रविवार, 5 अप्रैल 2026

जब बेर पर मचा था बवाल


जब बेर पर मचा था बवाल
 

 भारतीय जनता पार्टी धर्म के नाम पर किस किस तरह का तमाशा करती है यह किसी से छिपा नहीं है और ऐसे में  नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने छत्तीसगढ़ के विधानसभा में ही साय सरकार को बुरी तरीके से घेर लिया इसकी वजह थी बेर।

दरअसल कुछ ही दिन पहले साय सरकार यानी पूरी कैबिनेट राम लला के दर्शन करने के लिए अयोध्या गई थी और रामलला में क्या चढ़ाना है इसकी पूरी सूची जारी की थी जिसमें एक था सबरी के बेर शिवरी नारायण से लाया गया है यह बताया गया इसी बात को लेकर चरण दास महंत ने विधानसभा में सवाल पूछ लिया कि यह बेर का तो सीजन नहीं है मौसम नहीं है बेर का फिर शिवरी नारायण का बेर कहां से आ गया और बेर के नाम पर क्या चीज भगवान राम को चढ़ा दिया गया हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे भी अयोध्या जाना चाहते थे अकेले कैबिनेट को लेकर चले गए अब सब विधायकों को अयोध्या ले जाने प्लेन से अयोध्या ले जाने का इंतजाम किया जाए और बुरी तरीके से इस बेर के प्रकरण से बौखलाए बीजेपी के विधायकों ने चरण दास महंत को ही घेरने की कोशिश की 

राजेश मूणत रायपुर पश्चिम के विधायक है उन्होंने तो यह कह दिया कि 10 सीटें राम के नाम पर मिली है भारतीय जनता पार्टी को तो धर्मजीत सिंह पहले कांग्रेस में थे अब भाजपा में चले गए और भाजपा के विधायक हैं उन्होंने कह दिया कि क्या अयोध्या जाने का जो मंसा जाहिर कर रहे हैं चरण दास जी महंत उसके लिए राहुल गांधी से पूछे हैं लेकिन चरण दास महंत कब रुकने वाले थे उन्होंने सीधे-सीधे इन विधायकों से कह दिया कि आप लोग सही बातों का जवाब नहीं देते हैं बेर कहां से आया यह बताइए इधर-उधर की बात करते हैं और इसीलिए आप लोग अयोध्या से लेकर बद्रीनाथ चित्रकूट प्रयागराज नासिक रामेश्वरम सब हार गए देखना है कि सरकार इसका क्या जवाब देती हालांकि मुश्किल है इसका जवाब इस तरह के सवालों के जवाब कभी मिलते नहीं है और चरणदास महंत जी जब चर्चा कर रहे थे तो भाजपा के तेज करर माने जाने वाले विधायक और रमन सरकार में मंत्री रहे अजय चंद्राकर ने तो यहां तक कह दिया कि इस पर चर्चा क्यों होनी चाहिए और उन्होंने अध्यक्ष से यहां तक पूछ लिया कि क्या अयोध्या पर चर्चा के लिए कोई नोटिस दिया है अब बेर का मामला बड़ा होता जा रहा है और जन चर्चा का भी विषय बनता जा रहा है कि वाकई में आखिर जब सीजन नहीं था तो बेर कहां से लाया गया और क्या चढ़ाया गया भगवान को !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/DD8uGlRjsL4?si=lE7K7fvrxZtFc_5O

अब अनियमित कर्मचारियों की बड़ी तैयारी

अब अनियमित कर्मचारियों की बड़ी तैयारी 


एक तरफ़ प्रदेश में बढ़ते अपराध और बिगड़ती क़ानून व्यवस्था ने आम आदमी के सामने मुश्किल खड़ा कर दिया है तो  दूसरी तरफ अनियमित कर्मचारी भी सरकार के द्वारा ठगे जाने को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं बार-बार ठगे जा रहे हैं अनियमित कर्मचारी हम विस्तार से एक एक घटनाक्रम आपको बताएंगे कि किस तरीके से बच्चों को उफनती नदी पार करना पड़ रहा है पढ़ाई के लिए तो आत्मानंद  स्कूलों को किस तरीके से बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा इसके अलावा महतारी वंदन योजना को लेकर क्या विवाद चल रहा है क्यों ओपी चौधरी ने भूपेश बघेल को चैलेंज किया और भूपेश बघेल उस चैलेंज को किस तरीके से स्वीकारा यह सब बताएं उससे पहले आज सबसे पहले बता देते हैं कि कांग्रेस ने जन आंदोलन की बड़ी तैयारी की है और  कहा जा रहा है कि बलौदा बाजार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ही किया गया है याद कीजिए आप बलौदा बाजार में किस तरीके से सतनामी समाज के प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें हुई थी किस तरीके से एसपी कार्यालय जला दिए गए थे। ऐसी घटनाओं को रोकने सरकार अब मुस्तैद दिखाई देती है 

तब ऐसे में अनियमित कर्मचारियों के सामने क्या रास्ता है क्योंकि सत्ता अपनी बातों से मुकर रही है जब विपक्ष में थे भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी तब उनके नेता किस तरीके से भूपेश सरकार के अत्याचार को लेकर अनियमित कर्मचारियों के पंडालों में जाते थे और सत्ता आने पर उन्हें नियमित कर देने का वादा करते थे उस दौर में रमन सिंह से लेकर जो मोहन सेठ है मनत सेठ है सब तरह के भाजपा के नेता इन अनियमित कर्मचारियों के मंचों पर जाकर उनके नियमितीकरण की मांग को स्वीकार करते थे लेकिन सात माह बीत गए अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं अनियमित कर्मचारी और वे बड़े प्रदर्शन की तैयारी में उससे पहले वे धरना प्रदर्शन कर रहे हैं निमित कर्मचारी संघ के पदाधिकारी ने क्या कहा पहले यह सुन लीजिए छतीसगढ़ प्रमित कर्मचारी फेडरेशन प्रदेश के शासकीय कार्याल में का अमित कर्मचारियों की निमक निकाले गए कर्मचारियों की बहाली न्यूनतम न्यून वेतन पाने वाले कर्मचारी को न्यूनतम वेतन देने अंशकालीन कर्मचारी को पूर्ण कालीन करने एवं और स सि ठेका प्रथा सेवा प्रदाता समूह समिति के माध्यम से कर्मचारियो को भाग में रखने जैसे मुद्दे को लेकर के कल 20 जुलाई 2024 को ध्यानाकर्षण रैली कर रहा है इसके माध्यम से हम अपनी बातों को मजबूती से शासन प्रशासन के समक्ष रखेंगे तब ऐसे में क्या अनियमित कर्मचारी इस सरकार के द्वारा भी ठगे जाएंगे क्योंकि लगातार रमन सिंह जब सत्ता में थे उस समय से अनियमित कर्मचारी अपनी मांग कर रहे हैं भूपेश बघेल और पूरी कांग्रेस उनकी मांग को स्वीकार करने का वादा करते हुए सत्ता में आई थी लेकिन साल उसने भी कुछ नहीं किया केवल कुछ कागजी कारवाही की बात करते रही लेकिन अनियमित कर्मचारियों का कुछ नहीं हुआ तब अनियमित कर्मचारी छह सात माह इस नए सरकार का इंतजार करते रहे इस विष्णु देव साय की सरकार के वादों का इंतजार करते रहे और अब उनका शब्द टूटने लगा है तो दूसरी तरफ कई तरह के वादे किए थे विधानसभा जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी में में उसमें से एक बड़ा वादा था मतारी वंदन योजना जिसके तहत हर शादीशुदा महिला को 1000 देने की बात कही गई थी साल में 12000 लेकिन सत्ता में आने के बाद कुछ नियम बना दिए गए और उस नियम के तहत लाखों महिलाओं को इस लाभ से वंचित कर दिया गया और अब नया विवाद यह शुरू हो गया है कि क्या बीपीएल या निम्न आय वाले परिवार की सभी महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है और इसे लेकर ओपी चौधरी ने कांग्रेस के आरोप पर कह दिया कि वे तैयार हैं यदि महिलाएं ला दे कि जो वंचित हैं और भूपेश बघेल ने इसे स्वीकार करते हुए यहां तक कह दिया कि गांव क्यों जाए आइए रायपुर शहर में आप रहते हैं राय शहर से ही कुछ वार्डों में जाकर पता कर लेते हैं यह चैलेंज क्या ओपी चौधरी स्वीकार करेंगे ओ पी चौधरी इन दिनों सुपर सीएम कहलाते हैं और उन्होंने नौकरी को लेकर क्या कुछ कहा यह भी किसी से छिपा नहीं है 2 साल में 1 लाख लोगों को नौकरी देने का वादा किया है भारतीय जनता पार्टी ने।और ओपी चौधरी के पास जब युवा पहुंचे तो वे किस तरीके से जवाब दिए यह भी किसी से छिपा नहीं है नौकरी नहीं है फंड नहीं है वगैरह वगैरह कई तरह की बात उन्होंने कर दी और इसे लेकर विवाद भी मचा है युवाओं में आक्रोश भी है तब महतारी वंदन योजना को लेकर भूपेश बघेल ने जो चैलेंज किया है क्या ओपी चौधरी उसे स्वीकारें कहना मुश्किल है राजनीति में इस तरह का खेल चलता रहता है तब आत्मानंद स्कूल को लेकर भी तो शायद सरकार घिरी हुई है क्योंकि भूपेश बघेर ने जिस तरीके से आत्मानंद स्कूल बनाकर पढ़ाई के क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा काम किया था अब उन स्कूलों को पीएम श्री योजना में शामिल किया जा रहा है यही नहीं इस उमस के दौरान भी बारिश का मौसम है उमस होता है बच्चों की जो क्लासे लगाई जा रही उसमें कहीं किसी तरह की सुविधाएं भी नहीं है और परिपत्र पर परिपत्र जारी किया जा रहा है आत्मानंद स्कूल के प्राचार्य द्वारा इस हम फिर कभी विस्तार से बात करेंगे क्योंकि यह बड़ा महत्त्वपूर्ण काम है शिक्षा लेकिन दूसरी तरफ खुद सरगुजा क्षेत्र में और कई क्षेत्र होंगे अभी जो वीडियो आए हैं वे सरगुजा क्षेत्र के गोरेला पेंड्रा मरवाही जिले की है जहां बच्चों को उफनती नदी में स्कूल जा के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है आप खुद सोचिए कि उनके अभिभावक किस तरीके से चिंतित होंगे लेकिन सरकार का अपना रवैया है मंत्री कुछ कहते हैं सत्ता कुछ बताती है ऐसी परिस्थिति में महिलाओं को लेकर एक बड़ी गारंटी दी गई थी 500 रप में सिलेंडर राजस्थान साथ में ही चुनाव हुए थे साथ में ही सरकार बनी है वहां शुरू हो गई है लेकिन अभी तक छत्तीसगढ़ में इसकी कोई सु गाहट प्रशासनिक तौर पर दिखाई नहीं दे रही तो क्या नगरी निकाय चुनाव के पहले शहर सरकार बनाने के नाम से इस योजना को अभी रोक दिया गया है और नगरी चुनाव के लिए वोट बैंक बनाने इस योजना की घोषणा की जाएगी कहना मुश्किल है क्योंकि जिस तरीके से साय सरकार चल रही है वह सब काम तो मोदी शाह के इशारे पर कर रही है कांग्रेस ने तो इसे रिमोट कंट्रोल वाला सरकार बता दिया है यहां तक कि मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा है निगम मंडल आयोग की नियुक्ति को लेकर कार्यकर्ता आक्रोशित है उसकी भी नियुक्ति नहीं हो रही तब देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार विधानसभा में किस तरीके से कांग्रेस के सवालों का जवाब देती है विधानसभा घेराव को किस तरीके से रोकती है और कर्मचारियों में जो आक्रोश है उसे कैसे समाधान करती है ।

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https://youtu.be/2eeHzLliMBA?si=jd-1nsoCQE_7xRsx

