रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में
केंद्र के सरकार द्वारा यानी मोदी सत्ता के द्वारा लगातार 36 गढ़ की हो रही उपेक्षा की खबरों के बीच एक और चौकाने वाली खबर आई है महत्वकांक्षी योजना 45 हजार करोड़ की इस योजना को भी मोदी सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है हालांकि यह योजना नितिन गडकरी के विभाग की है सड़क निर्माण से संबंधित है लेकिन अचानक ही जिस तरीके से दैनिक प्रगति रिपोर्ट ही बंद करने की बात कर दी गई है पत्र लिख दिया गया है बकायदा उसके बाद इस महत्वकांक्षी योजना जो छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण होता खासकर यहां से बड़ी संख्या में लोग हैदराबाद जाते हैं इलाज के लिए और इस योजना के बंद होने से किस तरह का नुकसान होगा इसकी भी कोई कल्पना नहीं कर सकता 4500 की यह योजना भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर राजनांदगांव होते हुए यह योज यह सड़क हैदराबाद तक जाना था महत्त्वपूर्ण योजना लेकिन कहा जा रहा है कि इस योजना में जो 45 हज करोड़ रुपए लगने थे शायद उसे बचाया गया है क्योंकि बिहार और आंध्र प्रदेश को इस बार बजट में बड़ी राशि दी गई है हरियाणा महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव होने हैं उ से लेकर भी बजट में लंबे चौड़े प्रावधान किए गए हैं लेकिन छत्तीसगढ़ को क्या मिल रहा है यह सबसे बड़ा सवाल है डबल इंजन की सरकार है उसके बाद भी लगातार राज्य बनने के बाद लगातार 10 सीटें देने वाली भारतीय जनता पार्टी को यदि कैबिनेट मिनिस्टर के लायक भी कोई नहीं लग रहा है तो फिर इसे क्या कहा जाए हालांकि इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठे सिर्फ एक राज्य मंत्री मिला है तो खन साहू के रूप में लेकिन अब जो खबरें आ रही है वह बेहद ही चौकाने वाली खबर इसलिए है क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ को बहुत बड़ा फायदा होने वाला था रायपुर राजनाथ गांव गढ़ चिरौरी गोमी परी आदिलाबाद रामा करीम नगर होते हुए यह सड़क हैदराबाद को जोड़ती थी जिसमें छत्तीसगढ़ में 101 किलोमीटर सड़क बनना था तो महाराष्ट्र में 70 किलोमीटर और बचे 388 किलोमीटर सड़क आंध्र प्रदेश में है और इसे अचानक क्यों ठंडे वस्त डाल दिया गया है इसे लेकर अभी तक सरकारी स्तर पर कोई भी जवाब नहीं आया है कहा जाता है कि इस सड़क मार्ग में वन भी पढ़ते हैं मोहला मानपुर और गढ़ चलो गढ़ चिरौली का क्षेत्र आता है जहां अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया था हालांकि दिक्कत थी अधिग्रहण में क्योंकि वन भूमि को अधिग्रहण करने का जो एनजीटी जो मापदंड है उसकी वजह से कुछ दिक्कत थी लेकिन लगातार दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाए जा रहे थे और कल ही अचानक दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाने का काम रोक देने का पत्र भी जारी कर दिया गया डीपीआर बंद करने के इस पत्र के बाद हड़कंप मचा हुआ है जो इस परियोजना में लगे हुए थे इस योजना में लगे हुए थे सरकारी अधिकारी बकायदा सर्वे हो रहे थे कि किस तरीके से सड़क बन छत्तीसगढ़ में जो 101 किलोमीटर सड़क बनना है उसके रास्ते क्या होंगे यह सब भारत माला प्रोजेक्ट के तहत हो रहा था तब सवाल यही है कि आखिर छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कब तक होते रहेगी और अब जब इस परियोजना को साढे हजार करोड़ के इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है तो इसकी शुरुआत अब कब होगी !

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