जब धर्मजीत ने गधा गंवार कहा
सत्ता का नशा जब सर चढ़कर बोलता है तो वह किसी बात की परवाह नहीं करता ना तो उसकी जुबान पर ही कोई कंट्रोल रहता है और ना ही तेवर पे और शायद यही वजह है कि जल जीवन मिशन में घपले घोटाले को लेकर विधानसभा में जब चर्चा चल रही थी तब भारतीय जनता पार्टी के विधायक धर्म जीत सिंह ने ठेकेदारों को लेकर ऐसी बात कह दी जो हैरानी की बात है चौकाने वाली बात है
उन्होंने कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के आ कहां कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के सब गए उनके भीतर का ठाकुर इसलिए जाग गया कि कितने सालों के बाद उनकी पार्टी को सत्ता मिली धर्मजीत सिंह कभी कांग्रेस में हुआ करते थे और उसके बाद जब जनता कांग्रेस बनी यानी जोगी कांग्रेस की नीव रखी गई तो धर्मजीत सिंह जोगी कांग्रेस चले गए लेकिन अमित जोगी से उनकी पटरी नहीं बैठी तो वे भारतीय जनता पार्टी में आ गए और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें टिकट दी वे चुनाव भी जीत गए काफी सीनियर है लेकिन है तो ठाकुर तब छत्तीसगढ़ विधानसभा में उन्होंने क्या कहा यह पहले विस्तार से सुन लीजिए
कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के आ गए हैं आदरणीय अध्यक्ष जी इनके कारण ही पूरा जल जीवन मिशन लेप्स पोजीशन में है सिर्फ बिलासपुर की बात नहीं कह रहा हूं इस सदन में 90 विधानसभा क्षेत्र में यह योजना दम तोड़ रही है उसमें दम देने का काम आपसे निवेदन है कि आप करिए करोड़ों रुपया की लागत है अगर उसम थोड़ा और पैसा देकर के उसको लागू हो जाए तो गांव गांव में हम लोग जाते हैं दौरे में लोग क्या करेंगे हम लोग क्या कर सकते हैं घपले घोटाले में पूरा सिस्टम शामिल है क्या अधिकारी क्या मंत्री क्या ठेकेदार क्या बाबू क्या चपरासी सब कुछ शामिल है लेकिन गुस्सा धर्मजीत सिंह का है तो अपनी सरकार के मंत्री की बजाय या अधिकारियों की बजाय उन ठेकेदारों कर कहां के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के सब गए हैं इसम यह नहीं है कि धर्मजीत सिंह किस नेचर के व्यक्ति हैं वैसे तो बड़े सौम्य माने जाते हैं चेहरा मोहरा भी बड़ा शानदार है
लेकिन भाषा क्या इस तरह की होनी चाहिए किसी के लिए भी क्या कोई भी ठेकेदार बन जाता है जल जीवन मिशन में निश्चित रूप से जबरदस्त घपला हुआ है अब तक नौ इंजीनियर निलंबित किए जा चुके हैं कई ठेकेदारों को भी सस्पेंड कर दिया है या उनके काम को रोक दिया है उनसे काम वापस ले लिया गया प्राय सभी जिले में सर्वाधिक तो जो शिकायत सामने आई है वह बिलासपुर संभाग में है तो धमतरी जिले में भी जमकर शिकायत हुई है कहा जा रहा है कि अधिकारियों को पैसा देकर ठेकेदारों ने काम पूर्ण होने का सर्टिफिकेट तक ले लिया है लेकिन धरातल में काम शुरू ही नहीं हुआ कई जगह तो काम हुए कई जगह तो पानी की सप्लाई लोगों को मिला लेकिन 15 दिन बाद बंद कर दिया गया कई जगह तो पाइपलाइन ही नहीं बची यानी आधे अधूरे काम को पूर्ण दिखाकर जिस तरीके से ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया है उसे लेकर विधायकों ने सवाल पूछे तो मंत्री का जवाब भी हैरान कर देने वाला था गोलमोल जवाब दे रहे थे मंत्री सवाल कुछ और पूछे जा रहे थे जवाब कुछ और दिए जा रहे थे यहां तक कि जो ज्यादा राशि ठेकेदारों को दी गई है उसे लेकर भी जब सवाल पूछा गया तो ना तो ठेकेदारों पर कारवाई की बात की गई और ना ही उन राशियों को वसूलने की बात की गई यहां तक कि उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी क्या कारवाई होगी कहना मुश्किल है
लेकिन धर्मजीत सिंह को गुस्सा उन अधिकारियों पर नहीं है धर्मजीत सिंह को गुस्सा उस सिस्टम पर नहीं है गुस्सा है उन ठेकेदारों पर जो कमाने के लिए ही ठेकेदारी कर रहे हैं तब सवाल यह है कि क्या सत्ता का नशा इस तरीके से सिर चढ़कर बोलता है !
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