मंगलवार, 21 जुलाई 2026

570 करोड़ का कोयला घोटाला — फाइल दबेगी या 'उल्टा लटकेगे' भ्रष्टाचारी?

 570 करोड़ का कोयला घोटाला — फाइल दबेगी या 'उल्टा लटकेगे' भ्रष्टाचारी?


प्रशासनिक शह-मात के खेल में क्यों फूले हाथ-पांव? डबल इंजन सरकार की अग्निपरीक्षा

छत्तीसगढ़ में 570 करोड़ रुपये के कोयला लेवी/परिवहन घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राज्य का सियासी और प्रशासनिक तापमान बढ़ता जा रहा है [00:10]। "भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटकाकर सीधा करने" के बड़े-बड़े दावों के साथ सत्ता में आई डबल इंजन सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है [00:30]।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चार्जशीट दाखिल कर कार्रवाई की गेंद पूरी तरह से राज्य सरकार के पाले में डाल दी है [00:30]। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस घोटाले की जद में आए रसूखदार अधिकारियों पर वाकई गाज गिरेगी या फिर सियासी सेटिंग के तहत मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा [04:16]?

1. ED की चार्जशीट: आधा दर्जन IAS और IPS रडार पर

घोटाले की जांच के दौरान करीब आधा दर्जन आईएएस (IAS) और आधा दर्जन आईपीएस (IPS) अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं [00:50]। जांच एजेंसियों की नजर इन पर टेढ़ी तो है, लेकिन सीधी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जिम्मेदारी अब शासन पर छोड़ दी गई है [04:16]।

इस पूरे मामले में कई चर्चित चेहरे और अधिकारी लगातार सुर्खियों में रहे हैं:

 दीपांशु काबरा: ईडी की जांच के दौरान परिवहन और जनसंपर्क विभाग संभाल रहे इस वरिष्ठ अधिकारी का नाम खूब उछला, लेकिन राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारों में चर्चा रही कि वे अब तक बचे हुए हैं [04:44]।

 भोजराज पटेल: ईडी द्वारा पूछताछ किए जाने के बाद तत्कालीन सरकार ने उन्हें हटाया था, लेकिन वर्तमान में वे मुंगेली के एसपी पद पर तैनात हैं [05:08]।

 अभिषेक माहेश्वरी: महादेव सट्टा ऐप प्रकरण और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर जांच एजेंसियों के रडार पर रहे [05:50]।

 विवेक ढांड: राज्य के पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड से पूछताछ और ईओडब्ल्यू (EOW) की सुस्ती को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं [07:07]।

 इसके अलावा पारुल माथुर, आरिफ शेख, प्रशांत अग्रवाल और अभिषेक पल्लव जैसे अधिकारियों के नाम भी अलग-अलग मामलों व जांचों के संदर्भ में चर्चा में बने हुए हैं [05:42]।

2. नौकरशाही की 'दादागिरी' और मंत्रियों का सन्नाटा

घोटाले की आंच के बीच राज्य के प्रशासनिक ढांचे के भीतर का शक्ति-संतुलन भी गड़बड़ा गया है [01:35]। हाल ही में आयोजित कलेक्टर-एसपी-डीएफओ कॉन्फ्रेंस के दौरान सत्ता के गलियारों में जबरदस्त अंदरूनी विवाद देखने को मिला [01:35]:

 2005 बैच के अफसरों का प्रभाव: आरोप हैं कि 2005 बैच के अधिकारियों के एक गुट ने अपनी धमक के आगे विभागीय मंत्रियों को भी किनारे करने की कोशिश की [01:47]।

 मंत्रियों की उपेक्षा: वन मंत्री केदार कश्यप और गृह मंत्री विजय शर्मा जैसे शीर्ष मंत्रियों की उपस्थिति को लेकर खींचतान मची [02:08]। दिल्ली के हस्तक्षेप के बाद गृह मंत्री बैठक में पहुंचे जरूर, लेकिन पूरे समय सन्नाटा पसरा रहा [02:41]।

 राहुल भगत, सुबोध सिंह और ओपी चौधरी जैसे कद्दावर चेहरों का नाम इस प्रशासनिक खींचतान के संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है [03:01]।

3. 'जीरो टॉलरेंस' का नारा या महज खोखला दावा?

कोयला घोटाला हो, शराब घोटाला हो या महादेव सट्टा ऐप का जाल—हर तरफ बड़ी-बड़ी कार्रवाई की बातें तो की गईं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात नजर आ रहा है [06:29]। मुख्य आरोपियों और संदिग्ध अधिकारियों पर निर्णायक शिकंजा कसने के बजाय ईओडब्ल्यू जैसी राज्य एजेंसियां अब तक ठंडी नजर आ रही हैं [07:18]।

संपादकीय निष्कर्ष: क्या अब होगी वास्तविक कार्रवाई?

सत्ता और संगठन से जुड़े कई लोग आज भी जेल की सलाखों के पीछे हैं, जबकि कई अधिकारियों को अब तक अभयदान मिला हुआ है [03:43]। जनता यह देखने के लिए टकटकी लगाए बैठी है कि क्या डबल इंजन सरकार अपने वादे के मुताबिक इन शक्तिशाली अफसरों के खिलाफ कड़े कदम उठाएगी या फिर यह पूरा मामला महज एक सियासी तमाशा बनकर रह जाएगा [07:27]?


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