बुधवार, 8 जुलाई 2026

नहीं बदला दो दर्जन IAS अफसरों का 'सिंडिकेट राज'!

 चेहरे बदले, सरकारें बदलीं... पर छत्तीसगढ़ में नहीं बदला दो दर्जन IAS अफसरों का 'सिंडिकेट राज'!


छत्तीसगढ़ में सत्ता और मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने के बाद सुशासन के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन प्रशासनिक गलियारों की जमीनी हकीकत आज भी वही है। राज्य में दो दर्जन से अधिक रसूखदार आईएएस अफसरों का एक ऐसा मजबूत 'सिंडिकेट' सक्रिय है, जिसने पूरे सिस्टम को बंधक बना रखा है।

केंद्र की चिट्ठियां रद्दी की टोकरी में

यह नेक्सेस इतना ताकतवर है कि केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग, गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से आने वाले जांच के सख्त निर्देशों को भी यहां बड़ी आसानी से दबा दिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि टेंडर प्रक्रियाओं में गड़बड़ी, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग की शिकायतों पर केंद्र द्वारा मांगे गए जवाब आज भी फाइलों में धूल फांक रहे हैं।

अपनी ही सरकार के दावों पर सवाल

भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकीराम कंवर और कई अधिवक्ताओं ने पीएमओ से लेकर मुख्यमंत्री तक इन अफसरों के खिलाफ अनगिनत शिकायतें की हैं। कोरबा कलेक्टर के पद के दुरुपयोग से लेकर नजूल जमीन घोटाले तक, हर मामले में ठोस सबूत होने के बावजूद कार्रवाई की फाइलें गायब कर दी जाती हैं।

'प्यादों' पर एक्शन, असली खिलाड़ियों को अभयदान

आबकारी से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक, जब भी घोटालों का शोर मचता है, प्रशासन सिर्फ निचले स्तर के 'प्यादों' पर कार्रवाई कर खानापूर्ति कर देता है। लेकिन शतरंज के उन असली खिलाड़ियों पर हाथ डालने से सरकार के पसीने छूटते हैं, जो वास्तव में मलाईदार पदों पर बैठे हैं।

2005 बैच का नया 'नेक्सेस'

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि अब पूरा नेक्सेस 2005 बैच के एक रसूखदार अधिकारी के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर दफ्तरों तक इन्हीं अफसरों का वर्चस्व है। आलम यह है कि जो अफसर विवादित रहे, उन्हें रिटायरमेंट के बाद भी संविदा नियुक्तियों के जरिए मलाईदार कुर्सियां थमा दी जाती हैं।

बड़ा सवाल:

क्या छत्तीसगढ़ की जनता द्वारा चुनी गई सरकार, इन दो दर्जन अफसरों के सिंडिकेट से बड़ी है? कब तक केंद्र के निर्देशों का अपमान और जनता के अधिकारों का हनन जारी रहेगा?

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