गुरुवार, 19 मार्च 2026

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे 


 देश के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी एक बार फिर घोटाले में फंस गए हैं घोटाला क्या है सीधे-सीधे सरकार को चूना लगाना हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद ना तो गौतम अडानी का ही मुश्किल कम हो रहा है और ना ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दरअसल यह रिश्ता क्या कहलाता है यह सवाल इतना बड़ा हो चुका है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अब बौखलाने  लाने लगे हैं और शायद जिस गौतम अडानी को लेकर या हिडन बर्ग की रिपोर्ट को लेकर समूची मोदी सत्ता विपक्ष पर हमलावर थी गौतम अदानी को पाक साफ बताते नहीं थकती थी और चुनाव में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी  कहने लग गए कि अदानी और अंबानी के पास भरपूर काला धन है और वे टेंपो भर भर के कांग्रेस को पहुंचा रहे हैं इसलिए कांग्रेस ने गौतम अडानी या अंबानी का नाम लेना बंद कर दिया तेलंगाना की धरती से पूछना चाहता हूं जरा य शहजादे घोषित करें कि चुनाव में ये अंबानी अडानी थे कितना माल उठाया है काले धन के कितने बोरे भर कर के रुपए मारे हैं क्या टेंपो भर कर के नोटे कांग्रेस के लिए पहुंची है क्या क्या सौदा हुआ है ऐसे में उन समर्थकों का सोचिए या उन हिंदू वादियों का सोचिए या ऐसे बांगड़ बिल्लों का सोचिए जो अब मुंह छुपाते घूम रहे हैं कि वे जिस गौतम अदानी के लिए खड़े हुए थे उन्हें ही जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्ट कह दिया काला धन वाला कह दिया तो फिर उनके पास क्या बचता है लेकिन लगता है कि यह मित्र प्रेम का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और शायद यही वजह है कि कल दुनिया के सब सबसे बड़े अखबार 20 देशों से निकलते हैं फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की कोयला घोटाले को लेकर और गौतम अडानी पर कोयला घोटाले का आरोप पहली बार नहीं लगा है खदानों को देने के मामले में हो या फिर दूसरे देशों से कोयला मंगाकर यहां के विद्युत कंपनियों को मनमाने कीमत पर यानी कई गुना कीमत वसूलने को लेकर गौतम अडानी हमेशा ही विवाद में रहे हैं लेकिन इस बार जो विवाद है वह यह है कि घटिया क्वालिटी का कोयला नंबर एक क्वालिटी के नाम पर विद्युत कंपनियों को खपा गया जिसके चलते ना केवल विद्युत कंपनियों को नुकसान हुआ बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान प क्योंकि घटिया दर्जे की कोयला यदि जलाई जाएगी बिजली उत्पादन के लिए तो ज्यादा जलाना पड़ेगा और उतना ही पर्यावरण को नुकसान होगा इस पर कांग्रेस ने खुलकर मोदी सरकार पर हमला बोल दिया ऐसा कोई दिन नहीं आता जिस दिन अडानी जी का कोई महा घोटाला सामने ना आए अब एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आ रहा है कोयले को लेकर सही सुना आपने खटिया सस्ते दाम के कोयले को अच्छी गु गुणवत्ता का बताकर मनमाने डाम पर अडानी जी ने हिंदुस्तान की एक सरकारी कंपनी को चूना लगाकर बेचा यह बात तब की है जब अडानी जी ने इंडोनेशिया से कोयला लिया $28 प्रति टन पे ये कोयला 3500 कैलोरी वाला कोयला था हिंदुस्तान आते-आते लेकिन जादू हो गया ये 3500 कैलोरी वाला कोयला अपने आप 6000 