गुरुवार, 25 जून 2026

आदिवासी महिलाओं से अरबों की ठगी; सीधे मंत्रियों और अफसरों पर गंभीर आरोप!

 छत्तीसगढ़ में 'रक्षक ही भक्षक': राष्ट्रीय आजीविका मिशन के नाम पर 40,000 आदिवासी महिलाओं से अरबों की ठगी; सीधे मंत्रियों और अफसरों पर गंभीर आरोप!


- मोदी सरकार की लखपति दीदी और आत्मनिर्भर योजना को लगा बट्टा; 'फ्लोरोमैक्स' कंपनी के झांसे में आकर बर्बाद हुईं छत्तीसगढ़ की ग्रामीण बहनें।

- पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने खोला मोर्चा, कहा—"यह सिर्फ लूट नहीं, प्रधानमंत्री को बदनाम करने की साजिश", सीबीआई जांच की मांग।

- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सख्ती: गुमराह करने वाले कलेक्टर के बाद अब सीधे मुख्य सचिव को दिल्ली दरबार में किया तलब।

- "कर्ज चुकाने के लिए किडनी बेचो या खुद को बेचो..." बैंक दे रहे धमकियां, रोते-बिलखते हुए महिलाओं ने मंत्रियों को घेरा तो मिला 'नाटकबाजी' का ताना।


जिस राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की गरीब और आदिवासी महिलाओं की तकदीर बदलने, उन्हें 'लखपति दीदी' बनाने और आर्थिक रूप से सशक्त करने का सबसे बड़ा जरिया बताया था, छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में उसी योजना की आड़ में एक ऐसा खौफनाक खेल खेला गया है जिसकी कल्पना भी रूह कंपा देने वाली है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और विशेषकर कोरबा तथा आसपास के आदिवासी क्षेत्रों की लगभग 40,000 से अधिक लाचार और भोली-भाली महिलाओं को एक सोची-समझी साजिश के तहत अरबों रुपए की महालूट का शिकार बना दिया गया है।

हैरानी और शर्म की बात यह है कि जब ये ठगी गईं महिलाएं अपनी बर्बादी का रोना लेकर सरकार के पास पहुंचती हैं, तो रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आते हैं। आरोप सीधे प्रदेश सरकार के दो कद्दावर मंत्रियों—उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन और कृषि मंत्री रामविचार नेताम पर लग रहे हैं। वहीं, जिला प्रशासन और कलेक्टर पर इस महाघोटाले के आरोपियों को खुला संरक्षण देने और फाइलों को दबाने के संगीन आरोप लगे हैं।

मंत्रियों के चेहरे देख लिया था लोन, अब वही कह रहे 'नाटक बंद करो'

पीड़ित महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्राउंड जीरो से आ रही तस्वीरें और महिलाओं के बयान दिल दहला देने वाले हैं। महिलाओं का आरोप है कि 'फ्लोरोमैक्स' (Fluoromax) नाम की एक निजी कंपनी ने उन्हें रोजगार और मोटी कमाई का झांसा देकर बैंकों से बड़े-बड़े लोन दिलवाए। इस कंपनी के प्रमोशन और उद्घाटन में खुद प्रदेश के उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन और पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी शामिल हुए थे। मंत्रियों और सरकार के चेहरे को देखकर ही इन गरीब महिलाओं ने बैंकों से कर्ज उठाया था कि उनका घर सुधरेगा।

लेकिन आज आलम यह है कि कंपनी पैसा लेकर रफूचक्कर हो चुकी है, बैंक वाले महिलाओं के घरों पर दबिश दे रहे हैं और उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। पीड़ित महिलाओं ने रोते हुए कैमरे पर आपबीती सुनाई कि बैंक के अधिकारी और रिकवरी एजेंट उनसे कह रहे हैं—"कर्ज चुकाने के लिए चाहे अपना घर बेचो, अपनी किडनी बेचो या खुद को बेचो, लेकिन पैसा पटाओ।"

