभाग में वसूली की शिकायत भी किए जाने की चर्चा है तो कई पदाधिकारी हैं संगठन से जुड़े उनके खिलाफ भी इसी तरह की वसूली बाजी के मामले सामने आने लगे हैं मामला सिर्फ वसूली का नहीं है मामला तो धमकी चमकी का भी है याद होगा आपको कि किस तरीके से शुरुआती दौर में ही महतारी वंदन योजना का लाभ दिलाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने एक महिला को भला फुसलाकर बलात्कार तक कर दिया था रायगढ़ के जिला अध्यक्ष के खिलाफ किस तरह के मामले थे नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के पुत्र के खिलाफ किस तरह के मामले थे किसी से छिपा नहीं है लेकिन अब जिस तरीके से सत्ता में आने के बाद विधायकों के और संगठन के पदाधिकारियों पर आरोप लगने लगे हैं वसूली के वह हैरानी की बात तो है ही चिंता की भी बात क्योंकि मामला कई सारे हैं कहा जा रहा है सरगुजा क्षेत्र के दो विधायकों के खिलाफ शिकायत है तो बस्तर क्षेत्र के एक विधायक के खिलाफ शिकायत है यही नहीं रायपुर जिले के एक विधायक के खिलाफ तो उद्योगों में वसूली करने का मामला सामने आया है हम विस्तार से इन सारी घटनाओं को आपके सामने रखेंगे लेकिन एक बात तो हम बता देते हैं कि जिस तरीके से नव निर्वाचित विधायकों में आधा दर्जन विधायकों के नाम सामने आए हैं संगठन के भी लगभग चार पदाधिकारियों के नाम सामने आए हैं प्रवक्ता है एक उनके बारे में तो सर्व विधित है कहा जाता है कि उनके वसूली बाजी की वजह से पार्टी के नेता भी परेशान रहे हैं वे हर बार टिकट मांगने पहुंच जाते हैं महापौर की टिकट मांगने पहुंच जाते हैं कभी तो कभी विधायक की टिकट मांगने पहुंच जाते हैं लेकिन उनके खिलाफ जो शिकायतें हैं उनके इसी रवैया की वजह से अभी तक उन्हें केवल छोटे-मोटे चुनाव में ही टिकट दी गई है बड़े चुनाव से वंचित रखा गया है तो दूसरी तरफ ईश्वर साहू का मामला बड़ा होता जा रहा है और कहा जा रहा है कि इसे लेकर मामला विधानसभा में भी उठाने की तैयारी हालांकि ईश्वर साहू ने इस मामले को लेकर सफाई दी है लेकिन विधानसभा में य मामला तय है उठना और विधानसभा में तो भावना बोहरा के खिलाफ भी मामला उठाए जाने की चर्चा है कहा जा रहा है कि वहां जो पराजित प्रत्याशी है नीलकंठ वर्मा उन्होंने पिछले दिनों प्रदर्शन भी किया भावना बोरा के रहने को लेकर और खाद वाले मामले को लेकर तब ऐसी परिस्थिति में विष्णु देव साय सरकार या किरण देव जो प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष है वे क्या करते हैं हालांकि यह भी कहा जा रहा है किरण देव अब पद पर बने रहना नहीं चाहते हैं वे मंत्री बनना चाहते हैं लेकिन यह भाजपा है नया भाजपा है जहां सिर्फ मोदी शाह की चलती है और वे चाहेंगे वही मंत्री बनेंगे तब ऐसी परिस्थिति में कुछ होना!

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https://youtu.be/FDEL7LjZ7V8?si=2RH0ZsmkQ9MDZQeM