शनिवार, 4 अप्रैल 2026

बीजेपी में पल रहे खतरनाक लोग


बीजेपी में पल रहे खतरनाक लोग
 

 लगता है भारतीय जनता पार्टी और उनसे जुड़े लोग 2024 के चुनाव परिणाम से भी सबक लेने को तैयार नहीं है 240 सीट में सिमट गई भाजपा को शायद अब भी लगता है कि नफरत की दुकान लगाकर ही वे सत्ता हासिल कर सकते कोई विजन नहीं है उनके पास सिवाय हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का इसलिए धार्मिक नगरी को लेकर इन दिनों भारतीय जनता पार्टी बुरी तरीके से फंसी हुई है तो दूसरी तरफ 240 सीट आने की बौखलाहट भी दिखाई देने लगी है हालांकि बद्रीनाथ हार जाने के माले में भारतीय जनता पार्टी के लोगों को सांप स गया है लेकिन जब अयोध्या में पराजय मिली थी तो किस तरीके से विष बमन किया गया था वहां के लोगों को गालियां दी गई थी वह भी किसी से छिपा नहीं तो राहुल गांधी ने जो मोहब्बत की दुकान लगाने का आह्न करते हुए देश भर में यात्रा की थी क्या उसका असर है यह और इस असर को देखते हुए भाजपा के नेता कुछ ज्यादा ही बख लाने लगे हालांकि संघ ने भारतीय जनता पार्टी यानी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार को लेकर कई जगह बातें कही लेकिन उन्होंने नाम कभी नहीं लिया सत्ता के अहंकार की बात करते रहे लेकिन अब जो मामला सामने आया है वह साफ संके दे रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के जो कर्ता धरता है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मंसा क्या है क्योंकि लगातार नफरत की दुकान लगाने वालों को प्रमुख पदों पर बैठाया जाता है किस तरीके से भारतीय जनता पार्टी में हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का खेल चल रहा है और उसे आरस का किस तरीके से समर्थन प्राप्त है यह कहना अब मुश्किल नहीं रह गया क्योंकि आरएसएस की चुप्पी और मोदी शाह का खेल क्या इस देश को सचमुच आग लगा देना चाहती है यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पहले भी पहले भी यानी कल जब सुभेंदु अधिकारी ने साफ तौर पर कहा वे विपक्ष के नेता है पश्चिम बंगाल में मोदी शाह के नाक के बाल है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा और सुभेंदु अधिकारी ने सीधे-सीधे कहा कि भाजपा में अल्पसंख्यक मोर्चा को बंद कर देना चाहिए सबका साथ सबका विकास का नारा बेकार है इसी तरीके से क्या कुछ कहा पहले सुन लीजिए उनके मुह से बोले राष्ट्रवादी मुस्लिम अना बोले का साथ सबका विकास और बोल बोना बोल जो हमारे साथ हम उनका साथ जो हमारी साथ जो हमारे साथ जो हमारी साथ हम उनका साथ सबका साथ सबका विकास बंद करो नो नीड संल मोर्चा जय श्री राम तब क्या भारतीय जनता पार्टी ऐसे लोगों को हटाए गी हालांकि सुभेंदु अधिकारी ने कहा यह व्यक्तिगत सोच है और यदि यह सुभेंदु अधिकारी का व्यक्तिगत सोच भी है तो किस तरीके की सोच को सोच भाजपा में फूल रहा है यह क्या किसी को बताने की जरूरत है क्योंकि सुभेंदु अधिकारी ने जिस लहजे के साथ यह बात कही है वह इस देश के लिए बेहद ही खतरनाक है और भारतीय जनता पार्टी इस पर यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती कि यह सुभेंदु अधिकारी की सोच है और यदि सुभेंदु अधिकारी की सोच है तो वह पार्टी में इतने बड़े पद पर कर क्या रहे हैं हालांकि इससे पहले भी जब जूता मारो सालों को या गोली मारो सालों को जैसे नारे लगाए जा रहे थे उन लोगों को भी बड़े-बड़े पदों से नवाजा गया साधवी प्रज्ञा को तो टिकट तक दे दी गई थी और इस सांसद बनने के उत्साह में उन्होंने किस तरीके से महात्मा गांधी के खिलाफ अपशब्द कहे थे और जब बवाल मचा तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना पड़ा था कि वे प्रज्ञा को कभी माफ नहीं करेंगे इसके अलावा भी भारतीय जनता पार्टी के नेता समय-समय पर किस तरीके से विश् ममन करते हैं वह किसी से छिपा नहीं है 400 पार के नारे के साथ तो हेगड़े से लेकर राजस्थान के नेता तक कहने लगे थे कि 400 पार होगा तो हम संविधान बदल देंगे हिंदू राष्ट्र की घोषणा कर देंगे हालांकि पार्टी स्तर पर इस तरह के आरोपों का खंडन जरूर होता रहा लेकिन यह सभी लोग अब भी पार्टी में है प्रमुख पदों पर है उनका स्वागत सत्कार उतने ही ढंग अच्छे ढंग से किया जाता है तो क्या इस तरह के खतरनाक लोगों को भाजपा पाल नहीं रही है मोदी साहब पनाह नहीं दे रहे हैं तब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में यदि इस सोच को अमली जामा पहनाने की कोशिश करें जो पदों पर बैठे हैं तब सत्ता क्या करेगी आप खुद सोचिए कि किस तरीके से नफरत का खेल इस दौर में चल रहा है झूठ और अफवाह की राजनीति को साधते साधते किस कदर इस देश में नफरत फैलाया गया और अब धार्मिक पर्यटन को लेकर सत्ता की जो सोच है वह किस तरीके से डकैत की तरह हो गई है यह भी अब दिखने को मिलने लगा है चाहे अयोध्या का मामला हो बद्रीनाथ का मामला हो केदारनाथ का मामला हो या उज्जैन का मामला दिल्ली में तो केदारनाथ धाम बनाने को लेकर बवाल मचा हुआ शंकराचार्य को खुद सामने आकर इसकी आलोचना करनी पड़ी है तब सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार या भारतीय जनता पार्टी ऐसे खतरनाक लोगों को अपनी पार्टी से हका लेगी बाहर निकाल देगी देखना होगा !

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https://youtu.be/1fclYZfWWvI?si=0XeRUqlLYjRpiPMs


गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

रेत माफियाओं को खुले आम संरक्षण

रेत माफियाओं को खुले आम संरक्षण, आ गया नाम 


 क्या छत्तीसगढ़ में माफिया राज हावी होने लगा है क्या रेत माफियाओं के कहर के आगे जनप्रतिनिधि ही नहीं शासकीय अधिकारी भी नतमस्तक है दरअसल रेत की नीलामी के बाद पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने के बाद भी रेत खनन का काम बेतहाशा चल रहा है और क्या यह पूरा खेल उच्च स्तर पर चल रहा है यह सवाल इसलिए उठाये जा रहे है क्योंकि जिस तरीके से प्रतिबंध लगने के बाद भी छत्तीसगढ़ की नदियों से लगातार रेत का उत्खनन किया जा रहा है और हाईवा भर भर के सड़कों पर बेतहाशा दौड़ाई जा रही है जिससे लोगों की जान भी खतरे में आ गया है तब सवाल यह है  कि रेत माफियाओं के हौसले कितने बुलंद  है कि  धमतरी जिला पंचायत के उपाध्यक्ष जब एक कार्यक्रम से लौट रहे थे तो एक हाईवा तेज गति से आ रही थी और वे चपेट में आने से बाल-बाल बच गए हालांकि कई सारी घटनाएं हुई हैं छत्तीसगढ़ में इस दौर में जब हाईवा की चपेट में आकर लोग काल कलवी तक हुए हैं और लगातार शिकायत आ रही है कि कई खासकर धमतरी जिला महासमुंद जिला रायपुर जिला और बलौदा बाजार जिले से सर्वाधिक रेत की काला बाजारी की खबर आ रही है रेत के अवैध परिवहन को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं लेकिन जब प्रदेश के मुखिया के पास ही खनिज विभाग हो तब सवाल यह है कि क्या रेत माफिया का जो खेल चल रहा है अवैध उत्खनन का वह क्या मुख्यमंत्री के इशारे पर चल रहा है या रेत माफियाओं ने इतना अपना कद इतना बढ़ा लिया कि कारवाई करने में खनिज अधिकारियों के हाथ पैर काप जाते हैं छत्तीसगढ़ में रेत के अवैध उत्खनन का इतिहास यदि राज्य बनने के बाद देखा जाए तो याद कीजिए आप कि किस तरीके से जोगी शासन काल में कोई जैन और तिवारी के गठजोड़ ने किस तरह सी धमा चौकड़ी मचाई थी और उसके बाद डॉक्टर रमन सिंह के सरकार में भी चलता रहा केवल नाम बदल गया बाकी खेल उसी तरीके से चलते रहा और अब भी वही खेल चल रहा है भूपेश सरकार के दौरान भी रेत माफियाओं के गुंडागर्दी दादागिरी को लेकर सवाल उठते रहे और अब जब प्रतिबंधित समय बारिश के मौसम में नदियों में रेत उत्खनन प्रतिबंधित लगा कर दिया जाता है उस परिस्थिति में भी यदि बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन चल रहा है तो क्या इन्हें राजनैतिक संरक्षण है इन्हें अधिकारियों का संरक्षण और कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस खेल में कई जनप्रतिनिधि भी शामिल और लोगों को आशंका है कि यही स्थिति चलते रही तो कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है क्योंकि जिस ढंग से रेट माफिया ताकतवर होते जा रहे हैं वह आने वाले दिनों में प्रशासन और शासन दोनों के लिए मुश्किल हालात पैदा कर सकते हैं हालांकि चर्चा इस बात का भी है कि इस इन खेलों में कई जनप्रतिनिधि में सरपंच जिला पंचायत सदस्य या जनपद सदस्य और विधायक तक शामिल है तब देखना है कि जो धमतरी में घटना हुई है उसको प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है हालांकि धमतरी में एक और ऑडियो वायरल हो रहा है एक अधिकारी है नायब तहसीलदार ज्योति सिंह और जिला पंचायत के सदस्य खूब लाल ध्रुव के जो बहस हुई है इसी रेत मामले को लेकर वह खूब वायरल हो रहा है लेकिन अभी तक कारवाही नहीं रही है और कहा जा रहा है कि कारवाही के नाम में केवल खाना पूर्ति होती है और छोड़ दिया जाता है जुर्माना लिया जाता है नहीं लिया जाता है एक अलग विषय हो सकता है लेकिन जिस तरीके से रेत माफियाओं ने जाल बिछाया और रात भर बेहिसाब अवैध उत्खनन किया जाता है और हाईवा में भर भर के तेज गति से दौड़ाई जाती उससे आम लोगों के जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा है देखना है कि शासन अब धमतरी में जो घटना हुई है धरना दिया गया था रात उसे लेकर कितनी गंभीरता से लेती है और कारवाई करती है 

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https://youtu.be/IFR2gI8GHFE?si=_u1Ui_f0hA3P2GeO!

