रविवार, 21 जून 2026

स्वास्थ्य सचिव के नाम पर डॉक्टरों को चमकाने वाला 'अजय अग्रवाल' कौन?

 मंत्रालय के 'कमरा नंबर' से चल रहा था वसूली का खेल: स्वास्थ्य सचिव के नाम पर डॉक्टरों को चमकाने वाला 'अजय अग्रवाल' कौन?


अमित कटारिया (स्वास्थ्य सचिव) की पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी से मचा हड़कंप; रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर के नर्सिंग होम संचालकों में दहशत। दो मोबाइल नंबर होने के बावजूद पंद्रह दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली, क्या सफेदपोशों का है वरदहस्त?


छत्तीसगढ़ के पावर कॉरिडोर (मंत्रालय) और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक ऐसे 'अदृश्य' गिरोह की चर्चा है, जिसने सीधे प्रदेश के रसूखदार डॉक्टरों और निजी अस्पताल संचालकों की नींद उड़ा दी है। यह पूरा खेल किसी छोटे-मोटे साइबर ठग का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित सिंडिकेट का नजर आ रहा है, जिसे सत्ता के गलियारों से जुड़े किसी बड़े रसूखदार का संरक्षण प्राप्त होने की आशंका जताई जा रही है

क्या है पूरा मामला?

मामला तब खुला जब छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के नाम का इस्तेमाल कर रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर के बड़े नर्सिंग होम संचालकों को फोन पर धमकाया जाने लगा । फोन करने वाला खुद को स्वास्थ्य सचिव के निजी स्थापना (पर्सनल स्टाफ) का कर्मी बताता है और अपना नाम 'अजय अग्रवाल' बताता है

वह बकायदा स्वास्थ्य सचिव के कार्यालय और मंत्रालय के कमरा नंबर का हवाला देकर डॉक्टरों से कहता है कि "आपके अस्पताल के खिलाफ गंभीर कमियों और नियमों के उल्लंघन की शिकायत आई है" । इसके बाद, फाइल को दबाने और शिकायत को समाप्त करने के एवज में वह परोक्ष रूप से मोटी रकम (अवैध वसूली) की मांग करता है और डॉक्टरों पर मानसिक दबाव बनाता है

मंत्रालय बुलाकर बाहर से ही लौटाने का खेल

सूत्रों के मुताबिक, यह खेल इस कदर शातिर तरीके से खेला गया कि कुछ अस्पताल संचालकों को बाकायदा मंत्रालय (महानदी भवन) भी बुलाया गया था। वहां कथित आरोपी उन्हें बाहर ही मिला और स्वास्थ्य सचिव की 'अहम मीटिंग' का हवाला देकर उन्हें कुछ देर रोके रखने के बाद बाहर से ही रवाना कर दिया गया ताकि डॉक्टरों को पूरा भरोसा हो जाए कि मामला सीधे ऊपर से जुड़ा है

सचिव खुद हुए हैरान, लिखनी पड़ी चिट्ठी

जब पीड़ित डॉक्टरों और नर्सिंग होम एसोसिएशन की नाराजगी और दहशत की बात खुद स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया तक पहुंची, तो प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। सचिव ने तुरंत एक्शन लेते हुए रायपुर के पुलिस कमिश्नर को एक आधिकारिक पत्र लिखकर कड़ी नाराजगी जताई और तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की है । इस पत्र में आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल नंबरों (जिसमें से एक 76520 94640 बताया जा रहा है) का भी उल्लेख है । रायपुर से लेकर दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव और कोरबा पुलिस को भी अलर्ट मोड पर डाला गया है 

पर्दे के पीछे कौन? पुलिस की सुस्ती पर उठते सवाल:

1. मोबाइल नंबर एक्टिव, फिर भी गिरफ्तारी क्यों नहीं? स्वास्थ्य सचिव की चिट्ठी में साफ तौर पर मोबाइल नंबर दर्ज हैं। सर्विलांस और साइबर सेल के आधुनिक युग में दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी 'अजय अग्रवाल' पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है? 

2. मोहरा या मास्टरमाइंड? कयास लगाए जा रहे हैं कि पुलिस किसी छोटे मोहरे को पकड़कर खानापूर्ति कर सकती है, जबकि मंत्रालय के भीतर बैठकर कमान संभालने वाले असली चेहरे (मास्टरमाइंड) पर्दे के पीछे ही रह जाएंगे

3. कमरा नंबर की सटीक जानकारी कैसे? बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत या बड़े अधिकारी/नेता के संरक्षण के, कोई बाहरी ठग डॉक्टरों को मंत्रालय के कमरा नंबर और विभागीय अंदरूनी शिकायतों की सटीक जानकारी कैसे दे सकता है? 

विपक्ष का हमला: "बिना सत्ता के संरक्षण के यह संभव नहीं"

इस मामले को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार और कानून व्यवस्था को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में असामाजिक तत्वों और ठगों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे सीधे आईएएस अधिकारियों के नाम पर सरेआम वसूली कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि बिना सत्ता के शीर्ष संरक्षण के कोई भी व्यक्ति आधे दर्जन से अधिक डॉक्टरों को मंत्रालय का हवाला देकर इस तरह भयादोहन नहीं कर सकता; प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है


मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक भी इस मामले की गूंज पहुंचने की खबर है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस निष्पक्ष जांच कर 'शासन के इस खेल' के असली किरदारों को बेनकाब करती है, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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