सोमवार, 3 अगस्त 2026

विकास का मॉडल या ज़मीनों का 'कॉरपोरेट' सौदा?

 विकास का मॉडल या ज़मीनों का 'कॉरपोरेट' सौदा?

नवा रायपुर में 1076 एकड़ बेशकीमती जमीन निजी हाथों में सौंपने का ताना-बाना; नकटी में उजड़े गरीबों के आशियाने


 छत्तीसगढ़ की राजधानी के मुहाने पर बसे छह गांवों की 1076 एकड़ बेशकीमती जमीन को लेकर छिड़ा विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक गर्माहट का केंद्र बन गया है [01:30]। एक ओर जहां नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) ने रायपुर और नवा रायपुर के बीच स्थित छह प्रमुख गांवों की 436 हेक्टेयर (लगभग 1076 एकड़) जमीन के विकास के लिए नगर विकास योजना के तहत निविदाएं (Tenders) आमंत्रित की हैं [02:15], वहीं दूसरी ओर इस योजना की आड़ में गरीबों के मकानों पर चले बुलडोजर ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं [04:44]।

1. क्या है NRDA का 'स्मार्ट' टेंडर खेल?

सरकारी दस्तावेजों और जारी निविदा के अनुसार, छह गांवों—नकटी, छेरीखेड़ी, मंदिर हसौद, रमचंडी, बरौदा और रीको—की जमीन को इस योजना में शामिल किया गया है [01:30]।

 टेंडर की शर्त: निजी डेवलपर या बिल्डर को इस 1076 एकड़ भूमि पर सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करनी होंगी [03:11]।

 असली ट्विस्ट: इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के बदले में उस डेवलपर को 'मिक्स यूज़' भूमि का एक बड़ा हिस्सा खुद विकसित करने और उसे बाजार में मनमाने दामों पर बेचने तथा अधिकार हस्तांतरित करने की अनुमति दी गई है [03:36]।

विपक्ष और विश्लेषकों का आरोप है कि सरकार सीधे जमीन न बेचकर बिल्डर के जरिए जमीन बिकवाने का रास्ता अपना रही है [03:46]।

2. टेंडर की टाइमिंग और बुलडोजर का खौफ

निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई 2026 तय की गई थी [04:28]। लेकिन इस तारीख से ठीक पहले, योजना के तहत आने वाले गांव नकटी में भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर चलाकर 80 से अधिक गरीब परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया गया [04:44]।

 बारिश में छिना छत: भीषण गर्मी के बाद मानसून की पहली फुहारों के बीच गरीब परिवारों के सिर से छत छीन ली गई [05:13]।

 सरकारी योजनाओं का विरोधाभास: पीड़ितों का कहना है कि वे सालों से यहां रह रहे थे, बिजली बिल भर रहे थे, नल-जल योजना का लाभ उठा रहे थे और कुछ मकान तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे [06:02]।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एयरपोर्ट और नवा रायपुर के प्राइम लोकेशन पर वीआईपी प्रोजेक्ट्स और तथाकथित 'विधायक कॉलोनी' जैसी योजनाओं की नींव रखने के लिए यह कार्रवाई की गई [06:46]।

3. सियासत में उबाल: विपक्ष के हमले और सरकार का 'डैमेज कंट्रोल'

पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने दस्तावेजों के साथ पत्रकार वार्ता कर सरकार को घेरा [07:40]। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर चहेते बिल्डरों और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए यह पूरा खाका खींचा गया है [08:37]।

 सरकार का बचाव: बढ़ते विवाद और फजीहत के बीच कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप डैमेज कंट्रोल के लिए सामने आए [09:28]।

 पुरानी सरकार पर ढींकरा: उन्होंने तर्क दिया कि यह नगर विकास योजना 2020 (पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार) के समय की है और वर्तमान सरकार इसे सिर्फ आगे बढ़ा रही है [09:50]।

 अनुत्तरित सवाल: हालांकि, 1076 एकड़ जमीन को निजी डेवलपर्स के अधिकार में देने और मुनाफा कमाने की छूट देने के सवालों पर मंत्री ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया [10:12]।

4. किसानों का दर्द: जिस माटी के लिए जमीन दी, वहीं हुए बेगाने

नवा रायपुर के निर्माण के समय छह गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने नई राजधानी के विकास के सपने के साथ ओने-पौने दामों पर अपनी पुश्तैनी जमीनें सरकार को दी थीं [11:34]। आज जब उसी जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल कर कॉरपोरेट के खजाने भरने की तैयारी हो रही है, तब उन मूल निवासियों में भारी आक्रोश और असंतोष पनप रहा है [12:06]।

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