मंगलवार, 24 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी

 छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी 


नाम बदलने में माहिर विष्णु देव साय की सरकार यानी डबल इंजन की सरकार क्या अब छत्तीसगढ़ की पहचान भी मिटा देना चाहती है कई योजनाओं का नाम उन्होंने आते ही बदल दिया था जो भूपेश सरकार ने रखी थी और और अब जो काम किया जा रहा वह बेहद ही चौकाने वाला है यह चौकाने वाला इसलिए है क्योंकि इस योजना को भूपेश बघेल जब मुख्यमंत्री थे तब भी लाया गया था लेकिन मामला सिर्फ इसलिए रुका था क्योंकि नाम का संकट था केंद्र सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ हाट का नाम बदल दिया जाए और उसका नाम पीएम एकता माल कर दिया जाए और उसमें दूसरे राज्यों के हस्त शिल्प उत्पादकों को भी दुकान दिया जाए दूसरे राज्यों के हस्तशिल्प  को दुकान तो दिया ही जा रहा था लेकिन जो रायपुर की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ हाट जमीन से जुड़ा हुआ नाम है उसे आखिर विष्णुदेव साय क्यों बदल देना चाहती है क्या केंद्र की योजना से नाम भी बदलना जरूरी है यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस तरीके का खेल रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालन मंडल के कंधे पर रखकर किया गया है या कंधे पर रखकर बंदूक चलाया गया है वह स्वयं को बचाने के लिए भी है कहा जाए तो गलत नहीं हो अभी निगम मंडल आयोग सब में नियुक्तियां होनी है उससे पहले छत्तीसगढ़ हाट का नाम पीएम एकता माल रख दिया जाएगा या रख देने का प्रस्ताव पारित हो गया और इसको तोड़कर फिर से नए सीरे से बनाने की बात की जा रही है बिल्कुल बनाना चाहिए यदि कहीं कोई कमी है तो नए सीरे से बनाया जा सकता है लेकिन नाम बदलने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या डबल इंजन की सरकार सब कुछ बदल देगी और छत्तीसगढ़ की पहचान को भी मिटा देगी छत्तीसगढ़ की राजधानी में स्थित महत्त्वपूर्ण जगह में स्थित इस हाट का नाम लोगों को जोड़ता है एक दूसरे से तब ऐसी परिस्थिति में कल आरडीए के संचालन मंडल की बैठक में जो छत्तीसगढ़ हाट की जगह पीएम एकता माल बनाने की बात कही जा रही है प्रस्ताव पारित किया गया है वह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा छत्तीसगढ़ हाट की पहचान यहां विभिन्न हस्त शिल्प और दूसरे उत्पाद है ग्रामीण उत्पाद उसको लेकर बनी हुई है और लोग जाते हैं यहां और यहां ऐसा नहीं है कि केवल गढ़ के लोग ही स्टाल लगाते हैं बल्कि दूसरे प्रदेशों के लोगों का भी स्टाल लगता है तब नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी यह सबसे बड़ा सवाल सिटी सेंटर माल के पीछे छत्तीसगढ़ हाट बाजार को तोड़कर माल बनाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी यह केंद्र सरकार की योजना है कांग्रेस सरकार के दौरान यह योजना सिर्फ नाम को लेकर भूपेश सरकार अड़ी हुई थी कि वे पीएम एकता माल नाम नहीं रख सकते छत्तीसगढ़ हाट इस राजधानी की पहचान बन चुकी है वह नाम नहीं बदला जाएगा आवास एवं पर्यावरण विभाग की सचिव तथा प्राधिकरण की अध्यक्ष आर संगीता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एकता माल निर्माण के लिए निविदा दर की स्वीकृति कर ली गई है और इसको अनुमोदित भी कर लिया गया क्यों हड़बड़ी थी आखिर अभी आरडीए का अध्यक्ष बनाना आरडीए का अध्यक्ष बनना है उसके लिए मारामारी हो रही है इस विभाग के मंत्री ओपी चौधरी हैं जो रायगढ़ से विधायक हैं और प्रदेश सरकार में दमदार माने जाते हैं और यह भी माने जाते हैं कि वे अमित शाह के निर्देशन पर ही सब काम करते हैं तो क्या यह काम भी अमित शाह पसंद नहीं है यह नाम छत्तीसगढ़ इसलिए नाम बदला जा रहा है कई सवाल उठाए जा रहे हैं छत्तीसगढ़ हाट का सुपर बिल्ड अप एरिया जो है वह 73 392 वर्ग फुट है तथा निर्माण लागत करीब 1 स लाख रुपए होनी है एकता माल बनाने का जिम्मा मेसर्स दीपक पांडे डी एनवी प्रोजेक्ट लिमिटेड को दिया गया है इसका निर्माण लग दो साल के भीतर किया जाएगा यह अनुमोदित कर दिया गया प्रस्ताव पारित गया इतनी बड़ी राशि को संचालक मंडल ने एक झटके में पास कर दिया और साय सरकार के निर्देश पर ही किया गया है कहा जाए तो गलत नहीं होगा या ओपी चौधरी के निर्देश पर यह हुआ है छत्तीसगढ़ की अपनी पहचान है इस पहचान को लेकर लोगों ने कितना संघर्ष किया है और आज राजधानी के उस छत्तीसगढ़ हाट जो लोगों की जन भावना से जुड़ा हुआ है उसका नाम बदल दिया जाएगा है ना हैरानी की बात देखना है कि इस मामले को लेकर जनप्रतिनिधि किस तरह की आवाज उठाते हैं और विष्णु देव साय सरकार आगे किस किस छत्तीसगढ़ नाम से जुड़े योजनाओं का नाम केंद्र सरकार के निर्देश पर बदलती है!

