शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ भाजपा की पूरी सरकारी के अलावा कोई चारा नहीं

 


छत्तीसगढ़ भाजपा की पूरी  सरकारी के अलावा कोई चारा नहीं 

छत्तीसगढ़ में सत्ता की कमान संभाले 'डबल इंजन' सरकार के भीतर इन दिनों जो कुछ चल रहा है, उसे केवल रूटीन संगठनात्मक गतिविधि मान लेना जल्दबाज़ी होगी [00:00]। हाल ही में राजधानी रायपुर में भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की मौजूदगी में दो दिनों तक चला मंथन शिविर अब प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन चुका है [00:09]।

दो दिनों की इस मैराथन बैठक में जिस तरह से संगठन पदाधिकारियों और ज़िला अध्यक्षों ने अपनी ही सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड सामने रखा, उसने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है [00:23]।

बंद कमरों का असंतोष: ज़िला अध्यक्षों का 'रिपोर्ट कार्ड'

बैठक में 36 ज़िलों से आए ज़िला अध्यक्षों ने अपनी व्यथा खुलकर सामने रखी [03:01]। जो बातें छनकर बाहर आईं, वे बताती हैं कि सत्ता और संगठन के बीच की दूरी किस कदर बढ़ चुकी है [01:45]।

1. बिजली बिल और टैक्स का बोझ: ज़िला अध्यक्षों का साफ कहना था कि बिजली बिलों में वृद्धि और स्थानीय निकायों/पंचायतों में नए करों की वसूली के कारण वे जनता के बीच जाने से कतरा रहे हैं [02:04]।

2. प्रशासनिक उपेक्षा: पदाधिकारियों का आरोप है कि मंत्री और उच्च अधिकारी उनकी सुनते तक नहीं हैं [03:32]। कई मंत्रियों पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के फोन तक न उठाने के आरोप लगे [03:42]।

3. सड़कों और बुनियादी ढांचों की बदहाली: सरगुजा प्रवास के दौरान खुद संगठन महामंत्री पवन साय की गाड़ी गड्ढों में फंसने की घटना ने ज़मीनी स्थिति की पोल खोल दी, जिसके बाद स्थानीय मंत्रियों को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी [03:51]।

4. युवा और बेरोज़गारी: बैठक में यह बात भी उठी कि स्कूलों की स्थिति और नौकरियों के अभाव को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखा जनाक्रोश है [02:52]।

मंत्रियों की 'क्लास' और गुटबाज़ी पर शिकंजा

बताया जाता है कि बैठक के पहले दिन कई मंत्रियों की अनुपस्थिति पर संगठन ने सख्त रुख अपनाया, जिसके बाद दूसरे दिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी की मौजूदगी में मंत्रियों की जमकर 'क्लास' ली गई [01:15], [03:01]।

संगठन के कड़े रुख के बाद अब इस बात के कयास तेज़ी से लगाए जा रहे हैं कि क्या गुजरात मॉडल की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी मंत्रिमंडल में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा या पूरी टीम की सर्जरी होगी [05:28]।

विपक्ष के तीखे हमले: 'गड्ढे में सत्ता और संगठन'

सत्ताधारी दल के भीतर छिड़े इस मंथन पर विपक्ष ने भी हमला बोलने में देरी नहीं की। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता और संगठन में कोई तालमेल नहीं है और सरकार पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है [01:45]।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने 2023-24 की पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि 1600 पदों पर भर्ती रोक दी गई है और कई अभ्यर्थियों का चयन 7-8 ज़िलों में एक साथ होने की गड़बड़ी सामने आई है [07:50], [08:24]। इस मुद्दे को लेकर अभ्यर्थी गृह मंत्री के कवर्धा स्थित कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं [09:10]।

आगे की राह: क्या होगा आलाकमान का फैसला?

संगठन के इस दो दिवसीय मंथन की विस्तृत रिपोर्ट अब केंद्रीय नेतृत्व—प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन—को सौंपी जानी है [05:09]।

छत्तीसगढ़ में सत्ता-संगठन के बीच तालमेल बिठाने और जन-असंतोष को दूर करने के लिए आलाकमान क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी [07:22]। क्या यह मंथन केवल एक चेतावनी बनकर रह जाएगा या प्रदेश में बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत साबित होगा?

विडियो देखें 

https://youtu.be/qxolf1FkVZU?si=zGkMY3-32b4WEdVO

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