अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम
क्या मोदी सत्ता ने केंद्र सरकार के सभी विभागों को भ्रष्टाचार करने की खुले आम छूट दे रखी है लगातार खबर आ रही है चाहे रेलवे क्यों ना हो वंदे भारत एक्सप्रेस की छत से पानी टपकने की खबर आ रही है तो दूसरे तरफ पूलों के लगातार ढहने की खबर दिल्ली के प्रगति मैदान की भी तो खबर हैं तो दूसरी तरफ जिस तरीके से कैग ने रिपोर्ट दी थी चाहे आयुष्मान भारत कार्ड योजना हो या फिर ा स करोड़ रुपए में एक किलोमीटर सड़क निर्माण की बात हो सब तरफ भ्रष्टाचार की खबरें आ रही है लेकिन अब जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से खबर रही है वह भी हैरान कर देने वाली रायपुर स्थित एम्स अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान वहां से जो टेंडर घोटाले की खबर आ रही है वह हैरान कर देने वाली है कि किस तरीके से दिल्ली से आए स्टाफ ने अपने चहेते ठेकेदार को टेंडर देने के लिए किस किस तरीके का खेल नहीं खेला सब कुछ कागजों में कैद है और आरटीआई के माध्यम से और भी जानकारी इकट्ठी की जा रही है लेकिन जो प्रारंभिक जानकारी मिली है वह साफ संकेत दे रही है कि चहते ठेकेदार को टेंडर देने ठेका देने मनमाने ढंग से घपले बाजी की गई है घोटाले की गई है
इस घोटाले को लेकर जो खबर आ रही है व हैरान कर देने वाली इसलिए भी है क्योंकि रायपुर एम्स जो कई कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के आगमन के कार्यक्रम भी होते हैं मंत्रियों के कार्यक्रम होते इसके लिए इवेंट कंपनियों को काम दिया जाता है ऐसा ही एक काम का टेंडर निकला था जिसे 30 मई को खोला जाना था इस टेंडर में तीन कंपनियों ने भाग लिया था जिसम से एक कंपनी को यह टेंडर मिल गया था लेकिन वह कंपनी चहेता कंपनी नहीं था इसलिए यह टेंडर रदद कर दिया गया कि इन कंपलीट फाइनेंस की होने की वजह से
जबकि इसे जिस तरह के रेट आए थे या जो ए कंपनी थी व य 30 लाख में काम करने को तैयार थी तो जो दूसरी कंपनिया थी वह कोई 40 लाख तो कोई 60 लाख तक का टेंडर भरा था ऐसे में उस फाइनेंशियल कीट के जो खाने छूटे हुए थे उसे भरकर आसानी से टेंडर जारी किया जा सकता था लेकिन वर्क आर्डर नहीं दिया गया और तमाम टेंडर निरस्त करके फिर से टेंडर जारी कर दिया गया यह पूरा ऑनलाइन प्रक्रिया है लेकिन किस तरीके से इसमें भी खेल होता है यह समझिए जब दूसरी बार टेंडर जारी हुआ और 26 तारीख को उसे 26 जून को इसे खोला जाना था तब छ कंपनियो ने इस में हिस्सा लिया कंपने प्रजेंटेशन नहीं दिया तो उनका फम रिजेक्ट कर दिया गया अब सिर्फ दो कंपनिया बची थी एक री दूसरा और इन दोनों कंपनियों का टेंडर खोला जाना था और जिसका एल वन होता उसे टेंडर दे दिया जाना था लेकिन आश्चर्यजनक रूप से टेंडर खोला ही नहीं क्योंकि टेंडर देना था यह शिकायत भी हुई है क्योंकि जिस बना पर मेरी टेडर किया नहीं खोला गया है व पहले जब टेंडर हुआ था उसम प्रेजेंटेशन व दे चुके थे और यह कर दिया गया को की आपका जो प्रेजेंटेशन है अप टू द मार्क पर नहीं है जबक इसी प्रेजेंटेशन पर पहली बार टेंडर उसे मिल चुका था जिसे निरस्त किया गया था ऐसी परिस्थिति में जब हमारी टीम ने इस शिकायत पर जब अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो उपलब्ध नहीं थे लेकिन जो जानकारी मिली है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है क्योंकि टेंडर की शर्तो में एक महत्वपूर्ण शर्त यह था कि टर्न ओवर एक करोड़ होना चाहिए लेकिन जिस कंपनी को यह टेंडर जारी कर दिया गया उसका टर्न ओवर 50 लाख से भी ज्यादा नहीं है और कारण यह बताया गया क्योंकि वह एमएसएनई कंपनी है इसलिए उसे छूट दी जा रही है और यही बात यदि टेंडर जारी करते समय कर दी जाती कि एमएसएमई सेक्टर वालो को छूट दी जाएगी तो यकीन मानिए कि कई लोग स्टैंडर में भाग लेते हैं यानी एक करोड़ टन की शर्त लगाकर एमएसए के कई कंपनियों को रोक दिया गया और एमएस की छूट के नाम पर अपने चहते कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले में जबरदस्त ढंग से खेल हुआ है और यही नहीं अब तो जो कंपनिया इवेंट का काम करती है फ्लावर लगाने का टेंट लगाने का लगाने का व कंपनिया आशंकित इसलिए भी है क्योंकि एम्स में हर साल करोड़ अरब रुपए का काम निकलता है तो एक शुरुआत थी इस साल की उसमें ही यदि इस तरीके की घपले बाजी हो रही है तो आने वाले दिनों में क्या कुछ होगा कहना मुश्किल है देखना है कि इस मामले को लेकर अब किस तरीके की कारवाई होगी क्योंकि कहा तो यहां तक जा रहा है कि कुछ पार्टी इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाने वाली है !
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