कैलोरी वाला कोयला बन गया और दाम $28 प्रति टन से बढ़कर $92 प्रति टन हो गए 28 से बढ़ के 92 3500 कैलोरी अपने आप बढ़कर 6000 सैलरी हो गई यह कोयला अडानी ने इंडोनेशिया की एक कंपनी पीटी जोलिन से लिया था और यह तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी टन जटको को बेचा गया था ये कोयला जोने जो कंपनी है इंडोनेशिया की उसने अदानी को $28 प्रति टन में दिया पेपर में पूरी तरह से साफ है कि एंड कस्टमर टाइम जेट को है अदनी अदानी जो थे वो मध्यस्थता कर रहे थे ये कोयला का जो बिल काटा गया वो काटा गया ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित सुप्रीम यूनियन समूह के नाम उसने सिंगापुर में बिल काटा अडानी के नाम और उस कोयले को 3500 कैलोरी का तो रहने दिया लेकिन $4 प्रति टन दाम लगा दिया अब यही कोयला जब तमिलनाडु पहुंचता है भारत के छोड़ में आता है तो अडानी जी इसको 92 प्रति टन और जादू से 000 कैलोरी का बनाकर बेच देते हैं करीब 000 करोड़ रप का चूना लगाया उन्होंने भारत की एक कंपनी को तो इस पूरे मामले में अडानी जी ने एक भारतीय कंपनी से सरकारी कंपनी से धोखाधड़ी करी राजस्व की चोरी की बिजली के दाम बढ़ाए उपभोग ताओं के लिए क्योंकि महंगा कोयला आएगा तो महंगा जनरेशन होगा महंगा डिस्ट्रीब्यूशन होगा और यही नहीं उन्होंने पर्यावरण के साथ-साथ हिंदुस्तान के लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया करीब 22 लाख लोगों की हिंदुस्तान में वायु प्रदूषण से हर साल मौत होती है जिसमें से ज्यादातर बच्चे हैं तो दिक्कत की बात यह है कि आरानी जी ये सब तब कर रहे हैं जब आपको रिन्यूएबल एनर्जी में एक बड़ा प्लेयर बनाने जा रहे हैं ये अलग बात है कि कोयले की आयात करने वाली भारतीय समूह में से वो शायद एक या दूसरे नंबर पर होंगे तो मोदी जी से कुछ सवाल कि डायरेक्टरेट ऑ रेवन्यू इंटेलिजेंस को तो चलिए आपने छानबीन नहीं करने दी संस्थाओं के आपने हाथ बांध दिए आंखों पर पट्टी बांध द लेकिन अब क्या कीजिएगा क्योंकि आप ही ने कहा है कि टेंपो में भर भर कर काला धन बांटा जा रहा है वो टेंपो अडानी के पकड़े कब जाएंगे और ये काले कोयले की जो काली चोरी थी इसका क्या नतीजा है यह देश जानना चाहता है इसका अभिप्राय क्या है इसका एक ही मतलब है कि गौतम अडानी के पास भरपूर काला धन है जिसकी जानकारी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी है तब क्या घटिया कोयला सप्लाई का मामला तूल पकड़ेगा क्या इस मामले की जांच होगी यकीनन होगी यह जांच तो होगी लेकिन तब जब सत्ता बदलेगी क्योंकि राहुल गांधी ने अब साफ तौर पर कह दिया है कि जिस तरह के घपले घोटाले अदानी समूह के आने लगे हैं वे सत्ता में आए यानी इंडिया गठबंधन सत्ता में आई तो हर मामले की विस्तार से जांच की जाएगी तब क्या मोदी सरकार के रहते यह जांच नहीं होगी क्योंकि जिस तरीके से सिर्फ अदानी का नाम ले लेने से ही इस दौर में उन लोगों को प्रताड़ित किया गया संसद की सदस्यता तक समाप्त करने की बात सामने आई है या आरोप लगे हैं मोदी सरकार पर तब इस सत्ता के रहते तो अदानी समूह पर कोई कारवाई होगी या जांच भी होगी कहना मुश्किल है तब देखना है कि जो कोयला घोटाले को लेकर या घटिया कोयला सप्लाई को लेकर जो मामला सामने आया है वह आम लोगों को कितना समझ में आता है !


