ED की ₹1700 करोड़ की चोट के बाद अब CBI पर दबाव, पूर्व CM भूपेश बघेल और आधा दर्जन IPS-अफ़सरों पर गिरफ्तारी की तलवार!
भिलाई से लेकर दुबई तक अरबों रुपयों का साम्राज्य खड़ा करने वाले 'महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप' मामले में अब तक की सबसे बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दुबई की बुर्ज खलीफा की आलीशान संपत्तियों सहित करीब 1700 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति अटैच (कुर्क) किए जाने के बाद, अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) पर भी कड़ा एक्शन लेने का भारी दबाव बन गया है। सूत्रों का दावा है कि सीबीआई अब इस मामले में शामिल 'बड़े मगरमच्छों' पर शिकंजा कसने और उन्हें पूछताछ के बहाने बुलाकर सीधे गिरफ्तार करने की फुलप्रूफ प्लानिंग में जुट गई है।
बुर्ज खलीफा से लेकर दिल्ली तक जब्ती, कुल आंकड़ा ₹4336 करोड़ पार
बुधवार को ईडी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए दुबई के प्राइम लोकेशन पर मौजूद 18 और दिल्ली की 2 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। इसमें दुनिया की सबसे ऊंची इमारत 'बुर्ज खलीफा' के लग्जरी अपार्टमेंट, दुबई हिल्स स्टेट के विला और कई हाई-एंड फ्लैट्स शामिल हैं, जिनकी बाजार कीमत करीब 1700 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस ताजी कार्रवाई के बाद महादेव ऐप मामले में अब तक कुल फ्रीज और कुर्क की गई चल-अचल संपत्ति का आंकड़ा चौंकाने वाले ₹4,336 करोड़ के पार पहुंच चुका है।
आरोपी नंबर-6 पूर्व CM भूपेश बघेल और IPS लॉबी राडार पर
महादेव सट्टा ऐप को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण देने के आरोपों को लेकर सीबीआई की चार्जशीट में बड़े खुलासे हुए हैं। सीबीआई की एफआईआर में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 'आरोपी नंबर-6' बनाया गया है। इसके अलावा प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक रसूखदार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सीबीआई के सीधे राडार पर हैं।
इनमें आईपीएल स्तर के अधिकारी और अन्य बड़े नाम शामिल हैं:
आनंद छाबड़ा (प्रशासनिक/पुलिस अधिकारी)
अभिषेक पल्लव (प्रशासनिक/पुलिस अधिकारी)
प्रशांत अग्रवाल
आरिफ शेख
संजय ध्रुव (राज्य प्रशासनिक सेवा)
चंद्रभूषण वर्मा (जमानत पर बाहर एएसआई)
सीबीआई की जांच के मुताबिक, ये तमाम अधिकारी महादेव सट्टा ऐप को बेखौफ चलाने और प्रोटेक्शन देने के एवज में हर महीने ₹10 लाख से लेकर ₹20 लाख तक की मोटी प्रोटेक्शन मनी वसूलते थे। इन सभी के खिलाफ धारा 120B और 420 के तहत केस दर्ज किया जा चुका है और कभी भी इनकी गिरफ्तारी की जा सकती है।
एक तरफ जांच का शिकंजा, दूसरी तरफ अफ़सरों को प्रमोशन का 'इनाम'?
इस पूरे मामले में एक तीखा और गंभीर विरोधाभास भी सामने आया है। एक तरफ जहां मौजूदा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और 'अपराधियों को उल्टा लटकाकर सीधा करने' की हुंकार भरती है, वहीं दूसरी तरफ महादेव सट्टा ऐप के आरोपी घेरे में आए आनंद छाबड़ा और लोहारीडीह कांड के बाद हटाए गए अभिषेक पल्लव जैसे अधिकारियों को वेतन वृद्धि और प्रमोशन का 'इनाम' दिए जाने की खबरें हैं। सरकार की इस कथनी और करनी को लेकर अब सियासी गलियारों में तीखे सवाल उठने लगे हैं।
सिंडिकेट का नया पैंतरा: बैन के बावजूद बदले डोमेन, विपक्ष ने घेरा
हंगामा मचने और महादेव ऐप पर प्रतिबंध की बातों के बीच सट्टा सिंडिकेट ने 'गोल्ड 365', 'टाइगर एक्सचेंज' और 'लेजर 247' जैसे नए डोमेन बनाकर इस अवैध खेल को बदस्तूर जारी रखा। इधर विपक्ष (कांग्रेस) ने केंद्र सरकार पर इस ऐप को पूरी तरह बैन न करने का आरोप लगाते हुए पलटवार किया है कि महादेव ऐप का पैसा अब सत्ताधारी दल के एक बेहद प्रभावशाली नेता तक पहुंच रहा है, जिसके चलते मुख्य आरोपियों (सौरभ चंद्राकर और रवि उत्पल) को अभी भी राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
फिलहाल, ईडी की इस बड़ी चोट के बाद अब गेंद सीबीआई के पाले में है। देखना यह होगा कि धीमी रफ्तार से चल रही यह जांच कब अंजाम तक पहुंचती है, क्योंकि जनता के बीच अब यह चर्चा आम है कि 'डिलेड जस्टिस इज नो जस्टिस' (देर से मिला न्याय, न्याय नहीं होता)।

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