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https://youtu.be/1WB6tIW0P9w?si=Igq7Hy6KcEMhD03u

रविवार, 22 मार्च 2026

मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार

मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार 


 छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आते ही अडानी यानी गौतम अडानी की कंपनियों के काम में तेजी आ गई है एक तरफ हसदेव अरण्य को धड़ल्ले से काटा जा रहा है पेड़ काटने की अनुमति दी जा रही है वहां पर्यावरण को लेकर जिस तरह के सवाल उसकी अनदेखी की जा रही है तो दूसरी तरफ तिल्दा राजधानी रायपुर से लगे क्षेत्र में अडानी पावर के विस्तार को लेकर जन सुनवाई कल हुई इस जन सुनवाई के विरोध में गांव वाले एक राय होकर पहले ही सरकार को कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंप चुके थे कि जन सुनवाई रोक दी जाए पहले ही जीएमआर पावर कंपनी ने जो द किया था गांव वालों से उसे पूरा नहीं किया गया और गांव की आबोहवा अलग खराब हो रही है ऐसे में विस्तार के लिए जो 885 एकड़ जमीन चाहिए वे नहीं देंगे लेकिन यह विष्णुदेव साय की सरकार है यह डबल इंजन की सरकार है और कहा जा रहा है कि सरकार तो पूरी तरीके से अदानी की गोद में जा बैठे यानी जैसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्र के लिए क वही सब कुछ विष्णु देव साय की सरकार करेगी और यही वजह है कि जब ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा था कि यह जन सुनवाई टाल दी जाए स्थगित कर दी जाए उसकी अनदेखी करके कल जन सुनवाई की गई लदा विकासखंड के तहत रायखेड़ा गांव में स्थापित अडानी पावर लिमिटेड के पावर ग्रेड 370 मेगावाट प्लान के विस्तार हेतु प्रस्तावित 1600 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट की पर्यावरण स्वीकृति हेतु जन सुनवाई थी और प्रचारित प्रसारित यह किया जा रहा है कि जन सुनवाई में लोगों ने समर्थन दिया है लेकिन हकीकत तो यह है कि कल जमकर विवाद हुआ है विरोध हुआ है कांग्रेस ही नहीं दूसरे दलों के नेता जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के नेता भी पहुंचे थे विरोध के लिए जिसमें रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय पूर्व राज्यसभा सांसद छाया वर्मा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ग्रामीण जिलाध्यक्ष है उधो राम वर्मा जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के मुखिया अमित बघेल सहित कई लोग यहां पहुंचे थे और इस बात का विरोध कर रहे थे कि कंपनी जमीन लेते समय तो सब वादा कर देती है लेकिन जमीन हासिल होने के बाद गांव वालों की मुसीबत बढ़ जाती ऐसी परिस्थिति में अब सवाल यह उठ रहा है कि हसदेव कितना बच पाएगा और अब रायखेड़ा क्षेत्र के लोग पर्यावरण के प्रदूषण से अपने को कैसे बचा पाएंगे किस तरीके का विरोध प्रदर्शन हुआ है या किसी से छिपा नहीं है लेकिन मीडिया में खबर छपाई जा रही है कि समर्थन में लोग खड़े हैं ऐसे में सवाल यह है कि क्या सचमुच विष्णुदेव साय की सरकार अदानी की गोद में जा बैठी और कहा जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों में फिर जमीन खरीदी की जा रही है बड़े पैमाने पर अदानी द्वारा खासकर राजधानी और बड़े शहरों के नजदीकी जमीन ताकि वहां बड़े पैमाने पर गोदाम बनाया जा सके यानी मध्य प्रदेश की तर्ज पर क्या अब एफसीआई में रखने की बजाय धान जो खरीदती है छत्तीसगढ़ की सरकार वह अदान के गोदामों में रखेगी ऐसे कई सवाल हैं हम आपको बताते रहेंगे अभी तो जन सुनवाई एक बार हुई और कितने बार करती है या इस तरीके से हसदेव अरण्य को काटे जाने को लेकर जिस फर्जी जन सुनवाई हुई है कहा जा रहा है उस तरह से क्या फर्जी जन सुनवाई करके विस्तार के लिए अनुमति दे दी जाएगी पर्यावरण की अनदेखी कर  कर दी जाएगी जिसका प्रभाव राजधानी में भी पढना तय है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है!

