एक तरफ शराब की दुकान, दूसरी तरफ नशा-मुक्ति अभियान!
सत्ता का दोहरा चरित्र: टैक्सपेयर्स के पैसों पर विज्ञापनों का खेल और पुलिस के डंडे के बल पर शराब का कारोबार
1. सत्ता का अनोखा 'डबल गेम'
छत्तीसगढ़ में इन दिनों साय सरकार का एक अनोखा 'डबल गेम' देखने को मिल रहा है [00:08]। एक ऐसा खेल जिस पर जनता हंसे या रोए, समझ नहीं आता [00:16]।
पहला पहलू: किसी इलाके में जब ग्रामीण और महिलाएं शराब दुकान का विरोध करते हैं, तो सरकार आबकारी विभाग और भारी पुलिस बल लगाकर लाठी-डंडों के दम पर जबरन दुकान खुलवाती है [00:40]।
दूसरा पहलू: दूसरी तरफ यही सरकार जनता की कमाई से जमा हुए करोड़ों-अरबों रुपये (टैक्सपेयर्स का पैसा) पानी की तरह बहाकर 'नशा-मुक्ति अभियान' के बड़े-बड़े पोस्टर-बैनर चमकाती है [00:51]।
यह वही बात हो गई—"चोर से कहो चोरी करो, और गृहस्थ से कहो जागते रहो!" [04:08]
2. बीजापुर का संगमपल्ली: स्कूल मांग रहे थे, मिली शराब की दुकान
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड स्थित संगमपल्ली गांव की घटना सरकार की नीतियों की पोल खोलती है [01:19]।
संगमपल्ली के ग्रामीण लगातार स्कूल, अस्पताल और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं [02:14]।
लेकिन सरकार ने गांव में शासकीय विदेशी मदिरा दुकान खोलने का ऐलान कर दिया [01:32]।
जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो आबकारी विभाग ने समाधान तलाशने के बजाय बीजापुर SP को पत्र लिखकर पुलिस बल उपलब्ध कराने की मांग कर दी ताकि विरोध को दबाकर दुकान खोली जा सके [02:45]।
3. ओवररेटिंग का खेल और ₹3,870 करोड़ का घोटाला?
वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार कौशल तिवारी द्वारा उठाए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में शराब की ओवररेटिंग का बड़ा सिंडिकेट चल रहा है [05:05]:
दैनिक मदिरा बिक्री (सरकारी दावा): लगभग 28,65,000 बोतलें [05:17]।
अवैध ओवररेटिंग वसूली: हर बोतल पर ₹15 से अधिक की अतिरिक्त वसूली होती है [05:17]।
दैनिक अवैध कमाई: लगभग ₹4.29 करोड़ प्रतिदिन [05:23]।
वार्षिक गणित: यह आंकड़ा ₹1,548 करोड़ प्रति वर्ष बैठता है [05:32]।
ढाई साल का हिसाब: लगभग ₹3,870 करोड़ की अवैध वसूली [05:05]।
बड़ा सवाल: क्या ED, CBI या EOW जैसी केंद्रीय एजेंसियां इस कथित ओवररेटिंग सिंडिकेट की जांच करने का साहस दिखाएंगी [05:40]?
4. 'महतारी वंदन' का ढोंग और स्मार्ट मीटर का बोझ
सरकार एक हाथ से 'महतारी वंदन योजना' में महिलाओं को पैसे देने का प्रचार करती है [03:04], लेकिन दूसरे हाथ से:
1. गांव-गांव शराब की दुकानें खोलकर घरों की शांति और आर्थिक स्थिति भंग की जा रही है [03:11]।
2. स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली बिलों से भारी वसूली की तैयारी है [03:04]।
3. गुजरात व अन्य राज्यों से आ रहे सूखे नशे पर रोक लगाने में कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल दिखती है [04:41]।
5. राष्ट्रीय मॉडल से जुड़ाव (मोदी शासन व डबल इंजन सरकार पर तंज)
केंद्र व राज्यों की तथाकथित 'डबल इंजन' सरकारों में एक पैटर्न साफ दिखाई देता है:
इवेंट मैनेजमेंट व पब्लिसिटी: विज्ञापनों और सरकारी अभियानों (जैसे नशा मुक्त भारत या नशामुक्ति पखवाड़ा) के जरिए ब्रांडिंग की जाती है [03:59]।
कॉर्पोरेट व रेवेन्यू सिंडिकेट: धरातल पर नीतियां इस तरह बनाई जाती हैं कि शराब और राजस्व सिंडिकेट को फलने-फूलने दिया जाए, भले ही उसके लिए पुलिस बल का इस्तेमाल क्यों न करना पड़े


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें