छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी
नाम बदलने में माहिर विष्णु देव साय की सरकार यानी डबल इंजन की सरकार क्या अब छत्तीसगढ़ की पहचान भी मिटा देना चाहती है कई योजनाओं का नाम उन्होंने आते ही बदल दिया था जो भूपेश सरकार ने रखी थी और और अब जो काम किया जा रहा वह बेहद ही चौकाने वाला है यह चौकाने वाला इसलिए है क्योंकि इस योजना को भूपेश बघेल जब मुख्यमंत्री थे तब भी लाया गया था लेकिन मामला सिर्फ इसलिए रुका था क्योंकि नाम का संकट था केंद्र सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ हाट का नाम बदल दिया जाए और उसका नाम पीएम एकता माल कर दिया जाए और उसमें दूसरे राज्यों के हस्त शिल्प उत्पादकों को भी दुकान दिया जाए दूसरे राज्यों के हस्तशिल्प को दुकान तो दिया ही जा रहा था लेकिन जो रायपुर की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ हाट जमीन से जुड़ा हुआ नाम है उसे आखिर विष्णुदेव साय क्यों बदल देना चाहती है क्या केंद्र की योजना से नाम भी बदलना जरूरी है यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस तरीके का खेल रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालन मंडल के कंधे पर रखकर किया गया है या कंधे पर रखकर बंदूक चलाया गया है वह स्वयं को बचाने के लिए भी है कहा जाए तो गलत नहीं हो अभी निगम मंडल आयोग सब में नियुक्तियां होनी है उससे पहले छत्तीसगढ़ हाट का नाम पीएम एकता माल रख दिया जाएगा या रख देने का प्रस्ताव पारित हो गया और इसको तोड़कर फिर से नए सीरे से बनाने की बात की जा रही है बिल्कुल बनाना चाहिए यदि कहीं कोई कमी है तो नए सीरे से बनाया जा सकता है लेकिन नाम बदलने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या डबल इंजन की सरकार सब कुछ बदल देगी और छत्तीसगढ़ की पहचान को भी मिटा देगी छत्तीसगढ़ की राजधानी में स्थित महत्त्वपूर्ण जगह में स्थित इस हाट का नाम लोगों को जोड़ता है एक दूसरे से तब ऐसी परिस्थिति में कल आरडीए के संचालन मंडल की बैठक में जो छत्तीसगढ़ हाट की जगह पीएम एकता माल बनाने की बात कही जा रही है प्रस्ताव पारित किया गया है वह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा छत्तीसगढ़ हाट की पहचान यहां विभिन्न हस्त शिल्प और दूसरे उत्पाद है ग्रामीण उत्पाद उसको लेकर बनी हुई है और लोग जाते हैं यहां और यहां ऐसा नहीं है कि केवल गढ़ के लोग ही स्टाल लगाते हैं बल्कि दूसरे प्रदेशों के लोगों का भी स्टाल लगता है तब नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी यह सबसे बड़ा सवाल सिटी सेंटर माल के पीछे छत्तीसगढ़ हाट बाजार को तोड़कर माल बनाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी यह केंद्र सरकार की योजना है कांग्रेस सरकार के दौरान यह योजना सिर्फ नाम को लेकर भूपेश सरकार अड़ी हुई थी कि वे पीएम एकता माल नाम नहीं रख सकते छत्तीसगढ़ हाट इस राजधानी की पहचान बन चुकी है वह नाम नहीं बदला जाएगा आवास एवं पर्यावरण विभाग की सचिव तथा प्राधिकरण की अध्यक्ष आर संगीता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एकता माल निर्माण के लिए निविदा दर की स्वीकृति कर ली गई है और इसको अनुमोदित भी कर लिया गया क्यों हड़बड़ी थी आखिर अभी आरडीए का अध्यक्ष बनाना आरडीए का अध्यक्ष बनना है उसके लिए मारामारी हो रही है इस विभाग के मंत्री ओपी चौधरी हैं जो रायगढ़ से विधायक हैं और प्रदेश सरकार में दमदार माने जाते हैं और यह भी माने जाते हैं कि वे अमित शाह के निर्देशन पर ही सब काम करते हैं तो क्या यह काम भी अमित शाह पसंद नहीं है यह नाम छत्तीसगढ़ इसलिए नाम बदला जा रहा है कई सवाल उठाए जा रहे हैं छत्तीसगढ़ हाट का सुपर बिल्ड अप एरिया जो है वह 73 392 वर्ग फुट है तथा निर्माण लागत करीब 1 स लाख रुपए होनी है एकता माल बनाने का जिम्मा मेसर्स दीपक पांडे डी एनवी प्रोजेक्ट लिमिटेड को दिया गया है इसका निर्माण लग दो साल के भीतर किया जाएगा यह अनुमोदित कर दिया गया प्रस्ताव पारित गया इतनी बड़ी राशि को संचालक मंडल ने एक झटके में पास कर दिया और साय सरकार के निर्देश पर ही किया गया है कहा जाए तो गलत नहीं होगा या ओपी चौधरी के निर्देश पर यह हुआ है छत्तीसगढ़ की अपनी पहचान है इस पहचान को लेकर लोगों ने कितना संघर्ष किया है और आज राजधानी के उस छत्तीसगढ़ हाट जो लोगों की जन भावना से जुड़ा हुआ है उसका नाम बदल दिया जाएगा है ना हैरानी की बात देखना है कि इस मामले को लेकर जनप्रतिनिधि किस तरह की आवाज उठाते हैं और विष्णु देव साय सरकार आगे किस किस छत्तीसगढ़ नाम से जुड़े योजनाओं का नाम केंद्र सरकार के निर्देश पर बदलती है!
वीडियो देखें

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें