कहानी: 'चुनावी चाय' और बंधुआ रिमोट
एक बार की बात है, छत्तीसगढ़ के "सियासतपुर" गांव के चौराहे पर मंगलू की चाय दुकान सजी हुई थी। मंगलू की दुकान की खासियत थी कि वहां चाय कम और राजनीति की कड़क चर्चाएं ज्यादा उबलती थीं।
शाम का समय था, और तभी 'वीरू बाबू' (जो गांव के नए मुखिया बने थे) वहां आकर बैठ गए। वीरू बाबू थोड़े परेशान दिख रहे थे। वह अपनी चाय का घूंट ले ही रहे थे कि तभी वहां से हाथ में झोला टांगे और 125 किलोमीटर की 'पैदल न्याय यात्रा' करके आ रहे ' भोपू भैया' अपनी टोली के साथ गुजरे।
भोपू भैया ने जैसे ही वीरू बाबू को देखा, उन्होंने जोर से ताना मारा, "अरे वीरू बाबू! अपनी चाय की केतली तो संभाल लो! गांव में बिजली कट रही है, स्कूल के बच्चे परेशान हैं, और आप यहां आराम से चाय पी रहे हो? पहले अपनी केतली की समीक्षा करो!"
विरु बाबू ने मुस्कुराते हुए कहा, "भैया, सब ठीक चल रहा है। मैं तो बस गांव की कानून-व्यवस्था देख रहा हूं।"
इस पर भोपू भैया हंसते हुए बोले, "अरे क्या देख रहे हो! रिमोट कंट्रोल तो नागपुर वाले भाईसाहब के पास है। तुम तो बस वहां के 'बंधुआ मजदूर' बन गए हो [! बटन वहां दबता है, और चाय तुम्हारी दुकान पर उबलती है!"
"बंधुआ मजदूर" का शब्द सुनते ही पूरी चाय दुकान पर सन्नाटा छा गया!
तभी कोने में बैठे एक बुजुर्ग ने हुक्का गुड़गुड़ाते हुए कहा, "भैया हो! राजनीति भी अजब चीज है। जब भोपू भैया सत्ता में थे, तब विपक्ष उन पर निशाना साधता था, उनके पूरे परिवार के खातों की जांच की बातें होती थीं । अब वीरू बाबू आए हैं, तो भोपू भैया उन पर 'नागपुर का रिमोट' होने का ठप्पा लगा रहे हैं।"
भोपू भैया ने कड़क चाय का एक कुल्हड़ हाथ में लिया और बोले, "हम डरने वाले नहीं हैं बाबू! चाहे जितने हमले हों, जनता के लिए हमारी न्याय यात्रा चलती रहेगी!"
वीरू बाबू ने भी मुस्कुराते हुए अपनी चाय खत्म की और कहा, "भैया, रिमोट किसी के हाथ में हो या न हो, पर चाय तो मंगलू के हाथ की ही कड़क रहेगी!"
सीख: राजनीति में चाहे कितने भी "घाट-प्रतिघात" और तीखे बयान चलें, चाय की दुकान पर बैठने वाली जनता सब समझती है और अंत में मजे लेकर अपनी कड़क चाय का आनंद उठाती है!
Vidio देखें
https://youtu.be/n7CJrZDoC_c?si=fd2tDg2AEfsOljZW