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https://youtu.be/e7HjSQARqkY?si=qeW-dvU-OUVzve0z

इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…

इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…

 युद्ध की विभीषिका को लेकर कितने ही सवाल उठते रहे हैं। भारत पाकिस्तान का युद्ध हो या फिर ईरान और इजराइल के बीच मचे युद्ध के बाद किस तरह से आपाधापी मची पूरे इजराइल में या ईरान में लोग अपने काम छोड़कर अपने वतन की वापसी के लिए किस तरह से संघर्ष किए। आज हम बात करेंगे इजराइल में कार्यरत साइंटिस्ट हैं हमारे छत्तीसगढ़ के राजधानी के लाडले देवव्रत दुबे जी। उनसे हम बात करेंगे और समझने की कोशिश करेंगे कि इस युद्ध में किस तरीके से प्रभाव पड़ा इजराइल में या जहां वे काम कर रहे थे उस शहर में और क्या परिस्थिति बनी जिसकी वजह से उन्हें वतन यानी भारत आना पड़ा रायपुर आना पड़ा पूरा एक-एक बात हम समझने और जानने की कोशिश करेंगे इजराइल और ईरान के बीच बीच जो युद्ध का माहौल बना या युद्ध हुआ तो आप लोगों ने क्या देखा समझा ये थोड़ा सा बताएंगे। टेंशनंस तो पहले से थे ही पूरे मिडिल ईस्ट में। उसके बाद ईरान के न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज बम बनाने के नजदीक पहुंच रही थी। जिसको रोकने के लिए इजराइल ने अटैक किया और फिर ईरान से रिस्पांस आना शुरू हुआ मिसाइल्स का। मिसाइल्स जब आती थी तो सायरेंस बजते थे अलग-अलग एरिया में और जब हमारे एरिया में साइरस बजते थे तो हम शेल्टर में चले जाते थे। ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि वापस आना पड़ा? क्या सरकार ने कहा कि आप लोगों ने स्वयं निर्णय लिया। एंबेसी की एडवाइज़री आ रही इजराइल में एक होम फ्रंट कमांड है जो वहां पर जो भी रहते हैं उन सबको अलर्ट करती रहती है। तो एंबेसी की एडवाइज़री थी कि होम फ्रंट कमांड का जो भी गाइडेंस आए वो फॉलो कीजिए और ज्यादा ओपन एरियाज में मत घूमिए। ज्यादा भीड़ होम फ्रंट ने मना किया था जमा होने से। सारे यूनिवर्सिटीज और स्कूल्स भी बंद हो चुके थे। सब कुछ वर्क फ्रॉम होम मोड में चल रहा था। उसके बाद कुछ मिसाइल्स जो हुई जो हाईफा का अटैक हुआ। फिर वीरशिश में जब एक हॉस्पिटल पर अटैक हुआ उसके बाद एंबेसी ने यह एक ऑप्शन दिया था कि एक इवाकुएशन हो रहा है ऑपरेशन से जो जाना चाहते हैं वो अपना नाम एनरोल करवा सकते हैं। तो उसमें हम लोगों ने एनरोल किया और आ गए। कितना संघर्ष भरा महसूस हो रहा था उस दौरान जब ईरान का अटैक हुआ तो आप लोग क्या महसूस कर रहे थे? संघर्ष वैसे कुछ खास नहीं था क्योंकि जब रॉकेट्स आते थे वो पीरियड हमने देखा है। हुथस्ट की मिसाइल जब यमन से आती थी तब भी हम साइरेंस में चले जाते थे। ईरान के साथ भी जब सब कुछ शुरू हुआ तब भी हम शेल्टर्स में चले जाते थे गाइडेंस के हिसाब से। पर उसके बाद जब ये हुआ कि अटैक सिविलियन एरियाज पे होने लगे। जैसे हॉस्पिटल पे अटैक हुआ, वाइसमैन इंस्टट्यूट में अटैक हुआ। जब सिविलियन एरियाज पे अटैक होने लगे तब फिर हमने सोचना शुरू किया कि शायद निकल जाना चाहिए। इजराइल से भारत पहुंचते तक क्या महसूस कर रहे थे थोड़ा सा वो तो चल रहे थे हम तेलवी से लैंड बॉर्डर क्रॉस करके जॉर्डन गए वहां जॉर्डन के अमान एयरपोर्ट से कुवैत आए तो जब लैंड बॉर्डर क्रॉस कर रहे थे तब भी जब हम बस से जा रहे थे तब भी दो बार साइंस बजे और बस रोक के हमको सड़क के किनारे खेत में जाकर रुकना पड़ा उसके बाद जब हम कुवैत से दिल्ली के लिए निकल गए थे तब शायद ईरान ने कतर पे अटैक किया और यूएई ने एयर स्पेस क्लोज कर दिया तो हमारा प्लेन वापस कुवैत गया और उसके 4 घंटे बाद फिर से टेक ऑफ किया दिल्ली और अभी सिचुएशन नॉर्मल हो गई है तो 15 दिन में तो हम शायद वापस भी चले जाएंगे जब कुवैत से हम निकले थे दिल्ली के लिए और रास्ते में थे तो प्लेन रिटर्न होने के पहले मैं तो विंडो सीट पे नहीं था पर जो लोग विंडो सीट पे थे उन लोगों ने मिसाइल्स और इंटरसेप्ट र्स दोनों ल्च होते हुए देखे जो हम इजराइल में देखते रहते थे मिसाइल्स वगैरह बट एयरप्लेन से पहली बार उन लोगों ने देखा जो कुछ लोगों ने वीडियोस लिए इजराइल में रहते हुए क्या महसूस कर रहे थे आप जो सभी जो दूसरे देशों से थे वहां जो काम कर रहे थे या आप भी तो क्या लग रहा था कि क्या कुछ होगा अभी तक तो इजराइल वन में था उसका अपना मिडिल ईस्ट में खाक रहा है जो परसेप्शन रहा है लेकिन जब ईरान के मिसाइल गिरने लगे तो क्या सोचे आपको यहां हम लोग इतने चैतन्य नहीं रहते हैं अलर्ट नहीं रहते हैं बट इजराइल में जब से हम रह रहे हैं तो हम किसी भी मोमेंट पे रेडी रहते हैं कि आप तिलवी में है या वीर शिवा में है या हफा में है तो आप जिस शहर में हैं उसके हिसाब से एक टाइमिंग होती है कि 30 सेकंड में आपको शेल्टर में पहुंचना है या 1ढ़ मिनट में आपको शेल्टर में पहुंचना है सायरन बजने के बाद तो वीरसेवा जैसे ये एक मिनट था और इतने में आप शेल्टर में पहुंच सकते हैं क्योंकि आप जहां भी हैं जिस भी बिल्डिंग में है या सड़क के किनारे हैं तो उतनी दूर में कहीं ना कहीं आपको शेल्टर्स मिल ही जाएंगे या घर भी है तो घर के अंदर भी सेफ रूम्स होते हैं। तो उसके लिए हम प्रिपयर्ड ही थे। बट ईरान की जो बैलस्टिक मिसाइल्स आई जो कुछ ऐसी थी जो इंटरसेप्ट नहीं हुई एरो से और सिविलियन एरियाज पर जो ब्लास्ट हुए उसके बाद थोड़ा सा डर लगना शुरू हुआ!