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https://youtu.be/xuFtq-pr7wE?si=QZR5Gr9LzmfxCniE

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

क्या भाजपा ही करती है धर्म से ज़्यादा खिलवाड़

 क्या भाजपा ही करती है धर्म से ज़्यादा खिलवाड़ 


हिंदू धर्म का ठेकेदार बनने वाले लोगों को तब साप सूंघ जाता है जब इस ठेकेदार के समर्थकों में से कोई एक धर्म के साथ खिलवाड़ करता है चाहे वह संवित पात्रा का मामला हो या फिर दूसरे किसी और भारतीय जनता पार्टी के विधायक का मामला जब जब धर्म के साथ ऐसे लोग खिलवाड़ करते हैं उन्हें नजर अंदाज कर दिया जाता है और इससे भी छोटी बात पर यदि विपक्ष के नेता गिरफ्त में आ गए तो पूरे देश में भवाल मचा देते हैं उन्हें हिंदू विरोधी का तमगा देने से भी नहीं कतराते हैं यहां तक कि शंकराचार्य की अवहेलना राम मंदिर प्रांत प्रतिष्ठा समारोह में हुई तब भी कोई उन्हें कांग्रेसी बताने लगा तो कोई आलोचना करने लगा जबकि हमने बार-बार बताया कि यदि इतने सर्वोच्च गुरु किसी दूसरे धर्म के होते और बोल देते तो बवाल मज गया होता लेकिन यह दौर मोदी का दौर है यह दौर भगवान बनाने का दौर है यह दौर अवतार बताने का दौर है और बाप बनाने का और इसी चक्कर में शायद पूरी से चुनाव लड़ रहे हैं भाजपा के बड़े दिग्गज नेता माने जाते हैं संत पात्रा ने भगवान जगन्नाथ को ही मोदी का भक्त बता दिया ल लो मोदी भक्त जगन्नाथ मोदी भक्त जगन्नाथ मोद भक्त जगन्नाथ सब मोद परिवार हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका जुबान फिसल गया था लेकिन याद कीजिए कि जुबान एक बार फिसलती है बार-बार नहीं फिसलती और जुबान इन लोगों की क्यों फिसलती क्योंकि इसी संदीप पात्र ने एक समय कन्हैया कुमार से बहस के दौरान मोदी को देश का पाप भी बता दिया था उसके लिए माफी इससे पहले भी कई ऐसे मामले आए जिसके लिए कभी माफी नहीं मांगी गई और यह माफी शायद सिर्फ इसलिए मांगी गई क्योंकि वे चुनाव लड़ रहे हैं और चुनाव में इसका प्रभाव विपरीत पड़ सकता है जगन्नाथ स्वामी कलयुग के सबसे बड़े अवतार माने जाते हैं सबसे बड़े देवता माने जाते हैं सबसे प्रमुख देवता माने जाते हैं और उन्हें लेकर इस तरह से जुबान फिसल जाने की बात कहना आश्चर्य जनक है क्योंकि जो लोग यदि धर्म में 24 घंटे जुड़े हुए हैं धर्म को लेकर 24 घंटे चिंतित है तो फिर जुबान कैसे फिसल सकती है यह बड़ा सवाल आप खुद सोचिए लेकिन सवाल सिर्फ संवित पात्रा का नहीं है इस दौर में मोदी को भगवान बताने का जो खेल चला उसमें क्या स्वयं दे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं थे यानी धर्म के इस पूरे खेल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी या उन हिंदूवादी संगठनों के लोग शामिल नहीं थे जिन्हें लगता है कि मोदी ही हिंदू धर्म की रक्षा कर सकते हैं और कोई दूसरा कर ही नहीं सकता और शायद यही वजह है कि कोई मंदिर बना रहा है तो कोई उन्हें विष्णु का अवतार बता रहा है और हैरान की बात तो यह है कि धर्म के इस खिलवाड़ में बीजेपी खुद शामिल है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि भगवान वेंकटेश्वर का रूप दिखाते हुए खुद बीजेपी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से यह तस्वीर रिलीज की थी और क्या कुछ नहीं लिखा था नमो नमो वगैरह वगैरह आप हैरान हो जाएंगे तब भी किसी को आपत्ति नहीं हुई थी और यही बात कोई राहुल गांधी या सोनिया गांधी या और किसी को भगवान बनाकर प्रस्तुत कर दिया गया होता तो अभी तक इस देश में पता नहीं किस किस तरह के भवाल मचा दिए जाते उदाहरण कई है यदि हम आपको उदाहरण बताएंगे तो आप खुद हैरान हो जाएंगे कि धर्म के खिलवाड़ के को लेकर किस तरीके से यह लोग लगे हुए थे भारतीय जनता पार्टी के एमएलए मधुबनी से उन्होंने तो भगवान विश्वकर्मा का ही रूप दे दिया था भगवान विश्वकर्मा की जयंती के समय तो कंगना रानावत मंडी से लोकसभा की प्रत्याशी हैं और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विष्णु का अवतार बताया था और कहा जा रहा है कि वही अवतार बताने की वजह से ही उन्हें टिकिट दी गई थी यानी धर्म का खिलवाड़ करने की वजह से उन्हें टिकट दी गई थी तब ऐसे में बीएचयू में जो फोटो प्रदर्शनी लगाई गई किसने लगाई थी क्या एबीपी ने लगाई थी या कोई और इसी तरह के संगठन ने लगाई थी उसमें भी देश के प्रधानमंत्री के चित्र को किस रूप में दिखाया गया था आप खुद देखिए और सोचिए कि क्या कुछ खेल हुआ मेरठ में भी तो इसी तरह का भव्य मंदिर बनाकर स्थापित करने का खेल हुआ है तो महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता ने अवधूत बाग नाम है उन्होंने भी तो कहा था कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विष्णु के 11वें अवतार हैं और एक गोयल है जिन्होंने किताब लिखी और एक शिवाजी महाराज पर किताब लिखी गई और शिवाजी की मोदी वाली एक तस्वीर जब सामने आई तो उन्होंने कहा कि यह तस्वीर उन्हें पहले मिल जाती तो वे इसे ही किताब का कवर पेज बनाते आज के शिवाजी के लिए यह तस्वीर सबसे उपयुक्त है यह उस गोयल ने कहा था जो शिवाजी पर किताब लिख रहे थे ऐसे कई उदाहरण आपके सामने खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसकिस वेशभूषा  धरते हैं यह भी तो इस देश ने देखा है कभी वे सन्यासी बन जाते हैं तो कभी कुछ और एक बार तो उन्होंने जिस तरीके से रुद्राक्ष धारण किया था यहां तक कहा गया कि महाकाल का वेशभूषा धारण कर लिया यानी उसी तरीके से श्रृंगार करवाए थे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरीके का श्रृंगार महाकाल का होता है तब ऐसे में धर्म के साथ खिलवाड़ कौन कर रहा है कौन धर्म का ठेकेदार बना बैठा है और किस किस तरह से आने वाले दिनों में धर्म के साथ खिलवाड़ होगा !

