गुरुवार, 10 मई 2012

स्लाटर हाउस बनते अस्पताल...


राजधानी के एस्कार्ट हार्र्ट सेंटर में एक बार फिर पैसों के लिए शव को बंधक बनाया गया। यह खबर जितना विचलित करने वाला है उतना ही शर्मनाक भी है। व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के चलते अस्पतालों में ही नहीं डाक्टरों की सोच मे भी तब्दिली आई है और कर्ज लेकर अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार ने संवेेदनाओं को किनारे कर दिया।
कहने को तो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक से एक बड़े अस्पताल है लेकिन इनमें सरकार का कहीं नियत्रंण नहीं होने की वजह से यह स्लाटर हाउस में तब्दिल होने लगा है। डाक्टरों को सिर्फ पैसा दिखाई दे रहा है और सेवा के इस पेशे ने पूरी तरह व्यवसायिक रुप ले लिया है।
हालत यह हैै कि अपनी कमाई के चक्कर में सरकारी अस्पताल के डाक्टर भी मरीजों को स्लाटर हाउस में भेज रहे है और इस सब खेल को जानते हुए भी प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग खामोश है।
हम यहां पहले ही कह चुके है कि निजी अस्पतालों को लेकर कड़े कानून बनाने की जरूरत है यह सच हैै कि सभी डाक्टर संवेदनहीन नहीं होते और न ही कोई मरीजों को जानबुझकर मारता है लेकिन यहां सवाल मरीजों को बचाने तक सीमित नहीं है इनकी वजह से मरीज के परिजनों का जीते जी मर जाने का है।
ईलाज के नाम पर लूट-खसोट की जो परम्परा राजधानी व छत्तीसगढ़ में चल रही वह ठीक नहीं है मरीज के अस्पताल पहुंचते ही लूट-खसोट की जो रणनीति बनाई गई है उस पर सरकारी नियत्रंण की जरूरत है। जांच के नाम से लूट की शुरुआत एडमिट करने के बाद और उपचार के  बाद भी जारी रहता है। कमीशनखोरी इस तरह हावी है कि वेश्याओं के दलाल भी शरमा जाए। लेबोरेटरी में कमीशन, खुन में कमीशन ,दवाईयों में कमीशन की वजह से ईलाज का 75 फीसदी खर्च तो कमीशन खोरी में ही चला जाता है ऐसे में एक आम आदमी के लिए यह स्लाटर हाउस से कम कैसे हो सकता है।
ऐसा नहीं है कि राजधानी के सभी डाक्टर या पैथालॉजी लैब वाले लूट-खसोट में लगे है यहां वन्दना ग्रुप के गंगा डायग्नोस्टिक सेंटर जैसी संस्थाएं  भी है जो 75 फीसदी छूट के साथ जांच रिपोर्ट दे रहे है वह भी उच्च स्तरीय मशीन के साथ काम कर रहे है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि कमीशनखोरी में लगे डाक्टरों को तो अपने बताये लैब की रिपोर्ट ही चाहिए। दवाईया भी खुद का मेडिकल स्टोर्स से ही होना चाहिए।
कमाई के फेर में मरीज के परिजनों की जान लेने पर आमदा इन नर्सिंग होम या बड़े अस्पतालों के खिलाफ सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी ही चाहिए ताकि सेवा के इस क्षेत्र की पवित्रता बनी रहे।
                                                

1 टिप्पणी:

  1. मानवता भूल बैठे चिकित्सा के व्यावसायिकरण में…… धिक्कार है इन्हें।

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