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https://youtu.be/mCdclPK7G1E?si=6xaAuKKEWVndjJfX

बुधवार, 18 मार्च 2026

अब केंद्र की बाक़ी नौकरी भी अग्निवीर की तर्ज़ पर

अब केंद्र की बाक़ी नौकरी भी अग्निवीर की तर्ज़ पर 


 सेना में अग्निवीर को लेकर युवाओं में जबरदस्त आक्रोश है और खुद भारतीय जनता पार्टी इस योजना से बेचैन है लेकिन सरकार शायद एक इंच भी जगह छोड़ना नहीं चाहती और वह अपनी इस योजना की सफलता का दावा ठोक थकती भी नहीं लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष इस मामले को लेकर जबरदस्त ढंग से मोदी सरकार घेर रही है और  इसके बावजूद यदि मोदी सरकार अग्निवीर योजना की सफलता का डंका पीट रही है तो फिर इसे क्या कहा जाए और अब जो मामला सामने आया है कि अग्निवीर जैसी योजना केंद्र सरकार दूसरे विभाग में भी लाएगी हालांकि उसका नाम अग्निवीर नहीं दिया गया उसे अप्रेंटिस ट्रेनिंग या इस तरीके से नाम दिया जा रहा है लेकिन ती 3000 से 15000 के बीच सैलरी वाली इस अस्थाई नौकरी को लेकर कई तरह के सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल मेंही सरकारी बैंकों ने जो वैकेंसी निकाली है वह इसी तरह की वैकेंसी है जो अग्निवीर योजना से मिलती जुलती है यानी न साल 5 साल 10 साल के लिए ही काम पर रखने को लेकर वैकेंसी जारी की है और इसकी शुरुआत केंद्र बैंक से लेकर कई बैंकों ने उत्तर प्रदेश में की है उत्तर प्रदेश में नौकरी के लिए 3000 पद की वैकेंसी निकाली गई है तो क्या अब सरकार दूसरे विभागों में भी यही करेगी सार्वजनिक क्षेत्र की जो कंपनियां है वहां भी क्या अब अग्निवीर योजना की तरह ही युवाओं को नौकरी पर रखा जाएगा यह सबसे गंभीर सवाल और बैंकों को लेकर मीडिया रिपोर्ट जो आ रही है खासकर हिंदुस्तान ने जो खबरें प्रकाशित की है वह कम चौकाने वाला नहीं है हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक 2014 में बैंकों के कर्मचारियों की संख्या 8 4281 थी जो 24 आते आते लगभग एक लाख नौकरी कम हो गई और दूसरी तरफ निजी क्षेत्रों के बैंकों में नौकरी बढ़ रही है याने हैरानी की बात है एक तरफ नए नए शाखा खुल रहे हैं नए नए ऑफिस खोले जा रहे हैं सरकारी बैंकों के तो दूसरी तरफ नौकरी कम हो रही है और कहा जा रहा है कि यहां गुपचुप तरीके से अस्थाई कर्मचारियों की जिस पैमाने पर भर्ती की जा रही है उससे युवाओं के भविष्य को लेकर एक नई चिंता पैदा हो गई कि आखिर मोदी सरकार चाहती क्या है अग्निवीर को लेकर अभी हरियाणा चुनाव में ही इस कदर बवाल मचा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह को कहना पड़ा कि अग्निवीर से जो रिटायर होकर आएंगे उन्हें हरियाणा में हरियाणा की सरकार नौकरी देगी यानी दूसरे राज्यों के जो अग्निवीर रिटायर होकर आएंगे उसके लिए भाजपा शासित दूसरे राज्यों में पता नहीं क्या योजना है लेकिन हरियाणा में जरूर दावा किया गया चुनाव को देखते हुए यह पूरा होगा नहीं पूरा होगा यह भी मोदी की गारंटी में गिनी जाएगी नहीं गिनी जाएगी एक अलग मसला है क्योंकि यदि आप मोदी की गारंटी की बात ही कर ले तो छत्तीसगढ़ में तो कहा गया था कि 00 में सिलेंडर दिया जाएगा गैस सिलेंडर रसोई गैस के लिए वह योजना दिवाली सर पर है महंगाई चरम पर है लोग त्रस्त है वह योजना तो छत्तीसगढ़ में लागू हुई नहीं ऐसे में अग्निवीर योजना को लेकर अमित शाह ने जो भरोसा दिलाया है हरियाणा के युवाओं को उस पूरी होने की क्या गारंटी है लेकिन अब जिस तरह की खबरें आ रही है उससे एक बात तो तय हो गया है कि सरकार सब कुछ निजीकरण कर देना चाहती है और वह नौकरी का झंझट नहीं पालना चाहती क्योंकि एपीएस ओपीस और नए पेंशन स्कीम को लेकर विवाद चल ही रहा है ऐसे में सरकार इन सारे झंझट से मुक्त होना चाहती है 

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https://youtu.be/2EZxm8qNL-s?si=7-7ltaf0pXDPZQt3

मंगलवार, 17 मार्च 2026

मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार

मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार





क्या इस देश में आम आदमी की जान की कीमत सिर्फ 5 लाख रुपये है? कल छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में बारूद फटा और गुजरात के राजकोट में गेम जोन जला। दोनों जगह एक बात कॉमन थी—मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार।"

2. बेमेतरा कांड: रसूख और लापरवाही (The Chhattisgarh Angle)

इतिहास: 1988 से शुरू हुई 'स्पेशल ब्लास्ट' फैक्ट्री का विवादों से पुराना नाता रहा है।

पहुंच: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के रिश्तेदारों और कोल इंडिया के पूर्व विशेषज्ञों का मालिकाना हक।

बड़ा सवाल: जब पिछली सरकार ने सुरक्षा कारणों से इसे बंद किया था, तो यह दोबारा कैसे खुली? 800 मजदूरों की जान जोखिम में डालकर सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों हुई?

दृश्य: दो मंजिला इमारत का मलबे में तब्दील होना और हादसे के 3 घंटे बाद पुलिस का पहुँचना प्रशासन की मुस्तैदी पर तमाचा है।

3. राजकोट: मनोरंजन के नाम पर 'डेथ ट्रैप' (The Gujarat Angle)

अमित शाह के करीबियों का नाम: युवराज सिंह सोलंकी जैसे संचालकों का रसूख।

क्रूरता: आग लगते ही जानकारी देने के बजाय संचालक का फरार हो जाना उनकी मानसिकता दर्शाता है।

समानता: दोनों घटनाओं में 'पॉलिटिकल अप्रोच' ने सुरक्षा नियमों को रद्दी का टुकड़ा बना दिया।

4. मुआवजे का झुनझुना (The Critique of Power)

• सरकार ने 5 लाख का मुआवजा घोषित कर दिया। लेकिन क्या पैसा किसी का पिता, भाई या बेटा वापस ला सकता है?

दंडाधिकारी जांच (Magisterial Inquiry): क्या यह सिर्फ मामले को ठंडा करने का तरीका है? पिछली कितनी जांचों की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई या दोषियों को सजा मिली?

5. तीखे सवाल (The Conclusion/CTA)

• क्या डायरेक्टरों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर होगी?

• क्या प्रशासन उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा जिन्होंने इन असुरक्षित जगहों को 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) दिया?

अंतिम संदेश: "जब तक वोट और नोट के बदले जान की सौदागिरी बंद नहीं होगी, बेमेतरा और राजकोट जैसी खबरें आती रहेंगी। अब जागने का वक्त है।"

लगता है सत्ता सबक लेने तैयार नहीं इसलिए इसे एक बार फिर प्रकाशित किया जा रहा है ताकि लोगो को ध्यान रहे 