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https://youtu.be/FH8VX23Fnqc?si=FPAWVdWwJ-QrgrIq

गुरुवार, 19 मार्च 2026

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे 


 देश के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी एक बार फिर घोटाले में फंस गए हैं घोटाला क्या है सीधे-सीधे सरकार को चूना लगाना हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद ना तो गौतम अडानी का ही मुश्किल कम हो रहा है और ना ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दरअसल यह रिश्ता क्या कहलाता है यह सवाल इतना बड़ा हो चुका है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अब बौखलाने  लाने लगे हैं और शायद जिस गौतम अडानी को लेकर या हिडन बर्ग की रिपोर्ट को लेकर समूची मोदी सत्ता विपक्ष पर हमलावर थी गौतम अदानी को पाक साफ बताते नहीं थकती थी और चुनाव में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी  कहने लग गए कि अदानी और अंबानी के पास भरपूर काला धन है और वे टेंपो भर भर के कांग्रेस को पहुंचा रहे हैं इसलिए कांग्रेस ने गौतम अडानी या अंबानी का नाम लेना बंद कर दिया तेलंगाना की धरती से पूछना चाहता हूं जरा य शहजादे घोषित करें कि चुनाव में ये अंबानी अडानी थे कितना माल उठाया है काले धन के कितने बोरे भर कर के रुपए मारे हैं क्या टेंपो भर कर के नोटे कांग्रेस के लिए पहुंची है क्या क्या सौदा हुआ है ऐसे में उन समर्थकों का सोचिए या उन हिंदू वादियों का सोचिए या ऐसे बांगड़ बिल्लों का सोचिए जो अब मुंह छुपाते घूम रहे हैं कि वे जिस गौतम अदानी के लिए खड़े हुए थे उन्हें ही जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्ट कह दिया काला धन वाला कह दिया तो फिर उनके पास क्या बचता है लेकिन लगता है कि यह मित्र प्रेम का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और शायद यही वजह है कि कल दुनिया के सब सबसे बड़े अखबार 20 देशों से निकलते हैं फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की कोयला घोटाले को लेकर और गौतम अडानी पर कोयला घोटाले का आरोप पहली बार नहीं लगा है खदानों को देने के मामले में हो या फिर दूसरे देशों से कोयला मंगाकर यहां के विद्युत कंपनियों को मनमाने कीमत पर यानी कई गुना कीमत वसूलने को लेकर गौतम अडानी हमेशा ही विवाद में रहे हैं लेकिन इस बार जो विवाद है वह यह है कि घटिया क्वालिटी का कोयला नंबर एक क्वालिटी के नाम पर विद्युत कंपनियों को खपा गया जिसके चलते ना केवल विद्युत कंपनियों को नुकसान हुआ बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान प क्योंकि घटिया दर्जे की कोयला यदि जलाई जाएगी बिजली उत्पादन के लिए तो ज्यादा जलाना पड़ेगा और उतना ही पर्यावरण को नुकसान होगा इस पर कांग्रेस ने खुलकर मोदी सरकार पर हमला बोल दिया ऐसा कोई दिन नहीं आता जिस दिन अडानी जी का कोई महा घोटाला सामने ना आए अब एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आ रहा है कोयले को लेकर सही सुना आपने खटिया सस्ते दाम के कोयले को अच्छी गु गुणवत्ता का बताकर मनमाने डाम पर अडानी जी ने हिंदुस्तान की एक सरकारी कंपनी को चूना लगाकर बेचा यह बात तब की है जब अडानी जी ने इंडोनेशिया से कोयला लिया $28 प्रति टन पे ये कोयला 3500 कैलोरी वाला कोयला था हिंदुस्तान आते-आते लेकिन जादू हो गया ये 3500 कैलोरी वाला कोयला अपने आप 6000 कैलोरी वाला कोयला बन गया और दाम $28 प्रति टन से बढ़कर $92 प्रति टन हो गए 28 से बढ़ के 92 3500 कैलोरी अपने आप बढ़कर 6000 सैलरी हो गई यह कोयला अडानी ने इंडोनेशिया की एक कंपनी पीटी जोलिन से लिया था और यह तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी टन जटको को बेचा गया था ये कोयला जोने जो कंपनी है इंडोनेशिया की उसने अदानी को $28 प्रति टन में दिया पेपर में पूरी तरह से साफ है कि एंड कस्टमर टाइम जेट को है अदनी अदानी जो थे वो मध्यस्थता कर रहे थे ये कोयला का जो बिल काटा गया वो काटा गया ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित सुप्रीम यूनियन समूह के नाम उसने सिंगापुर में बिल काटा अडानी के नाम और उस कोयले को 3500 कैलोरी का तो रहने दिया लेकिन $4 प्रति टन दाम लगा दिया अब यही कोयला जब तमिलनाडु पहुंचता है भारत के छोड़ में आता है तो अडानी जी इसको 92 प्रति टन और जादू से 000 कैलोरी का बनाकर बेच देते हैं करीब 000 करोड़ रप का चूना लगाया उन्होंने भारत की एक कंपनी को तो इस पूरे मामले में अडानी जी ने एक भारतीय कंपनी से सरकारी कंपनी से धोखाधड़ी करी राजस्व की चोरी की बिजली के दाम बढ़ाए उपभोग ताओं के लिए क्योंकि महंगा कोयला आएगा तो महंगा जनरेशन होगा महंगा डिस्ट्रीब्यूशन होगा और यही नहीं उन्होंने पर्यावरण के साथ-साथ हिंदुस्तान के लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया करीब 22 लाख लोगों की हिंदुस्तान में वायु प्रदूषण से हर साल मौत होती है जिसमें से ज्यादातर बच्चे हैं तो दिक्कत की बात यह है कि आरानी जी ये सब तब कर रहे हैं जब आपको रिन्यूएबल एनर्जी में एक बड़ा प्लेयर बनाने जा रहे हैं ये अलग बात है कि कोयले की आयात करने वाली भारतीय समूह में से वो शायद एक या दूसरे नंबर पर होंगे तो मोदी जी से कुछ सवाल कि डायरेक्टरेट ऑ रेवन्यू इंटेलिजेंस को तो चलिए आपने छानबीन नहीं करने दी संस्थाओं के आपने हाथ बांध दिए आंखों पर पट्टी बांध द लेकिन अब क्या कीजिएगा क्योंकि आप ही ने कहा है कि टेंपो में भर भर कर काला धन बांटा जा रहा है वो टेंपो अडानी के पकड़े कब जाएंगे और ये काले कोयले की जो काली चोरी थी इसका क्या नतीजा है यह देश जानना चाहता है इसका अभिप्राय क्या है इसका एक ही मतलब है कि गौतम अडानी के पास भरपूर काला धन है जिसकी जानकारी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी है तब क्या घटिया कोयला सप्लाई का मामला तूल पकड़ेगा क्या इस मामले की जांच होगी यकीनन होगी यह जांच तो होगी लेकिन तब जब सत्ता बदलेगी क्योंकि राहुल गांधी ने अब साफ तौर पर कह दिया है कि जिस तरह के घपले घोटाले अदानी समूह के आने लगे हैं वे सत्ता में आए यानी इंडिया गठबंधन सत्ता में आई तो हर मामले की विस्तार से जांच की जाएगी तब क्या मोदी सरकार के रहते यह जांच नहीं होगी क्योंकि जिस तरीके से सिर्फ अदानी का नाम ले लेने से ही इस दौर में उन लोगों को प्रताड़ित किया गया संसद की सदस्यता तक समाप्त करने की बात सामने आई है या आरोप लगे हैं मोदी सरकार पर तब इस सत्ता के रहते तो अदानी समूह पर कोई कारवाई होगी या जांच भी होगी कहना मुश्किल है तब देखना है कि जो कोयला घोटाले को लेकर या घटिया कोयला सप्लाई को लेकर जो मामला सामने आया है वह आम लोगों को कितना समझ में आता है !


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https://youtu.be/e7HjSQARqkY?si=qeW-dvU-OUVzve0z

इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…

इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…

 युद्ध की विभीषिका को लेकर कितने ही सवाल उठते रहे हैं। भारत पाकिस्तान का युद्ध हो या फिर ईरान और इजराइल के बीच मचे युद्ध के बाद किस तरह से आपाधापी मची पूरे इजराइल में या ईरान में लोग अपने काम छोड़कर अपने वतन की वापसी के लिए किस तरह से संघर्ष किए। आज हम बात करेंगे इजराइल में कार्यरत साइंटिस्ट हैं हमारे छत्तीसगढ़ के राजधानी के लाडले देवव्रत दुबे जी। उनसे हम बात करेंगे और समझने की कोशिश करेंगे कि इस युद्ध में किस तरीके से प्रभाव पड़ा इजराइल में या जहां वे काम कर रहे थे उस शहर में और क्या परिस्थिति बनी जिसकी वजह से उन्हें वतन यानी भारत आना पड़ा रायपुर आना पड़ा पूरा एक-एक बात हम समझने और जानने की कोशिश करेंगे इजराइल और ईरान के बीच बीच जो युद्ध का माहौल बना या युद्ध हुआ तो आप लोगों ने क्या देखा समझा ये थोड़ा सा बताएंगे। टेंशनंस तो पहले से थे ही पूरे मिडिल ईस्ट में। उसके बाद ईरान के न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज बम बनाने के नजदीक पहुंच रही थी। जिसको रोकने के लिए इजराइल ने अटैक किया और फिर ईरान से रिस्पांस आना शुरू हुआ मिसाइल्स का। मिसाइल्स जब आती थी तो सायरेंस बजते थे अलग-अलग एरिया में और जब हमारे एरिया में साइरस बजते थे तो हम शेल्टर में चले जाते थे। ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि वापस आना पड़ा? क्या सरकार ने कहा कि आप लोगों ने स्वयं निर्णय लिया। एंबेसी की एडवाइज़री आ रही इजराइल में एक होम फ्रंट कमांड है जो वहां पर जो भी रहते हैं उन सबको अलर्ट करती रहती है। तो एंबेसी की एडवाइज़री थी कि होम फ्रंट कमांड का जो भी गाइडेंस आए वो फॉलो कीजिए और ज्यादा ओपन एरियाज में मत घूमिए। ज्यादा भीड़ होम फ्रंट ने मना किया था जमा होने से। सारे यूनिवर्सिटीज और स्कूल्स भी बंद हो चुके थे। सब कुछ वर्क फ्रॉम होम मोड में चल रहा था। उसके बाद कुछ मिसाइल्स जो हुई जो हाईफा का अटैक हुआ। फिर वीरशिश में जब एक हॉस्पिटल पर अटैक हुआ उसके बाद एंबेसी ने यह एक ऑप्शन दिया था कि एक इवाकुएशन हो रहा है ऑपरेशन से जो जाना चाहते हैं वो अपना नाम एनरोल करवा सकते हैं। तो उसमें हम लोगों ने एनरोल किया और आ गए। कितना संघर्ष भरा महसूस हो रहा था उस दौरान जब ईरान का अटैक हुआ तो आप लोग क्या महसूस कर रहे थे? संघर्ष वैसे कुछ खास नहीं था क्योंकि जब रॉकेट्स आते थे वो पीरियड हमने देखा है। हुथस्ट की मिसाइल जब यमन से आती थी तब भी हम साइरेंस में चले जाते थे। ईरान के साथ भी जब सब कुछ शुरू हुआ तब भी हम शेल्टर्स में चले जाते थे गाइडेंस के हिसाब से। पर उसके बाद जब ये हुआ कि अटैक सिविलियन एरियाज पे होने लगे। जैसे हॉस्पिटल पे अटैक हुआ, वाइसमैन इंस्टट्यूट में अटैक हुआ। जब सिविलियन एरियाज पे अटैक होने लगे तब फिर हमने सोचना शुरू किया कि शायद निकल जाना चाहिए। इजराइल से भारत पहुंचते तक क्या महसूस कर रहे थे थोड़ा सा वो तो चल रहे थे हम तेलवी से लैंड बॉर्डर क्रॉस करके जॉर्डन गए वहां जॉर्डन के अमान एयरपोर्ट से कुवैत आए तो जब लैंड बॉर्डर क्रॉस कर रहे थे तब भी जब हम बस से जा रहे थे तब भी दो बार साइंस बजे और बस रोक के हमको सड़क के किनारे खेत में जाकर रुकना पड़ा उसके बाद जब हम कुवैत से दिल्ली के लिए निकल गए थे तब शायद ईरान ने कतर पे अटैक किया और यूएई ने एयर स्पेस क्लोज कर दिया तो हमारा प्लेन वापस कुवैत गया और उसके 4 घंटे बाद फिर से टेक ऑफ किया दिल्ली और अभी सिचुएशन नॉर्मल हो गई है तो 15 दिन में तो हम शायद वापस भी चले जाएंगे जब कुवैत से हम निकले थे दिल्ली के लिए और रास्ते में थे तो प्लेन रिटर्न होने के पहले मैं तो विंडो सीट पे नहीं था पर जो लोग विंडो सीट पे थे उन लोगों ने मिसाइल्स और इंटरसेप्ट र्स दोनों ल्च होते हुए देखे जो हम इजराइल में देखते रहते थे मिसाइल्स वगैरह बट एयरप्लेन से पहली बार उन लोगों ने देखा जो कुछ लोगों ने वीडियोस लिए इजराइल में रहते हुए क्या महसूस कर रहे थे आप जो सभी जो दूसरे देशों से थे वहां जो काम कर रहे थे या आप भी तो क्या लग रहा था कि क्या कुछ होगा अभी तक तो इजराइल वन में था उसका अपना मिडिल ईस्ट में खाक रहा है जो परसेप्शन रहा है लेकिन जब ईरान के मिसाइल गिरने लगे तो क्या सोचे आपको यहां हम लोग इतने चैतन्य नहीं रहते हैं अलर्ट नहीं रहते हैं बट इजराइल में जब से हम रह रहे हैं तो हम किसी भी मोमेंट पे रेडी रहते हैं कि आप तिलवी में है या वीर शिवा में है या हफा में है तो आप जिस शहर में हैं उसके हिसाब से एक टाइमिंग होती है कि 30 सेकंड में आपको शेल्टर में पहुंचना है या 1ढ़ मिनट में आपको शेल्टर में पहुंचना है सायरन बजने के बाद तो वीरसेवा जैसे ये एक मिनट था और इतने में आप शेल्टर में पहुंच सकते हैं क्योंकि आप जहां भी हैं जिस भी बिल्डिंग में है या सड़क के किनारे हैं तो उतनी दूर में कहीं ना कहीं आपको शेल्टर्स मिल ही जाएंगे या घर भी है तो घर के अंदर भी सेफ रूम्स होते हैं। तो उसके लिए हम प्रिपयर्ड ही थे। बट ईरान की जो बैलस्टिक मिसाइल्स आई जो कुछ ऐसी थी जो इंटरसेप्ट नहीं हुई एरो से और सिविलियन एरियाज पर जो ब्लास्ट हुए उसके बाद थोड़ा सा डर लगना शुरू हुआ!