हद तो तब हो गई जब पिछले दिनों प्रवास पर पहुंचे कृषि मंत्री रामविचार नेताम और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन को महिलाओं ने घेरकर अपना दुखड़ा सुनाना चाहा। मदद और सांत्वना देने के बजाय कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने महिलाओं के आंदोलन और आंसुओं को 'नाटक' करार दे दिया। उन्होंने कड़े लहजे में महिलाओं से कहा—"लोन लेते समय हमसे पूछा था क्या? यह सब नाटकबाजी बंद करो।" पीड़ित महिलाओं का सवाल है कि सरकार हमसे बनती है, हम सरकार से नहीं। जब उद्घाटन के समय नेता भरोसा देने आ सकते हैं, तो आज मौत के मुहाने पर खड़ी महिलाओं का कर्ज माफ कराने वे आगे क्यों नहीं आ रहे?

राष्ट्रीय जनजाति आयोग में हड़कंप, मुख्य सचिव तलब

यह मामला अब सिर्फ छत्तीसगढ़ की गलियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुकी है। जब यह पूरा मामला चौंकाने वाले सबूतों के साथ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के सामने पहुंचा, तो आयोग के अधिकारी भी दंग रह गए।

सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर से जवाब तलब किया था और उन्हें हाजिर होने का आदेश दिया था। लेकिन प्रशासनिक तानाशाही और रसूखदारों को बचाने के चक्कर में आयोग को ही गुमराह करने की कोशिश की गई। कलेक्टर ने आदेश के बावजूद 30 दिनों के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और फाइल को दबाए रखा। इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए राष्ट्रीय जनजाति आयोग ने अब सीधे छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को समन जारी कर दिल्ली दफ्तर में व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया है।

अंतरराज्यीय गिरोह का शक, बीजेपी के ही कद्दावर नेता ने मांगी सीबीआई जांच

इस महालूट के खिलाफ विपक्ष तो दूर, खुद सत्ताधारी दल बीजेपी के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ननकीराम कंवर ने इस पूरे मामले को एक बेहद गंभीर साजिश बताते हुए सीधे 'सीबीआई (CBI) जांच' की मांग कर दी है।

कंवर का मानना है कि यह केवल 40 हजार महिलाओं की लूट का स्थानीय मामला नहीं है। यह एक बहुत बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह (Inter-state Gang) है, जिसने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के आदिवासियों को भी निशाना बनाया है। उन्होंने बेहद तीखा हमला करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ की आदिवासी बहनों की अस्मिता और पेट पर लात मारने के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख और उनकी जनकल्याणकारी योजनाओं को बदनाम करने की एक गहरी राजनीतिक और आर्थिक साजिश है।

बड़ा सवाल: हसदेव की तरह क्या यहां भी दफन हो जाएगा न्याय?

हसदेव अरण्य के आदिवासियों के साथ जो हुआ, वह जगजाहिर है। वहां भी आयोग की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब सवाल यह उठता है कि क्या छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार अपने दागदार मंत्रियों और भ्रष्ट नौकरशाहों को बचाएगी या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को बेदाग रखने के लिए इस अरबों रुपए के घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपेगी?

यदि 5 साल के लिए चुनी गई सत्ता अहंकार में चूर होकर आदिवासियों की इस चीख को 'नाटक' समझती रहेगी, तो लोकतंत्र में जनता का भरोसा उठना लाजिमी है। फिलहाल, दिल्ली से लेकर रायपुर तक मचे इस हड़कंप के बाद देखना होगा कि इन बेसहारा और प्रताड़ित बहनों को न्याय मिलता है या फिर यह फाइल भी फाइलों के अंबार में कहीं दफन हो जाएगी।

वीडियो देखें 

https://youtu.be/4KeBOfdeK7Y?si=e-tAut4GdaTYZC6g


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