बुधवार, 1 अप्रैल 2026

क्या बिजली दरों में बढ़ोतरी अदानी को फ़ायदा पहुँचाने

क्या बिजली दरों में बढ़ोतरी अदानी को फ़ायदा पहुँचाने 


 छत्तीसगढ़ में एक तरफ देश के सबसे बड़े उद्योगपति और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र गौतम अदानी के काम को गति मिली है तेज विस्तार हो रहा है खासकर पावर सेक्टर को लेकर तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के लघु उद्योगों खासकर जो स्टील क्षेत्र के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग है री रोलिंग मिल है इन पर बंद होने का खतरा मंडराता जा रहा है और तब सवाल यह है कि क्या इन दोनों खबरों में कोई तालमेल है यह सबसे बड़ा सवाल क्योंकि जिस तरीके से छत्तीसगढ़ की सरकार सत्ता में आते ही यानी डबल इंजन की सरकार बनते ही जिस तरीके से छत्तीसगढ़ में अडानी की भूमिका बढ़ गई है हसदेव काटे जाने लगे राजस्थान को बिजली देने के लिए जमकर कटाई हुई है और उसे लेकर जबरदस्त आंदोलन भी हुआ है तो पावर प्लांट के विस्तार के लिए भी जन सुनवाई में जो अफसरों की भूमिका है वह भी संदेह के घेरे में है किसान जमीन नहीं देना चाहते सरकार सरकारी जमीन दे दी लगातार विरोध हो रहा है रायपुर के तिल्दा ब्लॉक स्थित अडानी पावर प्लांट की बात हो या रायगढ़ में स्थित अडानी पावर प्लांट की बात तिल्दा का जो प्लांट था पहले जीएमआर ग्रुप के पास था उसे नी ने खरीद लिया अधिग्रहित कर लिया अब उसका विस्तार हो रहा है जिसे लेकर जो जन सुनवाई हुई उसमें जबरदस्त हंगामा मचा विरोध हुआ लेकिन सरकार का दावा है कि सब कुछ ठीक हो गया है और जन सुनवाई में अदानी के विस्तार को लेकर लोग खुश है हकीकत क्या है कहना बेहद मुश्किल है तो दूसरी तरफ सरकार ने बिजली के दरों में बढ़ोतरी की है आम आदमी को तो इससे दो चार होना पड़ ही रहा उन्हें ठीक से बिजली नहीं मिल रही है लगातार बिजली कटौती और अनियमित बिजली सप्लाई को लेकर कई जगह आंदोलन हुए हैं बिजली दफ्तर के कर्मचारियों को भागना तक पड़ा तो उद्योग समूह से जुड़े जो उद्योगपति हैं वे भी अचानक बढ़ोतरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं मुख्यमंत्री को ज्ञापन तक सौप गए हैं लेकिन अभी तक इस माम में कोई विचार नहीं होने से उद्योगपतियों में बेचैनी खबर यह भी है कि बिजली दर में बढ़ोतरी से परेशान कई उद्योगों ने अन्य विकल्पों की तलाश भी शुरू कर दी य विकल्प क्या हो सकते हैं सीधी सधी सी बात है कि जिन्हें उद्योग चलाना है वह सस्ती बिजली के लिए निजी जो कंपनियां है उनके पास जाएगी उनसे समझौता करेगी कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में जो कंपनी है सरकारी वह बिजली दे रही है वह सब टैक्स मिलाकर ₹ 60 पैसे पर यूनिट उद्योगों को बिजली दे रही है इस बढ़ोतरी के बाद जबकि यही पर यूनिट बिजली निजी कंपनी से तमाम टैक्स के बाद भी रुप प्रति यूनिट में मिल रहा है तब क्या महंगी बिजली खरीदेंगे और उद्योग क्या निजी कंपनी की ओ नहीं जाएगा और यह निजी कंपनी कौन है स्वाभाविक रूप से गौतम अडानी की कंपनी है जिससे बातचीत चल रही है और उद्योगपतियों ने नाम लेकर कहा कि वे अडानी से बिजली लेने को मजबूर हो जाएंगे यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो तो क्या सरकार ने पिछले दरवाजे से अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए बिजली दर में बढ़ोतरी की है यह सबसे बड़ा सवाल और यह सवाल इसलिए उठ रहा है क् कि लगातार पूरे देश में जिस तरीके से अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए मोदी सत्ता लगी रही हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई सेबी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे और मित्र प्रेम इस कदर हावी रहा कि संसद तक में हंगामा हुआ और आरोप तो यहां तक लगाया गया कि कई सदस्यों की सदस्यता सिर्फ इसलिए समाप्त कर दी गई क्योंकि अडानी को बचाना था तब ऐसी परिस्थिति में क्या छत्तीसगढ़ की सरकार अब पूरी तरीके से एक्सपोज हो गई है कि अडानी को वह किस हद तक मदद कर रही है सवाल सिर्फ हसदेव की कटाई का नहीं है सवाल राजस्थान को उजाला देकर छत्तीसगढ़ को अंधेरे में करने का भी है सवाल अदानी पावर प्लांट के विस्तार का नहीं है सवाल तो उस जन सुनवाई का है जो फर्जी करार दिया जाता है बाद में किसानों की सहमति के बगैर भूमि उद्योगों को सौंप दी जाती है दादागिरी के साथ उद्योग कब्जा कर लेते हैं कई सारे मामले हैं मोनेट वंदना कई कई लोगों पर इस तरह के आरोप लगते रहे कि उन्होंने जबरिया जमीन कब्जा की है सरकारी जमीन भी और निजी जमीन तब ऐसे में जो तब री रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी का कहना है कि एका एक बिजली की कीमत बढ़ा देने से लागत 300 से 500 रप टन बढ़ गया तो मिनी स्टील प्लांट के महासचिव मनीष धुप का कहना है कि य उद्योगों के लिए गंभीर मसला है और उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार करेगी उद्योग सीधा सरकार से बैल लेना नहीं चाहते इसलिए जब वह प्रेस के सामने बोलती है तो कुछ और बोलती क्योंकि इस दौर में जिसने भी अदानी समूह को फायदा पहुंचाने की सत्ता की कोशिश के खिलाफ आवाज बुलंद की है उसके खिलाफ क्या कुछ नहीं हुआ या किसी से छिपा नहीं इधर चर्चा इस बात की भी है कि निजी बिजली कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ही यह सारा खेल खेला गया है रचा गया है और निजी कंपनी में अडानी ऐसा है जो यहां बिजली सप्लाई आसानी से करेगा ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या उद्योगपतियों के पास जब अदानी से बिजली खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं है तब 3स गढ़ की जो विद्युत कंपनी है जो बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन कर रही है उन बिजली को क्या दूसरे राज्यों में बेचा जाएगा किस तरीके का घोटाला डॉक्टर रमन सिंह के कार्यकाल के दौरान सामने आया था जिंदल को लेकर और दूसरे राज्यों को बिजली देने को लेकर किस तरह के घोटाले थे उनकी कोई जांच वांच कभी नहीं हुई केवल आरोप तक सीमित होकर रह गए थे तब ऐसी परिस्थिति में जो स्थिति निर्मित हो रही है वह साफ संकेत दे रही है कि छत्तीसगढ़ में जो डबल इंजन की सरकार है वह अदानी के लिए सब कुछ कर लेना चाहती है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/jInmVvth5DM?si=nMtS0YPep2NyD31_

मंगलवार, 31 मार्च 2026

याद है वर्दी वाली खलनायिका


 याद है वर्दी वाली खलनायिका 

यह है वेद मती दरियो वर्दीधारी इनकी वर्दी की धमक अपराधियों पर कितनी है यह कहना कठिन है लेकिन इनके खिलाफ पीड़ित ही प्रताड़ित थाने में रिपोर्ट करने के लिए आने वालो को ही धमकाने में बहुत मजा आता है राजधानी के इकलौते महिला थाना के प्रभारी थी तब  इनके सामने अच्छे अच्छों की गिग्गी बन जाती और दहेज प्रताड़ित द्वारा वसूली का नया रिकॉर्ड कायम करने की भी चर्चा रही और यही नहीं इनके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा मामले थे और घेरा घारी करके  जब एसीबी ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया तो इनकी ठसक देखने लायक थी ऐसा नहीं है कि एसीबी ने सिर्फ इस महिला वर्दीधारी जो प्रताड़ित लोगों के लिए खलनायिका बन चुकी थी को ही गिरफ्तार किया बल्कि धमतरी जिले में भी एसीबी ने कारवाही करके तहसीलदार को पकड़ा हमने विस्तार से बताया कि किस तरीके से इसके पहले एसीबी ने भागीरथ खांडे को गिरफ्तार किया था जो एसडीएम थे अब तक के सबसे बड़े अधिकारी को चपेट में लिया था एसीबी ने लेकिन वेद मती दरियों की अपनी कहानी है राजधानी के इकलौते महिला थाना के इस प्रभारी रही  के खेल को आप सुनेंगे तो चौक जाएंगे कि किस तरीके से जो पीड़ित पक्ष उन्हीं से यह पैसा वसूल की थी और कहा तो यहां तक जाता है कि यह प्रताड़ित पक्ष से यानी जो प्रताड़ित करने वाले हैं या जो अपराधी पक्ष है उनसे सेटिंग कर लेती थी और यह खेल बड़े लंबे समय से चल रहा था लगातार एसीबी को शिकायत मिल रही थी लेकिन और ऐसा नहीं है कि इसकी खबर जिले के अफसर या नेताओं को नहीं थी कई नेता भी इसको अपनी तरह से दरियो से अपने हित के काम के लिए उपयोग भी करते थे कहा तो यहां तक जाता है कि मंत्री तक इनकी पकड़ थी इसमें कितनी सच्चाई हम नहीं कह सकते लेकिन जिस तरीके से उसके खिलाफ लगातार आरोप लग रहे थे मीडिया में भी खबरें छप रही थी कि महिला थाने में किस तरह की भर्रा साही चल रही है उसके बाद भी पुलिस कप्तान इसे नहीं हटा रहे थे तो क्या उनका भी संरक्षण था या राजनीतिक दबाव की वजह से पुलिस कप्तान कुछ नहीं कर पा रहे थे यह एक अलग कहानी है लेकिन मैडम दरियो के नाम से ना केवल महिला थाना आने वाले थर थर कापते थे चाहे वे रिपोर्ट लिखाने ही क्यों ना आए हो और महिला परामर्श केंद्र जहां घरेलू झगड़े को निपटाया जाता है वहां भी इनकी धमक जबरदस्त ी कहा जाता है कि परामर्श केंद्र में जो महिला परामर्श वाली हैं जो महिलाओं को परामर्श देती हैं घरेलू विवाद निपटा हैं ऐसे लोगों में भी इनकी धमक थी और उनकी रिपोर्ट के विपरीत जाकर काम करती थी और वे महिला परामर्श में बैठने वाली महिलाएं समाजसेवी का चुप हो जाती थी क्योंकि इनकी अपनी धमक थी कहा जाता है कि मोआ की एक पीड़ित दहेज प्रतारक महिला ने एसीबी से शिकायत की और इस बात के लिए तैयार हो गई कि हां रिश्वत की राशि को लेकर वह एबी के कार्यशैली को अपना लेगी और इसी तरह से जब प्रीति बंजारे पैसा लेकर पहुंची तो एसीबी की टीम ने वेद मती दरियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया 

कहना बेहद कठिन है क्योंकि इस दौर में राजनीतिक पहुंचने यही सब तो किया तब जो धमतरी में गिरफ्तार हुए हैं एसीबी की टीम ने जिसे गिरफ्तार किया है वे तहसीलदार है कीर सागर बघेल यही नाम है उनका एक किसान से नामांतरण को लेकर उन्होंने रिश्वत मांगी थी किसान बहुत गिड़गिड़ा है इनके सामने लेकिन वे साफ कह दिए थे कि पैसे के बगैर कोई काम नहीं होगा और यही वजह है कि उस किसान ने त्रस्त होकर एसीबी में शिकायत की थी और एसीबी ने पूरी टीम के साथ इस तहसीलदार बघेल को रंगे हाथों की रफ्तार की हमने आपको बताया था कि किस तरीके से दो हफ्ते पहले ही सूरजपुर क्षेत्र में एसडीएम भागीरथी खांडे को एसीबी की टीम ने पकड़ा था और खुद तो वे पकड़ाई अपने साथ वे बाबू चपरासी सबको ले डूबे थे देखना है कि इस मामले में क्या कुछ होता है क्योंकि जिस तेजी के साथ सरकार बद है उसी तेजी के साथ भ्रष्टाचार के मामले लगातार आ रहे हैं और इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मुख्यमंत्री के जनदर्शन में पहुंचने वाले ज्यादातर लोग इसी तरीके से प्रताड़ित लोग हैं शासन प्रशासन से प्रताड़ित लोगों की संख्या बड़ी बढ़ते जा रही है और मुख्यमंत्री इलाज के लिए पैसा देकर ट्राई साइकिल देकर वाहवाही लूटने में लगे हैं कि जन दर्शन में पहुंचने वालों की तकलीफें दूर की जा रही है लेकिन हकीकत तो यह है कि जिस तरीके से राजनैतिक हस्तक्षेप के साथ भ्रष्टाचार ही नहीं अफसरों की मनमानी भी बड़ी है उससे आम लोगों की तकलीफ बढ़ चुकी है देखना है कि इन तमाम मामलों में जो मुख्यमंत्री जनदर्शन में भी शिकायत लेकर आ रहे हैं उन पर किस तरह के कारवाई होती है !