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बुधवार, 18 मार्च 2026

अब केंद्र की बाक़ी नौकरी भी अग्निवीर की तर्ज़ पर

अब केंद्र की बाक़ी नौकरी भी अग्निवीर की तर्ज़ पर 


 सेना में अग्निवीर को लेकर युवाओं में जबरदस्त आक्रोश है और खुद भारतीय जनता पार्टी इस योजना से बेचैन है लेकिन सरकार शायद एक इंच भी जगह छोड़ना नहीं चाहती और वह अपनी इस योजना की सफलता का दावा ठोक थकती भी नहीं लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष इस मामले को लेकर जबरदस्त ढंग से मोदी सरकार घेर रही है और  इसके बावजूद यदि मोदी सरकार अग्निवीर योजना की सफलता का डंका पीट रही है तो फिर इसे क्या कहा जाए और अब जो मामला सामने आया है कि अग्निवीर जैसी योजना केंद्र सरकार दूसरे विभाग में भी लाएगी हालांकि उसका नाम अग्निवीर नहीं दिया गया उसे अप्रेंटिस ट्रेनिंग या इस तरीके से नाम दिया जा रहा है लेकिन ती 3000 से 15000 के बीच सैलरी वाली इस अस्थाई नौकरी को लेकर कई तरह के सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल मेंही सरकारी बैंकों ने जो वैकेंसी निकाली है वह इसी तरह की वैकेंसी है जो अग्निवीर योजना से मिलती जुलती है यानी न साल 5 साल 10 साल के लिए ही काम पर रखने को लेकर वैकेंसी जारी की है और इसकी शुरुआत केंद्र बैंक से लेकर कई बैंकों ने उत्तर प्रदेश में की है उत्तर प्रदेश में नौकरी के लिए 3000 पद की वैकेंसी निकाली गई है तो क्या अब सरकार दूसरे विभागों में भी यही करेगी सार्वजनिक क्षेत्र की जो कंपनियां है वहां भी क्या अब अग्निवीर योजना की तरह ही युवाओं को नौकरी पर रखा जाएगा यह सबसे गंभीर सवाल और बैंकों को लेकर मीडिया रिपोर्ट जो आ रही है खासकर हिंदुस्तान ने जो खबरें प्रकाशित की है वह कम चौकाने वाला नहीं है हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक 2014 में बैंकों के कर्मचारियों की संख्या 8 4281 थी जो 24 आते आते लगभग एक लाख नौकरी कम हो गई और दूसरी तरफ निजी क्षेत्रों के बैंकों में नौकरी बढ़ रही है याने हैरानी की बात है एक तरफ नए नए शाखा खुल रहे हैं नए नए ऑफिस खोले जा रहे हैं सरकारी बैंकों के तो दूसरी तरफ नौकरी कम हो रही है और कहा जा रहा है कि यहां गुपचुप तरीके से अस्थाई कर्मचारियों की जिस पैमाने पर भर्ती की जा रही है उससे युवाओं के भविष्य को लेकर एक नई चिंता पैदा हो गई कि आखिर मोदी सरकार चाहती क्या है अग्निवीर को लेकर अभी हरियाणा चुनाव में ही इस कदर बवाल मचा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह को कहना पड़ा कि अग्निवीर से जो रिटायर होकर आएंगे उन्हें हरियाणा में हरियाणा की सरकार नौकरी देगी यानी दूसरे राज्यों के जो अग्निवीर रिटायर होकर आएंगे उसके लिए भाजपा शासित दूसरे राज्यों में पता नहीं क्या योजना है लेकिन हरियाणा में जरूर दावा किया गया चुनाव को देखते हुए यह पूरा होगा नहीं पूरा होगा यह भी मोदी की गारंटी में गिनी जाएगी नहीं गिनी जाएगी एक अलग मसला है क्योंकि यदि आप मोदी की गारंटी की बात ही कर ले तो छत्तीसगढ़ में तो कहा गया था कि 00 में सिलेंडर दिया जाएगा गैस सिलेंडर रसोई गैस के लिए वह योजना दिवाली सर पर है महंगाई चरम पर है लोग त्रस्त है वह योजना तो छत्तीसगढ़ में लागू हुई नहीं ऐसे में अग्निवीर योजना को लेकर अमित शाह ने जो भरोसा दिलाया है हरियाणा के युवाओं को उस पूरी होने की क्या गारंटी है लेकिन अब जिस तरह की खबरें आ रही है उससे एक बात तो तय हो गया है कि सरकार सब कुछ निजीकरण कर देना चाहती है और वह नौकरी का झंझट नहीं पालना चाहती क्योंकि एपीएस ओपीस और नए पेंशन स्कीम को लेकर विवाद चल ही रहा है ऐसे में सरकार इन सारे झंझट से मुक्त होना चाहती है 

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https://youtu.be/2EZxm8qNL-s?si=7-7ltaf0pXDPZQt3

मंगलवार, 17 मार्च 2026

मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार

मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार





क्या इस देश में आम आदमी की जान की कीमत सिर्फ 5 लाख रुपये है? कल छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में बारूद फटा और गुजरात के राजकोट में गेम जोन जला। दोनों जगह एक बात कॉमन थी—मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार।"

2. बेमेतरा कांड: रसूख और लापरवाही (The Chhattisgarh Angle)

इतिहास: 1988 से शुरू हुई 'स्पेशल ब्लास्ट' फैक्ट्री का विवादों से पुराना नाता रहा है।

पहुंच: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के रिश्तेदारों और कोल इंडिया के पूर्व विशेषज्ञों का मालिकाना हक।

बड़ा सवाल: जब पिछली सरकार ने सुरक्षा कारणों से इसे बंद किया था, तो यह दोबारा कैसे खुली? 800 मजदूरों की जान जोखिम में डालकर सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों हुई?

दृश्य: दो मंजिला इमारत का मलबे में तब्दील होना और हादसे के 3 घंटे बाद पुलिस का पहुँचना प्रशासन की मुस्तैदी पर तमाचा है।

3. राजकोट: मनोरंजन के नाम पर 'डेथ ट्रैप' (The Gujarat Angle)

अमित शाह के करीबियों का नाम: युवराज सिंह सोलंकी जैसे संचालकों का रसूख।

क्रूरता: आग लगते ही जानकारी देने के बजाय संचालक का फरार हो जाना उनकी मानसिकता दर्शाता है।

समानता: दोनों घटनाओं में 'पॉलिटिकल अप्रोच' ने सुरक्षा नियमों को रद्दी का टुकड़ा बना दिया।

4. मुआवजे का झुनझुना (The Critique of Power)

• सरकार ने 5 लाख का मुआवजा घोषित कर दिया। लेकिन क्या पैसा किसी का पिता, भाई या बेटा वापस ला सकता है?

