बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे...

कार्रवाई की बजाय पुलिस का संरक्षण
 छत्तीसगढ़ में अपराधियों के हौसले किस तरह से बुलंद है इसका ताजा उदाहरण ऋषभ काम्पलेक्स से लोगों का करोड़ों रुपया उड़ा लेने वाले फायनेंस कंपनी के मालिकों की दादागिरी से लगाया जा सकता है। अब तो दुकान मालिक सेट्टी ने अखबार को नोटिस भिजवाई है। उनका कहना है कि उनका फरार आरोपी से कोई लेना देना नहीं है जबरन उनका नाम घसीटा जा रहा है लेकिन हमें कर्मचारियों ने जो जानकारी दी है उसके बाद सारे सबूत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है।
उल्लेखनीय है कि करीब 15 दिन पहले ऋषभ काम्पलेक्स स्थित वैष्णव फायनेंस के द्वारा करीब चार सौ लोगों का करोड़ों रुपया लेकर फरार हो गया। इसकी खबर पर जब तहकीकात की गई तो पता चला कि यह आफिस न्यू शांति नगर निवासी मदनमोहन राये सेट्टी की है और वे लोग भी इस कंपनी से जुड़े हुए थे। मदन मोहन सेट्टी ने नोटिस में कहा है कि कमल सेट्टी वहां नौकरी करता था जबकि कर्मचारियों व पीडि़तों ने हमें जो शिकायत लिखकर दी है उसके मुताबिक कमल सेट्टी वहां पार्टनर था और उसके पास ही आफिस की चाबी व पैसे रहते थे जिस दिन आखरी बार आफिस बंद हुआ तब भी चाबी कमल सेट्टी के पास ही थी और उस दिन लगभग ढाई लाख रुपए भी आफिस में रहा है। यही नहीं इस मामले में पुलिस की भूमिका शुरु से ही संदेहास्पद रही है। जिस आरोपी शिवकुमार शर्मा को फरार बताया जा रहा है उससे पुलिस न केवल मुलाकात कर चुकी है बल्कि पुलिस पर यह आरोप भी है कि उसने साढ़े तीन लाख रुपए लेकर आरोपी को छोड़ दिया। मामूली अपराध में मकान मालिक के खिलाफ जुर्म दर्ज करने वाली पुलिस इस मामले में पीछे क्यों है? यही बात अनेक संदेहों को जन्म देता है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मैादाहापारा थाना में अब तक चार दर्जन से अधिक पीडि़तों ने लिखित में शिकायत की है लेकिन पुलिस द्वारा जांच के नाम पर अपराध दर्ज नहीं करना भी पुलिस की करतूत को ही उजागर करता है। इधर हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों का दावा है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए तो कई और मुजरिम भी पकड़ में आएंगे। इधर मदनमोहन राय सेट्टी ने पुलिस में शिवकुमार शर्मा द्वारा बगैर किराये दिए भाग जाने की शिकायत की है और उनके पुत्र व कुछ कर्मचारियों ने वेतन नहीं दिए जाने की शिकायत की है। वह भी घटना के दो दिन बाद।
बताया जाता है कि राजनैतिक एप्रोच के चलते मामले को दबाया जा रहा है जबकि आम लोगों से करोड़ों रुपए दबाने वाले पुलिस की करतूत की वजह से बेखौफ घूम रहे हैं। बहरहाल इस मामले के पीडि़त अब मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश में है जबकि इस मामले में दुकान मालिक-फायनेंस कंपनी व पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं ऐसे में देखना है कि इस मामले में जुर्म दर्ज कर गिरफ्तारी होती है या अन्य मामलों की तरह इसे भी भूला दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ बुनकर संघ की जमीन पर बालकृष्ण अग्रवाल का कब्ज़ा हटाने रैली व् आमसभा




छत्तीसगढ़ के तमाम समाज के लोगो ने आज छत्तीसगढ़ बुनकर संघ की जमीन पर बालकृष्ण अग्रवाल का कब्ज़ा हटाने की मांग को लेकर रैली व् आमसभा की साथ ही यंहा से शराब दुकान हटाने की मांग भी की .समाज प्रमुखों ने इस दौरान सरकार की जमकर खिंचाई भी की

ट्रक ने साईकिल सवार लड़की को कुचल दिया






पचपेड़ी नका रायपुर के पास ट्रक ने साईकिल सवार १४ साल की लड़की शीतल  को कुचल दिया लड़की की मौके पर ही मौत हो गई .