Vidio देखें 


https://youtu.be/T-xppzHlF7k?si=U3QhOp0znCBkFM7P

सोमवार, 30 मार्च 2026

जब चौधरी ने बताया था दो करोड़ को चौबीस करोड़ बनाना

जब चौधरी ने बताया था दो करोड़ को चौबीस करोड़ बनाना 


देश के गृहमंत्री अमित शाह के लाड़ले और छत्तीसगढ़ प्रदेश के वित्त मंत्री ओ पी चौधरी का पैसा कमाने का अपना फंडा है,  2 करोड़ रुपया को  करोड़ रुप बना लेते है, और हो सकता है कि अमित शाह के लाड़ले ओपी चौधरी इसलिए बने हैं क्योंकि उनके पास पैसा कमाने का सभी तरह का फंडा है कहा जाए तो भी गलत नहीं होगा

 पिछले दिनों साला उत्सव के कार्यक्रम में जब ओपी चौधरी ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बताया बच्चों को या सिखाया कि किस तरीके से उन्होंने दो करोड़ रुपए को 24 करोड़ बना दिया । शाला उत्सव के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी ओपी चौधरी की बात सुनकर ताली बजाते नजर आए दरअसल छत्तीसगढ़ में हर साल  शाला  प्रवेश उत्सव का कार्यक्रम चलता है जगह-जगह प्राय सभी स्कूलों में जनप्रतिनिधि विधायक मंत्री इसी तरह के कार्यक्रम में व्यस्त रहते  है बच्चों का स्वागत कर रहे हैं सम्मान कर रहे हैं ऐसे ही एक कार्यक्रम बगीचा में हुआ जो मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है और यहां ओपी चौधरी ने किस तरीके से पैसा कमाने का फंडा बताया वह बच्चों को क्या सीखना चाहिए यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए है क्योंकि ओपी चौधरी ने बताया कि बगैर शिक्षकों के या शिक्षकों के अभाव में उन्होंने पढ़ाई को  प्राथमिकता देते हुए आईएएस बने यह ओपी चौधरी बता रहे थे प्रदेश सरकार के सबसे होशियार मंत्री माने जाने वाले ओपी चौधरी ने जब बताया कि किस तरीके से शिक्षकों के अभाव में वे पढ़ाई कर रहे थे वे बच्चों से कह रहे थे कि पढ़ाई शिक्षा ही जीवन में काम आता है क्योंकि राइस मिल लगाने से लेकर दूसरे तमाम धंधे के लिए पैसा चाहिए अगर लाइफ में आप कुछ करना चाहता जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता हो तो शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाओ आप क्रेसर खोले जाया तो दिक्कत आ सकते है राइस मिल खोले जाया तो पैसा नहीं है तो घर में नहीं खोल सका आज पेट्रोल पंप चालू कर किया तो एक सामान्य घर के लड़का नहीं कर सके लेकिन पढ़ाई आप मन जरूर कर सकते हो और पढ़ाई के माध्यम से जीवन लापन के बदल सका था लेकिन शिक्षा के लिए पैसा नहीं पैसे की जरूरत नहीं होती केवल मन लगाने की जरूरत होती है और उन्होंने बताया कि जब वे 2018 का चुनाव हार गए तो उन्होंने किस तरीके से अपने दोस्तों से उधारी लेकर शेयर मार्केट का गहन अध्ययन करके दो करोड़ रुपए को 24 करोड़ रुपए बनाया एक तरह से कहा जाए तो शेयर मार्केट को लोग आम बोलचाल की भाषा में सट्टा बाजार भी कहते हैं वहां पैसा लगाकर ओपी चौधरी ने कई गुना किया अपने पैसे को उधारी उन्होंने चुकाया नहीं चुकाया इस पर उन्होंने कोई बात नहीं की लेकिन यह गजब का फंडा है पैसा कमाने का जो बच्चों को बताया जा रहा था कि शेयर मार्केट में पैसा लगाकर कई गुना ज्यादा पैसा कमाया जा सकता है।

जब कलेक्ट्री की नौकरी छोड़ दे रहे तो आदमी मन सोचे कैसे जीवन यापन करी का करी कैसे करी इकोनॉमिक समय मो थोड़ ठीक ठाक पकड़ रही तो मैं स्टॉक मार्केट के पढ़ाई करो 20089 से देखो थोड़ बहुत का का का होते करके तो जब मैं नौकरी छोड़ दे तो स्टॉक मार्केट के बहुत गहनता के साथ अध्ययन करें और दो करोड़ रुपया में उधारी ले अलग अलग दोस्त मंे मिला जुला के और चार साल में सरस्वती मां के ही कृपा से दो करोड़ रुप 24 करोड़ रुपया बना दो करोड़ रुप 24 करोड़ रुप बना हालाकि ओपी चौधरी की चौधरा हट को लेकर कई तरह की चर्चा है और कई लोग तो उन्हें सुपर सीएम भी कहते हैं खासकर आईएएस आईपीएस लाबी में ओपी चौधरी की धमक है और कहा तो यहां तक जाता है कि ओपी चौधरी ही तमाम प्रशासन को चलाते हैं वि देव साय को मुख्यमंत्री बनाया है मोदी शाह ने लेकिन ओपी चौधरी को तो चुनाव प्रचार के दौरान ही अमित शाह ने बड़ा आदमी बनाने की बात कह दी थी तब शायद अमित शाह को यह बात मालूम नहीं रहा होगा कि ओपी चौधरी तो बड़ा आदमी बन चुके हैं उन्होंने शेयर मार्केट से दो करोड़ को 24 करोड़ बना दिया अब देखना है कि इस बयान को लेकर ओपी चौधरी का जो वीडियो है वह खूब वायरल हो रहा है देखना है कि आने वाले दिनों में स्कूली बच्चे इस पैसा कमाने के फंडे को किस तरीके से लेते हैं!

वीडियो देखे 


https://youtu.be/mnR6Vhd0qro?si=I5_A6zPiWKL7AYcC

रविवार, 29 मार्च 2026

अब इस कोल घोटाले पर बिफरे ननकीराम, सीबीआई जाँच की माँग

अब इस कोल घोटाले पर बिफरे ननकीराम, सीबीआई जाँच की माँग 


 माल ढुलाई के लिए यात्रियों को परेशान करने वाले रेल मंत्रालय क्या अब कोयला घोटाले में शामिल हो गया है यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस तरीके से छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेनों को रद्द किया जा रहा है उसे ले कर लोगों में बेहद आक्रोश है लेकिन 10 सीट भारतीय जनता पार्टी को देने के बाद भी यहां के सांसदों ने इस मामले में अपने मुंह में दही जमा रखा है कहा जाए तो गलत नहीं होगा 

पिछले छ महीने बल्कि उससे अधिक दिनों से यहां के जो यात्री है जो रेलवे में सफर करते हैं वह परेशान है लेकिन अब कल जो मामला सामने आया है कि कोयला ढुलाई के नाम पर किस तरीके से कोल माफिया सक्रिय हैं और इस पूरे खेल में ना केवल रेल प्रशासन एचएससीएल बल्कि राज सरकार के भी कई अधिकारियों और नेताओं के शामिल होने की खबर है 

इस मामले को लेकर पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कवर ने रमन सरकार में गृह मंत्री थे और उन्होंने अपनी ईमानदारी के चलते रमन सरकार के एसपी और कलेक्टर को वसूली बाज और कमीशन खोर ही नहीं कहा था बल्कि 10 हजार में थाना बिकने की भी बात भरी विधानसभा में कही थी और अब उसी ननकी राम कवर ने कोयला घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी से मुलाकात करके पूरे मामले की जानकारी देते हुए सीबीआई जांच की मांग की है और उनके इस मांग से प्रदेश सरकार के कई अफ़सर और नेताओं में भी हड़कंप मचा हुआ है कहा जाए तो गलत नहीं होगा

 दरअसल मामला सरबिया स्टेशन का है जहां खदान से निकलने वाली कोयले को मालगाड़ी के जरिए ढुलाई करते हुए पहुंचाया जाता है और ज्यादा माल यानी कोयला ज्यादा लोड कर देने की वजह से डंप किया जाता है एडजस्टमेंट किया जाता है समायोजन किया जाता है यह रेलवे का दावा है लेकिन इस डंप कोयले की तलाई वजन या फिर यह कहां जा रहा है किसी को नहीं पता चलता और कहा जा रहा है कि इस डंप कोयले को फिर डंपर के माध्यम से इधर उधर पहुंचाया जाता है और इसी में पूरा खेल होता है इस मामले की जांच लंबे समय से ननकी राम कवर करते रहे और उन्होंने इस मामले को लेकर वहां धरना भी दिया था और कहा जाता है उसके धरने के बाद रेलवे प्रशासन ने जांच के आदेश तो दिए लेकिन अब सरबिया स्टेशन में माल डंप होना बंद हो गया लेकिन ननकी राम कवर ने सवाल उठाया है कि यदि सब कुछ सही था तो फिर डंप क्यों बंद किया गया क्यों पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल रही यानी इसमें बहुत लंबा चौड़ा घोटाला और इस मामले को लेकर कल ननकी राम कवर ने जी किशन रेड्डी से मुलाकात भी की लाखों मेट्रिक टन कोयले की हेराफेरी और यही नहीं इस सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि ज्यादा लोड लादने की वजह से रेलवे ट्रैक भी खराब हो रहे हैं रेलवे को भी नुकसान हो रहा है और किसकिस तरह के नुकसान हो रहे ये सब सीबीआई जांच में पता चलेगा लेकिन इस मामले को लेकर नंद की राम कवर ने साफ तौर पर जी किशन रेड्डी यानी केंद्री मंत्री से कहा कि इसकी सीबीआई जांच की जाए उन्होंने जितने भी मामले उठाए हैं चाहे इसके पहले कोयला घोटाला हो शराब घोटाला हो या पीएससी परीक्षा घोटाला हो सब में कार्रवाई चल रही है और कई अफसर जेल की सलाखों में है कई नेता जेल की सलाखों में है कई दलाल से जेल की सलाखों में है इसलिए इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए क्योंकि इस पूरे खेल में ना केवल रेल मंत्रालय बल्कि कोयला उत्पादन कंपनी और यही नहीं राज्य सरकार के कुछ अफसर भी शामिल हैं यह ननकी राम कवर का दावा है देखना है कि इस मामले को लेकर किस तरह की जांच शुरू होती है लेकिन ननकी राम कवर के सीधे केंद्रीय मंत्री से मिल लेने को लेकर भी पार्टी में हलचल है।

वीडियो देखें 


https://youtu.be/FL7uDUlMjQY?si=zT6txdNU8YWhkqKD

शनिवार, 28 मार्च 2026

जब धर्मजीत ने गधा गंवार कहा

 जब धर्मजीत ने गधा गंवार कहा 


सत्ता का नशा जब सर चढ़कर बोलता है तो वह किसी बात की परवाह नहीं करता ना तो उसकी जुबान पर ही कोई कंट्रोल रहता है और ना ही तेवर पे और शायद यही वजह है कि जल जीवन मिशन में घपले घोटाले को लेकर विधानसभा में जब चर्चा चल रही थी तब भारतीय जनता पार्टी के विधायक धर्म जीत सिंह ने ठेकेदारों को लेकर ऐसी बात कह दी जो हैरानी की बात है चौकाने वाली बात है 

उन्होंने कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के आ कहां कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के सब गए उनके भीतर का ठाकुर इसलिए जाग गया कि कितने सालों के बाद उनकी पार्टी को सत्ता मिली धर्मजीत सिंह कभी कांग्रेस में हुआ करते थे और उसके बाद जब जनता कांग्रेस बनी यानी जोगी कांग्रेस की नीव रखी गई तो धर्मजीत सिंह जोगी कांग्रेस चले गए लेकिन अमित जोगी से उनकी पटरी नहीं बैठी तो वे भारतीय जनता पार्टी में आ गए और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें टिकट दी वे चुनाव भी जीत गए काफी सीनियर है लेकिन है तो ठाकुर तब छत्तीसगढ़ विधानसभा में उन्होंने क्या कहा यह पहले विस्तार से सुन लीजिए 

कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के आ गए हैं आदरणीय अध्यक्ष जी इनके कारण ही पूरा जल जीवन मिशन लेप्स पोजीशन में है  सिर्फ बिलासपुर की बात नहीं कह रहा हूं इस सदन में  90 विधानसभा क्षेत्र में यह योजना दम तोड़ रही है उसमें दम देने का काम आपसे निवेदन है कि आप करिए करोड़ों रुपया की लागत है अगर उसम थोड़ा और पैसा देकर के उसको लागू हो जाए तो गांव गांव में हम लोग जाते हैं दौरे में लोग क्या करेंगे हम लोग क्या कर सकते हैं  घपले घोटाले में पूरा सिस्टम शामिल है क्या अधिकारी क्या मंत्री क्या ठेकेदार क्या बाबू क्या चपरासी सब कुछ शामिल है लेकिन गुस्सा धर्मजीत सिंह का है तो अपनी सरकार के मंत्री की बजाय या अधिकारियों की बजाय उन ठेकेदारों कर कहां के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के सब गए हैं इसम यह नहीं है कि धर्मजीत सिंह किस नेचर के व्यक्ति हैं वैसे तो बड़े सौम्य माने जाते हैं चेहरा मोहरा भी बड़ा शानदार है 