दंडाधिकारी जांच (Magisterial Inquiry): क्या यह सिर्फ मामले को ठंडा करने का तरीका है? पिछली कितनी जांचों की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई या दोषियों को सजा मिली?

5. तीखे सवाल (The Conclusion/CTA)

• क्या डायरेक्टरों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर होगी?

• क्या प्रशासन उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा जिन्होंने इन असुरक्षित जगहों को 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) दिया?

अंतिम संदेश: "जब तक वोट और नोट के बदले जान की सौदागिरी बंद नहीं होगी, बेमेतरा और राजकोट जैसी खबरें आती रहेंगी। अब जागने का वक्त है।"

लगता है सत्ता सबक लेने तैयार नहीं इसलिए इसे एक बार फिर प्रकाशित किया जा रहा है ताकि लोगो को ध्यान रहे 

 छत्तीसगढ़ और गुजरात में जो घटना हुई वह हृदय विदारक घटना गुजरात में गेम जोन में लगी भीषण आग में 24 लोगों की मौत हो गई जिसमें 12 ब तो छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित बारूदी फैक्ट्री में हुए विस्फोट से एक दर्जन से अधिक लोगों के मरने की बात कही जा रही है दोनों ही घटनाओं में यदि कुछ कामन है तो वह आम लोगों की मौत या फिर उनके संचालकों का राजनैतिक पहुंच रखना आप हैरान हो जाएंगे कि किस तरीके से राजनीतिक पहुंच के चलते लापरवाही बढ़ती जाती है और लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जाता है राजकोट में तो जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं वे गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी लोगों में से इस गेम जोन के संचालक युवराज सिंह सोलंकी ने घटना के बाद पुलिस या प्रशासन से इतल करने की बजाय फरार हो गए बेहद अफरातफरी का माहौल है और कहा जा रहा है कि कई लोग बेहद ही गंभीर हालत में अस्पताल में भरती है तो दूसरी तरफ बेमेतरा में जो बात सामने आई है कि इस फैक्ट्री को लेकर हमेशा ही लापरवाही की खबर आती रही है बारूद फैक्ट्री है यह और 1988 से इसका निर्माण शुरू हुआ और 1998 999 में इसने प्रोडक्शन शुरू किया कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश के धाकड़ नेता रहे सुंदरलाल पटवा के दामाद और उनके रिश्तेदारों की यह फैक्ट्री है डायरेक्टरों में जो नाम है वह अजय चौधरी चौधरी यह रिश्तेदार बताए जा रहे हैं इसके अलावा जो टेक्निकल सलाहकार है एसन सी यह कभी कोल इंडिया में रहे हैं और एक्सप्लोसिव और कोल के यह एक्सपर्ट माने जाते हैं तो एनआईटी से पास आउट आदेश जैन भी एक डायरेक्टर है इस स्पेशल ब्लास्ट नाम ही है इस कंपनी का स्पेशल ब्लास्ट तो सुंदरलाल पटवा के करीबी लोगों की इस फैक्ट्री में कल सुबह अचानक शनिवार को विस्फोट होता है दो मंजिला बिल्डिंग भरभरा कर गिर जाती है अफरातफरी का माहौल है और हैरानी की बात तो यह है कि घटना के तीन घंटे बाद पुलिस पहुंचती है तब तक वहां जो कर्मचारी तैनात थे सुरक्षा गार्ड थे कैशियर थे मैनेजर थे सब के सब फरार हो गए कहां है पुलिस ढूंढ रही है घटना क्यों हुई किस तरीके से हुई यह बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कि इस फैक्ट्री को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा था सुरक्षा कारणों की अनदेखी पर कई सवाल उठते रहे हैं लेकिन कहा जाता है कि राजनैतिक अप्रोच के चलते इनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई यहां तक कि भूपेश सरकार में भी कई शिकायतें होने के बाद पिछले साल एक हफ्ते के लिए सुरक्षा कारणों से इसे बंद कर दिया गया था लेकिन अचानक फिर इसे कब चालू किया गया कोई नहीं जानता और तब से यहां सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी की जा रही थी 800 के आसपास लोग यहां काम करते थे जिस बिल्डिंग में या जिस यूनिट में चार यूनिट थे लेकिन जिस यूनिट में विस्फोट हुआ वहां उस समय कितने लोग थे यह भी कोई बताने वाला नहीं है दो मंजिला बिल्डिंग जब बला में भरभरा कर गिरा तो मलम में भी कई लोगों की दबे होने की आशंका है और अभी तक राहत और बचाव का कार्य चल रहा है लोगों में आक्रोश है लेकिन इस आक्रोश का क्या करें सरकार हमेशा की तरह मृतकों को 5 लाख रुपए मुआवजा दे दे दी विष्णु देसाय की सरकारने और 00 रप इलाज के खर्चे के लिए घायलों को दे दी यानी राजनीति के इस गड़बड़ झाले में या घालमेल में किस तरह से लोगों की जान पे बन आई है और सत्ता मुआवजा बांटने में लगी है क्या डायरेक्टरों के खिलाफ एफआईआर नहीं होना चाहिए हालांकि कांग्रेस इस मामले में हमलावर है क्योंकि पिछले साल भूपेश सरकार के दौरानी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे एक सप्ताह के लिए बंद भी कर दिया गया था लेकिन उसके बाद भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधरी थी कहा जा रहा है तब फैक्ट्री कैसे चालू यह बड़ा सवाल है हालांकि इस परे दंडाधिकारी जांच के आदेश दे दिए हैं गए हैं लेकिन सब जानते हैं कि इन इस तरह की जांच का क्या मतलब होता है मामले को शांत करने के लिए इस तरह की जांच की घोषणा कर दी जाती है और उस दंडाधिकारी जांच का क्या होता है कितने ही जांच है जो रद्दी की टोकरी में फेंक दिए गए हैं तब ऐसे में सवाल यह है कि क्या राजनीतिक और पैसे के पहुंच के आगे सत्ता भी नतमस्तक है प्रशासन भी नतमस्तक है!

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https://youtu.be/SAUufPl8cxs?si=0pR-GQCh1X-_j4JR