 छत्तीसगढ़ और गुजरात में जो घटना हुई वह हृदय विदारक घटना गुजरात में गेम जोन में लगी भीषण आग में 24 लोगों की मौत हो गई जिसमें 12 ब तो छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित बारूदी फैक्ट्री में हुए विस्फोट से एक दर्जन से अधिक लोगों के मरने की बात कही जा रही है दोनों ही घटनाओं में यदि कुछ कामन है तो वह आम लोगों की मौत या फिर उनके संचालकों का राजनैतिक पहुंच रखना आप हैरान हो जाएंगे कि किस तरीके से राजनीतिक पहुंच के चलते लापरवाही बढ़ती जाती है और लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जाता है राजकोट में तो जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं वे गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी लोगों में से इस गेम जोन के संचालक युवराज सिंह सोलंकी ने घटना के बाद पुलिस या प्रशासन से इतल करने की बजाय फरार हो गए बेहद अफरातफरी का माहौल है और कहा जा रहा है कि कई लोग बेहद ही गंभीर हालत में अस्पताल में भरती है तो दूसरी तरफ बेमेतरा में जो बात सामने आई है कि इस फैक्ट्री को लेकर हमेशा ही लापरवाही की खबर आती रही है बारूद फैक्ट्री है यह और 1988 से इसका निर्माण शुरू हुआ और 1998 999 में इसने प्रोडक्शन शुरू किया कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश के धाकड़ नेता रहे सुंदरलाल पटवा के दामाद और उनके रिश्तेदारों की यह फैक्ट्री है डायरेक्टरों में जो नाम है वह अजय चौधरी चौधरी यह रिश्तेदार बताए जा रहे हैं इसके अलावा जो टेक्निकल सलाहकार है एसन सी यह कभी कोल इंडिया में रहे हैं और एक्सप्लोसिव और कोल के यह एक्सपर्ट माने जाते हैं तो एनआईटी से पास आउट आदेश जैन भी एक डायरेक्टर है इस स्पेशल ब्लास्ट नाम ही है इस कंपनी का स्पेशल ब्लास्ट तो सुंदरलाल पटवा के करीबी लोगों की इस फैक्ट्री में कल सुबह अचानक शनिवार को विस्फोट होता है दो मंजिला बिल्डिंग भरभरा कर गिर जाती है अफरातफरी का माहौल है और हैरानी की बात तो यह है कि घटना के तीन घंटे बाद पुलिस पहुंचती है तब तक वहां जो कर्मचारी तैनात थे सुरक्षा गार्ड थे कैशियर थे मैनेजर थे सब के सब फरार हो गए कहां है पुलिस ढूंढ रही है घटना क्यों हुई किस तरीके से हुई यह बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कि इस फैक्ट्री को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा था सुरक्षा कारणों की अनदेखी पर कई सवाल उठते रहे हैं लेकिन कहा जाता है कि राजनैतिक अप्रोच के चलते इनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई यहां तक कि भूपेश सरकार में भी कई शिकायतें होने के बाद पिछले साल एक हफ्ते के लिए सुरक्षा कारणों से इसे बंद कर दिया गया था लेकिन अचानक फिर इसे कब चालू किया गया कोई नहीं जानता और तब से यहां सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी की जा रही थी 800 के आसपास लोग यहां काम करते थे जिस बिल्डिंग में या जिस यूनिट में चार यूनिट थे लेकिन जिस यूनिट में विस्फोट हुआ वहां उस समय कितने लोग थे यह भी कोई बताने वाला नहीं है दो मंजिला बिल्डिंग जब बला में भरभरा कर गिरा तो मलम में भी कई लोगों की दबे होने की आशंका है और अभी तक राहत और बचाव का कार्य चल रहा है लोगों में आक्रोश है लेकिन इस आक्रोश का क्या करें सरकार हमेशा की तरह मृतकों को 5 लाख रुपए मुआवजा दे दे दी विष्णु देसाय की सरकारने और 00 रप इलाज के खर्चे के लिए घायलों को दे दी यानी राजनीति के इस गड़बड़ झाले में या घालमेल में किस तरह से लोगों की जान पे बन आई है और सत्ता मुआवजा बांटने में लगी है क्या डायरेक्टरों के खिलाफ एफआईआर नहीं होना चाहिए हालांकि कांग्रेस इस मामले में हमलावर है क्योंकि पिछले साल भूपेश सरकार के दौरानी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे एक सप्ताह के लिए बंद भी कर दिया गया था लेकिन उसके बाद भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधरी थी कहा जा रहा है तब फैक्ट्री कैसे चालू यह बड़ा सवाल है हालांकि इस परे दंडाधिकारी जांच के आदेश दे दिए हैं गए हैं लेकिन सब जानते हैं कि इन इस तरह की जांच का क्या मतलब होता है मामले को शांत करने के लिए इस तरह की जांच की घोषणा कर दी जाती है और उस दंडाधिकारी जांच का क्या होता है कितने ही जांच है जो रद्दी की टोकरी में फेंक दिए गए हैं तब ऐसे में सवाल यह है कि क्या राजनीतिक और पैसे के पहुंच के आगे सत्ता भी नतमस्तक है प्रशासन भी नतमस्तक है!

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https://youtu.be/SAUufPl8cxs?si=0pR-GQCh1X-_j4JR

शनिवार, 14 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ में नशा का ये कैसा गुजरात मॉडल

छत्तीसगढ़ में नशा का ये कैसा गुजरात मॉडल

एक  तरफ अफ़ीम की खेती को लेकर सरकार घिरी हुई है तो दूसरी तरफ़ सरकार गांवगांव में घर-घर में शराब पहुंचाने आमदा है तो अब सूखा नशा का कारोबार भी जमकर फलफूल रहा है। कुछ महीने पहले जरूर पाकिस्तान से ड्रग्स सप्लाई से लेकर डर्टी पार्टी को लेकर पुलिस ने कारवाई तो की थी। यह राजधानी की बात थी। लेकिन छत्तीसगढ़ के गांवगांव में किस तरीके से नशा का व्यापार फल फूट रहा है और अब तो गुजरात का विकास मॉडल की बात नहीं है और ना ही शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में गुजरात मॉडल लागू करने की बात यह कब लागू होगा कहना बड़ा मुश्किल है। हालांकि गुजरात मॉडल तो फ़ेल साबित हुआ है। इसकी भी तो चर्चा है। 

ऐसे में नशा के मामले में ज़रूर गुजरात मॉडल अब धीरे-धीरे लागू होने लगा है। और जिस तरीके से पाकिस्तान से ड्रग्स आने लगे हैं। कहा जा रहा है कि गुजरात और राजस्थान के रास्ते ही छत्तीसगढ़ ड्रग्स पहुंच रहे थे। तब ऐसे में नशीली टेबलेट को लेकर भी तो बड़ा सवाल है। हालांकि छोटे-छोटे स्थानों पर तो मेडिकल स्टोर्स में ही खुलेआम नशीली टेबलेट बिक रहे हैं। लेकिन यह नशीली टेबलेट यदि गुजरात से आ रहा है तो फिर यह कौन सा गुजरात का नशा मॉडल है? कहना बड़ा मुश्किल होता जा रहा है। आज हम बताएंगे कि पिछले दिनों पुलिस ने जिस तरीके से गुजरात से नशीली टेबलेट सप्लाई का मामला पकड़ा है, वह बेहद ही चौंकाने वाला है और यह सवाल बड़ा होने लगा है कि क्या गुजरात का शिक्षा मॉडल पता नहीं कब लागू हो लेकिन नशा मॉडल तो लागू होने लगा है और यह कारवाई खैरागढ़ पुलिस ने की है। कहा जाता है कि यहां लंबे अरसे से पुलिस को सूचना मिल रही थी कि गुजरात से खासकर भरूच क्षेत्र से यहां बड़ी मात्रा में नशीली टेबलेट सप्लाई होती है और इस खेल में छत्तीसगढ़ के युवा भी शामिल है जो खैरागढ़ ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों के गांव में भी नशीली टेबलेट सप्लाई कर रहे हैं। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत कुछ गिरफ़्तारियां की है। कुछ गिरफ़्तारियां क्या? आधा दर्जन युवाओं को पकड़ा है जो गुजरात के भरूच के रास्ते से ड्रामा डोल कैप्सूल लाते थे। बड़ी मात्रा में और गांव-गांव में अपना कारोबार जमा कर रखे थे। जो मामला पकड़ाया वह भी लाखों रुपए का मामला है। लाखों रुपए के कैप्सूल ड्रामाडोल पकड़ाए हैं। गुजरात के भरूच से यहां तक मोटरसाइकिल से सप्लाई हो रहा था। और इस मामले में पुलिस ने भरूच से ड्रग्स लाने वाले यानी इस कैप्सूल को लाने वाले आधा दर्जन युवकों को गिरफ्तार किया है। जिसमें मोहित, राहुल, शाहबाज, शैलेश, उत्तम और एक युवक नाबालिक है। इसलिए उसका नाम हम नहीं बता रहे हैं। ऐसे आधा दर्जन युवक खैरागढ़ ही नहीं उसके आसपास के क्षेत्रों में गंडई से लेकर कई गांवों के नाम है। क्षेत्रों के नाम है। जहां ये लोग गुजरात से नशीले कैप्सूल लाकर सप्लाई किया करते थे। सोचिए कि छत्तीसगढ़ में किस तरीके से नशा का खेल हो रहा है। सरकार के अपने दावे हैं। शराब की कमाई को लेकर किस तरीके का खेल होता है। हमने कई बार बताया है कि वैध कमाई से ज्यादा अवैध कमाई का खेल ने सत्ता को नए-नए दुकान खोलने को मजबूर कर दिया और इसीलिए वह नए-नए उपाय कर रही है। 67 दुकान तो खोलने की घोषणा कर ही दी है। जिसका कई जगह भारी विरोध हो रहा है। कई क्षेत्रों से यह खबर भी आने लगी कि महिलाओं ने अब इस नशा के खिलाफ यानी शराब के खिलाफ अभियान छेड़ना शुरू कर दिया। याद कीजिए एक समय में डॉक्टर रमन सिंह की सरकार के दौरान किस तरीके से गुलाबी गैंग के नाम से महिलाएं सक्रिय हो गई थी और नशेड़ियों की पिटाई करने लगी थी। तो दूसरी तरफ सरकार कभी घोषणा करती है कि वह बियर को गन्ना रस की तर्ज पर बेचेगी तो कभी कहा जाता है कि बड़े रेसराओं को आमंत्रित किया जा रहा है उन्हें शुल्क सुविधाएं दी जाएगी। तो अब इस बात की भी चर्चा है कि क्या सरकार बड़ी कमाई के लिए जिन शराब दुकानों का सरकारीकरण किया गया है उनके ही सरकार द्वारा डॉक्टर रमन सिंह की सरकार ने किया था। ठेका प्रथा बंद करके सरकारीकरण उसे बदल के फिर ठेका प्रथा में लाने वाली ताकि एक मुस्तराक एक साथ आए और इस घपले घोटाले की झंझट से बचा जा सके। जिस घपले घोटाले के झंझट में भूपेश बघेल की सरकार फंस गई थी। तब ऐसी परिस्थिति में जो नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। खासकर सूखा नशा को लेकर ड्रग्स, एमडी और नशीली टेबलेट मेडिकल स्टोरों से। इसके अलावा क्विक्स, बोन फिक्स, आयडेक्स जैसे नशीली वस्तुओं की बिक्री और युवाओं का गर्त में चले जाना। क्या छत्तीसगढ़ को उड़ता छत्तीसगढ़ बना देगा? उड़ता छत्तीसगढ़ का मतलब समझिए कि पंजाब के युवक जब नशे में बर्बाद हो रहे थे तो उसका नामकरण उड़ता पंजाब कर दिया गया था। उसी तर्ज पर क्या छत्तीसगढ़ भी अब उड़ता छत्तीसगढ़ हो जाएगा। 