लेकिन भाषा क्या इस तरह की होनी चाहिए किसी के लिए भी क्या कोई भी ठेकेदार बन जाता है जल जीवन मिशन में निश्चित रूप से जबरदस्त घपला हुआ है अब तक नौ इंजीनियर निलंबित किए जा चुके हैं कई ठेकेदारों को भी सस्पेंड कर दिया है या उनके काम को रोक दिया है उनसे काम वापस ले लिया गया प्राय सभी जिले में सर्वाधिक तो जो शिकायत सामने आई है वह बिलासपुर संभाग में है तो धमतरी जिले में भी जमकर शिकायत हुई है कहा जा रहा है कि अधिकारियों को पैसा देकर ठेकेदारों ने काम पूर्ण होने का सर्टिफिकेट तक ले लिया है लेकिन धरातल में काम शुरू ही नहीं हुआ कई जगह तो काम हुए कई जगह तो पानी की सप्लाई लोगों को मिला लेकिन 15 दिन बाद बंद कर दिया गया कई जगह तो पाइपलाइन ही नहीं बची यानी आधे अधूरे काम को पूर्ण दिखाकर जिस तरीके से ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया है उसे लेकर विधायकों ने सवाल पूछे तो मंत्री का जवाब भी हैरान कर देने वाला था गोलमोल जवाब दे रहे थे मंत्री सवाल कुछ और पूछे जा रहे थे जवाब कुछ और दिए जा रहे थे यहां तक कि जो ज्यादा राशि ठेकेदारों को दी गई है उसे लेकर भी जब सवाल पूछा गया तो ना तो ठेकेदारों पर कारवाई की बात की गई और ना ही उन राशियों को वसूलने की बात की गई यहां तक कि उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी क्या कारवाई होगी कहना मुश्किल है 

लेकिन धर्मजीत सिंह को गुस्सा उन अधिकारियों पर नहीं है धर्मजीत सिंह को गुस्सा उस सिस्टम पर नहीं है गुस्सा है उन ठेकेदारों पर जो कमाने के लिए ही ठेकेदारी कर रहे हैं तब सवाल यह है कि क्या सत्ता का नशा इस तरीके से सिर चढ़कर बोलता है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/nxStEleO5Bw?si=HaogPSqQ7c5j_OCv

शुक्रवार, 27 मार्च 2026

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम 


 क्या मोदी सत्ता ने केंद्र सरकार के सभी विभागों को भ्रष्टाचार करने की खुले आम छूट दे रखी है लगातार खबर आ रही है चाहे रेलवे क्यों ना हो वंदे भारत एक्सप्रेस की छत से पानी टपकने की खबर आ रही है तो दूसरे तरफ पूलों के लगातार ढहने की खबर दिल्ली के प्रगति मैदान की भी तो खबर हैं तो दूसरी तरफ जिस तरीके से  कैग ने रिपोर्ट दी थी चाहे आयुष्मान भारत कार्ड योजना हो या फिर ा स करोड़ रुपए में एक किलोमीटर सड़क निर्माण की बात हो सब तरफ भ्रष्टाचार की खबरें आ रही है लेकिन अब जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से खबर रही है वह भी हैरान कर देने वाली रायपुर स्थित एम्स  अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान  वहां से जो टेंडर घोटाले की खबर आ रही है वह हैरान कर देने वाली है कि किस तरीके से दिल्ली से आए स्टाफ ने अपने चहेते ठेकेदार को टेंडर देने के लिए किस किस तरीके का खेल नहीं खेला सब कुछ कागजों में कैद है और आरटीआई के माध्यम से और भी जानकारी इकट्ठी की जा रही है लेकिन जो प्रारंभिक जानकारी मिली है वह साफ संकेत दे रही है कि चहते ठेकेदार को टेंडर देने ठेका देने मनमाने ढंग से घपले बाजी की गई है घोटाले की गई है 

इस घोटाले को लेकर जो खबर आ रही है व हैरान कर देने वाली इसलिए भी है क्योंकि रायपुर एम्स जो कई कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के आगमन के कार्यक्रम भी होते हैं मंत्रियों के कार्यक्रम होते इसके लिए इवेंट कंपनियों को काम दिया जाता है ऐसा ही एक काम का टेंडर निकला था जिसे 30 मई को खोला जाना था इस टेंडर में तीन कंपनियों ने भाग लिया था जिसम से एक कंपनी को यह टेंडर मिल गया था लेकिन वह कंपनी चहेता कंपनी नहीं था इसलिए यह टेंडर रदद कर दिया गया कि इन कंपलीट फाइनेंस की होने की वजह से 

जबकि इसे जिस तरह के रेट  आए थे या जो ए कंपनी थी व य 30 लाख में काम करने को तैयार थी तो जो दूसरी कंपनिया थी वह कोई 40 लाख तो कोई 60 लाख तक का टेंडर भरा था ऐसे में उस फाइनेंशियल कीट के जो खाने छूटे हुए थे उसे भरकर आसानी से टेंडर जारी किया जा सकता था लेकिन वर्क आर्डर नहीं दिया गया और तमाम टेंडर निरस्त करके फिर से टेंडर जारी कर दिया गया यह पूरा ऑनलाइन प्रक्रिया है लेकिन किस तरीके से इसमें भी खेल होता है यह समझिए जब दूसरी बार टेंडर जारी हुआ और 26 तारीख को उसे 26 जून को इसे खोला जाना था तब छ कंपनियो ने इस में हिस्सा लिया कंपने प्रजेंटेशन नहीं दिया तो उनका फम रिजेक्ट कर दिया गया अब सिर्फ दो कंपनिया बची थी एक री दूसरा और इन दोनों कंपनियों का टेंडर खोला जाना था और जिसका एल वन होता उसे टेंडर दे दिया जाना था लेकिन आश्चर्यजनक रूप से  टेंडर खोला ही नहीं क्योंकि  टेंडर देना था यह शिकायत भी हुई है क्योंकि जिस बना पर मेरी टेडर किया नहीं खोला गया है व पहले जब टेंडर हुआ था उसम प्रेजेंटेशन व दे चुके थे और यह कर दिया गया को की आपका जो प्रेजेंटेशन है अप टू द मार्क पर नहीं है जबक इसी प्रेजेंटेशन पर पहली बार टेंडर उसे मिल चुका था जिसे निरस्त किया गया था ऐसी परिस्थिति में जब हमारी टीम ने इस शिकायत पर जब अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो उपलब्ध नहीं थे लेकिन जो जानकारी मिली है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है क्योंकि टेंडर की शर्तो में एक महत्वपूर्ण शर्त यह था कि टर्न ओवर एक करोड़  होना चाहिए लेकिन जिस कंपनी को यह टेंडर जारी कर दिया गया उसका टर्न ओवर 50 लाख से भी ज्यादा नहीं है और कारण यह बताया गया क्योंकि वह  एमएसएनई कंपनी है इसलिए उसे छूट दी जा रही है और यही बात यदि टेंडर जारी करते समय कर दी जाती कि एमएसएमई  सेक्टर वालो को छूट दी जाएगी तो यकीन मानिए कि कई लोग स्टैंडर में भाग लेते हैं यानी एक करोड़ टन की शर्त लगाकर एमएसए के कई कंपनियों को रोक दिया गया और एमएस की छूट के नाम पर अपने चहते कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले में जबरदस्त ढंग से खेल हुआ है और यही नहीं अब तो जो कंपनिया इवेंट का काम करती है फ्लावर लगाने का टेंट लगाने का लगाने का व कंपनिया आशंकित इसलिए भी है क्योंकि एम्स में हर साल करोड़ अरब रुपए का काम निकलता है तो एक शुरुआत थी इस साल की उसमें ही यदि इस तरीके की घपले बाजी हो रही है तो आने वाले दिनों में क्या कुछ होगा कहना मुश्किल है देखना है कि इस मामले को लेकर अब किस तरीके की कारवाई होगी क्योंकि कहा तो यहां तक जा रहा है कि कुछ पार्टी इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाने वाली है !

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https://youtu.be/uXzRZRUhjLw?si=_zis7qUm9KlXBTBE

प्रदेश में क्यो बदतर हो रही क़ानून व्यवस्था

 प्रदेश में क्यो बदतर हो रही क़ानून व्यवस्था 


क्या छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार पूरी तरीके से फेल हो चुकी है और उसके सामने इस प्रदेश के कानून व्यवस्था को संभालने का कोई रास्ता नहीं बचा है या फिर प्रदेश की सरकार को किसानों की भी चिंता नहीं है , हालत बदतर होते जा रहा है महंगाई को जमा खोर ने और बढ़ा दिया है जमकर जमाखोरी हो रही है छत्तीसगढ़ में और बेरोजगारी का यह आलम है कि एक वैकेंसी निकलती है और लाखों बच्चे टूट पड़ते हैं उसकी नौकरी पाने के लिए तब ऐसी परिस्थिति में डबल इंजन की सरकार कर क्या रही है यह बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कि अपनी पूरी कैबिनेट के साथ विष्णु देव साय सरकार  रामलला के दर्शन करने गए थे, वे अपने साथ बेर भी ले गए हैं सबरी का बेर बहुत चर्चित रहा है पूरे राम कथा में उस बेर को लेकर गए हैं शिवरी नारायण से तो विष्णु भोग चाव यह भी छत्तीसगढ़ की एक अपनी पहचान है कोंसा वस्त्र कारी लड्डू अनरसा और सीताफल सब कुछ लेकर गए थे,रामलला को खुश करने के लिए लेकिन क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि जब वह रामलला के दर्शन की रवानगी कर रही थी तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ की राजधानी में सरेआम गोलीबारी हो रही थी हवाई फायर किए गए हैं कार को गोली लगी है तब कानून व्यवस्था की स्थिति किस हद तक बदतर है और किस तरीके से लोगों में पुलिस का डर खत्म हो गया है यह लगातार देखने को मिल रहा है लगातार हत्याएं हो रही है सवाल सिर्फ बलौदा बाजार के उस घटना का नहीं है जिसमें पुलिस कप्तान के कार्यालय को जला दिया गया और कलेक्टोरेट में तोड़फोड़ किया गया उसके बाद पुलिस पकड़ धकड़ कर रही है कहा जा रहा है कि जो लोग इस घटना में शामिल नहीं थे उनकी भी गिरफ्तारी हो रही है भीम आर्मी भी निशाने में है तो कांग्रेस के नेता भी निशाने में है लेकिन यदि प्रदेश भर में लगातार हत्याएं हो रही है याद कीजिए कि किस तरीके से सरेआम एक लड़की को बीच बाजार में चाकू मार दिया गया था सरगुजा क्षेत्र में तो दूसरी तरफ जगदलपुर में जो घटना हुई है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है सरकार भले ही दुनिया भर का दावा कर ले लेकिन महंगाई और बेरोजगारी ने आम लोगों का जीवन नार की बना दिया और नशे के कारोबार में जिस तरीके से सरकार भी लिप्त हो गई है जिस तरीके से अवैध शराब बिक रहे हैं जिस तरीके से नशे की गोलियां राजधानी के कई क्षेत्रों में बिक रही है उसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार केवल पैसा पैसा पैसा कर रही है क्योंकि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी साफ कह दिया है कि योजनाओं में पैसे खर्च हो रहे हैं रोज बेरोजगार युवक पकौड़ा तलने यह सीधे नहीं कहा है लेकिन इसी तरह का आशा है उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि वैकेंसी नहीं निकलेगी तब ऐसी परिस्थिति में जब अपराध पढ़ रहे हैं राजधानी में ही लगातार नशे के कारोबार फल फूल रहे हैं जुआ सट्टा का जोर है और खुलेआम गोलीबारी हो रही हो तब सवाल यह है कि आखिर बस्तर में जो जगदलपुर में जो दोहरा हत्याकांड हुआ उसका सच क्या है क्या उसके पीछे महंगाई बड़ी वजह है कहा भी जा रहा है कि जिस युवक ने अपने मां और बड़े भाई की हत्या की वह पूरी तरीके से कर्ज में डूबा था उनके घर में आए दिन पैसे को लेकर विवाद होता था और घर चलाना मुश्किल होता जा रहा था एक छोटी सी किराने की दुकान थी आप सोच रहे होंगे कि अपनी मां और भाई की हत्या करते वक्त उस हत्यारे भाई का हाथ क्या नहीं खापा होगा लेकिन क्या महंगाई और कर्जे का बोझ इतना बड़ा हो चला था कि उसके हाथ अपनी मां और भाई के गर्दन तक जा पहुंचा सवाल सवाल आप इस दौर में कुछ भी उठा ले लेकिन यदि सब कुछ धर्म के आधार पर ही राजनीति को हका जाएगा तो फिर आम आदमी की तकलीफ कैसे दूर होगी यह सबसे बड़ा सवाल है जिस तरीके से तेली बांधा क्षेत्र राजधानी के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है भीड़भाड़ वाले इलाके में सरेआम कोयला कारोबारी पर गोली दागी गई हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन क्या यह कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा नहीं करता है आप खुद सोचिए कि एक तरफ कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर है किसानों की हालत खराब है और दूसरी तरफ यदि सत्ता सरकारी खर्चे से यदि पूरे कैबिनेट के साथ राम लला का दर्शन करने जा रहे हैं तो यह किस तरह की राजनीति की जा रही है आप खुद सोचिए !

