इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…
युद्ध की विभीषिका को लेकर कितने ही सवाल उठते रहे हैं। भारत पाकिस्तान का युद्ध हो या फिर ईरान और इजराइल के बीच मचे युद्ध के बाद किस तरह से आपाधापी मची पूरे इजराइल में या ईरान में लोग अपने काम छोड़कर अपने वतन की वापसी के लिए किस तरह से संघर्ष किए। आज हम बात करेंगे इजराइल में कार्यरत साइंटिस्ट हैं हमारे छत्तीसगढ़ के राजधानी के लाडले देवव्रत दुबे जी। उनसे हम बात करेंगे और समझने की कोशिश करेंगे कि इस युद्ध में किस तरीके से प्रभाव पड़ा इजराइल में या जहां वे काम कर रहे थे उस शहर में और क्या परिस्थिति बनी जिसकी वजह से उन्हें वतन यानी भारत आना पड़ा रायपुर आना पड़ा पूरा एक-एक बात हम समझने और जानने की कोशिश करेंगे इजराइल और ईरान के बीच बीच जो युद्ध का माहौल बना या युद्ध हुआ तो आप लोगों ने क्या देखा समझा ये थोड़ा सा बताएंगे। टेंशनंस तो पहले से थे ही पूरे मिडिल ईस्ट में। उसके बाद ईरान के न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज बम बनाने के नजदीक पहुंच रही थी। जिसको रोकने के लिए इजराइल ने अटैक किया और फिर ईरान से रिस्पांस आना शुरू हुआ मिसाइल्स का। मिसाइल्स जब आती थी तो सायरेंस बजते थे अलग-अलग एरिया में और जब हमारे एरिया में साइरस बजते थे तो हम शेल्टर में चले जाते थे। ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि वापस आना पड़ा? क्या सरकार ने कहा कि आप लोगों ने स्वयं निर्णय लिया। एंबेसी की एडवाइज़री आ रही इजराइल में एक होम फ्रंट कमांड है जो वहां पर जो भी रहते हैं उन सबको अलर्ट करती रहती है। तो एंबेसी की एडवाइज़री थी कि होम फ्रंट कमांड का जो भी गाइडेंस आए वो फॉलो कीजिए और ज्यादा ओपन एरियाज में मत घूमिए। ज्यादा भीड़ होम फ्रंट ने मना किया था जमा होने से। सारे यूनिवर्सिटीज और स्कूल्स भी बंद हो चुके थे। सब कुछ वर्क फ्रॉम होम मोड में चल रहा था। उसके बाद कुछ मिसाइल्स जो हुई जो हाईफा का अटैक हुआ। फिर वीरशिश में जब एक हॉस्पिटल पर अटैक हुआ उसके बाद एंबेसी ने यह एक ऑप्शन दिया था कि एक इवाकुएशन हो रहा है ऑपरेशन से जो जाना चाहते हैं वो अपना नाम एनरोल करवा सकते हैं। तो उसमें हम लोगों ने एनरोल किया और आ गए। कितना संघर्ष भरा महसूस हो रहा था उस दौरान जब ईरान का अटैक हुआ तो आप लोग क्या महसूस कर रहे थे? संघर्ष वैसे कुछ खास नहीं था क्योंकि जब रॉकेट्स आते थे वो पीरियड हमने देखा है। हुथस्ट की मिसाइल जब यमन से आती थी तब भी हम साइरेंस में चले जाते थे। ईरान के साथ भी जब सब कुछ शुरू हुआ तब भी हम शेल्टर्स में चले जाते थे गाइडेंस के हिसाब से। पर उसके बाद जब ये हुआ कि अटैक सिविलियन एरियाज पे होने लगे। जैसे हॉस्पिटल पे अटैक हुआ, वाइसमैन इंस्टट्यूट में अटैक हुआ। जब सिविलियन एरियाज पे अटैक होने लगे तब फिर हमने सोचना शुरू किया कि शायद निकल जाना चाहिए। इजराइल से भारत पहुंचते तक क्या महसूस कर रहे थे थोड़ा सा वो तो चल रहे थे हम तेलवी से लैंड बॉर्डर क्रॉस करके जॉर्डन गए वहां जॉर्डन के अमान एयरपोर्ट से कुवैत आए तो जब लैंड बॉर्डर क्रॉस कर रहे थे तब भी जब हम बस से जा रहे थे तब भी दो बार साइंस बजे और बस रोक के हमको सड़क के किनारे खेत में जाकर रुकना पड़ा उसके बाद जब हम कुवैत से दिल्ली के लिए निकल गए थे तब शायद ईरान ने कतर पे अटैक किया और यूएई ने एयर स्पेस क्लोज कर दिया तो हमारा प्लेन वापस कुवैत गया और उसके 4 घंटे बाद फिर से टेक ऑफ किया दिल्ली और अभी सिचुएशन नॉर्मल हो गई है तो 15 दिन में तो हम शायद वापस भी चले जाएंगे जब कुवैत से हम निकले थे दिल्ली के लिए और रास्ते में थे तो प्लेन रिटर्न होने के पहले मैं तो विंडो सीट पे नहीं था पर जो लोग विंडो सीट पे थे उन लोगों ने मिसाइल्स और इंटरसेप्ट र्स दोनों ल्च होते हुए देखे जो हम इजराइल में देखते रहते थे मिसाइल्स वगैरह बट एयरप्लेन से पहली बार उन लोगों ने देखा जो कुछ लोगों ने वीडियोस लिए इजराइल में रहते हुए क्या महसूस कर रहे थे आप जो सभी जो दूसरे देशों से थे वहां जो काम कर रहे थे या आप भी तो क्या लग रहा था कि क्या कुछ होगा अभी तक तो इजराइल वन में था उसका अपना मिडिल ईस्ट में खाक रहा है जो परसेप्शन रहा है लेकिन जब ईरान के मिसाइल गिरने लगे तो क्या सोचे आपको यहां हम लोग इतने चैतन्य नहीं रहते हैं अलर्ट नहीं रहते हैं बट इजराइल में जब से हम रह रहे हैं तो हम किसी भी मोमेंट पे रेडी रहते हैं कि आप तिलवी में है या वीर शिवा में है या हफा में है तो आप जिस शहर में हैं उसके हिसाब से एक टाइमिंग होती है कि 30 सेकंड में आपको शेल्टर में पहुंचना है या 1ढ़ मिनट में आपको शेल्टर में पहुंचना है सायरन बजने के बाद तो वीरसेवा जैसे ये एक मिनट था और इतने में आप शेल्टर में पहुंच सकते हैं क्योंकि आप जहां भी हैं जिस भी बिल्डिंग में है या सड़क के किनारे हैं तो उतनी दूर में कहीं ना कहीं आपको शेल्टर्स मिल ही जाएंगे या घर भी है तो घर के अंदर भी सेफ रूम्स होते हैं। तो उसके लिए हम प्रिपयर्ड ही थे। बट ईरान की जो बैलस्टिक मिसाइल्स आई जो कुछ ऐसी थी जो इंटरसेप्ट नहीं हुई एरो से और सिविलियन एरियाज पर जो ब्लास्ट हुए उसके बाद थोड़ा सा डर लगना शुरू हुआ!
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