मंगलवार, 19 अक्टूबर 2010

कांग्रेस के चर्चित दलाल

 शंकर नगर के इस दलाल का संबंध राजा महाराजाओं के अलावा भाजपा के नगर मंत्री से है। कांग्रेस की बुराई में माहिर इस दलाल को बड़े नेता भी अपने बगल में बिठाते हैं ताकि काम चलता रहे।
ऐसे ही कई दलालों की चर्चा कांग्रेस में आम रुप से सुनी जा सकती है। टिकरापारा क्षेत्र के एक दलाल की सांसद व नगर मंत्री से सेटिंग की बात हो या ब्राम्हणपारा के कुछ कांग्रेसियों की नगर मंत्री से सेटिंग की बात आम है। समता कालोनी के पास के वीसी के करीबी रहे अब जोगी के करीबी एक नेता की भी भूमिका सभापति चुनाव में दलाली की रही है। जबकि सुंदरनगर के शराब खोर पदाधिकारी का तो नाम ही दलाल रख दिया गया है। जबकि इसके खास फाफाडीह वाले को तो दलाल का दलाल कहा जाता है।
राजधानी के बाहर के भी कई नेताओं को दलाल के नाम से संबोधित किया जाता है। जबकि कई विधायक की भाजपाईयों से सेटिंग की चर्चा आम है। ऐसे में कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष वीसी-जोगी जैसा दमदार नहीं होगा तो स्थिति विकराल हो सकती है।

पार्टी में दलाल, कांग्रेस हुई हलाल

भाजपा नेताओं से संबंध, गुटबाजी

चरम पर, पैसा कमाना उद्देश्य
 कमजोर नेतृत्व गुटबाजी और पार्टी में दलालों की सक्रियता ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बदतर स्थिति में ला खड़ा किया है। हालत यह है कि कांग्रेस के नेताओं को भाजपा नेताओं के हार में दो-पांच हजार के चक्कर में लाईन लगाते देखा जा सकता है। अनुशासन का डर खत्म हो चुका है और संगठन में भाजपा की दलाली करने वालों का बोलबाला है?
छत्तीसगढ़ में इन दिनों नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कवायद चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा, किस गुट का होगा इसे लेकर सवाल चर्चा में है। छत्तीसगढ़ में मुख्यत: विद्याचरण शुक्ल, अजीत जोगी और मोतीलाल वोरा जैसे लोग गुटबाजी को हवा देने में लगे है। जिसकी वजह से आम कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और वे चौक चौराहों में इन नेताओं की बुराई करते देखे जा सकते हैं।
वास्तव में देखा जाए तो कार्यकर्ताओं की फौज और जमीनी ताकत सिर्फ विद्याचरण और अजीत जोगी के पास है जबकि मोतीलाल वोरा के साथ जुडऩे की वजह उनका हाईकमान के साथ सिर्फ संबंध होना है? और पार्टी का छत्तीसगढ़ में बदतर स्थिति के लिए इस गुट का ही सबसे बड़ा हाथ है। हाईकमान से संबंधों के चलते जानबूझकर ऐसे लोगों को प्रदेश का नेतृत्व दिया गया जिनकी औकात अपने विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र तक ही रही और इन अध्यक्षों ने अपनी कुर्सी बचाने भाजपा के साथ मिलकर दलाली ज्यादा की है।
दूसरी ओर अजीत जोगी और विद्याचरण शुक्ल के साथ भी ऐसे लोग जुड़ते चले गए हैं जिनका काम सिर्फ व्यापार करना है ऐसे लोगों ने अपने नेताओं को भाजपा के खिलाफ यह कहकर नहीं खड़ा होने दिया कि इससे वोरा गुट मजबूत होगा? लगातार सत्ता से दूर रहने की वजह से कांग्रेस में बेचैनी तो है लेकिन सत्ता से मिल रहे फायदे ने इन्हें संघर्ष करने से रोका। सर्वाधिक बुरी स्थिति राजधानी व आदिवासी क्षेत्रों की है। सरकार की मनमानी के खिलाफ उतना ही बोला गया जितने में पैसा मिल सके? इस स्थिति के चलते आम कार्यकर्ताओं में भी यह चर्चा होने लगी है कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भाजपा से सेटिंग कर ली है जबकि विधायकों व संगठन के पदाधिकारियों पर बिक जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
टिकिट वितरण से लेकर पद देने में जिस तरह से खरीदी बिक्री के आरोप लग रहे हैं उसकी वजह से भी कांग्रेस की स्थिति बदतर होते जा रही है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जिस तरह से बड़े नेताओं में रूचि और आम कार्यकर्ताओं में बेरुखी देखी जा रही है इससे भी कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल जोगी वर्सेस ऑल की राजनीति ने कांग्रेस को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है और भाजपा की दलाली में भी जोगी विरोधी गुट के लोग ही अधिक नजर आते हैं। इस स्थिति में यदि प्रदेश अध्यक्ष किसी दमदार नेता को नहीं बनाया गया तो एक बार फिर कांग्रेस हाशिये में चली जाएगी। वैसे कांग्रेस के हित में विद्याचरण शुक्ल या अजीत जोगी को ही प्रदेशाध्यक्ष बना दिए जाने की मांग निष्ठावान कांग्रेसी कर रहे है लेकिन वोरा गुट कभी नहीं चाहेगा कि उसके लोगों की दलाली बंद हो और प्रदेश से उसकी जमीन खिसके।
बहरहाल कांग्रेस में सक्रिय दलालों ने कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा है हालत यह है कि इन दलालों को लेकर आम लोगों में चर्चा है लेकिन बड़े नेताओं को भी ये दलाल ज्यादा पसंद आते हैं?