वीडियो देखें 

https://youtu.be/ZK_KT7frpWE?si=nDDGJupSd3ABRF4B

शुक्रवार, 13 मार्च 2026

मंत्री का चहेता एसडीएम जब फँस गया

मंत्री का चहेता एसडीएम जब फँस गया 


 एंटी करप्शन ब्यूरो ने कुछ माह पहले  जिस एसडीएम को पकड़ा है उसका नाम भागीरथ खांडे है भागीरथ यानी गंगा बिल्कुल पवित्र शुद्ध साफ लेकिन इनके कर्म ऐसे थे कि बिल्कुल उलट नाम के और धमक इतनी थी कि वे दमदार से वसूली करते थे कहा जाता है कि इनके खिलाफ ढेरों शिकायत थी लेकिन एसीबी के जाल में यह मुश्किल से आया है एक मंत्री का वरद हस्त है इसके ऊपर और उस वरद हस्त के चलते अपने काम को वह बेखौफ अंजाम देता था

 एंटी करप्शन ब्यूरो ने  जब पकड़ा तो सिर्फ भागीरथी खांडे को नहीं पकड़ा बल्कि इसके चक्कर में बाबू चपरासी गार्ड सब थरे गए क्योंकि पैसे का जो लेनदेन हुआ था वह इन्हीं लोगों के मार्फ़त हुआ था यानी एसडीएम का कहना यदि बाबू चपरासी या गार्ड नहीं मानते तो भी उनकी मुसीबत थी और मान लिए तब भी उनकी मुसीबत है मामला अंबिकापुर का है छत्तीसगढ़ प्रदेश के अंबिकापुर को पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस बाबा के नाम से भी जाना जाता है तो इस जिले में परसा कोल ब्लॉक याने अदानी की कोयला खदान भी यानी आप सोचिए कि इस पूरे संभाग में जिले में किस तरह के अधिकारियों की पोस्टिंग होती है खासकर राजस्व के मामले में क्योंकि बड़ी  ही कमाई वाला क्षेत्र माना जाता है 

गरीब आदिवासी भोले भाले लोगों को बेवकूफ बनाकर वसूली करने वाले अधिकारियों की यहां फेहरिस्त लेकिन आज हम बात कर रहे हैं उस भागीरथी खांडे का जिन्हें विष्णुदेव साय सरकार के एक मंत्री का वरद हस्त्र कौन है वह मंत्री हम आगे आपको बताएंगे उससे पहले बता देते हैं कि जिस अधिकारी को पकड़ा गया है भागीरथ खांडे वह एसडीएम है यानी सोचिए कि कितना बड़ा अधिकारी है और एसीबी को यह बड़ी सफलता मिली है कहा जाए तब भी गलत नहीं यदि एसीबी की माने तो इस इस अधिकारी की धूर्तता कितनी थी कि इसने किसान से रिश्वत तो ली ही ली साथ ही जमीन का पावर पटानी भी अपने नजदीकी लोगों के नाम कर दिया गया यानी य जमीन देर सवेर वह अपने पाले में कर ही लेता मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 7 मई को जब किसान  कन्हरा बंजारा ने इस अधिकारी की शिकायत की थी कि उन पर दबाव डाला जा रहा है 500 घूस मांगा जा कन्ही राम बंजारा जो शिकायत करता है उसका एक जमीन को लेकर अपने चाचा से विवाद और तहसील दफ्तर में उस जमीन विवाद को लेकर कन्ही राम मंजारा ने आवेदन दिया था शिकायत की तो तहसीलदार के आदेश के खिलाफ चाचा एसडीएम उदयपुर के राजस्व न्यायालय में अपील की थी इस मामले में उसके तथा अन्य परिजनों के पक्ष में आदेश पारित कराने के एवज में एसडीएम उदयपुर भागीरथी राम खांडे यही नाम है उसने रिश्वत मांगी थी और इसकी शिकायत जब की गई तो एसीबी ने जाल बिछाना शुरू किया क्योंकि यह बेहद ही यह  बहुत प्रभावशाली व्यक्ति है मंत्री का आदमी है और इसे पकड़ना आसान भी नहीं था और पकड़ने के बाद हंगामा के भी आसार थे और रिश्वत की रकम देने के लिए 21 जून को जब शाम को 6 बजे कन्हीरांगद उसने सीधी रकम नहीं दी बल्कि अपने बाबू से कह दिया कि वह रकम ले ले तो बाबू ने वह पैसा चपरासी को दे दिया अबीर राम को अभीर राम ने जाकर बताया कि पैसा मिल गया इसे क्या किया जाए तो एसडीएम ने कहा कि जाओ पैसा जो उनके गार्ड है सिक्योरिटी गार्ड कविनाथ सिंह को दे दिया और चपरासी ने वैसा ही किया जो एसडीएम ने कवि नाथ सिंह को देने को कहा था और जैसे ही शिकायत करता ने इसकी पुष्टि की छापे मार की कारवाही की गई और ना केवल रुपए बरामद किए गए बल्कि एक चौकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस जमीन के बदले आदेश पारित करने के लिए  रिश्वत लिया गया है उसका पावर ऑफ एटमी भी बना दिया गया और कितना चालाकी से यह पावर ऑफ एटनी अपने परिचित महिलाओं के नाम से तैयार किया गया था ताकि फिर कभी भी मिले व जमीन अपने नाम में कर लिया जब खंगाला गया दफ्तर तो वह पावर टन भी मिल कहा जाता है कि इनकी संपत्ति को लेकर भी अब एसीबी जांच करने में जुटी क्योंकि इस अधिकारी के संबंध कांग्रेस के नेताओं और ऐसी परिस्थिति में इसने हाल के वर्षों में खूब पैसा बनाया था अब देखना है कि इस अधिकारी को निलंबित किया जाता है !