Video देखें 

https://youtu.be/C42uGXjDaB4?si=pib-0Tiw-v1lahmD

बुधवार, 25 मार्च 2026

आख़िर कौन चला रहा कृषि विभाग

आख़िर कौन चला रहा कृषि विभाग 


 छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार के मंत्रियों की करतूत एकएक करके बाहर आने लगी है हमने आपको बताया कि किस तरीके से सीजीपीएससी घोटाले में ओपी चौधरी की भूमिका सामने आई है तो शिक्षा विभाग के घोटाले को लेकर कई तरह के सवाल उठे हैं ट्रांसफर पोस्टिंग पदोन्नति जिसमें देखिए आप गड़बड़ छाला है लेकिन आज हम बात कर रहे हैं कृषि विभाग का क्योंकि अब मानसून छत्तीसगढ़ पहुंच चुका है और यहां के किसान खेती किसानी में जूट गए हैं धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की अपनी अहमियत है कृषि को लेकर और विभाग को लेकर शायद यही वजह है कि एक समय में डॉक्टर रमन सिंह ने इसके लिए अलग से बजट तक की बात कर दी थी लेकिन अब इस दौर में किस तरीके का खेल यहां चल रहा है कहना मुश्किल है कृषि विभाग आखिर है किसके हवाले कहने को तो इसके मंत्री राम विचार नेताम को बनाया गया है लेकिन राम विचार नेता काम को लेकर कई तरह के सवाल हमेशा ही उठते रहे हैं खासकर इंदिरा प्रदर्शनी बैंक घोटाले में राम विचार ताम का नाम सामने आया था नारको टेस्ट की कथित सीडी में जिस तरीके से पैसे की लेनदेन को लेकर बातें सामने आई थी उसमें राम विचार नेताम का नाम भी सामने था इसके अलावा भी उनके गृह मंत्री रहते जब रमन सरकार में वे गृह मंत्री थे तब भी उन के खेल को लेकर सवाल उठते रहे लेकिन इस बार विष्णु देव साय की सरकार ने उन्हें कृषि विभाग दिया है सबसे बड़ा बजट वाला विभाग कहा जाए तो गलत नहीं होगा और इस विभाग में किसका खेल चल रहा है यह विभाग आखिर चला कौन रहा है क्या कृषि मंत्री राम विचार नेताम चला रहे हैं या आईएएस जो बैठे हैं भुनेश यादव वे चला रहे हैं राजस्थान से आते हैं भुनेश यादव और उनकी एक अपनी कहानी है कि किस तरीके से वे बिजनेस करते आईएएस बने दूसरे अटें में उन्होंने पास किया था लेकिन सत्ता बदलते हु उन्हें एपीओ में रख दिया गया था कोई विभाग नहीं दिया गया था फिर कई तरह के विभाग मिले भूपेश बघेल सरकार के नाक के बाल भी कहे जाते थे भूने यादव हालांकि उन पर अभी तक घपले घोटाले के कोई चार्ज नहीं लगे हैं लेकिन जिस तरीके का रवैया चल रहा है कृषि विभाग में उसमें भुनेश यादव की भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है तब क्या कोई राकेश अग्रवाल नाम का व्यक्ति चला रहा है कृषि यह बेहद ही गंभीर सवाल है क्योंकि जो मीडिया रिपोर्ट आ रही है उसमें सीधे अग्रवाल का नाम तो सामने नहीं आ रहा है हमारी टीम ने जब पता किया कि मीडिया रिपोर्ट में जिस लक्ष्मी पुत्र की बात की जा रही है या जिस दलाल की बात की जा रही है वह है कौन तब उसमें कुछ नाम सामने आए और सबसे बड़े नाम जो सामने आए वह राकेश अग्रवाल का नाम है तो क्या कृषि विभाग को राकेश अग्रवाल के सुपुर्द कर दिया गया यह बेहद गंभीर सवाल हालांकि हमने राकेश अग्रवाल से बात करने की कोशिश की लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे इस पूरे मामले को लेकर लेकिन कहा जा रहा है कि पूरा दफ्तर वहीं से चल रहा है तब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बीच निगम में चल क्या रहा है टेंडर को लेकर गड़बड़ियों की खबर तो लगातार आ रही है यही नहीं किसानों को दिए जाने वाली योजनाओं में भी जो ठेका दिया जाता है उसे लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि किसान त्रस्त है नकली बीज नकली खाद का मामला तो पहले भी उठता रहा है लेकिन सप्लाई के काम में जिस तरह की भर्रा साही की खबरें सामने आ रही है या मीडिया रिपोर्ट सामने आ रहे हैं कि किस तरीके का खेल हो रहा है वहां पहले कमीशन दो और कमीशन भी कितना 40 फीदी कमी की बात सामने आ रही है जो प्रदेश में किसी भी विभाग में सबसे ज्यादा बताया जा रहा है हालांकि कमीशन के मामले को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग हो या नगर निगम कई तरह के विभाग जो है वोह हमेशा ही चर्चा में रहे हैं पीएचई में जल जीवन मिशन को लेकर घोटाले की लगातार खबरें आ रही है कुछ इंजीनियरों को सस्पेंड भी किया गया हम इस पर विस्तार से फिर कभी चर्चा करेंगे लेकिन कृषि विभाग है किसके पास यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि जो खबरें आ रही हैं वह हैरान कर देने वाली है कि आखिर राम विचार नेताओ ने चुप्पी क्यों ओढ ली है या इन खबरों को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है यह भी समझ में नहीं आ रहा है बीज निगम से लेकर उद्यान की विभाग तक गड़बड़ झाला की जो खबरें आ रही है वह हैरान कर देने वाली है हम हमारे रिपोर्टर्स लगे हुए हैं इस पूरे मामले की पता साझी करने के लिए देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है !

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https://youtu.be/36X_nwujrko?si=IvoMnqz5Ift3g1Am

भाजपा विधायकों की वसूली बाजी

भाजपा विधायकों की वसूली बाजी 


 डबल इंजन की सरकार बने अभी दो साल ही पूरे  हुए हैं और पार्टी के विधायकों और कई पदाधिकारियों पर वसूली के आरोप लगने लगे हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में अभी तक ना तो संगठन कोई कारवाही कर रही है ना नोटिस दी है और ना ही सरकार की तरफ से ही कोई बयान आया है मामला सिर्फ शराब को लेकर नहीं है या अहाता को लेकर नहीं है या फिर कोयला घोटाले को लेकर नहीं है सवाल तो अब सीधे-सीधे मामले को दबाने के लिए वसूली का है और यह मामला कहीं और से नहीं साझा विधानसभा क्षेत्र के जो विधा पहली बार बने हैं गरीब विधायक के रूप में प्रचारित प्रसारित किया गया उनके द्वारा एक मामले को दबाने के लिए दो लाख रुपए वसूलने की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई है और इस मामले के सामने आते ही कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमकर हमला बोला है सरकार पर और कहा जा रहा है कि कई विधायकों के नाम है पंडरिया की विधायक भावना बोहरा पर तो तीन ट्रक खादी उतरवा लेने का आरोप लगाया गया इसके अलावा भी कई तरह के आरोप है भावना बोहरा को डॉक्टर रमन सिंह की रिश्तेदार बताई जाती है और पहली बार वे भी विधायक बनी है इसके अलावा भैयालाल राजवाड़े को लेकर स्वास्थ्य विभाग में वसूली की शिकायत भी किए जाने की चर्चा है तो कई पदाधिकारी हैं संगठन से जुड़े उनके खिलाफ भी इसी तरह की वसूली बाजी के मामले सामने आने लगे हैं मामला सिर्फ वसूली का नहीं है मामला तो धमकी चमकी का भी है याद होगा आपको कि किस तरीके से शुरुआती दौर में ही महतारी वंदन योजना का लाभ दिलाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने एक महिला को भला फुसलाकर बलात्कार तक कर दिया था रायगढ़ के जिला अध्यक्ष के खिलाफ किस तरह के मामले थे नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के पुत्र के खिलाफ किस तरह के मामले थे किसी से छिपा नहीं है लेकिन अब जिस तरीके से सत्ता में आने के बाद विधायकों के और संगठन के पदाधिकारियों पर आरोप लगने लगे हैं वसूली के वह हैरानी की बात तो है ही चिंता की भी बात क्योंकि मामला कई सारे हैं कहा जा रहा है सरगुजा क्षेत्र के दो विधायकों के खिलाफ शिकायत है तो बस्तर क्षेत्र के एक विधायक के खिलाफ शिकायत है यही नहीं रायपुर जिले के एक विधायक के खिलाफ तो उद्योगों में वसूली करने का मामला सामने आया है हम विस्तार से इन सारी घटनाओं को आपके सामने रखेंगे लेकिन एक बात तो हम बता देते हैं कि जिस तरीके से नव निर्वाचित विधायकों में आधा दर्जन विधायकों के नाम सामने आए हैं संगठन के भी लगभग चार पदाधिकारियों के नाम सामने आए हैं प्रवक्ता है एक उनके बारे में तो सर्व विधित है कहा जाता है कि उनके वसूली बाजी की वजह से पार्टी के नेता भी परेशान रहे हैं वे हर बार टिकट मांगने पहुंच जाते हैं महापौर की टिकट मांगने पहुंच जाते हैं कभी तो कभी विधायक की टिकट मांगने पहुंच जाते हैं लेकिन उनके खिलाफ जो शिकायतें हैं उनके इसी रवैया की वजह से अभी तक उन्हें केवल छोटे-मोटे चुनाव में ही टिकट दी गई है बड़े चुनाव से वंचित रखा गया है तो दूसरी तरफ ईश्वर साहू का मामला बड़ा होता जा रहा है और कहा जा रहा है कि इसे लेकर मामला विधानसभा में भी उठाने की तैयारी हालांकि ईश्वर साहू ने इस मामले को लेकर सफाई दी है लेकिन विधानसभा में य मामला तय है उठना और विधानसभा में तो भावना बोहरा के खिलाफ भी मामला उठाए जाने की चर्चा है कहा जा रहा है कि वहां जो पराजित प्रत्याशी है नीलकंठ वर्मा उन्होंने पिछले दिनों प्रदर्शन भी किया भावना बोरा के रहने को लेकर और खाद वाले मामले को लेकर तब ऐसी परिस्थिति में विष्णु देव साय सरकार या किरण देव जो प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष है वे क्या करते हैं हालांकि यह भी कहा जा रहा है किरण देव अब पद पर बने रहना नहीं चाहते हैं वे मंत्री बनना चाहते हैं लेकिन यह भाजपा है नया भाजपा है जहां सिर्फ मोदी शाह की चलती है और वे चाहेंगे वही मंत्री बनेंगे तब ऐसी परिस्थिति में कुछ होना!