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी नारायण सामी को कालिख पोता









प्रदेश कांग्रेस के डेलिगेट्स की बैठक लेने आये  प्रभारी नारायण सामी को चार लड़कों ने कालिख पोत दी 

रविवार, 17 अक्टूबर 2010

विवादास्पद सिंह साहब भी मोहन के बंगले में...

अजय को डुबाया अब...!
 छत्तीसगढ़ के दमदार माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता है इन दिनों उनके बंगले में आर.एन. सिंह का दबदबा है और कभी इनका दबदबा अजय चंद्राकर के बंगले में रहा है। पीएसी में चयन को लेकर विवाद में रहे आर.एन. सिंह इन दिनों अपने दबदबे से सुर्खियों में हैं।
छत्तीसगढ़ में वैसे तो अफसरराज ही नहीं चल रहा है बल्कि दागी और विवादास्पद छवि के लोगों को सरकार द्वारा प्रश्रय भी दिया जा रहा है। दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में सर्वाधिक दागी और विवादास्पद अधिकारियों का जमावड़ा है। दंतेवाड़ा शिक्षा अधिकारी डा.एच. आर. शर्मा, श्रीमती आर.बाम्बरा, मैडम तवारिस, अजय श्रीवास्तव, एमजी श्रीवास्तव, सुब्रत साहू, एम.के. राउत के अलावा अब मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के बंगले में पदस्थ आर.एन. सिंह का नाम भी विवादास्पद अधिकारियों में जुड़ गया है।
कहा जाता है कि जिन अधिकारियों को उनकी करतूतों के कारण बर्खास्त कर देना चाहिए उन लोगों को सरकार द्वारा प्रश्रय दिया जा रहा है। बताया जाता है कि पीएससी में चयन के दौरान आर.एन. सिंह भी सुर्खियों में रहे हैं। दरअसल सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी मिली है उसके तहत यह बात स्पष्ट होने लगा है कि आर.एन. शर्मा का चयन न केवल गलत ढंग से हुआ है बल्कि वे चयन के पात्र ही नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक पीएससी चयन में लिे गए साक्षात्कार में आरएन शर्मा को आठवां स्थान मिला था और जब मेरिट बनी तो वे तीसरे नम्बर पर पहुंच गए। यह गोलमाल कहा और केसे हुआ यह जांच का विषय है। लेकिन कहा जाता है कि तब तत्कालीन मंत्री अजय चंद्राकर के बंगले में आर.एन. शर्मा को पदस्थ किया गया।
बताया जाता है कि अजय चंद्राकर को अपनी करतूत के कारण विधानसभा में हार का मुंह देखना पड़ा तब आर.एन. सिंह के लिए बृजमोहन अग्रवाल का दरबार सज गया। सूत्रों की माने तो श्री सिंह को बृजमोहन अग्रवाल के बंगले में पदस्थ करने में अजय चंद्राकर ने ही सिफारिश की थी। इधर आर.एन. सिंह के चयन को लेकर जब सवाल उठने लगे तो एक बार फिर मामले की लीपापोती की जा रही है। बताया जाता है कि इन दिनों मंत्री के बंगले में उनके व्यवहार को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी है और इसकी शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से मोहन समर्थक ही गड़े-मुर्दे उखाड़ने में लगे हैं। बहरहाल दागी और विवादास्पद अधिकारियों के जमावड़े ने एक बार फिर दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को सुर्खियों में ला दिया है।