ये तो थी घटना , लेकिन कहा जा रहा है कि अब उसने फिर सेटिंस जमा ली है देखना है क्या होता हैं ।


वीडियो देखें 


https://youtu.be/lG54_JVHmAk?si=jiLXlZ42rFamBKZM

गुरुवार, 12 मार्च 2026

कुपोषण में भारत से पाकिस्तान बेहतर

कुपोषण में भारत से पाकिस्तान बेहतर 


भारत  को दुनिया का सबसे बड़ा इकोनॉमी बनाने के लिए कमर कसकर तैयार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शायद यूनिसेफ की उस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है जो भारत को पाकिस्तान से भी नीचे खड़ा कर देता है हमसे भी छोटे-छोटे देश बच्चों के पोषण के मामले में बेहतर है नेपाल बांग्लादेश श्रीलंका किसी भी देश का नाम आप ले लीजिए हमसे एक पायदान नीचे कोई है तो वह अफगानिस्तान है अफगानिस्तान यानी तालिबान तब ऐसी परिस्थिति में विश्व गुरु बनाने की जो चाल चली जा रही है या सपना दिखाया जा रहा है उसकी हकीकत क्या यूनिसेफ की रिपोर्ट ने नहीं खोल दिया

 दुनिया भर में 18 करोड़ से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार है या उन्हें ठीक से खाना नहीं मिल रहा है और उनमें से 40 फीसद बच्चे भारत के यानी भारत की स्थिति नीचे के पैदान से आठवें नंबर पर है और हमसे बेहतर स्थिति में पाकिस्तान 

पाकिस्तान तो खुशहाली की रिपोर्ट में भी भारत से बेहतर तब क्या भारत में जो बच्चे हैं उन्हें पोषित खाना नहीं मिलना चाहिए 5 किलो अनाज एक परिवार को देकर वोट हासिल करने लाभार्थी बताकर लाभ लेने का इस खेल में किस कदर भारत की स्थिति लगातार खराब होते जा रही है और पूंजीपति और पूंजी वाले होते जा रहे हैं दुनिया में भारत का डंका बजाने के लिए ठहाके लगाए जा रहे हैं याद कीजिए आप इटली में किस तरीके से देश के प्रधानमंत्री ठहाके लगा रहे थे लेकिन यह कालिक क्या उन्हें दिखाई नहीं देता दुनिया तो देख ही लेगी यूनिसेफ की रिपोर्ट को य की रिपोर्ट बेहद ही चौकाने वाला ही नहीं परेशान करने वाला है कि किस तरीके से भारत के 40 फीसद बच्चे पोषण युक्त खाने के लिए तरस रहे हैं किस तरीके से गरीबी हावी है और इसकी कल्पना तो उन लोगों को तभी कर लेनी चाहिए थी जब भारत सरकार ने आंकड़े दिए थे कि 80 लाख परिवारों को 5 कि अनाज दिया जाता है तब देश में आम आदमी किस कदर परेशान है महंगाई बेरोजगारी एक अलग सवाल है लेकिन बच्चे बच्चों की जिंदगी को लेकर भी क्या सरकार गंभीर नहीं है कुपोषण दूर करने के लिए कितने बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं प्रचार प्रसार में ही करोड़ों रुपए बर्बाद करके अपना प्रचार प्रसार किया गया लेकिन खप की स्थिति यूनिसेफ ने खोल कर रख दी है कि किस तरीके से भारत में छोटे बच्चों को पोषण युक्त खाना तक नसीब नहीं हो रहा है और देश के प्रधानमंत्री भारत को दुनिया का तीसरा इकोनॉमी बनाने के लिए तैयार है तो क्या यह इकोनॉमी कॉरपोरेट सेक्टर के दम पर बन रहा है क्या पूंजी सिर्फ कारपोरेट सेक्टर के पास जाकर रह गई यह बेहद ही गंभीर सवाल है और इसके लिए मानवाधिकार को लेकर चिंतित लोगों को भी सामने आना चाहिए कहां है वह एनजीओ जो लगातार बच्चों के लिए काम कर रहे हैं किस तरीके से काम कर रहे हैं क्या सिर्फ अपना वेतन निकाल रहे हैं और सरकार के जी हुजूरी में लगे हुए हैं या उनके ग्रांड लेने में लगे हुए हैं सवाल आप कुछ भी उठा लीजिए सवाल यह नहीं है कि दे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश की दिशा किस तरफ ले जाना चाह रहे हैं सवाल तो यह है कि देश किस दिशा में जा रहा है नसता बढ़ी है इसमें किसी को कोई संदेह नहीं अब तो छोटी-छोटी बातों पर ही लोग मारने कूटने को तैयार हो जाते हैं तब ऐसी परिस्थिति में यूनिसेफ की जो रिपोर्ट है हम डिस्क्रिप्शन बॉक्स में उनका लिंक दिया आप चाहे तो जाकर पढ़ सकते हैं लेकिन जो रिपोर्ट है वह बेहद ही गंभीर चेतावनी है देश के लिए कि आने वाले दिनों में देश इस तरह से चलाया जाएगा तो जो भविष्य के नागरिक हैं वे किस तरीके से होंगे महंगाई को लेकर कोई सवाल नहीं उठाता शिक्षा व्यवस्था ठप हुई है किस तरीके से शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया गया वह भी इस दौर में लोगों ने देखा है और यह भी है कि सरकारी स्कूलों को खंडहर में तब्दील करके निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया गया क्या इस तरीके से इकोनॉमी बढ़ेगी भारत की और वह दुनिया में अपना झंडा बुलंद करेगा लेकिन धरातल में हकीकत क्या है जिस देश में 80 लाख परिवार 5 किलो अनाज पर निर्भर हो जिस देश में पीने का पानी के लिए हाहाकार मज गया हो जिस देश में बिजली सुविधा तक निर्वात गति से नहीं मिल रही हो या ट्रेन तक रद्द कर दी जाती हो तब उस देश में तीसरी इकोनॉमी को लेकर प्रधानमंत्री ने जो सपना देखा है क्या उसके लिए उन्हें बधाई दे दिया जाए इस यूनिसेफ की रिपोर्ट आने के बाद बधाई दे दिया जाए आप खुद तय करें

वीडियो देखें 

https://youtu.be/-jl05KaXTLg?si=tBhB8iFrgZiFc7hS