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https://youtu.be/FDEL7LjZ7V8?si=2RH0ZsmkQ9MDZQeM

मंगलवार, 24 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी

 छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी 


नाम बदलने में माहिर विष्णु देव साय की सरकार यानी डबल इंजन की सरकार क्या अब छत्तीसगढ़ की पहचान भी मिटा देना चाहती है कई योजनाओं का नाम उन्होंने आते ही बदल दिया था जो भूपेश सरकार ने रखी थी और और अब जो काम किया जा रहा वह बेहद ही चौकाने वाला है यह चौकाने वाला इसलिए है क्योंकि इस योजना को भूपेश बघेल जब मुख्यमंत्री थे तब भी लाया गया था लेकिन मामला सिर्फ इसलिए रुका था क्योंकि नाम का संकट था केंद्र सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ हाट का नाम बदल दिया जाए और उसका नाम पीएम एकता माल कर दिया जाए और उसमें दूसरे राज्यों के हस्त शिल्प उत्पादकों को भी दुकान दिया जाए दूसरे राज्यों के हस्तशिल्प  को दुकान तो दिया ही जा रहा था लेकिन जो रायपुर की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ हाट जमीन से जुड़ा हुआ नाम है उसे आखिर विष्णुदेव साय क्यों बदल देना चाहती है क्या केंद्र की योजना से नाम भी बदलना जरूरी है यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस तरीके का खेल रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालन मंडल के कंधे पर रखकर किया गया है या कंधे पर रखकर बंदूक चलाया गया है वह स्वयं को बचाने के लिए भी है कहा जाए तो गलत नहीं हो अभी निगम मंडल आयोग सब में नियुक्तियां होनी है उससे पहले छत्तीसगढ़ हाट का नाम पीएम एकता माल रख दिया जाएगा या रख देने का प्रस्ताव पारित हो गया और इसको तोड़कर फिर से नए सीरे से बनाने की बात की जा रही है बिल्कुल बनाना चाहिए यदि कहीं कोई कमी है तो नए सीरे से बनाया जा सकता है लेकिन नाम बदलने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या डबल इंजन की सरकार सब कुछ बदल देगी और छत्तीसगढ़ की पहचान को भी मिटा देगी छत्तीसगढ़ की राजधानी में स्थित महत्त्वपूर्ण जगह में स्थित इस हाट का नाम लोगों को जोड़ता है एक दूसरे से तब ऐसी परिस्थिति में कल आरडीए के संचालन मंडल की बैठक में जो छत्तीसगढ़ हाट की जगह पीएम एकता माल बनाने की बात कही जा रही है प्रस्ताव पारित किया गया है वह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा छत्तीसगढ़ हाट की पहचान यहां विभिन्न हस्त शिल्प और दूसरे उत्पाद है ग्रामीण उत्पाद उसको लेकर बनी हुई है और लोग जाते हैं यहां और यहां ऐसा नहीं है कि केवल गढ़ के लोग ही स्टाल लगाते हैं बल्कि दूसरे प्रदेशों के लोगों का भी स्टाल लगता है तब नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी यह सबसे बड़ा सवाल सिटी सेंटर माल के पीछे छत्तीसगढ़ हाट बाजार को तोड़कर माल बनाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी यह केंद्र सरकार की योजना है कांग्रेस सरकार के दौरान यह योजना सिर्फ नाम को लेकर भूपेश सरकार अड़ी हुई थी कि वे पीएम एकता माल नाम नहीं रख सकते छत्तीसगढ़ हाट इस राजधानी की पहचान बन चुकी है वह नाम नहीं बदला जाएगा आवास एवं पर्यावरण विभाग की सचिव तथा प्राधिकरण की अध्यक्ष आर संगीता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एकता माल निर्माण के लिए निविदा दर की स्वीकृति कर ली गई है और इसको अनुमोदित भी कर लिया गया क्यों हड़बड़ी थी आखिर अभी आरडीए का अध्यक्ष बनाना आरडीए का अध्यक्ष बनना है उसके लिए मारामारी हो रही है इस विभाग के मंत्री ओपी चौधरी हैं जो रायगढ़ से विधायक हैं और प्रदेश सरकार में दमदार माने जाते हैं और यह भी माने जाते हैं कि वे अमित शाह के निर्देशन पर ही सब काम करते हैं तो क्या यह काम भी अमित शाह पसंद नहीं है यह नाम छत्तीसगढ़ इसलिए नाम बदला जा रहा है कई सवाल उठाए जा रहे हैं छत्तीसगढ़ हाट का सुपर बिल्ड अप एरिया जो है वह 73 392 वर्ग फुट है तथा निर्माण लागत करीब 1 स लाख रुपए होनी है एकता माल बनाने का जिम्मा मेसर्स दीपक पांडे डी एनवी प्रोजेक्ट लिमिटेड को दिया गया है इसका निर्माण लग दो साल के भीतर किया जाएगा यह अनुमोदित कर दिया गया प्रस्ताव पारित गया इतनी बड़ी राशि को संचालक मंडल ने एक झटके में पास कर दिया और साय सरकार के निर्देश पर ही किया गया है कहा जाए तो गलत नहीं होगा या ओपी चौधरी के निर्देश पर यह हुआ है छत्तीसगढ़ की अपनी पहचान है इस पहचान को लेकर लोगों ने कितना संघर्ष किया है और आज राजधानी के उस छत्तीसगढ़ हाट जो लोगों की जन भावना से जुड़ा हुआ है उसका नाम बदल दिया जाएगा है ना हैरानी की बात देखना है कि इस मामले को लेकर जनप्रतिनिधि किस तरह की आवाज उठाते हैं और विष्णु देव साय सरकार आगे किस किस छत्तीसगढ़ नाम से जुड़े योजनाओं का नाम केंद्र सरकार के निर्देश पर बदलती है!

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https://youtu.be/1WB6tIW0P9w?si=Igq7Hy6KcEMhD03u

रविवार, 22 मार्च 2026

मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार

मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार 


 छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आते ही अडानी यानी गौतम अडानी की कंपनियों के काम में तेजी आ गई है एक तरफ हसदेव अरण्य को धड़ल्ले से काटा जा रहा है पेड़ काटने की अनुमति दी जा रही है वहां पर्यावरण को लेकर जिस तरह के सवाल उसकी अनदेखी की जा रही है तो दूसरी तरफ तिल्दा राजधानी रायपुर से लगे क्षेत्र में अडानी पावर के विस्तार को लेकर जन सुनवाई कल हुई इस जन सुनवाई के विरोध में गांव वाले एक राय होकर पहले ही सरकार को कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंप चुके थे कि जन सुनवाई रोक दी जाए पहले ही जीएमआर पावर कंपनी ने जो द किया था गांव वालों से उसे पूरा नहीं किया गया और गांव की आबोहवा अलग खराब हो रही है ऐसे में विस्तार के लिए जो 885 एकड़ जमीन चाहिए वे नहीं देंगे लेकिन यह विष्णुदेव साय की सरकार है यह डबल इंजन की सरकार है और कहा जा रहा है कि सरकार तो पूरी तरीके से अदानी की गोद में जा बैठे यानी जैसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्र के लिए क वही सब कुछ विष्णु देव साय की सरकार करेगी और यही वजह है कि जब ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा था कि यह जन सुनवाई टाल दी जाए स्थगित कर दी जाए उसकी अनदेखी करके कल जन सुनवाई की गई लदा विकासखंड के तहत रायखेड़ा गांव में स्थापित अडानी पावर लिमिटेड के पावर ग्रेड 370 मेगावाट प्लान के विस्तार हेतु प्रस्तावित 1600 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट की पर्यावरण स्वीकृति हेतु जन सुनवाई थी और प्रचारित प्रसारित यह किया जा रहा है कि जन सुनवाई में लोगों ने समर्थन दिया है लेकिन हकीकत तो यह है कि कल जमकर विवाद हुआ है विरोध हुआ है कांग्रेस ही नहीं दूसरे दलों के नेता जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के नेता भी पहुंचे थे विरोध के लिए जिसमें रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय पूर्व राज्यसभा सांसद छाया वर्मा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ग्रामीण जिलाध्यक्ष है उधो राम वर्मा जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के मुखिया अमित बघेल सहित कई लोग यहां पहुंचे थे और इस बात का विरोध कर रहे थे कि कंपनी जमीन लेते समय तो सब वादा कर देती है लेकिन जमीन हासिल होने के बाद गांव वालों की मुसीबत बढ़ जाती ऐसी परिस्थिति में अब सवाल यह उठ रहा है कि हसदेव कितना बच पाएगा और अब रायखेड़ा क्षेत्र के लोग पर्यावरण के प्रदूषण से अपने को कैसे बचा पाएंगे किस तरीके का विरोध प्रदर्शन हुआ है या किसी से छिपा नहीं है लेकिन मीडिया में खबर छपाई जा रही है कि समर्थन में लोग खड़े हैं ऐसे में सवाल यह है कि क्या सचमुच विष्णुदेव साय की सरकार अदानी की गोद में जा बैठी और कहा जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों में फिर जमीन खरीदी की जा रही है बड़े पैमाने पर अदानी द्वारा खासकर राजधानी और बड़े शहरों के नजदीकी जमीन ताकि वहां बड़े पैमाने पर गोदाम बनाया जा सके यानी मध्य प्रदेश की तर्ज पर क्या अब एफसीआई में रखने की बजाय धान जो खरीदती है छत्तीसगढ़ की सरकार वह अदान के गोदामों में रखेगी ऐसे कई सवाल हैं हम आपको बताते रहेंगे अभी तो जन सुनवाई एक बार हुई और कितने बार करती है या इस तरीके से हसदेव अरण्य को काटे जाने को लेकर जिस फर्जी जन सुनवाई हुई है कहा जा रहा है उस तरह से क्या फर्जी जन सुनवाई करके विस्तार के लिए अनुमति दे दी जाएगी पर्यावरण की अनदेखी कर  कर दी जाएगी जिसका प्रभाव राजधानी में भी पढना तय है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है!

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https://youtu.be/xuFtq-pr7wE?si=QZR5Gr9LzmfxCniE

