अब केंद्र की बाक़ी नौकरी भी अग्निवीर की तर्ज़ पर
सेना में अग्निवीर को लेकर युवाओं में जबरदस्त आक्रोश है और खुद भारतीय जनता पार्टी इस योजना से बेचैन है लेकिन सरकार शायद एक इंच भी जगह छोड़ना नहीं चाहती और वह अपनी इस योजना की सफलता का दावा ठोक थकती भी नहीं लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष इस मामले को लेकर जबरदस्त ढंग से मोदी सरकार घेर रही है और इसके बावजूद यदि मोदी सरकार अग्निवीर योजना की सफलता का डंका पीट रही है तो फिर इसे क्या कहा जाए और अब जो मामला सामने आया है कि अग्निवीर जैसी योजना केंद्र सरकार दूसरे विभाग में भी लाएगी हालांकि उसका नाम अग्निवीर नहीं दिया गया उसे अप्रेंटिस ट्रेनिंग या इस तरीके से नाम दिया जा रहा है लेकिन ती 3000 से 15000 के बीच सैलरी वाली इस अस्थाई नौकरी को लेकर कई तरह के सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल मेंही सरकारी बैंकों ने जो वैकेंसी निकाली है वह इसी तरह की वैकेंसी है जो अग्निवीर योजना से मिलती जुलती है यानी न साल 5 साल 10 साल के लिए ही काम पर रखने को लेकर वैकेंसी जारी की है और इसकी शुरुआत केंद्र बैंक से लेकर कई बैंकों ने उत्तर प्रदेश में की है उत्तर प्रदेश में नौकरी के लिए 3000 पद की वैकेंसी निकाली गई है तो क्या अब सरकार दूसरे विभागों में भी यही करेगी सार्वजनिक क्षेत्र की जो कंपनियां है वहां भी क्या अब अग्निवीर योजना की तरह ही युवाओं को नौकरी पर रखा जाएगा यह सबसे गंभीर सवाल और बैंकों को लेकर मीडिया रिपोर्ट जो आ रही है खासकर हिंदुस्तान ने जो खबरें प्रकाशित की है वह कम चौकाने वाला नहीं है हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक 2014 में बैंकों के कर्मचारियों की संख्या 8 4281 थी जो 24 आते आते लगभग एक लाख नौकरी कम हो गई और दूसरी तरफ निजी क्षेत्रों के बैंकों में नौकरी बढ़ रही है याने हैरानी की बात है एक तरफ नए नए शाखा खुल रहे हैं नए नए ऑफिस खोले जा रहे हैं सरकारी बैंकों के तो दूसरी तरफ नौकरी कम हो रही है और कहा जा रहा है कि यहां गुपचुप तरीके से अस्थाई कर्मचारियों की जिस पैमाने पर भर्ती की जा रही है उससे युवाओं के भविष्य को लेकर एक नई चिंता पैदा हो गई कि आखिर मोदी सरकार चाहती क्या है अग्निवीर को लेकर अभी हरियाणा चुनाव में ही इस कदर बवाल मचा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह को कहना पड़ा कि अग्निवीर से जो रिटायर होकर आएंगे उन्हें हरियाणा में हरियाणा की सरकार नौकरी देगी यानी दूसरे राज्यों के जो अग्निवीर रिटायर होकर आएंगे उसके लिए भाजपा शासित दूसरे राज्यों में पता नहीं क्या योजना है लेकिन हरियाणा में जरूर दावा किया गया चुनाव को देखते हुए यह पूरा होगा नहीं पूरा होगा यह भी मोदी की गारंटी में गिनी जाएगी नहीं गिनी जाएगी एक अलग मसला है क्योंकि यदि आप मोदी की गारंटी की बात ही कर ले तो छत्तीसगढ़ में तो कहा गया था कि 00 में सिलेंडर दिया जाएगा गैस सिलेंडर रसोई गैस के लिए वह योजना दिवाली सर पर है महंगाई चरम पर है लोग त्रस्त है वह योजना तो छत्तीसगढ़ में लागू हुई नहीं ऐसे में अग्निवीर योजना को लेकर अमित शाह ने जो भरोसा दिलाया है हरियाणा के युवाओं को उस पूरी होने की क्या गारंटी है लेकिन अब जिस तरह की खबरें आ रही है उससे एक बात तो तय हो गया है कि सरकार सब कुछ निजीकरण कर देना चाहती है और वह नौकरी का झंझट नहीं पालना चाहती क्योंकि एपीएस ओपीस और नए पेंशन स्कीम को लेकर विवाद चल ही रहा है ऐसे में सरकार इन सारे झंझट से मुक्त होना चाहती है
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