बुधवार, 15 अप्रैल 2026

महादेव सट्टा से जुड़े नेता-अफ़सरों पर कार्रवाई क्यों नहीं

महादेव सट्टा से जुड़े नेता-अफ़सरों पर कार्रवाई क्यों नहीं

 महादेव सट्टा  को लेकर विष्णुदेव साय की सरकार क्या जनता से जो वादे किए थे मोदी ने जो गारंटी दी थी क्या उससे इतर काम हो रहा है क्या इस मामले में लिप्त अपराधियों को बचाया जा रहा है, केवल छोटी मछलियों को ही पकड़ा जा रहा है क्या वाशिंग मशीन बन चुकी है इस मामले को लेकर विष्णु देव साय सरकार पर यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे क्योंकि जिस तरीके से एसीबी और ईओडब्ल्यू ने चालान पेश किया है वह कम चौकाने वाला नहीं है अब तक राज्य में और राज्य से बाहर 300 से अधिक गिरफ्तारी हो चुकी कई व्यापारी वर्ग के लोग भी इस मामले में गिरफ्तार होकर जेल की सलाखों में है सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले को लेकर ईडी ने जो सवाल उठाए थे या ईडी ने जो दावा किया था ईओडब्ल्यू और एसीसीबी की टीम वैसा कुछ नहीं कर पा रही है तो क्या बड़े अफसरों और राजनेताओं को बचा लिया गया है यह बेहद ही महत्त्वपूर्ण सवाल क्योंकि इस मामले में जिस तरह के बड़े अधिकारियों पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों के नाम खुलकर सामने आए थे केवल सिपाही हवालदार जैसों पर कार्रवाई की गई जो पैसे इधर से उधर पहुंचाते थे लेकिन जिनका प्रमुख संरक्षण था इस पूरे मामले में वे अफसर क्या बचा लिए गए हैं क्या उन्हें फिर से मलाईदार पदों पर बिठाया जा चुका है या क्या उन अफसरों से जो सेटिंग पूर्ववर्ती सरकार की बताई जा रही थी उस तरह की सेटिंग वर्तमान सरकार ने कर ली है प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा असम दौरे को लेकर सवालों के घेरे में है इस पर हम फिर कभी विस्तार से बताएंगे कि असम दौरे का पूरा खेल क्या है लेकिन उससे पहले हम बता देते हैं कि महादेव सट्टा प में जिस तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले को भी निशाने पर लिया गया था वर्मा बघेल कई तरह के दावे किए गए थे और पूरे विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी इस मामले को जोर शोर से उठाती रही है लेकिन सरकार बने सात आठ माह हो गए अभी तक कोई भी बड़े अधिकारी घेरे में नहीं आए और ना राजनेता ही घेरे में आए यानी क्या सेटिंग हो चुकी है क्या जिस तरीके से आरोप लगे थे पूर्ववर्ती सरकार को करोड़ों रुपए मिलने के क्या वर्तमान सरकार में बैठे कुछ लोगों को यह राशि मिल रही है इसलिए वे खामोश है हालांकि दावा तो इस बात का किया गया था कि महादेव सट्टा ए पर प्रतिबंध लगा दिया गया लेकिन सट्टा अभी भी चल रहा है अभी भी पुलिस कारवाही कर रही है एसीबी भी छापेमारी की कारवाही कर रही है लेकिन इन सारे मामले से क्यों अफसरों को बचा लिया गया है कई अफसर थे रायपुर में भी पदस्थ अफसरों के नाम थे तो दुर्ग में भी पदस्थ अफसरों के नाम थे और यह सारे अफसर आईपीएस है कहा तो यहां तक जा रहा है कि यदि कोयला घोटाला शराब घोटाला और महादेव सट्टा एप को लेकर ईडी की कारवाही को देखा जाए तो उसने केवल आईएएस पर ही कारवाई की है आईपीएस लाबी को पूरी तरीके से छोड़ दिया गया जबकि नाम कई बड़े बड़े थे जिनसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था उसमें दीपांशु काबरा जैसे अधिकारी भी थे तो भोजराज पटेल और पारुल माथुर जैसे आईपीएस लोगों के भी नाम थे लेकिन जब चालान पेश किया महादेव सट्टा को लेकर एसीबी और डब्लू ने तो हैरान कर देने वाली बात यह थी कि ईडी ने जिन अफसरों पर संदेह व्यक्त किया था उन अफसरों पर भी ना तो किसी तरह की पूछता हुई ना किसी तरह की कार्रवाई हुई जिन राजनेताओं के नाम लिए गए थे पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले को ही घेरे में लिया गया था कई बड़े-बड़े नाम थे उसमें पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकारों के भी नाम थे लेकिन अब क्या यह कारवाई केवल छोटी मछलियों तक ही सिमट गई है हम आपको विस्तार से बताएंगे हमारी टीम पूरी लगी हुई है कि अब महादेव सट्टा प को लेकर विष्णुदेव साय सरकार की भूमिका क्या है और गृह मंत्री विजय शर्मा किस तरीके का खेल खेल रहे हैं !

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