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

क्या भाजपा ही करती है धर्म से ज़्यादा खिलवाड़

 क्या भाजपा ही करती है धर्म से ज़्यादा खिलवाड़ 


हिंदू धर्म का ठेकेदार बनने वाले लोगों को तब साप सूंघ जाता है जब इस ठेकेदार के समर्थकों में से कोई एक धर्म के साथ खिलवाड़ करता है चाहे वह संवित पात्रा का मामला हो या फिर दूसरे किसी और भारतीय जनता पार्टी के विधायक का मामला जब जब धर्म के साथ ऐसे लोग खिलवाड़ करते हैं उन्हें नजर अंदाज कर दिया जाता है और इससे भी छोटी बात पर यदि विपक्ष के नेता गिरफ्त में आ गए तो पूरे देश में भवाल मचा देते हैं उन्हें हिंदू विरोधी का तमगा देने से भी नहीं कतराते हैं यहां तक कि शंकराचार्य की अवहेलना राम मंदिर प्रांत प्रतिष्ठा समारोह में हुई तब भी कोई उन्हें कांग्रेसी बताने लगा तो कोई आलोचना करने लगा जबकि हमने बार-बार बताया कि यदि इतने सर्वोच्च गुरु किसी दूसरे धर्म के होते और बोल देते तो बवाल मज गया होता लेकिन यह दौर मोदी का दौर है यह दौर भगवान बनाने का दौर है यह दौर अवतार बताने का दौर है और बाप बनाने का और इसी चक्कर में शायद पूरी से चुनाव लड़ रहे हैं भाजपा के बड़े दिग्गज नेता माने जाते हैं संत पात्रा ने भगवान जगन्नाथ को ही मोदी का भक्त बता दिया ल लो मोदी भक्त जगन्नाथ मोदी भक्त जगन्नाथ मोद भक्त जगन्नाथ सब मोद परिवार हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका जुबान फिसल गया था लेकिन याद कीजिए कि जुबान एक बार फिसलती है बार-बार नहीं फिसलती और जुबान इन लोगों की क्यों फिसलती क्योंकि इसी संदीप पात्र ने एक समय कन्हैया कुमार से बहस के दौरान मोदी को देश का पाप भी बता दिया था उसके लिए माफी इससे पहले भी कई ऐसे मामले आए जिसके लिए कभी माफी नहीं मांगी गई और यह माफी शायद सिर्फ इसलिए मांगी गई क्योंकि वे चुनाव लड़ रहे हैं और चुनाव में इसका प्रभाव विपरीत पड़ सकता है जगन्नाथ स्वामी कलयुग के सबसे बड़े अवतार माने जाते हैं सबसे बड़े देवता माने जाते हैं सबसे प्रमुख देवता माने जाते हैं और उन्हें लेकर इस तरह से जुबान फिसल जाने की बात कहना आश्चर्य जनक है क्योंकि जो लोग यदि धर्म में 24 घंटे जुड़े हुए हैं धर्म को लेकर 24 घंटे चिंतित है तो फिर जुबान कैसे फिसल सकती है यह बड़ा सवाल आप खुद सोचिए लेकिन सवाल सिर्फ संवित पात्रा का नहीं है इस दौर में मोदी को भगवान बताने का जो खेल चला उसमें क्या स्वयं दे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं थे यानी धर्म के इस पूरे खेल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी या उन हिंदूवादी संगठनों के लोग शामिल नहीं थे जिन्हें लगता है कि मोदी ही हिंदू धर्म की रक्षा कर सकते हैं और कोई दूसरा कर ही नहीं सकता और शायद यही वजह है कि कोई मंदिर बना रहा है तो कोई उन्हें विष्णु का अवतार बता रहा है और हैरान की बात तो यह है कि धर्म के इस खिलवाड़ में बीजेपी खुद शामिल है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि भगवान वेंकटेश्वर का रूप दिखाते हुए खुद बीजेपी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से यह तस्वीर रिलीज की थी और क्या कुछ नहीं लिखा था नमो नमो वगैरह वगैरह आप हैरान हो जाएंगे तब भी किसी को आपत्ति नहीं हुई थी और यही बात कोई राहुल गांधी या सोनिया गांधी या और किसी को भगवान बनाकर प्रस्तुत कर दिया गया होता तो अभी तक इस देश में पता नहीं किस किस तरह के भवाल मचा दिए जाते उदाहरण कई है यदि हम आपको उदाहरण बताएंगे तो आप खुद हैरान हो जाएंगे कि धर्म के खिलवाड़ के को लेकर किस तरीके से यह लोग लगे हुए थे भारतीय जनता पार्टी के एमएलए मधुबनी से उन्होंने तो भगवान विश्वकर्मा का ही रूप दे दिया था भगवान विश्वकर्मा की जयंती के समय तो कंगना रानावत मंडी से लोकसभा की प्रत्याशी हैं और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विष्णु का अवतार बताया था और कहा जा रहा है कि वही अवतार बताने की वजह से ही उन्हें टिकिट दी गई थी यानी धर्म का खिलवाड़ करने की वजह से उन्हें टिकट दी गई थी तब ऐसे में बीएचयू में जो फोटो प्रदर्शनी लगाई गई किसने लगाई थी क्या एबीपी ने लगाई थी या कोई और इसी तरह के संगठन ने लगाई थी उसमें भी देश के प्रधानमंत्री के चित्र को किस रूप में दिखाया गया था आप खुद देखिए और सोचिए कि क्या कुछ खेल हुआ मेरठ में भी तो इसी तरह का भव्य मंदिर बनाकर स्थापित करने का खेल हुआ है तो महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता ने अवधूत बाग नाम है उन्होंने भी तो कहा था कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विष्णु के 11वें अवतार हैं और एक गोयल है जिन्होंने किताब लिखी और एक शिवाजी महाराज पर किताब लिखी गई और शिवाजी की मोदी वाली एक तस्वीर जब सामने आई तो उन्होंने कहा कि यह तस्वीर उन्हें पहले मिल जाती तो वे इसे ही किताब का कवर पेज बनाते आज के शिवाजी के लिए यह तस्वीर सबसे उपयुक्त है यह उस गोयल ने कहा था जो शिवाजी पर किताब लिख रहे थे ऐसे कई उदाहरण आपके सामने खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसकिस वेशभूषा  धरते हैं यह भी तो इस देश ने देखा है कभी वे सन्यासी बन जाते हैं तो कभी कुछ और एक बार तो उन्होंने जिस तरीके से रुद्राक्ष धारण किया था यहां तक कहा गया कि महाकाल का वेशभूषा धारण कर लिया यानी उसी तरीके से श्रृंगार करवाए थे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरीके का श्रृंगार महाकाल का होता है तब ऐसे में धर्म के साथ खिलवाड़ कौन कर रहा है कौन धर्म का ठेकेदार बना बैठा है और किस किस तरह से आने वाले दिनों में धर्म के साथ खिलवाड़ होगा !

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https://youtu.be/FH8VX23Fnqc?si=FPAWVdWwJ-QrgrIq

गुरुवार, 19 मार्च 2026

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे 


 देश के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी एक बार फिर घोटाले में फंस गए हैं घोटाला क्या है सीधे-सीधे सरकार को चूना लगाना हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद ना तो गौतम अडानी का ही मुश्किल कम हो रहा है और ना ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दरअसल यह रिश्ता क्या कहलाता है यह सवाल इतना बड़ा हो चुका है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अब बौखलाने  लाने लगे हैं और शायद जिस गौतम अडानी को लेकर या हिडन बर्ग की रिपोर्ट को लेकर समूची मोदी सत्ता विपक्ष पर हमलावर थी गौतम अदानी को पाक साफ बताते नहीं थकती थी और चुनाव में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी  कहने लग गए कि अदानी और अंबानी के पास भरपूर काला धन है और वे टेंपो भर भर के कांग्रेस को पहुंचा रहे हैं इसलिए कांग्रेस ने गौतम अडानी या अंबानी का नाम लेना बंद कर दिया तेलंगाना की धरती से पूछना चाहता हूं जरा य शहजादे घोषित करें कि चुनाव में ये अंबानी अडानी थे कितना माल उठाया है काले धन के कितने बोरे भर कर के रुपए मारे हैं क्या टेंपो भर कर के नोटे कांग्रेस के लिए पहुंची है क्या क्या सौदा हुआ है ऐसे में उन समर्थकों का सोचिए या उन हिंदू वादियों का सोचिए या ऐसे बांगड़ बिल्लों का सोचिए जो अब मुंह छुपाते घूम रहे हैं कि वे जिस गौतम अदानी के लिए खड़े हुए थे उन्हें ही जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्ट कह दिया काला धन वाला कह दिया तो फिर उनके पास क्या बचता है लेकिन लगता है कि यह मित्र प्रेम का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और शायद यही वजह है कि कल दुनिया के सब सबसे बड़े अखबार 20 देशों से निकलते हैं फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की कोयला घोटाले को लेकर और गौतम अडानी पर कोयला घोटाले का आरोप पहली बार नहीं लगा है खदानों को देने के मामले में हो या फिर दूसरे देशों से कोयला मंगाकर यहां के विद्युत कंपनियों को मनमाने कीमत पर यानी कई गुना कीमत वसूलने को लेकर गौतम अडानी हमेशा ही विवाद में रहे हैं लेकिन इस बार जो विवाद है वह यह है कि घटिया क्वालिटी का कोयला नंबर एक क्वालिटी के नाम पर विद्युत कंपनियों को खपा गया जिसके चलते ना केवल विद्युत कंपनियों को नुकसान हुआ बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान प क्योंकि घटिया दर्जे की कोयला यदि जलाई जाएगी बिजली उत्पादन के लिए तो ज्यादा जलाना पड़ेगा और उतना ही पर्यावरण को नुकसान होगा इस पर कांग्रेस ने खुलकर मोदी सरकार पर हमला बोल दिया ऐसा कोई दिन नहीं आता जिस दिन अडानी जी का कोई महा घोटाला सामने ना आए अब एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आ रहा है कोयले को लेकर सही सुना आपने खटिया सस्ते दाम के कोयले को अच्छी गु गुणवत्ता का बताकर मनमाने डाम पर अडानी जी ने हिंदुस्तान की एक सरकारी कंपनी को चूना लगाकर बेचा यह बात तब की है जब अडानी जी ने इंडोनेशिया से कोयला लिया $28 प्रति टन पे ये कोयला 3500 कैलोरी वाला कोयला था हिंदुस्तान आते-आते लेकिन जादू हो गया ये 3500 कैलोरी वाला कोयला अपने आप 6000 कैलोरी वाला कोयला बन गया और दाम $28 प्रति टन से बढ़कर $92 प्रति टन हो गए 28 से बढ़ के 92 3500 कैलोरी अपने आप बढ़कर 6000 सैलरी हो गई यह कोयला अडानी ने इंडोनेशिया की एक कंपनी पीटी जोलिन से लिया था और यह तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी टन जटको को बेचा गया था ये कोयला जोने जो कंपनी है इंडोनेशिया की उसने अदानी को $28 प्रति टन में दिया पेपर में पूरी तरह से साफ है कि एंड कस्टमर टाइम जेट को है अदनी अदानी जो थे वो मध्यस्थता कर रहे थे ये कोयला का जो बिल काटा गया वो काटा गया ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित सुप्रीम यूनियन समूह के नाम उसने सिंगापुर में बिल काटा अडानी के नाम और उस कोयले को 3500 कैलोरी का तो रहने दिया लेकिन $4 प्रति टन दाम लगा दिया अब यही कोयला जब तमिलनाडु पहुंचता है भारत के छोड़ में आता है तो अडानी जी इसको 92 प्रति टन और जादू से 000 कैलोरी का बनाकर बेच देते हैं करीब 000 करोड़ रप का चूना लगाया उन्होंने भारत की एक कंपनी को तो इस पूरे मामले में अडानी जी ने एक भारतीय कंपनी से सरकारी कंपनी से धोखाधड़ी करी राजस्व की चोरी की बिजली के दाम बढ़ाए उपभोग ताओं के लिए क्योंकि महंगा कोयला आएगा तो महंगा जनरेशन होगा महंगा डिस्ट्रीब्यूशन होगा और यही नहीं उन्होंने पर्यावरण के साथ-साथ हिंदुस्तान के लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया करीब 22 लाख लोगों की हिंदुस्तान में वायु प्रदूषण से हर साल मौत होती है जिसमें से ज्यादातर बच्चे हैं तो दिक्कत की बात यह है कि आरानी जी ये सब तब कर रहे हैं जब आपको रिन्यूएबल एनर्जी में एक बड़ा प्लेयर बनाने जा रहे हैं ये अलग बात है कि कोयले की आयात करने वाली भारतीय समूह में से वो शायद एक या दूसरे नंबर पर होंगे तो मोदी जी से कुछ सवाल कि डायरेक्टरेट ऑ रेवन्यू इंटेलिजेंस को तो चलिए आपने छानबीन नहीं करने दी संस्थाओं के आपने हाथ बांध दिए आंखों पर पट्टी बांध द लेकिन अब क्या कीजिएगा क्योंकि आप ही ने कहा है कि टेंपो में भर भर कर काला धन बांटा जा रहा है वो टेंपो अडानी के पकड़े कब जाएंगे और ये काले कोयले की जो काली चोरी थी इसका क्या नतीजा है यह देश जानना चाहता है इसका अभिप्राय क्या है इसका एक ही मतलब है कि गौतम अडानी के पास भरपूर काला धन है जिसकी जानकारी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी है तब क्या घटिया कोयला सप्लाई का मामला तूल पकड़ेगा क्या इस मामले की जांच होगी यकीनन होगी यह जांच तो होगी लेकिन तब जब सत्ता बदलेगी क्योंकि राहुल गांधी ने अब साफ तौर पर कह दिया है कि जिस तरह के घपले घोटाले अदानी समूह के आने लगे हैं वे सत्ता में आए यानी इंडिया गठबंधन सत्ता में आई तो हर मामले की विस्तार से जांच की जाएगी तब क्या मोदी सरकार के रहते यह जांच नहीं होगी क्योंकि जिस तरीके से सिर्फ अदानी का नाम ले लेने से ही इस दौर में उन लोगों को प्रताड़ित किया गया संसद की सदस्यता तक समाप्त करने की बात सामने आई है या आरोप लगे हैं मोदी सरकार पर तब इस सत्ता के रहते तो अदानी समूह पर कोई कारवाई होगी या जांच भी होगी कहना मुश्किल है तब देखना है कि जो कोयला घोटाले को लेकर या घटिया कोयला सप्लाई को लेकर जो मामला सामने आया है वह आम लोगों को कितना समझ में आता है !


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https://youtu.be/e7HjSQARqkY?si=qeW-dvU-OUVzve0z