धर्म के 'सौदागर' और राजनीति का 'झूठा' खेल: पाखंड का पर्दाफाश!
जब बात धर्म की राजनीति करने और दूसरों पर उंगली उठाने की हो, तो कुछ राजनेताओं की जुबान सबसे तेज चलती है। लेकिन जब खुद की ही निष्ठा और पवित्रता कसौटी पर हो, तो ये नेता कैमरे के सामने ऐसे बेनकाब होते हैं कि उनकी बोलती बंद हो जाती है। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने कथित 'धर्म रक्षकों' के दोहरे चरित्र को सरेआम उजागर कर दिया है ।
महाकाल का प्रसाद और बीजेपी नेता की 'झूठ'
तिरुपति मंदिर के लड्डू विवाद को लेकर देश में मचे शुद्धिकरण और प्रायश्चित के शोर के बीच, अब बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से एक शर्मनाक वीडियो वायरल हुआ है । यह वीडियो किसी विपक्षी दल के नेता का नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के महामंत्री संजय अग्रवाल का है ।
दरअसल, महाकाल मंदिर परिसर में एक गेट गिरने से हुए हादसे का निरीक्षण करने बीजेपी के नेता पहुंचे थे। इस दौरान उन्हें वहां प्रसाद (लड्डू-पैकेट के लिए चना) बनने की प्रक्रिया दिखाने ले जाया गया । लेकिन कैमरे में जो कैद हुआ, उसने आस्थावानों के पैरों तले जमीन खिसका दी। बीजेपी नेता संजय अग्रवाल ने प्रसाद के चने की सामग्री में से एक मुट्ठी चना उठाया, उसे चखा (मुंह में डाला) और उसी हाथ में बचे हुए चने को वापस प्रसाद के ढेर में डाल दिया !
करोड़ों भक्तों की आस्था के प्रतीक बाबा महाकाल के महाप्रसाद को इस तरह 'जूठा' करने का वीडियो जैसे ही कांग्रेस ने जारी किया, वैसे ही हड़कंप मच गया ।
चौतरफा घिरे तो मांगी माफी, पर 'हिंदुत्व' के ठेकेदार चुप क्यों?
वीडियो के सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलते ही चारों तरफ थू-थू होने लगी। खुद को चौतरफा घिरा देख बीजेपी नेता संजय अग्रवाल ने तुरंत सफाई दी और माफी मांग ली । उन्होंने दलील दी कि मुंह में डालने के बाद हाथ में बची सामग्री झूठी नहीं हुई थी । लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या आस्था के साथ इस तरह का खिलवाड़ माफी योग्य है?
सबसे बड़ा और तीखा सवाल उन तमाम तथाकथित हिंदू संगठनों और कट्टरपंथियों पर उठता है, जो दूसरों की छोटी सी चूक पर भी सड़कों पर उतर आते हैं, 'थूक जिहाद' जैसे नैरेटिव गढ़ने लगते हैं और प्रधानमंत्री तक का खून खौल उठता है । आज वही संगठन इस मामले पर पूरी तरह 'मौन व्रत' धारण किए हुए हैं । आखिर यह चुप्पी क्यों? क्या हिंदुत्व की भावनाएं सिर्फ तभी आहत होती हैं जब आरोपी विपक्ष का हो या किसी दूसरे समुदाय का ?
डबल इंजन की सरकार में 'ढहती' व्यवस्था
यह घटना उस वक्त की है जब महाकाल मंदिर का एक द्वार ढहने से दो मासूमों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए थे । इससे पहले भी उज्जैन में आए आंधी-तूफान में करोड़ों की लागत से बनी मूर्तियां ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थीं, जिन्हें जेसीबी से बेहद अमानवीय और मनमाने तरीके से उठाया गया था ।
चाहे अयोध्या के राम मंदिर की छत से पानी टपकने का मामला हो या महाकाल में घोटालों और हादसों की फेहरिस्त—इस डबल इंजन की सरकार में आस्था के केंद्रों का रख-रखाव और नेताओं का आचरण, दोनों ही कटघरे में हैं ।
बड़ा सवाल: आस्था पर विश्वासघात कब तक?
यह वीडियो उन तमाम लोगों की आंखें खोलने के लिए काफी है, जो धर्म की पट्टी बांधकर किसी एक राजनीतिक दल या संगठन पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं । सच तो यह है कि आम जनता की भावनाओं और श्रद्धा के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात वही लोग कर रहे हैं, जो खुद को धर्म का सबसे बड़ा अलमबरदार बताते हैं ।
महाकाल के दरबार में हुआ यह कृत्य महज एक नेता की लापरवाही नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार और धर्म के नाम पर की जाने वाली पाखंडी राजनीति का सरेआम सबूत है।
Vidio देखें
https://youtu.be/YEPHEl0KUSU?si=LdiZpzoNDkWLk4P8

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